परिवाद पेश करने की रीति को समझाइये।
Explain
the procedure of filing a complaint.
or
जिला
फोरम में परिवाद किसके द्वारा पेश किया जा सकता है ? क्या अधिवक्ता के माध्यम से कोई
परिवाद पेश किया जा सकता है ? किसी निर्णय का उल्लेख करते हुए समझाइये।
Who can file a complaint before
the District Forum? Whether a complaint can be filed through an Advocate?
Explain referring to a Judgment.
उत्तर-
परिवाद कौन पेश कर सकता है? - धारा 12 में परिवाद प्रस्तुत करने की रीति का अर्थात्
उन व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है जो जिला फोरम में परिवाद प्रस्तुत कर सकते हैं।
इसके अनुसार निम्न व्यक्तियों द्वारा परिवाद प्रस्तुत किया जा सकता है-
1.
ऐसे किसी उपभोक्ता द्वारा जिसको माल बेचा गया है या दिया गया है या बेचने या परिदान
करने के लिए सहमति दी गई है या जिसको सेवा उपलब्ध कराई गई है या सेवा उपलब्ध कराने
हेतु सहमति प्रदान की गई है।
2.
ऐसे किसी भी मान्यता प्राप्त उपभोक्ता संगम द्वारा जिसका ऐसा कोई उपभोक्ता चाहे सदस्य
हो या नहीं।
3.
जहाँ बहुसंख्यक उपभोक्ताओं का समान हित हो, वहाँ जिला फोरम की अनुमति से उनमें से किसी
एक या एक से अधिक उपभोक्ताओं द्वारा स्मरणीय है कि यह व्यवस्था उपभोक्ता संरक्षण (संशोधन)
अधिनियम, 1993 द्वारा ही की गई है, पहले ऐसी व्यवस्था नहीं थी,
4.
केन्द्र या राज्य सरकार द्वारा।
अधिवक्ता
द्वारा परिवाद का प्रस्तुतीकरण (Presentation of a Complaint by Advocate) - के० एस०
शर्मा ब० मै० कृष्णा ट्रेडर्स, बीकानेर रिवीजन संख्या 9 सन् 1989 राजस्थान आयोग
10.1.1990 में राजस्थान आयोग द्वारा यह निर्धारित किया गया है कि अधिवक्ता अभिभाषक,
वकील एवं विधि व्यवसायी उपभोक्ता मंच के समक्ष उपस्थिति दे सकते हैं, पक्षकार की ओर
से परिवाद पेश कर सकते हैं एवं उसका प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।
प्रश्न 20 (अ) राज्य
आयोग की संरचना एवं विभिन्न क्षेत्राधिकारों सम्बन्धी प्रावधानों का वर्णन कीजिये क्या
राज्य आयोग एक जिला फोरम से दूसरे जिला फोरम में मामलों का अन्तरण कर सकता है ?
Explain the Jurisdictions and
Constitution of the State Commission. Can State Commission transfer the cases
from one District Forum to another District Forum?
उत्तर
- राज्य आयोग की सरचना (Composition of the State Commission)- धारा 16 के अनुसार राज्य
आयोग में कुल तीन सदस्य होंगे जिनमें से एक अध्यक्ष होगा। अन्य दो सदस्यों में से एक
सदस्य महिला होगी।
अध्यक्ष
(President) - ऐसा व्यक्ति जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश है या रह चुका है, आयोग के
अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया जा सकता है। ऐसी नियुक्ति के लिए सम्बन्धित उच्च न्यायालय
के मुख्य न्यायाधीश से राय लिया जाना आवश्यक होगा।
सदस्य
(Member) सदस्य के लिए ऐसा व्यक्ति पात्र होगा, जो-
(i)
योग्यता, सत्यनिष्ठा एवं प्रतिष्ठा युक्त हो,
(ii)
अर्थशास्त्र, विधि, वाणिज्य, लेखाकर्म, उद्योग, लोक कार्य या प्रशासन का पर्याप्त ज्ञान
और अनुभव रखता हो, या
(iii)
इनसे सम्बन्धित समस्याओं में कार्यवाही की योग्यता/ क्षमता रखता हो।
चयन
समिति (Selection Committee) - सदस्यों को नियुक्ति एक चयन समिति द्वारा - की जायेगी
जिसके निम्नांकित व्यक्ति सदस्य होंगे-
(क)
राज्य आयोग का अध्यक्ष,
(ख)
राज्य के विधि विभाग का सचिव एवं
(ग)
राज्य के उपभोक्ता सम्बन्धी मामलों के विभाग का प्रभारी सचिव ।
सेवाकाल
(Term of Office) आयोग का सदस्य पाँच वर्ष की अवधि या 67 वर्ष की आयु प्राप्त करने
तक, इनमें से जो भी पहले हो, पद धारण कर सकेगा। एक बार नियुक्त सदस्य पुनर्नियुक्ति
के लिए पात्र नहीं होगा।
राज्य
आयोग का क्षेत्राधिकार (Jurisdiction of the State Commission)- धारा 17 में वर्णित
राज्य आयोग की अधिकारिता को हम चार भागों में बाँट सकते हैं- 1. आर्थिक अधिकारिता
(Pecuniary Jurisdiction ) - आर्थिक अधिकारिता के अन्तर्गत राज्य आयोग ऐसे परिवादों
की सुनवाई कर सकता है जिनमें परिवादित माल या सेवाओं अथवा दावाकृत का मूल्य पाँच लाख
से बीस लाख रुपयों के बीच हो। उल्लेखनीय है कि सन् 1993 के उपभोक्ता संरक्षण (संशोधन)
अधिनियम से पूर्व यह अधिकारिता एक लाख से दस लाख रुपये तक की थी।
प्रादेशिक
अधिकारिता (Territorial Jurisdiction) - राज्य आयोग की अधिकारिता का विस्तार सम्पूर्ण
राज्य पर है अर्थात् सम्पूर्ण राज्य में उत्पन्न मामलों को वह सुनवाई कर सकता है।
अपीलीय
अधिकारिता (Appellate Jurisdiction) - अपीलीय अधिकारिता के अन्तर्गत राज्य आयोग राज्य
के किसी भी जिला फोरम के आदेशों के विरुद्ध अपीलों को सुनवाई कर सकता है।
पुनरीक्षण
अधिकारिता (Revisional Jurisdiction) राज्य आयोग को पुनरीक्षण की शक्तियाँ भी प्रदान
की गई हैं। जहाँ राज्य आयोग को यह प्रतीत हो कि -
(i)
जिला फोरम ने ऐसी अधिकारिता का प्रयोग किया है जो उसमें निहित नहीं है, या
(ii)
जिला फोरम ऐसी अधिकारिता का प्रयोग करने में असफल रहा है जो उसमें निहित है,
या
(iii)
जिला फोरम ने अपनी अधिकारिता का प्रयोग अवैध रूप से या तात्विक अनियमितता (Material Irregularity) से किया है,
वहाँ
आयोग ऐसे अभिलेखों को अपने पास मंगवा सकेगा और उनमें समुचित आदेश पारित कर सकेगा।
मामलों
के अन्तरण की शक्ति (Power of Transfering Cases) राज्य आयोग को - एक जिला फोरम से
दूसरे जिला फोरम में मामलों का अन्तरण करने का अधिकार नहीं है : अध्यक्ष, चित्तौड़गढ़
जिला उपभोक्ता संरक्षण समिति व जिला फोरम, चित्तौड़गढ़, 1993 R.L.T. 158
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें