राज्य आयोग की संरचना कैसे होती है? समझाइये।
उत्तर-राज्य आयोग की संरचना के बारे में प्रावधान अधिनियम की धारा 16 में किया गया है। इसके अनुसार राज्य आयोग में कुल तीन सदस्य होंगे जिनमें से एक अध्यक्ष होगा। अन्य दो सदस्यों में से एक सदस्य महिला होगी।
अध्यक्ष - ऐसा व्यक्ति जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश है या रह चुका है, आयोग के अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया जा सकता है। ऐसी नियुक्ति के लिए सम्बन्धित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से राय लिया जाना आवश्यक होगा।
सदस्य- सदस्य के लिए ऐसा व्यक्ति पात्र होगा, जो-
(i) योग्यता, सत्यनिष्ठा एवं प्रतिष्ठा युक्त हो,
(ii) अर्थशास्त्र, विधि, वाणिज्य, लेखाकर्म, उद्योग, लोक कार्य या प्रशासन का पर्याप्त ज्ञान और अनुभव रखता हो; या
(iii) इनसे सम्बन्धित समस्याओं में कार्यवाही करने की योग्यता / क्षमता रखता हो। चयन समिति सदस्यों की नियुक्ति एक चयन समिति द्वारा की जायेगी जिसके निम्नांकित व्यक्ति सदस्य होंगे-
(क) राज्य आयोग का अध्यक्ष,
(ख) राज्य के विधि विभाग का सचिव एवं
(ग) राज्य के उपभोक्ता सम्बन्धी मामलों के विभाग का प्रभारी सचिव
सेवाकाल आयोग का सदस्य पांच वर्ष की अवधि या 67 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, इनमें से जो भी पहले हो, पद धारण कर सकेगा। एक बार नियुक्त सदस्य पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा।
राष्ट्रीय आयोग का गठन कैसे होता है?
उत्तर- अधिनियम की धारा 20 में राष्ट्रीय आयोग गठन के बारे में प्रावधान किया गया है यह उपभोक्ता विवाद प्रतितोष अक्षिकरणों की श्रेणी में उच्चतम स्तर पर है। गठन राष्ट्रीय आयोग का गठन पांच सदस्यों से मिलकर होता है जिनमें से एक अध्यक्ष होता है। अन्य चार सदस्यों में भी एक महिला सदस्य होती है। अध्यक्ष- अध्यक्ष के एद पर ऐसा व्यक्ति नियुक्त किया जा सकता है जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश है या न्यायाधीश रह चुका है। ऐसी नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश की राय से की जायेगी।
सदस्य - सदस्य के रूप में नियुक्ति के लिए ऐसा व्यक्ति पात्र होगा, जो-
(i) योग्य, ईमानदार एवं प्रतिष्ठित हो,
(ii) जिसे अर्थशास्त्र, विधि, वाणिज्य, लेखाकर्म, उद्योग, लोक कार्य या प्रशासन का समुचित ज्ञान या अनुभव हो, या
(iii) इनसे सम्बन्धित समस्याओं के बारे में कार्यवाही करने की योग्यता क्षमता हो।
चयन समिति सदस्यों की नियुक्ति एक चयन समिति द्वारा की जायेगी जिसमें निम्नांकित सदस्य होंगे-
(i) सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश जो सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा नाम निदेशित किया जायेगा,
(ii) भारत सरकार का विधि सचिव एवं
(iii) भारत सरकार के उपभोक्ता सम्बन्धी मामलों के विभाग का सचिव।
कार्यकाल - आयोग के सदस्यों की नियुक्ति पांच वर्ष या 67 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक, इनमें से जो भी पहले हो, के लिए की जायेगी। एक बार नियुक्त सदस्य पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा।
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