अतिचार और आरम्भ से अतिचार के मध्य अन्तर कीजिए।
उत्तर-
अतिचार एवं आरम्भ से अतिचार में अन्तर (Distinction between Trespass and
Trespassab-initio) - अतिचार किसी व्यक्ति की भूमि पर अनाधिकार प्रवेश करने या उसकी
भूमि के कब्जे में किसी प्रकार का हस्तक्षेप करने को कहते हैं। इस अपकृत्य की तीन विशेषतायें
हैं- (अ) अतिचार बिना कानूनी औचित्य के अन्य की भूमि पर प्रदेश होता है। (ब) अतिचार
एक निरन्तर जारी रहने वाला अपकृत्य है और जब तक यह रहता है एक नये अपकृत्य को जन्म
देता रहता है और प्रतिदिन के अतिचार के लिये एक अलग वाद लाया जा सकता है। (स) अतिचार
एक स्वतः अनुयोज्य अपकृत्य है अर्थात् इसमें क्षतिपूर्ति पाप्त करने के लिये क्षति
का होना सिद्ध किया जाना आवश्यक नहीं है।
प्रारम्भतः
अतिचार (Trespass-ab-initio) - जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति की भूमि पर कानूनी
अधिकार के अन्तर्गत प्रवेश करता है और इसके बाद वह उस अधिकार का दुरूपयोग करके उस भूमि
पर कोई अपकरण (Misfeasance) करता है तो उसका प्रवेश आरम्भ से ही अतिचार माना जाता है
और वह व्यक्ति न केवल अपकरण के बाद वाले कार्यों के लिये क्षतिपूर्ति के लिये दायी
माना जाता है, बल्कि वह प्रारम्भिक प्रवेश के समय से ही अतिचारी और सभी कार्यों के
लिये दायी माना जाता है।
आरम्भतः
अतिचार की दो शर्तें हैं-
(i)
अधिकार कानून द्वारा प्रदान किया गया होना चाहिये न कि किसी व्यक्ति द्वारा तथा
(ii)
पश्चात्वती कार्य अपकरण (Misfeasurice) होना चाहिये न कि अकरण (Non-feasance)। इस प्रकार,
किसी व्यक्ति द्वारा सराय में जाकर वहाँ खाये हुए भोजन का मूल्य न चुकाना उसे आरम्भ
से अतिचार नहीं बनाता। उपर्युक्त दोनों अपकृत्यों में मुख्य अन्तर यह है कि
(i)
अतिचार किसी अन्य व्यक्ति की भूमि पर ऐसा प्रवेश है जिसका कोई कानूनी औचित्य नहीं है जबकि आरम्भतः अतिचार में प्रवेश कानूनी अधिकार के
अन्तर्गत होता है।
(ii)
अतिचार एक निरन्तर अपकृत्य होता है जैबकि आरम्भतः अतिचार निरन्तर जारी रहने वाला अपकृत्य नहीं होता।
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