गुरुवार, 12 अक्टूबर 2023

हेतु और आशय की व्याख्या करते हुए दुष्कृति सम्बन्धी मामलों में उनकी संगतता पर टिप्पणी

हेतु' और 'आशय' की व्याख्या करते हुए दुष्कृति सम्बन्धी मामलों में उनकी संगतता पर टिप्पणी लिखिये।

 

उत्तर:  हेतु (Motive) हेतु वह मानसिक स्थिति होती है जो किसी कार्य को करने की प्रेरणा देती है। उसके द्वारा ही मन किसी कार्य की ओर अग्रसर होता है सामण्ड ने इसे दूर का आशय बताया है, जो शीघ्र ही प्रकट न हो, वरन् पार्श्व भूमि (Back Ground) में पड़ा हो। जब हम यह निर्णय करते हैं कि "कोई कार्य दुष्कृति है या नहीं" हेतु असंगत मानी जाती है। अपराध में चाहे इसे कितना ही महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हो किन्तु दुष्कृति में इसका कोई स्थान नहीं है। एक वैध कार्य इसलिये अवैध नहीं माना जा सकता क्योंकि वह बुरे हेतु (Motive) से किया गया है। किसी भी कृत्य में महत्व कार्य का होता है, हेतु का नहीं।

इस विषय पर निम्नलिखित मामले उल्लेखनीय है-

 

(i) मेयर आफ ब्रेक फोर्ड कारपोरेशन बनाम पिकिल्स, 1895 AC 587 में प्रतिवादी ने भूमिगत पानी के श्रोत को बदल दिया। यह उसने इसलिये किया कि वादी जोकि एक कारपोरेशन थी उसकी भूमि को खरीद ले उस श्रोत से वादी अपना कार्य चलाती थी। वादी ने क्षतिपूर्ति का दावा किया। न्यायालय ने निर्णय दिया और कहा यद्यपि प्रतिवादी का कार्य कोई निश्चित रूप से एक भले पड़ोसी जैसा नहीं था फिर भी वादी कारपोरेशन किसी तरह की क्षति पाने की अधिकारिणी नहीं है।

 

(ii) विष्णु वासुदेव जोशी बनाम टी० एल० एच० स्मिथ पियर्स 1949, नागपुर 262 का वाद हेतु के सम्बन्ध में उल्लेखनीय है। इस मामले में वादी राजकुमार कालेज, रायपुर में बिजली मिस्त्री का काम कर रहा था और प्रतिवादी कालेज का प्राधानाचार्य था। प्रतिवादी ने वादी को नौकरी से मुअत्तल (Suspend) कर दिया और वादी के पेट में दो तीन लातें मारी जिससे वादी को शारीरिक एवं मानसिक चोट पहुँची तथा उसका अपमान हुआ इसलिये वादी द्वारा प्रतिवादी के खिलाफ उसके उक्त कार्य से हुई क्षति के लिये 100 रूपये का दावा किया प्रतिवादी की ओर से यह कहा गया है कि "इस मामले में यह सिद्ध नहीं हुआ कि गलत हेतु से प्रेरित होकर प्रतिवादी ने यह कृत्य किया था। अतः क्षतिपूर्ति का दायित्व ही उत्पन्न नहीं होता है। न्यायाधीश मधोलकर ने अपने निर्णय में कहा कि "इस मामले में हेतु का महत्व बहुत थोड़ा है। यह अनुमान करना चाहिये कि प्रत्यार्थी ने सआशय अपीलार्थी को मानसिक एवं शारीरिक कष्ट पहुँचाया है।'

 

आशय (Intention) - आशय से तात्पर्य उस उद्देश्य या भावना से है जिससे कोई कार्य किया जाता है। इसमें किसी कार्य का पूर्व ज्ञान तथा इच्छा का सम्मिश्रण होता है जिसके द्वारा उस इच्छा को कार्य रूप प्रदान किया जाता है। सामण्ड के अनुसार, जिस ध्येय को मन में रखकर कोई कार्य किया जाता है उसे आशय या नीयत कहते हैं। इसमें क्षतिकारक परिशास्त्र का पूर्व ज्ञान और उसको कृत्य द्वारा प्राप्त करने की अभिलाषा निहित रहती है उद्देश्य को पाने में आशय एक व्यवहार का निर्देशन है। किसी कृत्य को तभी आशय युक्त कहा जाता है जब वह तथ्य के रूप में आने के पूर्व विचार के रूप में भी रहा हो।" दूसरे शब्दों में, "लक्ष्य को प्राप्त करने की इच्छा और उसके पूर्वज्ञान से प्रेरित होकर किये गये कृत्य को आशय युक्त (Intentional) कृत्य कहेंगे।

 

दुष्कृति विधि के अन्तर्गत आशय (Intention) - का कोई महत्व नहीं है क्योंकि सभी दीवानी मामलों में विधि कर्ता के आशय को इतना महत्व नहीं देता है जितना कि क्षतिग्रस्त पक्ष के नुकसान और क्षति को देता है। इस सन्दर्भ में निम्नलिखित वाद उल्लेखनीय हैं-

 

(i) गिले बनाम स्वान, 1822 - इस मामले में प्रतिवादी एक गुब्बारे में बैठकर उड़ा और कुछ समय आसमान में उड़ने के बाद वादी के उद्यान में उतरा। प्रतिवादी को गुब्बारे में बैठा देखकर वादी और बहुत से व्यक्ति दर्शक के रूप में उद्यान में घुस आये। इससे वादी के उद्यान को बहुत नुकसान हुआ। वादी ने प्रतिवादी पर नुकसानी का मुकदमा चलाया। प्रतिवादी ने अपने बचाव में कहा कि उसका वादी को नुकसान पहुंचाने का कोई आशय नहीं था। न्यायाधीश ने अपने निर्णय में प्रतिवादी को नुकसान के लिये उत्तरदायी ठहराते हुये कहा है कि 'गुब्बारे में उड़ने वाले व्यक्ति को भूमि पर उतरते देखने की इच्छा स्वाभाविक है, अतः भीड़ का उद्यान में घुस आना और पौधों को कुचलना प्रतिवादी के कृत्य का प्रत्यक्ष एवं स्वाभाविक परिणाम है। इसमें प्रतिवादी यह नहीं कह सकता कि उसे अपने कृत्य के स्वाभाविक परिणाम का पूर्व ज्ञान नहीं था। कानून की दृष्टि में उसे अपने कृत्य का पूर्व ज्ञान था। भले ही उसे वास्तव में ऐसा ज्ञान न रहा हो।

 

(ii) विल्किंसन बनाम डाउनटन, 1892 वाद में इस प्रतिवादी ने व्यावहारिक पजाक करते हुये वादी (श्रीमती विल्किंसन को मिथ्या सूचना दी कि उसका पति (जो कि वास्तव में विदेश में था) एक दुर्घटना में बुरी तरह घायल हो गया है और उसकी दोनों टाँगे टूट गई हैं। इस सूचना से वादी (श्रीमती विल्किंसन) को मानसिक ठेस लगी और वह बीमार पड़ गयी तथा उसके बाल भी सफेद हो गये कुछ अवधि तक तो उनके प्राण भी संकट में पड़ गये वह सूचना मिथ्या ज्ञात होने पर यादी, श्रीमती विल्किंसन ने प्रतिवादी (डाउनटन) पर क्षतिपूर्ति का मुकदमा चलाया और कहा कि मिच्या सूचना के कारण उसको बहुत कष्ट हुआ है। न्यायाधीश ने मुकदमे का निर्णय करते हुए कहा कि "व्यक्ति जो कार्य करता है अपने स्वाभाविक परिणाम के उद्देश्य से करता है और इस मामले में यदि प्रतिवादी की मिथ्या सूचना के परिणाम स्वरूप कथित हानि पहुँची तो प्रतिवादी क्षतिपूर्ति के लिए उत्तरदायी है।"

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