वक्रोक्ति (Innuendo) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- सामण्ड के अनुसार, कथन दो प्रकार के होते हैं- (i) प्रथम दृष्टया मानहानिजनक (Defamatory) तथा (ii) प्रथम दृष्टया निर्दोष (Innocent) पहले प्रकार के कथन मानहानिजनक होते है तथा स्वतः अभियोज्य होते हैं जब तक कि वह कथन किसी अपवाद की श्रेणी में ही न आ जाये। इसके विपरीत, दूसरे प्रकार के कथन प्रथम दृष्टया निर्दोष मालूम होते हैं किन्तु उनका अर्थ परिस्थितियों के सन्दर्भ में मानहानिजनक बन जाता है। ऐसे कचन को 'वक्रोक्ति या व्यंगात्मक कथन ( Innuendo) कहा जाता है, जैसे 'अ', 'ब' के बारे में 'स' कहता है कि 'ब' वैसा ही है जैसा उसका पिता यदि पिता चोर हो तो इन शब्दों का अर्थ यह होगा कि 'ब' भी चोर है। यदि 'ब' सिद्ध चोर नहीं है यह कथन मानहानिजनक होगा, भले ही ऊपर से देखने में कथन निर्दोष मालूम होता है। इसी प्रकार, जहाँ 'अ' 'ब' के बारे में यह कथन करता है कि 'ब' एक साधु है और यदि उसका संकेत यह है कि 'ब' साधुओं के एक ऐसे ग्रुप का सदस्य है जो तश्करी करते है तो कथन निर्दोष होते हुये भी मानहानिजनक होगा।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें