गुरुवार, 12 अक्टूबर 2023

1. संपरिवर्तन एवं अवरोध, 2. हानि एवं हर्जाना, 3. दैवी कृत्य एवं अवश्यम्भावी दुर्घटना, 4. आक्रमण तथा प्रहार, 5. क्षति बिना हानि तथा हानि बिना क्षति

निम्नलिखित की परिभाषा एवं अन्तर कीजिये-

Define and distinguish between the following-

 1. संपरिवर्तन एवं अवरोध (Conversion and Detention)

2. हानि एवं हर्जाना (Damage and Damages)

3. दैवी कृत्य एवं अवश्यम्भावी दुर्घटना (Act of God and Inevitable Accident) |

4. आक्रमण तथा प्रहार (Assault and Battery) |

5. क्षति बिना हानि तथा हानि बिना क्षति (Injuria sine damnum and Damnum sine injuria)|

 

उत्तर- संपरिवर्तन (Conversion) - सामण्ड के अनुसार, "संपरिवर्तन किसी की वस्तुओं में बिना वैध औचित्य के हस्तक्षेप करना है, जिससे कि वह उसके कब्जे से वंचित हो जाये।" दूसरे शब्दों में जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति की सम्पत्ति पर अनाधिकृत रूप से कब्जा कर लेता है तथा उसे अपने प्रयोग में लाता है या नष्ट करता है या उसके कब्जे में अनुचित हस्तक्षेप करता है तो इस कृत्य को संपरिवर्तन कहते हैं। श्री राम लाइसेन्स कारपोरेशन व चावला बाई रेड्डी, 1976 आन्ध्र W. R. में एक ऋणदाता ने कर्जदार की सम्पत्ति जो उसके पास ऋण की प्रतिभूति की एवज में रखी थी, को जब्त करके अवैध ढंग से बेच दिया। उसे प्रतिभूति को जब्त करने का अधिकार था किन्तु बेचने का नहीं। निर्णय हुआ कि ऋणदाता द्वारा इस प्रकार सम्पति बेच देना संपरिवर्तन का अपकृत्य है। वादी ऋण और ब्याज अदा करके उस अन्तरित सम्पत्ति को वापिस ले सकता है।

 

अवरोध (Detention)- किसी व्यक्ति की सम्पत्ति को बिना किसी कानूनी औचित्य के रोक लेना अवरोध होता है। अवरोध में वादी को दो बातें सिद्ध करना आवश्यक है— (i) वादी वस्तुओं के तात्कालिक कब्जे का अधिकारी है तथा (ii) प्रतिवादी ने सम्पत्ति को वादी द्वारा माँगी जाने पर लौटाने से इन्कार कर दिया है।

 

संपरिवर्तन व अवरोध (Conversion and Detention) में अन्तर-

1. संपरिवर्तन में वास्तविक स्वामी के स्वामित्व के अधिकार को अमान्य करके चल सम्पत्ति पर अपना अधिकार जमाने का उद्देश्य होता है जबकि अवरोध में अपने संरक्षण में आई हुई वस्तु को न लौटाने की गैरकानूनी प्रक्रिया होती है।

 

2. दोनों में मुख्य अन्तर इनके लिये उपलब्ध उपायों में हैं। अवरोध में वस्तु का लौटाना पड़ता है तथा संपरिवर्तन में क्षतिपूर्ति (Damages) देनी होती है।

 

3. अधिकतर मामलों में अवरोध तथा अतिचार संपरिवर्तन के अपकृत्य के अन्तर्गत आ जाते हैं। लेकिन कुछ मामलों में इन तीनों को अलग-अलग करके देखा जा सकता है। उदाहरणार्थ- यदि एक निक्षेपपहीता अपने पास रखी वस्तु को असावधानी से खो देता है तो वह निरोध का दोषी होगा न कि संपरिवर्तन का क्योंकि उसने जान बूझकर ऐसा नहीं किया था। •

 

2. हानि तथा हर्जाना (Damage and Damages) में अन्तर - हानि से तात्पर्य किसी व्यक्ति को उसके कानूनी अधिकारों के उल्लंघन के फलस्वरूप पहुंची आर्थिक, सुख, सुविधा व नौकरी आदि की हानि से है जबकि हर्जाना का अर्थ होता है, हानि की पूर्ति जो न्यायालय वादी को प्रतिवादी से प्रतिकर के रूप में दिलवाता है, जो प्राय: हर्जाना के रूप में ही दी जाती है। उदाहरणार्थ- अ. व के खिलाफ एक मानहानिजनक कथन छापता है जिसके फलस्वरूप व अपने मित्रों की दृष्टि में गिर जाता है और उसकी प्रतिष्ठा की हानि होती है। अ इस हानि की क्षति हेतु क्षतिपूर्ति के लिये वाद लाता है। क्षतिपूर्ति की वह रकम जो न्यायालय अ से दिलाता है हर्जाना कहलाती है तथा मानहानिजनक कथन से प्रतिष्ठा को जो आघात पहुंचाता है, वह हानि है।

 

3. दैवीकृत्य एवं अवश्यम्भावी दुर्घटना की परिभाषा ( Definition of Act of God and Inevitable Accident) –

 

1. देवी कृत्य (Act of God) सामण्ड के अनुसार, "ईश्वरीय नृत्य के अन्तर्गत वे घटना आती हैं जिन्हें मनुष्य युक्तियुक्त सावधानी बरतकर भी नहीं रोक सकता है। ऐसी घटनायें प्राकृतिक क्रियाओं का परिणाम होती हैं जिनका मनुष्य की क्रियाओं से कोई सम्बन्ध नहीं होता।" दूसरे शब्दों में देवी कृत्य जैसे बाढ़, भूकम्प, ओलों व वर्षा आदि का आना प्राकृतिक कार्यों का परिणाम हैं, जिनके घटने की मनुष्य कल्पना भी नहीं कर सकता और न ही उन्हें रोक सकता। ऐसे कार्यों के फलस्वरूप हानि होने पर किसी के विरुद्ध अपकृत्य का दायित्व उत्पन्न नहीं होता। निकोलस ब० मार्सलैण्ड (1875) में प्रतिवादी की भूमि पर कुछ कृत्रिम झीलें बन गई थी जिनमें पानी किसी ऊपर के स्रोत से आता था। एक वर्ष स्काटलैंड में असाधारण वर्षा हुई जिसके कारण झील के किनारे टूट गये और तेज जलधारा से वादी की 4 पुलियाँ वह गई। क्षतिपूर्ति के बाद में निर्णय हुआ कि वादी उत्तरदायी नहीं है क्योंकि उक्त घटना एक दैवी घटना थी जिसकी पूर्व धारणा प्रतिवादी नहीं कर सकता था।

 

2. अवश्यम्भावी दुर्घटना (Inevitable Accident) पोलक के अनुसार, "अवश्यम्भावी दुर्घटना वह घटना होती है जिसे साधारण बुद्धि का व्यक्ति उन परिस्थितियों में आवश्यक सावधानी या सतर्कता बरतने के बावजूद भी नहीं रोक सकता था जिनमें वह घटित होती है।" अतः यदि कोई व्यक्ति किसी कानूनी कार्य को करते समय पूर्ण सावधानी बरतता है और उसके बावजूद भी ऐसी घटना घट जाती है जिसे रोका नहीं जा सकता और किसी अन्य व्यक्ति को हानि पहुँचती है। तो ऐसी हानि के लिये हानिपूर्ति का दावा नहीं लाया जा सकता। स्टेनले ब० पावल, 1891 में वादी व प्रतिवादी शिकार करने के लिये एक जंगल में गये। प्रतिवादी ने एक चिड़िया पर गोली चलाई गोली का एक छर्रा अभाग्यवश पेड़ के तने से टकराकर वादी को लगा जिससे वह घायल हो गया। निर्णय हुआ कि वादी को हुई क्षति अवश्यम्भावी घटना का परिणाम थी। अतः प्रतिवादी क्षतिपूर्ति के लिये दायी नहीं है।

 

देवी कृत्य एवं अवश्यम्भावी घटना में अन्तर (Difference between Act of God and Inevitable Accident)- (i) दैवी कृत्य के अन्तर्गत वे कार्य आते हैं जो प्राकृतिक शक्तियों के द्वारा घटित होते हैं तथा जिनका मानवीय क्रियाओं से कोई सम्बन्ध नहीं होता। इसके विपरीत वे कार्य अंशत या पूर्णतः मनुष्य की ऐसी क्रियाओं से सम्बन्धित होते हैं जिनका प्राकृतिक शक्तियों से कोई सम्बन्ध नहीं होता अवश्यम्भावी घटना के अन्तर्गत आते हैं।

 

(ii) डॉo विनफील्ड के अनुसार देवी कार्य अवश्यम्भावी घटना की अपेक्षा अधिक प्राचीन बोधगम्य एवं सरल हैं। प्राकृतिक बिजली, ओले तथा पेड़ आदि का गिरना देवी कृत्य के ज्वलन्त उदाहरण हैं। इसके विपरीत वे कृत्य जो प्राकृतिक संपरिवर्तनों के फलस्वरूप नहीं होते, एक बिल्कुल अलग बात अतः अवश्यम्भावी घटना प्राकृतिक शक्तियों पर निर्भर नहीं करती जबकि दैवी कृत्य करते हैं।

 

(iii) अवश्यम्भावी घटना अपकृत्य में एक विशेष बचाव है जबकि दैवी कृत्य अपकृत्य मँ एक सामान्य बचाव है।

 

4. आक्रमण तथा मारपीट (Assault and Battery) - आक्रमण (Assault) - प्रो० विनफील्ड के अनुसार, "आक्रमण प्रतिवादी का वह कार्य है जो वादी के मन में ऐसी युक्तियुक्त आशंका उत्पन्न कर देता है कि प्रतिवादी उस पर प्रहार (मारपीट करने वाला है। अतः आक्रमण का तात्पर्य है कि किसी व्यक्ति के द्वारा अन्य व्यक्ति को गैरकानूनी रूप से हाथों को दिखाना या उसे शारीरिक क्षति पहुँचाने का प्रयत्न करना, किन्तु ऐसा करते समय क्षतिकर्त्ता में कृत्यों को करने का इरादा और क्षमता होना आवश्यक है। बल प्रयोग की धमकी मात्र ही आक्रमण होता है लेकिन प्रत्येक धमकी से आक्रमण नहीं हो जाता। उदाहरणार्थ-यदि एक व्यक्ति चलती गाड़ी से किसी व्यक्ति को मुक्का दिखाये तो वह बल प्रयोग नहीं कहा जा सकता, क्योंकि ऐसी अवस्था में वह मुक्का मारने में पूर्णतया असमर्थ है।"

 

मारपीट (Battery) - सामण्ड के अनुसार, "बिना कानूनी औचित्य के किसी व्यक्ति के शरीर के प्रति जानबूझकर या इरादे से बल प्रयोग मारपीट कहलाता है।" दूसरे शब्दों में मारपीट शत्रु भाव से या अन्य व्यक्ति की इच्छा के खिलाफ जान बूझकर उसके शरीर को स्पर्श करना है, भले ही वह कितना ही हल्का क्यों न हो 1

 

आक्रमण तथा मारपीट (प्रहार) (Assault and Battery) में अन्तर

 

(i) आक्रमण में मारपीट करके वादी के शरीर को स्पर्श करना आवश्यक नहीं है, किन्तु मारपीट में स्पर्श होना आवश्यक है। पोलक के अनुसार किसी व्यक्ति के प्रति गैरकानूनी बल-प्रयोग, मारपीट कहलाता है। जब एक व्यक्ति के प्रति बल प्रयोग वास्तविक रूप में नहीं किया जाता, लेकिन उससे तत्काल बल प्रयोग का भय उत्पन्न होता है तो ऐसी स्थिति को आक्रमण कहते हैं।

 

(i) आक्रमण मारपीट की दिशा में एक यत्न है या मारपीट करने की धमकी है। पोलक के अनुसार मारपीट में आक्रमण निहित रहता है। जब आक्रमण की धमकी मात्र दी जाती है और जिसको धमकी दी जाती है वह भयभीत हो जाता है लेकिन उसके शरीर को स्पर्श नहीं होता तो उस कृत्य को आक्रमण के अन्तर्गत रखा जाता है। यदि शरीर को स्पर्श हो जाता है तो यह स्थिति मारपीट हो जाती है।

 

5. क्षति बिना हानि तथा हानि बिना क्षति में अन्तर -

 

क्षति बिना हानि (Injuria Sine Damnum)

 

1. इसमें व्यक्ति के कानूनी अधिकार का उल्लंघन होता है ।

2. यह अधिकार अभियोज्य होते हैं ।

3. केवल कानूनी अधिकार की अवहेलना प्रमाणित करना पर्याप्त होता है। आर्थिक क्षति प्रमाणित करना आवश्यक नहीं है।

4. इसमें कानूनी दोष होता है इसलिए अपकृत्य के वाद का कानूनी उपाय भी है।

5. इन्जूरिया का सम्बन्ध विधिक अधिकारों से है।

 

हानि बिना क्षति

(Damnum Sine Injuria)

 

1. बिना कानूनी अधिकार के उल्लंघन के क्षति होती है।

2. यह अधिकार अभियोज्य नहीं होते हैं।

3. बिना कानूनी अधिकार की अवहेलना क्षति प्रमाणित करने का कोई महत्व नहीं है ।

4. इसमें नैतिक दोष (Moral Fault) होता है इसलिए कानूनी उपाय नहीं है ।

5. डैमनम का सम्बन्ध नैतिक अधिकारों से होता है ।

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