गुरुवार, 12 अक्टूबर 2023

राज्य आयोग के आदेशों के विरुद्ध अपील कहाँ की जा सकती है ? क्या इसके लिए कोई सीमा निर्धारित की गई है?, राष्ट्रीय आयोग के गठन एवं विभिन्न क्षेत्राधिकार सम्बन्धी प्रावधानों का वर्णन कीजिये

राज्य आयोग के आदेशों के विरुद्ध अपील कहाँ की जा सकती है ? क्या इसके लिए कोई सीमा निर्धारित की गई है? समझाइये।

Where an appeal can be filed against the orders of state commission ? Whether any limitation has been prescribed for filing appeals ?

 

उत्तर- बारा 19 के अनुसार, राज्य आयोग के आदेशों के विरुद्ध अपील राष्ट्रीय आयोग में की जा सकती है। राज्य आयोग के आदेश से पीड़ित (Aggrieved ) कोई भी व्यक्ति राष्ट्रीय आयोग में ऐसी अपील दायर कर सकता है।

 

अपील के लिए परिसीमा की अवधि तीस दिन निर्धारित की गई है। आदेश की तारीख से तीस दिन के भीतर ऐसी अपील की जा सकती है। पर्याप्त कारण होने पर तीस दिन के बाद भी अपील ग्रहण की जा सकती है।

 

प्रश्न - राष्ट्रीय आयोग के गठन एवं विभिन्न क्षेत्राधिकार सम्बन्धी प्रावधानों का वर्णन कीजिये।

Explain the provisions relating to composition of National Commission and its various jurisdictions.

 

उत्तर- राष्ट्रीय आयोग का गठन (Constitution of National Commission) - धारा 20 के अनुसार, राष्ट्रीय आयोग का गठन पाँच सदस्यों से मिलकर होता है जिनमें से एक अध्यक्ष होता है। अन्य चार सदस्यों में भी एक महिला सदस्य होती है 1

 

अध्यक्ष (President) - अध्यक्ष के पद पर ऐसा व्यक्ति नियुक्त किया जा सकता है जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश है या न्यायाधीश रह चुका है। ऐसी नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश की राय से की जायेगी।

 

सदस्य (Members) सदस्य के रूप में नियुक्ति के लिए ऐसा व्यक्ति पात्र होगा, जो-

(i) योग्य, ईमानदार एवं प्रतिष्ठित हो,

(ii) जिसे अर्थशास्त्र, विधि, वाणिज्य, लेखाकर्म, उद्योग, लोक कार्य या प्रशासन का उचित ज्ञान या अनुभव हो,

(iii) इनसे सम्बन्धित समस्याओं के बारे में कार्यवाही करने की योग्यता हो ।

 

चयन समिति (Selection Committee) - सदस्यों की नियुक्ति एक चयन समिति द्वारा की जायेगी जिसमें निम्नांकित सदस्य होंगे-

 

(i) सवोच्च न्यायालय का न्यायाधीश जो सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा नाम निदेशित किया जायेगा,

(ii) भारत सरकार का विधि सचिव एवं

(iii) भारत सरकार के उपभोक्ता सम्बन्धी मामलों के विभाग का सचिव ।

 

कार्यकाल (Term of Office)- आयोग के सदस्यों की नियुक्ति पाँच वर्ष या 67 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक इनमें से जो भी पहले हो, के लिए की जायेगी। एक बार नियक्त सदस्य पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होंगे। राष्ट्रीय आयोग का मुख्यालय दिल्ली में है।

 

राष्ट्रीय आयोग की अधिकारिता (Jurisdiction of the National Commission) – धारा 21 के अनुसार राष्ट्रीय आयोग की अधिकारिता चार प्रकार की है-

 

1. आर्थिक अधिकारिता (Pecuniary Jurisdiction) - राष्ट्रीय आयोग को ऐसे परिवादों की सुनवाई करने का क्षेत्राधिकार है जिनमें परिवादित माल या सेवा या दावाकृत प्रतिकर का मूल्य बीस लाख रुपये से अधिक हो। सन् 1993 के उपभोक्ता संरक्षण (संशोधन) अधिनियम से पूर्व यह अधिकारिता दस लाख रुपये से अधिक के मामलों की थी।

 

2. प्रादेशिक अधिकारिता (Territorial Jurisdiction) राष्ट्रीय आयोग की अधिकारिता का विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है अर्थात् सम्पूर्ण भारत में उत्पन्न विवादों की सुनवाई करने की इसे अधिकारिता है।

 

3. अपीलीय अधिकारिता (Appellate Jurisdiction) राष्ट्रीय आयोग को किसी भी राज्य आयोग के आदेशों के विरुद्ध अपील की सुनवाई करने का क्षेत्राधिकार है। ।

 

4. पुनरीक्षण अधिकारिता (Revisional Jurisdiction) राष्ट्रीय आयोग को पुनरीक्षण की शक्तियाँ भी प्राप्त हैं। जहाँ राष्ट्रीय आयोग को यह प्रतीत होता हो कि-

 

(i) राज्य आयोग ने ऐसी अधिकारिता का प्रयोग किया है जो उसमें निहित नहीं है, या

(ii) राज्य आयोग ऐसी अधिकारिता का प्रयोग करने में असफल रहा है जो उसमें निहित है,

या

(iii) राज्य आयोग ने अपनी अधिकारिता का प्रयोग करने में अवैधानिकता या तात्विक अनियमितता बरती है।

 

वहाँ राष्ट्रीय आयोग ऐसे राज्य आयोग से सम्बन्धित अभिलेख मंगवा कर उसमें उचित आदेश पारित कर सकता है।

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