सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000
(The Information Technology Act, 2000)
(i) डिजिटल हस्ताक्षर
(ii) इलेक्ट्रॉनिक नियन्त्रण
(iii) डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण-पत्र
(iv) उपभोक्ता के कर्तव्य
(v) साइबर विनिमय अपीलीय अधिकरण
भारत गणराज्य के इक्यानवें वर्ष में संसद द्वारा यह अधिनियमित हो-
अध्याय 1: प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार प्रारम्भ और लागू होना-
(1) यह अधिनियम सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 कहा जायेगा ।
(2) इसका विस्तार इस अधिनियम में अन्यथा उपबन्धित के सिवाय सम्पूर्ण भारत पर होगा यह किसी अधिनियम, किसी व्यक्ति द्वारा भारत से बाहर किये गये अपराध अथवा उल्लंघन के सम्बन्ध में भी लागू होगा।
(3) इस केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित तथा नियत ऐसी तिथि को लागू होगा और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबन्धों के लिए भिन्न-भिन्न तारीख नियत की जा सकती है और इस अधिनियम के उपबन्धों के संदर्भ में यह माना जायेगा कि वह उस प्रावधान के प्रारम्भ के संदर्भ में बनाया गया था
(4) इस अधिनियम की कोई भी बात-
3. [(क)] परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (1881 का 26) की धारा 13 में परिभाषित परक्राम्य लिखत (चेक से अन्य);
(ख) मुख्तार नाभा अधिनियम, 1882 (1882 का 7) की धारा 1-4 में परिभाषित मुख्तार नामा;
(ग) भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (1882 का 2) की धारा 3 में परिभाषित न्यासः
(घ) किसी भी अन्य नाम से पुकारे जाने वाले अन्य वसीयती कथनों के सहित भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 ( 1925 का 39) की धारा 2 के खण्ड (h) में परिभाषित वसीयत;
(ङ) विक्रय की किसी संविदा अथवा किसी अचल सम्पत्ति अथवा ऐसी सम्पत्ति के किसी हित के अभिहस्तान्तरण;
(च) केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किये जा सकने वाले ऐसे किसी दस्तावेजों अथवा संव्यवहारों को लागू नहीं होगा।
2. परिभाषायें - (1) इस अधिनियम में जब तक अन्यथा संदर्भित, अपेक्षित न हो-
(क) “पहुँच" अपने व्याकरणीय, भिन्नता और समान अभिव्यक्ति के साथ इसका अर्थ है, कम्प्यूटर, कम्प्यूटर व्यवस्था अथवा कम्प्यूटर नेटवर्क के, लाजिकल, अर्थमेटिकल, मेमोरी फंक्शन, स्त्रोतों में प्रवेश करना निर्देशित करना अथवा संसूचित करना है;
ख) "सम्बोधित" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो व्यक्ति इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड का ओरिजेनेटर है लेकिन इसमें कोई मध्यवर्ती शामिल नहीं है;
(ग) “न्याय निर्णयन करने वाले अधिकारी” से अभिप्रेत है धारा 46 की उपधारा के अधीन नियुक्त न्याय करने वाला अधिकारी;
(घ) “अंकीय हस्ताक्षर अपने व्याकरणीय भिन्नता”, समानभावों के सहित अर्थ है, (1) डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रिकार्डों को प्रमाणीकरण के प्रयोजनों के लिए किसी व्यक्ति द्वारा प्रक्रिया अथवा ढंग के अंगीकृत किये जाने से है ।
(ङ) समुचित सरकार से अभिप्रेत हैं किसी मामले के सम्बन्ध में-
(i) संविधान की सातवीं अनुसूची की दूसरी सूची में उल्लिखित सरकार से है;
(ii) संविधान की सातवीं अनुसूची की तीसरी सूची में अधिनियम किसी राज्य की विधि के सम्बन्ध में, राज्य सरकार और अन्य मामलों में केन्द्रीय सरकार;
(च) “एसाइमेट्रिक किष्टो सिस्टम" से अभिप्रेत है डिजिटल हस्ताक्षर और डिजिटल हस्ताक्षर को सत्यापित करने वाली लोक कुंजी को सृजित करने वाली प्राइवेट कुंजी से बनी हुई सुरक्षित कुंजी के जोड़ों की व्यवस्था,
(छ) “प्रमाणन प्राधिकारी” से अभिप्रेत है ऐसा व्यक्ति जो कि धारा 24 के अधीन डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अनुज्ञप्ति प्रदान करना है;
(ज) “प्रमाणन अभ्यास" कथन से अभिप्रेत है डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र के जारी करने में प्रमाण प्राधिकारी के कर्मचारी द्वारा अभ्यास के उल्लेख के लिए प्रमाणन प्राधिकारी द्वारा जारी किये गये कथन से है;
(झ) “कम्प्यूटर" से अभिप्रेत है, कोई इलेक्ट्रॉनिक, मैग्नेटिक आप्टिकल अथवा अन्य किसी युक्ति की प्रगति अथवा व्यवसथा जो कि तार्किक, अर्थमेटिकल यादगार कार्यों को इलेक्ट्रॉनिक, मैग्नेटिक आप्टिकल इम्प्यूलस और सभी इनपुट आउटपुट, प्रगति भण्डारण कम्प्यूटर साफ्टवेयर, संसूचना सुविधा के सहित जो कि कम्प्यूटर व्यवस्था अथवा कम्प्यूटर नेटवर्क से कम्प्यूटर से संपृक्त अथवा सम्बन्धित है के कुशल प्रबन्ध द्वारा पालन करता है;
(ञ) "कम्प्यूटर नेटवर्क" से अभिप्रेत है-
(i) सेटेलाइट, माइक्रोवेव, टेरिस्ट्रियल लाइन अथवा अन्य संसूचना साधन के प्रयोग, और
(ii) टर्मिनल अथवा आपस में जुड़े हुए दो या दो से अधिक कम्प्यूटर जटिलता चाहे यह लगातार जुड़े हुए हों अथवा नहीं के माध्यम से आपस में जुड़े हुए दो या दो से अधिक कम्प्यूटरों से है ।
(ट) “कम्प्यूटर स्त्रोत" से अभिप्रेत है, कम्प्यूटर, कम्प्यूटर व्यवस्था नेटवर्क, विवरण, कम्प्यूटर डेटाबेस अथवा साफ्टवेयर से है;
(ठ) “कम्प्यूटर पद्धति” से अभिप्रेत है, ऐसी युक्ति के एकत्रण इनपुट और आउटपुट के सहित और संगणन को छोड़कर जो कि प्रोग्राम के लायक नहीं है और बाहरी फाइल के साथ प्रयुक्त नहीं किये जा सकते हैं जिसके अन्तर्गत कम्प्यूटर प्रोग्राम, इलेक्ट्रॉनिक निदेश इनपुट डाटा तथा आउटपुट डाटा सम्मिलित होता है जो कि तर्क, अंकाणिक, डाटा भण्डारण एवं पुनर्स्थापन एवं संसूचना नियंत्रण तथा अन्य कार्य सम्मिलित है;
(ड) “नियंत्रक” से अभिप्रेत है धारा 17 की उपधारा 1 के अधीन नियुक्त प्रमाणन प्राधिकारियों के कन्टोलर से है;
(ढ़) “साइबर अपीलीय अधिकरण" से अभिप्रेत है धारा 48 की उपधारा 1 के अधीन स्थापित साइबर विनियमन अपीलीय अधिकरण;
(ण) “आँकड़ा (डाटा)" से अभिप्रेत है, ऐसी सूचना, ज्ञान, तथ्य अवधारणा निर्देश जो कि तैयार किये गये हैं, तैयारी के क्रम में हैं, और कम्प्यूटर तंत्र अथवा कम्प्यूटर नेटवर्क की प्रगति की प्रक्रिया से आशयित है और जो कि कम्प्यूटर प्रिन्टर्स मेग्नेटिक, आप्टिकल स्टोरेज पंच्ड कार्ड पंच्ड टाइप (के सहित) कम्प्यूटर की याददाशत प्रतिसेधित्व करते हैं;
(त) “डिजिटल हस्ताक्षर” से अभिप्रेत है, किसी उपभोक्ता द्वारा किसी इलेक्ट्रॉनिक तरीके अथवा धारा 3 के उपबन्धों की प्रक्रिया के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड का प्रमाणीकरण;
(थ) “डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र" से अभिप्रेत है धारा 35 की उपधारा 4 के अधीन जारी डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र;
(द) “सूचना के संदर्भ में इलेक्ट्रॉनिक फार्म" से अभिप्रेत है, कोई सूचना उत्पन्न करना, भेजना, प्राप्त करना या किसी चुम्बकीय, प्रकाशीय, कम्प्यूटर याददाशत, माइक्रोफिल्म, माइक्रोफिच या उसी तरह की अन्य युक्ति द्वारा कम्प्यूटर को संचालित करना;
(ध) “इलेक्ट्रॉनिक गजट” से अभिप्रेत है इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में प्रकाशित आफिसियल गजट;
(न) "इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख " से अभिप्रेत है, ऐसा आँकड़ा, अभिलेख उत्पन्न आँकड़े प्रतिबिम्ब या आवाज का भण्डारण अथवा प्राप्त करना अथवा किसी इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप, अथवा माइक्रो फिल्म अथवा कम्प्यूटर संचालित माइक्रो फिच का भेजना;
(प) "कम्प्यूटर के सम्बन्ध में कार्य”, तर्क, नियंत्रण गणितीय प्रक्रिया, समापन, भण्डारण और पुनः प्राप्ति और संसूचना, दूर संचार अथवा कम्प्यूटर को सम्मिलित करता है;
(फ) "सूचना”, आँकड़े मूल प्रति, प्रतिबिम्ब, ध्वनि स्वर संहिता कम्प्यूटर कार्यक्रम, सॉफ्टवेयर और अंक आधार सूक्ष्म-परत या कम्प्यूटर निर्मित परतों को सम्मिलित करती है;
(व) "किसी विशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक संदेश के सम्बन्ध में मध्यस्थ" से आशय व्यक्ति जो किसी उस संदेश को भंडारित अथवा पारेषित करता है अथवा कोई सेवा उपलब्ध कराता है;
(भ) "कुंजी जोड़ा” असमरूप गुप्त तंत्र से आशय एक व्यक्तिगत तंत्र और उसकी सम्बन्धित गणितीय कुंजी जो कि इस प्रकार सम्बन्धित है कि लोक कुंजी व्यक्तिगत कुंजी द्वारा सृजित डिजिटल हस्ताक्षर को सत्यापित कर सके;
(म) "विधि" संसद अथवा राज्य विधान मण्डल, राष्ट्रपति, राज्यपाल द्वारा जारी अधिसूचना और जैसी भी दशा हो सकेगी अनुच्छेद 240 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा बनाये गये विनियमों, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 357 के खण्ड के उपखण्ड अ के अधीन राष्ट्रपति द्वारा अधिनियमित बिलों, विनियमों और उनके अधीन बनाये गये और जारी किये ये आदेशों को समाहित करती है;
(य) “अनुज्ञप्ति ” से अभिप्रेत है धारा 24 के अधीन प्रमाणन प्राधिकारी के लिए स्वीकृत अनुज्ञप्ति;
(य-क) “उत्पादक” से अभिप्रेत है ऐसा व्यक्ति जो किसी इलेक्ट्रॉनिक सन्देश को भेजता है, उत्पन्न भण्डारित अथवा पारेषित करता है अथवा किसी इलेक्ट्रॉनिक संदेह को किसी अन्य व्यक्ति को भेजना, उत्पन्न करना, भण्डारित करना, पारेषित करना कारित करता है लेकिन इसमें कोई मध्यस्थ सम्मिलित नहीं होता है;
(य-ख) "विहित" से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन बनाये गये नियमों द्वारा "विहित";
(य-ग) “व्यक्तिगत कुंजी” से अभिप्रेत है डिजिटल हस्ताक्षर सृजित करने में प्रयुक्त कुंजी जोड़े की कुंजी;
य-घ) “लोक कुंजी” से अभिप्रेत है डिजिटल हस्ताक्षर के सत्यापन और डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र को सूचीबद्ध करने में प्रयुक्त कुंजी जोड़े की कुंजी;
(य-ड) “सुरक्षित तंत्र" से अभिप्रेत है कम्प्यूटर हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और प्रक्रिया जो कि
(क) अप्राधिकृत पहुँच और दुरुपयोग से युक्तियुक्त रूप से सुरक्षित है;
(ख) जो कि संक्रिया की शुद्धता, विश्वसनीयता के स्तर को युक्तियुक्त रूप से उपबन्धित करती है;
(ग) जो कि आशयित कार्यों के पालन को युक्तियुक्त रूप से अनुकूलन बनाती है;
(घ) सुरक्षित प्रक्रिया को साधारणतया स्वीकार करती है;
(य-च) “सुरक्षित प्रक्रिया" से अभिप्रेत है, धारा 16 के अधीन केन्द्र सरकार द्वारा विहित प्रक्रिया;
(य-छ) “उपभोक्ता” से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जिसके नाम डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र जारी किया जाता है;
(य-ज) “सत्यापन” डिजिटल हस्ताक्षर, इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख लोक कुंजी और इनकी गणितीय भिन्नता और समान अभिव्यक्तियों के सम्बन्ध में सत्यापन के आशय यह अभिनिश्चित करना है कि-
(क) आरम्भिक इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख डिजिटल हस्ताक्षर के साथ उपभोक्ता की लोक कुंजी के सहित व्यक्तिगत कुंजी के प्रयोग द्वारा चिपकाया गया था ।
(ख) आरम्भिक इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख वास्तव में प्रतिधारित है अथवा ऐसा इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख जो डिजिटल हस्ताक्षर के साथ इस प्रकार चिपकाया गया या परिवर्तित किया गया है।
(2) इस अधिनियम के संदर्भ में किसी अधिनियम अथवा उसके कोई उपबन्ध किसी ऐसे क्षेत्र के सम्बन्ध में होंगे जिसके लिए ऐसा अधिनियम अथवा ऐसा उपबन्ध लागू नहीं है, समवर्ती विधि अथवा समवर्ती विधि से सम्बन्धित सुसंगत उपबन्धों यदि कोई उस क्षेत्र के लिए लागू हो के सन्दर्भ में निर्मित होगा ।
डिजिटल हस्ताक्षर
3. इलेक्ट्रॉनिक, अभिलेखों का प्रमाणीकरण-
1. इस धारा के उपबन्धों के सम्बन्ध में कोई उपभोक्ता अपने डिजिटल हस्ताक्षर करने के द्वारा किसी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख को प्रमाणित कर सकेगा ।
2. इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख का प्रमाणीकरण असमरूप गुप्त तंत्र और हैश कार्यों जो कि आरम्भिक इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को अन्य इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख से आवृत्त करता है या परिवर्तित करता है कि प्रयोग द्वारा प्रभावी होगा ।
स्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजन के लिए " हैश कार्य” से आशय किसी एल्गोरियम मैपिंग अथवा किसी क्रम को अन्य क्रम में अनुवादित करता है अथवा साधारणतया छोटा है है परिणाम के नाम से जाना जाता है इस प्रकार कि कोई इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख प्रत्येक समय ऐसा हैरा परिणाम पैदा करता है एल्गोरिथ्म उसी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख जैसा कि इसका इनपुट आंकलन करता है से निर्मित होता है।
(क) एल्गोरिथ्म द्वारा पेश किये गये हैश परिणाम से मूल इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख प्राप्त करता है अथवा पुननिर्मित करता है ।
(ख) दो इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख एल्गोरिथ्म के प्रयोग द्वारा हैश परिणाम को पेश कर सकते हैं।
3) कोई व्यक्ति उपभोक्ता की लोक कुंजी के प्रयोग द्वारा इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख को सत्यापित कर सकता है।
(4) व्यक्तिगत कुंजी और लोक कुंजी उपभोक्ता की अनुपम है और कार्यकारी कुंजी जोड़ा को निर्मित करती है।
इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण
4. इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख की विधि मान्यता-
जहाँ कोई विधि यह उपबन्ध करती है कि सूचना और अन्य मामले लिखित रूप में अथवा टाइप में अथवा मुद्रित रूप में होंगे तब ऐसी विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए ऐसी अपेक्षा सन्तोषजनक समझी जायेगी यदि ऐसी सूचना या अन्य मामले-
(क) किसी इलेक्ट्रॉनिक रूप में बनाये गये हैं अथवा उपलब्ध हैं;
(ख) पश्चातवर्ती संदर्भ विषय के प्रयोग के लिए सुगम हैं।
5. डिजिटल हस्ताक्षरों की विधिक मान्यता-
जहाँ कोई विधि यह उपबन्धित करती है कि कोई इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख या अन्य मामले हस्ताक्षर के किये जाने के द्वारा प्रमाणित होंगे अथवा कोई दस्तावेज हस्ताक्षरित किया जाना चाहिए अथवा उस पर किसी व्यक्ति का हस्ताक्षर होना चाहिए तब इस विधि में किसी बात के होते हुए भी ऐसी अपेक्षा सन्तोषजनक समझी जायेंगी यदि ऐसी सूचना अथवा मामले केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किये जा सकने वाले ढंग से हस्ताक्षर किये जाने के द्वारा प्रमाणीकृत किये जाते हैं।
स्पष्टीकरण - इस धारा के लिए "हस्ताक्षर "
अपनी व्याकरणीय भिन्नता और समान अभिव्यक्ति के सहित किसी दस्तावेज पर किसी व्यक्ति के हस्तलेख में हस्ताक्षर करने के द्वारा, सम्बन्ध में होंगे और अभिव्यक्ति हस्ताक्षर तद्नुसार निर्मित की गयी कही जायेगी ।
6. सरकार और इसके अभिकरणों में इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख और डिजिटल हस्ताक्षर का प्रयोग - (1) जहाँ कोई विधि—
(क) किसी फार्म, आवेदन, अथवा किसी अन्य दस्तावेज के किसी कार्यालय प्राधिकारी, निकाय अथवा समुचित सरकार द्वारा नियंत्रित या धारित किसी अभिकरण में विहित ढंग से फाइल करने;
(ख) विशिष्ट ढंग के नामों से पुकारे जाने वाले के अनुमोदन और मंजूरी से किसी अनुज्ञप्ति के दिये जाने या जारी किये जाने के लिए;
(ग) विशिष्ट ढंग में धन के भुगतान की रसीद प्राप्त करने के लिए उपबन्धित है, तब उस समय प्रवृत्त विधि में किसी बात के होते हुए भी ऐसी अपेक्षा सन्तोषजनक समझी जायेगी यदि ऐसा फाइल किया जाना, जारी अथवा प्राप्त किया जाना समुचित सरकार द्वारा विहित किए जा सकने वाले इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप द्वारा प्रभावित होता है;
(2) समुचित सरकार उपधारा 1 के प्रयोजन के लिए नियमों द्वारा-
(क) ढंग और आकार जिसमें इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड फाइल, सृजित अथवा जारी किया जा सकेगा;
(ख) उपखण्ड (क) के अधीन किसी इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड फाइल, सृजित अथवा जारी किये जाने का शुल्क अथवा प्रभार का भुगतान का तरीका विहित कर सकेगी।
7. इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों का प्रतिधारण - 1. जहाँ कोई विधि यह उपबन्धित करती है कि दस्तावेज, अभिलेख अथवा सूचना किसी विनिर्दिष्ट अवधि के लिए प्रतिधारित की जाए तब वह अपेक्षा सन्तोषजनक समझी जायेगी यदि ऐसा दस्तावेज, अभिलेख, सूचना इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में प्रतिधारित है, यदि -
(क) उसमें अन्तर्विष्ट सूचना इस प्रकार सुगम है कि पश्चातवर्ती प्रयोजन के लिए उपयुक्त है:
(ख) इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड ऐसे आधार में प्रतिधारित है जिनमें यह मूल रूप से उत्पन्न भेजा जाना अथवा प्राप्त किया जाना है अथवा आकार जिसमें यह मूल रूप में उत्पन्न भेजे जाने अथवा किये जाने के लिए प्रदर्शित है;
(ग) विवरण जो कि उत्पत्ति शन्तव्य पारेषण की तिथि, समय इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख में उपलब्ध ऐसे इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख की प्राप्ति के पहचान को सुगम करेंगे;
परन्तु यह कि यह खण्ड किसी ऐसी सूचना को लागू नहीं होगा जो इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख के डिस्पैच अथवा प्राप्त होने के प्रयोजन को समर्थ बनाने के लिए धीरे-धीरे उत्पन्न होती है।
(2) इस धारा की कोई भी बात किसी निधि जो कि दस्तावेजों, अभिलेखों अथवा सूचनाओं के प्रयोजन के लिए स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त है लागू नहीं होगी
8. इलेक्ट्रॉनिक गजट में नियमों और विनियमों का प्रकाशन
जहाँ कोई विधि यह उपबन्धित करती है कि कोई नियम, विनियम, आदेश उपनियम अधिसूचना अथवा कोई अन्य मामला किसी आफिशियल गजट में प्रकाशित होगा तब ऐसी अपेक्षा संतोषजनक समझी जायेगी यदि ऐसी नियम, विनियम, आदेश उपनियम अधिसूचना अथवा अन्य मामले आफिशियल शासकीय गजट अथवा इलेक्ट्रॉनिक गजट में प्रकाशित है-
परन्तु यह कि जहाँ कोई नियम, विनियम, आदेश, उपनियम, अधिसूचना अथवा अन्य मामले सरकारी (आफिशियल) गजट अथवा इलेक्ट्रॉनिक गजट में प्रकाशित है प्रकाशन की तिथि गजट की तिथि समझी जायेगी जो कि पहले प्रकाशित की गयी थी ।
9. धारा 6, 7 और 8 यह आग्रह करने का अधिकार नहीं देती है कि दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में स्वीकार की जानी चाहिए ।
धारा 6, 7 और 8 में ऐसी कोई बात अन्तर्विष्ट नहीं है जो किसी व्यक्ति को यह आग्रह करने का अधिकार देती हो कि केन्द्र सरकार अथवा राज्य सरकार का कोई भी मंत्रालय अथवा विभाग अथवा कोई प्राधिकारी निकाय जो कि किसी विधि के अधीन अथवा विधि के द्वारा स्थापित है अथवा केन्द्र सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा स्थापित अथवा नियंत्रित है स्वीकार जारी, सृजित प्रातिधारित किया जाना चाहिए और इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों के रूप में है, प्रतिरक्षित किया जाना चाहिए अथवा इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप संव्यवहारों को प्रभावी होना चाहिए।
10. डिजिटल हस्ताक्षर के सम्बन्ध में केन्द्र सरकार को नियम बनाने की शक्ति - केन्द्र . सरकार इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए नियमों द्वारा -
(क) डिजिटल हस्ताक्षर के प्रकार;
(ख) ढंग और तरीका जिनमें डिजिटल हस्ताक्षर किया जायेगा;
(ग) ढंग और प्रक्रिया जिसमें डिजिटल हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति की पहचान;
(घ) पर्याप्त विश्वसनीयता और सुरक्षा अथवा इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख की गोपनीयता भुगतान सुनिश्चित करने वाली नियंत्रण विधि और प्रक्रिया;
(ङ) कोई अन्य मामले जो डिजिटल हस्ताक्षर के प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक है ।
इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों का लगाया जाना, अभिस्वीकृति और प्रेषण
11. इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों का लगाया जाना
कोई इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख अपने मूल रूप में लगाया जायेगा-
(क) यदि यह स्वयं उत्पादक द्वारा भेजा गया था;
(ख) ऐसे व्यक्ति द्वारा जो ऐसे इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख के सम्बन्ध में उत्पादक की ओर से कार्य करने के लिए प्राधिकृत हैं;
(ग) किसी सूचना तंत्र कार्यक्रम अथवा उत्पादक की ओर से स्वतः संक्रिया द्वारा ।
12. रसीद की अभिस्वीकृति - (1) जहाँ कि उत्पादक सम्बोधिती से सहमत नहीं है कि इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख की रसीद की अभिस्वीकृति विशिष्ट रूप में अथवा विशिष्ट ढंग से दी गयी है कोई भी अभिस्वीकृति-
(क) किसी सम्बोधिती, अथवा अन्यथा द्वारा दी गयी संसूचना; अथवा
(ख) सम्बोधिती का ऐसा कोई आचरण जो उत्पादक को इस बात के लिए संकेतित करने के लिए पर्याप्त है कि इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख प्राप्त किया गया था ।
(2) जहाँ उत्पादक यह अनुबद्ध करता है कि इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख केवल इस इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख की अभिस्वीकृत की रसीद पर ही बाध्यकर होगा तब जब तक कि • अभिस्वीकृति इस प्रकार प्राप्त नहीं की जाती यह समझा जायेगा कि इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड उत्पादक द्वारा कभी भेजा नहीं गया हैं ।
(3) जहाँ उत्पादक यह अनुबद्ध नहीं करता है कि इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख इसकी अभिस्वीकृति की रसीद पर बाध्यकर होगा और अभिस्वीकृति उत्पादक द्वारा विनिर्दिष्ट, अथवा सहमत समय के भीतर प्राप्त नहीं की गयी है अथवा यदि युक्तियुक्त समय के भीतर कोई समय विनिर्दिष्ट या सहमत नहीं किया गया है तब उत्पादक यह कहते हुए सम्बोधिती को नोटिस दे सकेगा कि उसके द्वारा कोई भी अभिस्वीकृति प्राप्त नहीं की गयी है और वह युक्तियुक्त समय भी विनिर्दिष्ट करेगा जिसके भीतर उसे अवश्य ही अभिस्वीकृति प्राप्त हो जाये यदि उपरोक्त कथित समय के भीतर कोई भी अभिस्वीकृति प्राप्त नहीं की जाती है तो वह सम्बोधिती को नोटिस देने के पश्चात् इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख के साथ ऐसा व्यवहार करेगा जैस वह कभी भेजा ही न गया हो ।
13. इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों के प्रेषण और प्राप्ति का स्थान और समय-
(1) उत्पादक और सम्बोधिती के बीच सहमति के सिवाय किसी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख का प्रेषण तब होगा जब यह उत्पादक की शक्ति के बाहर कम्प्यूटर स्त्रोतों में प्रवेश करता है ।
(2) उत्पादक और सम्बोधिती के बीच सहमति के होने के सिवाय किसी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख की प्राप्ति के लिए समय निम्न प्रकार अभिनिश्चित किया जायेगा-
(क) यदि सम्बोधिती नामित है कम्प्यूटर स्त्रोत इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की प्राप्ति के प्रयोजन के लिए रखता है-
(i) रसीद उस समय प्राप्त हुई मानी जाती है, जब इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख नामित कम्प्यूटर स्त्रोत में प्रवेश करता है;
(ii) यदि इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख सम्बोधिती के कम्प्यूटर स्त्रोत में भेजा जाता है और यह कम्प्यूटर स्त्रोत नामित स्त्रोत नहीं हैं तबं रसीद उस समय प्राप्त होगी जब इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख सम्बोधिती द्वारा प्राप्त किया जाता है;
(ख) यदि सम्बोधिती कम्प्यूटर स्त्रोत को विनिर्दिष्ट समय के भीतर पदनामित नहीं करता और यदि कोई रसीद उस समय प्राप्त होती है जब इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख सम्बोधिती के कम्प्यूटर स्त्रोत में प्रवेश करता है।
(3) उत्पादक और सम्बोधिती के बीच सहमति के बीच सहमति के सिवाय किसी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख को ऐसे स्थान पर प्रेषित समझा जाता है जहाँ उत्पादक अपने कारबार का स्थान रखता है और यह उस स्थान पर प्राप्त समझा जाता है जहाँ सम्बोधिती अपने कारबार का स्थान रखता है।
(4) उपधारा 2 के उपबन्ध इस बात के होते हुए भी लागू होंगे कि स्थान जहाँ कम्प्यूटर स्त्रोत स्थित है उस स्थान से भिन्न हो सकेगा जहाँ इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख उपधारा (3) के अधीन स्वीकार किया गया समझा जाता है ।
(5) इस धारा के प्रयोजन के लिए-
(क) यदि उत्पादक और सम्बोधिती कारबर के प्रयोजन के लिए एक से अधिक स्थान रखते हैं तो कारबार का मुख्य स्थान कारबार का स्थान होगा;
(ख) यदि उत्पादक और सम्बोधित कारबार का स्थान नहीं रखते हैं तो उनके निवास का स्थान कारबर का स्थान समझा जायेगा;
(ग) निवास का स्थान निगमित निकाय के सम्बन्ध में निवास स्थान से आशय स्थान जहाँ यह रजिस्ट्रीकृत है ।
सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख और सुरक्षित डिजिटल हस्ताक्षर
14. सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख - जहाँ कोई सुरक्षित प्रक्रिया सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख को विनिर्दिष्ट समय पर लागू होती है तब ऐसा अभिलेख ऐसे सत्यापन के समय पर सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख समझा जायेगा ।
15. सुरक्षित डिजिटल हस्ताक्षर - यदि सुरक्षित प्रक्रिया लागू किये जाने के बारे में संपृक्त पक्षकारों के बीच सहमति होती है तो वह सत्यापित हो सकेगा कि डिजिटल हस्ताक्षर जब यह किया गया था तो यह-
(क) इसे करने वाले उपभोक्ता के लिए अनुपम था;
(ख) ऐसे उपभोक्ता की शिनाख्त के लिए समर्थ था;
(ग) ऐसे ढंग में सृजित अथवा उपभोक्ता के नियंत्रण के अधीन अन्य साधनों के प्रयोग द्वारा सृजित किया गया था, और यह इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख से इस प्रकार जुड़ा होता है कि जिसमें कि यदि इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख में डिजिटल हस्ताक्षर परिवर्तित किया गया होता तो अवैध होता ।
तब ऐसा डिजिटल हस्ताक्षर सुरक्षित डिजिटल हस्ताक्षर समझा जाता है ।
16. सुरक्षित प्रक्रिया- केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा के प्रयोजन के लिए वाणिज्यिक परिस्थितियों के सम्बन्ध में उस समय जब प्रक्रिया प्रयुक्त की गयी थी सुरक्षित प्रक्रिया निम्न के सहित विहित करेगा-
(क) संव्यवहार की प्रकृति;
(ख) पक्षकारों की तकनीकी क्षमता में कुतर्क करने के सम्बन्ध स्तर;
(ग) अन्य पक्षकारों के समान संव्यवहारों में लगे होने के विस्तार;
(घ) विकल्पात्मक प्रस्तावित उपलब्धता जो पक्षकारों द्वारा नामंजूर कर दी गयी हो;
(ङ) विकल्पात्मक प्रक्रिया का खर्च,
(च) समान प्रकार के संव्यवहारों अथवा संसूचनाओं के लिए सामान्य उपयोग की प्रक्रिया ।
प्रमाणन प्राधिकारियों के विनियम
17. कन्ट्रोलर और अन्य अधिकारियों की नियुक्ति - ( 1 ) केन्द्रीय सरकार सरकारी गजट में अधिसूचना द्वारा इस धारा के प्रयोजन के लिए प्रमाणन प्राधिकारियों के कन्ट्रोलर की नियुक्ति कर सकेगी और उसी अथवा पश्चातवर्ती अधिसूचना द्वारा ऐसे उप कन्ट्रोलर और सहायक कन्ट्रोलर जैसा भी वह उचित समझेगी नियुक्त कर सके ।
(2) इस अधिनियम के अधीन कन्ट्रोलर केन्द्र सरकार के सामान्य नियंत्रण और निर्देशों के अधीन अपने कार्यों से उन्मुक्त होगा ।
(3) उप कन्ट्रोलर और सहायक कन्ट्रोलर अपने समनुदेशित कर्त्तव्यों का पालन कन्ट्रोलर के सामान्य प्रबन्ध और कन्ट्रोलर के नियंत्रण में करेगा ।
(4) कन्ट्रोलर, उप कन्ट्रोलर और सहायक कन्ट्रोलर की सेवा की अर्हतायें, अनुभव, निबन्धन और शर्तें ऐसी होगी जैसा कि केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जा सकेगी।
(5) कन्ट्रोलर का प्रधान कार्यालय और शाखा कार्यालय ऐसे स्थान पर होगा जैसा कि केन्द्र सरकार विनिर्दिष्ट करे और ये ऐसे स्थानों पर स्थापित किये जा सकेंगे जैसा केन्द्र सरकार उचित समझती है।
(6) कन्ट्रोलर के कार्यालय की एक मुहर होगी ।
18. कन्ट्रोलर के कार्य - कन्ट्रोलर निम्न कर्त्तव्यों में से सभी या किसी का पालन कर सकेगा-
(क) प्रमाणन प्राधिकारी की कार्यवाही की देखरेख करना;
(ख) प्रमाणन प्राधिकारी की लोक कुंजी का प्रमाणन;
(ग) प्रमाणन प्राधिकारी द्वारा बनाये रखे जाने वाले स्तर को अधिकथित करना;
(घ) ऐसे अर्हता और अनुभव विनिर्दिष्ट करना जिसे प्रमाणन प्राधिकारियों के कर्मचारी धारण करेंगे;
(ङ) ऐसी शर्तें विनिर्दिष्ट करना जिन पर प्रमाणन प्राधिकारी अथवा कारबार करेंगे;
(च) लिखित, मुद्रित, दृष्टिगत तत्त्वों को विनिर्दिष्ट करना और प्रकाशन जो कि अथवा डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र और लोक कुंजी के प्रयोग के सम्बन्ध में प्रयुक्त किया जा सकेगा।
(छ) डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र और कुंजी के स्वरूप और विनिर्दिष्ट अन्तर्वस्तुयें;
(ज) प्रमाणन प्राधिकारियों द्वारा खातों के व्यवस्थित रखने के लिए ढंग और स्वरूप का विनिर्दिष्टीकरण;
(झ) निबंधन और शर्तें जिन पर संपरीक्षण नियुक्त किये जा सकेंगे और भत्ते जो उन्हें दिये जा सकेंगे;
(ञ) प्रमाणन प्राधिकारी द्वारा किसी इलेक्ट्रॉनिक तंत्र का व्यवस्थापन और ऐसे तंत्र का विनियमन;
(ट) ढंग जिसमें प्रमाणन प्राधिकारी उपभोक्ताओं के साथ व्यवहार करेंगे;
(ठ) प्रमाणन प्राधिकारियों और उपभोक्ताओं के बीच हितों के संघर्ष को दूर करना;
(ड) प्रमाणन प्राधिकारियों के कर्त्तव्यों को अभिलिखित करना;
(ढ) प्रत्येक प्रमाणन प्राधिकारी के प्रकटित अभिलेख जिनमें विनियम द्वारा विनिर्दिष्ट ऐसी शर्तें जो कि लोक के लिए सुगम हों की अन्तर्विष्ट करना और उनका व्यवस्थापन ।
19. विदेशी प्रमाणन प्राधिकारी की मान्यता-
(1) विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जा सकने वाली शर्तें और प्रतिबन्धों के अनुसार कन्ट्रोलर केन्द्रीय सरकार की पूर्व अनुमति से और सरकारी गजट में अधिसूचना द्वारा किसी विदेशी प्रमाणन प्राधिकारी को इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए प्रमाण प्राधिकारी के रूप में मान्यता प्रदान कर सकेगा ।
(2) जहाँ कोई प्रमाणन प्राधिकारी उपधारा (1) के अधीन मान्यता प्राप्त है ऐसे प्रमाणन प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया डिजिटल प्रमाण पत्र इस धारा के प्रयोजन के लिए वैध होगा ।
(3) कन्ट्रोलर यदि सन्तुष्ट है कि किसी प्रमाणन प्राधिकारी ने ऐसी शर्तों और प्रतिबन्धों का उल्लंघन किया है जिन पर उसे उपधारा (1) के अधीन मान्यता प्रदान की गयी थी तो वह ऐसे कारणों से जो अभिलिखित किये जायेंगे सरकारी गजट में अधिसूचना द्वारा ऐसी मान्यता को प्रतिसंहृत कर सकेगा ।
20. कन्ट्रोलर कोषाध्यक्ष के रूप में करेंगे - ( 1 ) कन्ट्रोलर इस अधिनियम के अधीन | जारी सभी डिजिटल प्रमाण पत्र के कोषाध्यक्ष के रूप में कार्य करेगा ।
(2) कन्ट्रोलर-
(क) हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर का उपयोग और ऐसी प्रक्रिया का उपयोग करेगा जो अप्राधिकृत और अनुचित प्रयोग से सुरक्षित हों;
(ख) ऐसे अन्य मापदण्डों का संप्रेक्षण कर सकेगा जो केन्द्र सरकार द्वारा विहित किये जा सकेंगे; यह सुनिश्चित करता है कि डिजिटल हस्ताक्षर की गोपनीयता और सुरक्षा सुरक्षित रहे ।
(3) कन्ट्रोलर सभी लोक कुंजियों के लिए ऐसे ढंग से सभी लोक कुंजियों का कम्प्यूटरीकृत विवरण व्यवस्थित रखेगा और लोक कुंजी सभी लोक सदस्यों के लिए उपलब्ध करायेगा ।
21. डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र जारी किये जाने के लिए अनुज्ञप्ति - (1) उपधारा (2) के उपबन्धों के विषयों के लिए कोई भी व्यक्ति डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र जारी करने की अनुज्ञप्ति के लिए आवेदन कर सकेगा ।
(2) उपधारा (2) के अधीन कोई भी अनुज्ञप्ति तब तक जारी नहीं की जायेगी जब तक कि ऐसा आवेदक, अर्हता, जन शक्ति, वित्तीय संसाधनों और अन्य सुविधाएँ जो कि डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र जारी करने के लिए आवश्यक है और केन्द्रीय सरकार द्वारा वहित की जा सकेगी उनसे सम्बन्धित अपेक्षाओं की पूर्ति नहीं कर दी जाती है ।
(3) इस धारा के अधीन प्रदान की गयी अनुज्ञप्ति-
(क) केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किये जा सकने वाले समय तक के लिए वैध होगी;
(ख) अन्तरणीय और दाययोग्य नहीं होगी;
(ग) विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किये जा सकने वाले शर्तों और निबन्धनों के अधीन होगी ।
22. अनुज्ञप्ति के लिए आवेदन - (1) अनुज्ञप्ति जारी किये जाने के लिए प्रत्येक आवेदन ऐसे फार्म में हो सकेगा जो केन्द्र सरकार विहित करें ।
(2) अनुज्ञप्ति जारी किये जाने के लिए दिया गया प्रत्येक आवेदन-
(क) प्रमाणिक अभ्यासिक कथन;
(ख) आवेदक की पहचान के सम्बन्ध में प्रक्रिया अन्तर्विष्ट करने वाला कथन;
(ग) ऐसी फीस का भुगतान जो पच्चीस हजार रुपये से अधिक न होगी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जा सकेगी;
(घ) केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किये जा सकने वाले अन्य दस्तावेज के साथ दिया जायेगा ।
23. अनुज्ञप्ति का नवीनीकरण - अनुज्ञप्ति के नवीनीकरण के लिए प्रत्येक आवेदन- (क) ऐसे फार्म में;
(ख) और ऐसी फीस के सहित होगा जो पाँच हजार रुपये से अधिक न होगी अथवा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जा सकेगी और अनुज्ञप्ति की वैधता की अवधि समाप् के पैंतालीस दिन के पूर्व दिया जा सकेगा ।
24. अनुज्ञप्ति दिये जाने और खारिज किये जाने के लिए प्रक्रिया 21 की उपधारा 1 के आवेदन की प्राप्ति पर कन्ट्रोलर आवेदन के साथ दिये दस्तावेजों और अन्य बातों पर विचार करने के पश्चात् यदि वह उचित समझता है तो अनुज्ञप्ति प्रदान करेगा अथवा आवेदन को खारिज कर देगा:
परन्तु यह कि इस धारा के अधीन कोई भी आवेदन तब तक खारिज नहीं किया. जायेगा जब तक कि आवेदक को अपने मामले को प्रस्तुत करने का युक्तियुक्त अवसर नहीं दिया जाता है।
25. अनुज्ञप्ति का निलम्बन - (1) कन्ट्रोलर यदि संतुष्ट है तो वह ऐसी जाँच जिसे वह उचित समझता है करने के पश्चात्—
(क) प्रमाणन प्राधिकारी ने आवेदन जारी किये जाने अथवा उसके सम्बन्ध में ऐसा कथन किया जो कि असत्य है अथवा तात्विक विशिष्टियों में झूठा है ।
(ख) ऐसी शर्तों और निबन्धों जिन पर आवेदन किया गया था पालन करने में असफल रहा है ।
1. [ (ग)] धारा 30 के अधीन प्रक्रियाओं और विनिर्दिष्ट, मापदण्डों को व्यवस्थित रखने में असफल रहा है।
(घ) इस अधिनियम के किसी उपबन्धों, नियमों, विनियमों अथवा उसके अधीन किये गये आदेशों का उल्लंघन किया है तो अनुज्ञप्ति को प्रतिसंहृत कर देगा ।
परन्तु यह कि कोई भी अनुज्ञप्ति तब तक प्रतिसंह्यत न की जायेगी जब तक कि " प्रमाणन प्राधिकारी को प्रस्तावित प्रतिसंहरण के विरुद्ध कारण दर्शित करने के लिए युक्तियुक्त अवसर नहीं दिया जाता है
(2) कन्ट्रोलर यदि यह विश्वास करने का युक्तियुक्त कारण रखता है कि उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञप्ति के प्रतिसंहृत किये जाने के लिए युक्तियुक्त आधार है तो आदेश द्वारा ऐसी अनुज्ञप्ति उसके द्वारा आदेशित की जाने वाली जाँच को पूरा होने तक निलम्बित होगा-
परन्तु यह कि कोई भी अनुज्ञप्ति दस दिन से अधिक समय के लिए निलम्बित न की जायेगी जब तक कि प्रमाणन प्राधिकारी को प्रस्तावित निलम्बन के सम्बन्ध में कारण दर्शित करने के लिए युक्तियुक्त अवसर नहीं दिया जाता है । निलम्बित की गयी हैं ऐसे
(3) प्रमाणन प्राधिकारी जिसकी अनुज्ञप्ति इस प्रकार निलम्बन के दौरान डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र जारी नहीं करेगा ।
26. अनुज्ञप्ति के निलम्बन अथवा प्रतिसंहरण के लिए सूचना-
(1) जहाँ कि प्रमाणन प्राधिकारी की अनुज्ञप्ति निलम्बित की जाती है कन्ट्रोलर ऐसे निलम्बन अथवा प्रतिसंहरण जैसी भी दशा हो अपने द्वारा व्यवस्थित विवरण में नोटिस प्रकाशित करेगा ।
(2) जहाँ कि एक था एक से अधिक रिपोजिटरीज विनिर्दिष्ट हों तो कनट्रोलर ऐसे निलम्बन और प्रतिसंहरण, जैसी भी दशा हो ऐसी सभी रिपोजिटरीज में नोटिस प्रकाशित करेगा
परन्तु यह कि ऐसे निलम्बन और प्रतिसंहरण की नोटिस अन्तर्विष्ट करने वाले प्रत्येक विवरण वेब साइट के माध्यम से जो कि सुगम हो उपलब्ध कराया जायेगा ।
परन्तु यह कि कन्ट्रोलर यदि आवश्यक समझता है तो विवरण की अन्तर्वस्तुओं की ऐसे इलेक्ट्रॉनिक अथवा अन्य माध्यमों जिन्हें वह उचित समझता है में प्रकाशित कर सकेगा।
27. शक्ति का प्रव्यायोजन – कन्ट्रोलर लिखित रूप से उप कन्ट्रोलर और सहायक कन्ट्रोलर को अथवा किसी अन्य अधिकारी को इस अध्याय के अधीन कन्ट्रोलर की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा ।
28. उल्लंघनों के अन्वेषण की शक्ति- कन्ट्रोलर अथवा उसके द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी इस अधिनियम, नियमों अथवा उनके अधीन बनाये गये विनियमों के उल्लंघन के लिए अन्वेषण करेगा।
(2) कन्ट्रोलर या कोई अन्य अधिकारी जो उसके द्वारा प्राधिकृत है आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के अध्याय XIII के अधीन आयकर अधिकारी को दी गयी शक्तियों का प्रयोग करेगा और ऐसी शक्तियों का प्रयोग ऐसे सीमाओं के अधीन करेगा जो इस अधिनियम में अभिलिखित की गयी हो ।
29. कम्प्यूटर और आँकड़े तक पहुँच - ( 1 ) धारा 68 की उपधारा (1) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना कन्ट्रोलर अथवा उसके प्राधिकृत कोई व्यक्ति यदि इस के बारे मैं सन्देह के लिए युक्तियुक्त कारण रखता है कि इस अधिनियम, नियमों अथवा उनके अधीन बनाये गये विनियमों का उल्लंघन किया है तो वह किसी कम्प्यूटर तंत्र, किसी पत्र, आँकड़े अथवा ऐसे तंत्र से संपृक्त अन्य मामलों के लिए ऐसे कम्प्यूटर तंत्र के सम्बन्ध में कोई सूचना, अन्तर्विष्ट आँकड़े या उपलब्ध आँकड़े को प्राप्त करने के प्रयोजन के लिए अनुसंधान कर सकेंगे।
(2) उपधारा 1 के प्रयोजन के लिए कन्ट्रोलर अथवा उसके द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य व्यक्ति आदेश द्वारा किसी अन्य व्यक्ति जो कि कम्प्यूटर तंत्र की संक्रिय आँकड़े, यंत्र जिनका कि वह भारसाधक है उसे युक्तियुक्त तकनीकी और अन्य सहायता जिसे वह आवश्यक समझता है उपलब्ध कराने के लिए निदेशित कर सकेगा।
30. प्रमाणन प्राधिकारी कुछ प्रक्रियाओं का पालन करेंगे- प्रत्येक प्रमाणन प्राधिकारी-
(क) हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और प्रक्रिया जो कि अनाधिकार प्रवेश के सम्बन्ध में है प्रयोग करेंगे;
(ख) उनकी सेवा की विश्वसनीयता के युक्तियुक्त स्तर जो कि आशयित कार्यों के पालन में युक्तियुक्त है उपलब्ध करायेंगे;
(ग) ऐसी सुरक्षित प्रक्रियायें सुनिश्चित करेंगे कि डिजिटल हस्ताक्षर की गोपनीयता अथवा गुप्तता सुरक्षित रहे;
(घ) ऐसे अन्य संप्रेक्षण करेंगे जो विनियम में विनिर्दिष्ट हों ।
31. प्रमाणन प्राधिकारी इस अधिनियम आदि का पालन सुनिश्चित करेंगे - प्रत्येक प्रमाणन प्राधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक नियोजित व्यक्ति अथवा अन्यथा कार्य में लगा हुआ व्यक्ति अपने नियोजन अथव हुए कार्य के अनुक्रम में इस अधिनियम उपबन्धों, नियमों, विनियमों और इसके अधीन किये गये आदेशों का पालन करेंगे।
32. अनुज्ञप्ति का प्रदर्शन - प्रत्येक प्रमाणन प्राधिकारी अपनी अनुज्ञप्ति को दृष्यमान स्थान जहाँ कारबार किया जा रहा हो, प्रदर्शित करेगा ।
33. अनुज्ञप्ति का समर्पण - (1) प्रत्येक प्रमाणन प्राधिकारी जिसकी अनुज्ञप्ति निलम्बित अथवा प्रति संहृत कर दी गयी है ऐसे निलम्बन अथवा प्रतिसंहरण के तुरन्त पश्चात् अनुज्ञप्ति को कन्ट्रोलर को समर्पित करेगा ।
(2) जहाँ कोई प्रमाणन प्राधिकारी उपधारा के अधीन अनुज्ञप्ति का समर्पण करने में असफल होता है व्यक्ति जिसके पक्ष में अनुज्ञप्ति जारी की जाती है किसी अपराध का दोषी होगा और कारावास जिसकी अवधि छः माह तक की हो सकेगी अथवा जुर्माने से जो दस हजार रुपये तक हो सकेगा अथवा दोनों से दण्डित किया जायेगा ।
34. प्रकटीकरण - (1) प्रत्येक प्रमाणन प्राधिकारी विनियमों में विनिर्दिष्ट ढंग से -
(क) डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र जिसमें कि लोक कुंजी और व्यक्तिगत कुंजी अन्तर्विष्ट हो उसका उपयोग प्रमाणन प्राधिकारी डिजिटल हस्ताक्षर को अन्य डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्रों पर डिजिटल हस्ताक्षर करने के लिए करता है,
(ख) उससे सुसंगत कथनों का कोई प्रमाण पत्र;
(ग) अपने प्रमाणन प्राधिकारी प्रमाण पत्र के निलम्बन अथवा प्रतिसंहरण की सूचना;
(घ) कोई अन्य तथ्य जो कि डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र जो कि उसे जारी किया है कि विश्वसनीयता के प्रतिकूल हो अथवा प्राधिकारी द्वारा अपनी सेवा के पालन की उपलब्धता प्रकटित करेगा।
(2) जहाँ प्रमाणन प्राधिकारी की राय में कोई घटना घटित होती है अथवा इसके कम्प्यूटर तंत्र की विश्वसनीयता पर अथवा विषय जिनके लिए डिजिटल प्रमाण पत्र जारी किया गया है पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कोई तथ्य उत्पन्न होता है तब प्रमाणन प्राधिकारी-
(क) उस घटना से प्रमाणित होने वाले किसी व्यक्ति को सूचित करने के लिए युक्तियुक्त प्रयास करेगा;
(ख) ऐसी घटनाओं और स्थितियों के व्यवहार करने के लिए अपने प्रमाणीकरण कथनों में विनिर्दिष्ट प्रक्रिया के अनुसार कार्य करेंगा।
डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र
35. प्रमाणन प्राधिकारी डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र जारी करेगा-
(1) कोई व्यक्ति केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित फार्म में डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र जारी किये जाने के लिए प्रमाणन प्राधिकारी से आवेदन कर सकेगा।
(2) ऐसा प्रत्येक आवेदन ऐसी फीस जो पच्चीस हजार रुपये से अधिक न होगी जो कि केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जा सकेगी के साथ दिया जायेगा और उसका भुगतान प्रमाणन प्राधिकारी को किया जायेगा ।
परन्तु यह कि उपधारा (2) के उपबन्धित शुल्क विभिन्न आवेदनों के लिए भिन्न-भिन्न रूप में विहित किये जा सकेंगे।
(3) प्रत्येक ऐसा आवेदन प्रमाणन अभ्यास कथनों के सहित अथवा जहाँ ऐसे कथन न हों विनियमों में विनिर्दिष्ट की जा सकने वाली विशिष्टियों को अन्तर्विष्ट करने वाले कथनों के साथ दिया जायेगा ।
(4) उपधारा (1) के अधीन किसी आवेदन की प्राप्ति पर प्रमाणन प्राधिकारी प्रमाणन अभ्यास कथनों अथवा उपधारा (3) के अधीन किये गये अन्य कथनों पर विचार करने के पश्चात् और ऐसी जाँच जिसे वह उचित समझता है करने के पश्चात् डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र प्रदान करेगा अथवा अभिलिखित किये जाने वाले कारणों के आधार पर आवेदन को खारिज कर देगा।
परन्तु यह कि कोई भी डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र तब तक जारी नहीं किया जायेगा जब तक प्रमाणन प्राधिकार इस बात से सन्तुष्ट नहीं हो जाता है कि-
(क) आवेदन डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र में सूचीबद्ध व्यक्तिगत कुंजी और साथ ही साथ लोक कुंजी को धारण करता है।
(ख) आवेदक व्यक्तिगत कुंजी जो कि डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र के सृजित किये जाने के लिए समर्थ है धारण करता था ।
(ग) प्रमाण पत्र में सूचीबद्ध लोक कुंजी आवेदक द्वारा धारण की जाने वाली व्यक्तिगत कुंजी द्वारा किये गये डिजिटल हस्ताक्षर के सत्यापन के लिए प्रयुक्त की जा सकती है ।
परन्तु यह कि कोई भी आवेदन तब तक खानिज न किया जायेगा जब तक कि प्रस्तावित खारिजी के लिए कारण दर्शित करने का युक्तियुक्त अवसर आवेदक को नहीं दिया जाता है।
36. डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र जारी किये जाने पर प्रतिनिधित्व - प्रमाणन प्राधिकारी जो कि डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र जारी करता है यह प्रमाणित करेगा कि-
(क) यह इस अधिनियम के उपबन्धों और उनके अधीन बनाये गये नियमों और विनियमों का पालन करता है ।
(ख) यह डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र को प्रकाशित करता है अथवा इसे इस पर निर्भर करने वाले ऐसे व्यक्तियों को उपलब्ध करायेगा ।
(ग) उपभोक्ता ने डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र में सूचीबद्ध व्यक्तिगत कुंजी के साथ-साथ लोक कुंजी को धारण किया है।
(घ) उपभोक्ता की लोक कुंजी और व्यक्तिगत कुंजी जोड़े का कार्य करती है ।
(ङ) डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र में अन्तर्विष्ट सूचना यथार्थ है और;
(च) इसमें कोई ऐसा तात्विक तथ्य नहीं है जिसे यदि डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र में मिला दिया जाये तो खण्ड क घ तक में किये गये प्रतिनिधित्वों और विश्वसनीयता पर प्रतिकूल प्रभाव होगा ।
37. डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र का निलम्बन-
(1) उपधारा (2) के उपबन्धों के लिए प्रमाणन प्राधिकारी जो कि डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र जारी करता है ऐसे डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र को निलम्बित कर सकेगा-
(क) उसके प्रभाव की प्रार्थना प्राप्त होने पर --
(i) उपभोक्ता डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र में सूचीबद्ध करेगा; या
(ii) उस उपभोक्ता द्वारा उस कार्य के लिए सम्यक् रूप से प्राधिकृत द्वारा सूचीबद्ध करेगा ।
(ख) यदि यह राय है कि डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र लोक हित में निलम्बित किया जाना चाहिए ।
(2) डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र पन्द्रह दिन से अधिक अवधि के लिए निलम्बित नहीं किया जायेगा जब तक कि उस मामले के सम्बन्ध में सुनवायी का अवसर नहीं दिया जाता है।
(3) इस धारा के अधीन डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र के निलम्बन पर प्रमाणन प्राधिकारी उसके बारे में उपभोक्ता को सूचित करेगा ।
38. डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र का प्रतिसंहरण-
प्रमणन प्राधिकारी अपने द्वारा जारी डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र प्रतिसंहृत कर सकेगा-
(क) जहाँ कि उपभोक्ता अथवा उसके द्वारा प्राधिकृत कोई व्यक्ति उसके लिए प्रार्थना करता है।
(ख) उपभोक्ता की मृत्यु पर ।
(ग) फर्म के विघटन अथवा कम्पनी के परिसमापन पर जहाँ कि उपभोक्ता फर्म कम्पनी है।
(2) उपधारा (3) के उपबन्धों के लिए और उपधारा (1) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना प्रमाणन प्राधिकारी डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र जिसे उसने किसी भी समय जारी किया है प्रतिसंहृत कर सकेगा यदि उसकी राय है कि-
(क) डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र में प्रस्तुत तथ्य झूठे हैं अथवा छिपाये गये हैं।
(ख) डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र जारी किये जाने की अपेक्षायें सन्तोष जनक नहीं हैं।
(ग) प्रमाणन प्राधिकारी की व्यक्तिगत कुंजी और सुरक्षित तंत्र में इस ढंग से सहमति हो गयी है कि डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता प्रमाणित होती है।
(घ) उपभोक्ता के दिवालिया घोषित किये जाने पर अथवा उसकी मृत्यु पर जहाँ उपभोक्ता कोई फर्म है अथवा कम्पनी है जिसे कि विघटित या परिसमापित कर दिया गया अथवा अन्यथा समाप्त किये जाने पर ।
(3) डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र तब तक प्रतिसंहत नहीं किया जायेगा जब तक कि उपभोक्ता मामले में सुनवाई का अवसर नहीं दिया जाता है।
(4) इस धारा के अधीन डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र के प्रतिसंहृत किये जाने पर प्रमाणन प्राधिकारी उसके बारे में उपभोक्ता को संसूचित करेगा ।
39. निलम्बन अथवा प्रतिसंहरण की सूचना-
(1) जहाँ धारा 37 या 38 के अधीन डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र निलम्बित या प्रतिसंहृत किया जाता है प्रमाणन प्राधिकारी ऐसे निलम्बन या प्रतिसंहरण की सूचना ऐसी नोटिस के प्रकाशन के लिए डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र में विनिर्दिष्ट कोष में करेगा ।
(2) जहाँ एक से अधिक कोष विनिर्दिष्ट है वहाँ प्रमाणन प्राधिकारी ऐसे सभी कोषों के निलम्बन, पर प्रतिसंहरण के बारे में सूचना देगा।
उपभोक्ता के कर्त्तव्य
40. कुंजी जोड़ा उत्पन्न करना - जहाँ डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र और जिसकी लोक कुंजी और साथ ही साथ उपभोक्ता की व्यक्तिगत कुंजी जो किं डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र में सूचीबद्ध है और उपभोक्ता द्वारा स्वीकार की गयी है 1[तब] उपभोक्ता सुरक्षित प्रक्रिया द्वारा 2 [वह कुंजी] जोड़ा उत्पन्न करेगा ।
41. डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र का प्रतिग्रहण-
(1) उपभोक्ता डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र का प्रतिग्रहीता समझा जायेगा यदि वह इसे प्रकाशित करता हैं अथवा डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र के प्रकाशन के लिए-
(क) एक या अधिक व्यक्तियों को प्राधिकृत करता है ।
(ख) कोष में अथवा ।
किसी ढंग से डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण-पत्र के अपने अनुमोदन को प्रदर्शित करता है ।
(2) डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र स्वीकार करने के पश्चात् उपभोक्ता डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र में अन्तर्विष्ट सूचना पर युक्तियुक्त रूप से विश्वास करता है यह प्रमाणित करता है कि-
(क) उपभोक्ता डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र में सूचीबद्ध व्यक्तिगत कुंजी के साथ लोक कुंजी धारण करता है और उसको धारण करने का हकदार है ।
(ख) उपभोक्ता द्वारा प्रमाणन प्राधिकारी से किये गये सभी प्रतिनिधित्वों और डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र में अन्तर्विष्ट सभी सूचनायें से सुसंगत सभी तथ्य सत्य हैं।
(ग) डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र की सभी सूचनाओं जो कि उपभोक्ता के ज्ञान में है सत्य हैं। ।
42. व्यक्तिगत कुंजी का नियंत्रण - (1) प्रत्येक उपभोक्ता अपने डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र में सूचीबद्ध लोक कुंजी के साथ व्यक्तिगत कुंजी का नियंत्रण प्रतिधारित करने के लिए युक्तियुक्त सावधानी बरतेगा और प्रकटीकरण को रोकने के लिए सभी कदम उठायेगा 3 (***) ।
शास्ति और न्याय निर्णयन
43. कम्प्यूटर, कम्प्यूटर तंत्र की नुकसानी के लिए शास्ति-
यदि कोई व्यक्ति कम्प्यूटर, कम्प्यूटर तंत्र, कम्प्यूटर नेटवर्क के स्वामी या उसके भारसाधक किसी अन्य व्यक्ति अनुमति के बिना -
(क) ऐसे कम्प्यूटर, कम्प्यूटर तंत्र, कम्प्यूटर नेटवर्क में पहुँचता है या पहुँचना सुरक्षित करता है।
(ख) ऐसे कम्प्यूटर, कम्प्यूटर तंत्र, कम्प्यूटर नेटवर्क की सूचनायें, धारित विवरण के सहित कम्प्यूटर के विवरण आधार पर किसी विवरण को निकालता या उसकी नकल करता है या उनका वजन कम करता है ।
(ग) किसी ऐसे कम्प्यूटर, कम्प्यूटर तंत्र, कम्प्यूटर नेटवर्क के कम्प्यूटर वाईरस (Virus) अथवा कम्प्यूटर कन्टमिनेन्ट (Contaminant) से परिचय करता है या परिचय करने का कार्य करता है।
(घ) किसी कम्प्यूटर, कम्प्यूटर तंत्र, कम्प्यूटर नेटवर्क के विवरण, कम्प्यूटर विवरण आधार की नुकसानी करता है या ऐसे कम्प्यूटर, कम्प्यूटर तंत्र, कम्प्यूटर नेटवर्क कार्यक्रम की नुकसानी कारित करता है।
(ङ) किसी कम्प्यूटर, कम्प्यूटर तंत्र, कम्प्यूटर नेटवर्क को तितर-बितर करता है या कारित करता है।
(च) किसी व्यक्ति को जो कि ऐसे कम्प्यूटर, कम्प्यूटर तंत्र, कम्प्यूटर नेटवर्क तक पहुँचने के लिए प्राधिकृत है पहुँचने से इंकार करता है या इन्कारी कारित करता है ।
(छ) इस अधिनियम के उपबन्धों या इसके अधीन बनाये गये नियमों और विनियमों उल्लंघन में किसी व्यक्ति को ऐसे कम्प्यूटर, कम्प्यूटर तंत्र, कम्प्यूटर नेटवर्क तक पहुँचने में सहायता या सुविधा प्रदान करता है ।
(ज) एक व्यक्ति द्वारा ली गई सेवा को दूसरे व्यक्ति के मद में मशीनी छेड़छाड़ करने के द्वारा अथवा किसी कम्प्यूटर अथवा किसी कम्प्यूटर पद्धति को अथवा कम्प्यूटर -नेटवर्क को छल शादित करता है।
तो उसे प्रभावित व्यक्ति को प्रतिकर देना पड़ेगा जो कि एक करोड़ रुपये से अधिक न हो।
स्पष्टीकरण - इस धारा के प्रयोजन के लिए कम्प्यूटर कन्टेनमेन्ट से आशय कम्प्यूटर का कोई भी सेंट जो भी निर्देश पदनामित करता है-
(1) "कम्प्यूटर कन्टामिनेन्ट" से अभिप्रेत है, कम्प्यूटर निदेश का कोई जोड़ा जो कि एसा बनाया गया है।
(क) कि संशोधित कर सके, विनाश कर सके, अभिलिखित कर सके डाटा अथवा प्रोग्राम को भेज सके जो कि एक कम्प्यूटर में अथवा कम्प्यूटर पद्धति अथवा कम्प्यूटर नेटवर्क में अवस्थित हैं ।
(ख) किसी पद्धति से कम्प्यूटर के साधारण कार्य प्रणाली को हड़पना अथवा कम्प्यूटर पद्धति के अथवा कम्प्यूटर नेटवर्क को हड़पना ।
(ii) कम्प्यूटर डाटा बेस से अभिप्रेत है सूचनाओं का ज्ञान, तथ्य संकल्पना या निदेश प्रतिबिम्ब, आडियो वीडियो जो कि तैयार किये जा रहे हैं अथवा तैयार किये जा चुके हैं एक औपचारिक तरीके से अथवा किसी कम्प्यूटर द्वारा निर्मित किये गये हैं अथवा किसी कम्प्यूटर पद्धति द्वारा अथवा कम्प्यूटर नेटवर्क द्वारा और कम्प्यूटर में प्रयुक्त किये जाने के लिए आशयित हैं अथवा कम्प्यूटर पद्धति, अथवा कम्प्यूटर नेटवर्क का प्रतिनिधित्व ।
(iii) कम्प्यूटर वाइरस से अभिप्रेत है कोई कम्प्यूटर निदेश सूचना डाटा अथव प्रोग्राम जो विनाश करता है, नुकसान पहुँचाता है, अपमानित करता है, अथवा कम्प्यूटर की कार्य प्रणाली को गलत तरीके से प्रभावित करता है अथवा अपने आप को किसी अन्य कम्प्यूटर स्त्रोत से सम्मिलित करता है और संचालित करता है जब एक प्रोग्राम डाटा अथवा निदेश को क्रियान्वित किया जाता है अथवा जब कोई अन्य घटना उस कम्प्यूटर स्त्रोत से घटित होती है।
(iv) नुकसानी से अभिप्रेत है विनाश करना, बदलाव करना, समाप्त करना, जोड़ना संशोधित करना अथवा किसी कम्प्यूटर रिसोर्स को किसी भी तरीके से पुनः व्यवस्थित करना।
सूचना वापसी दिये जाने में असफलता के लिए 44 शास्ति-
यदि कोई व्यक्ति जिससे कि इस अधिनियम अथवा किसी नियम अथवा इनके अधीन बनाये गये विनियमों के अधीन अपेक्षा की जाती है कि-
(क) कोई दस्तावेज, वापसी, अथवा रिपोर्ट प्रमाणन प्राधिकारी के कन्ट्रोलर को दे यदि वह ऐसा करने में असफल रहता है तो वह ऐसे उल्लंघन के लिए ऐसी शास्ति जो कि एक लाख पचास हजार रुपये से अधिक न होगी के लिए जिम्मेदार होगा ।
(ख) विनियमों में समय के भीतर वापसी फाइल करेगा अथवा कोई सूचना पुस्तिका या अन्य दस्तावेज देगा यदि विनिर्दिष्ट समय के भीतर वापसी फाइल करने या अन्य चीज़ों के दिये जाने में असफल रहता है तो ऐसी असफलता के लिए ऐसी शास्ति जो कि पाँच हजार रुपये से अधिक न होगी ऐसी असफलता के बने रहने तक प्रत्येक दिन के लिए देगा ।
(ग) बही खातों अथवा स्त्रोतों का प्रतिपादन करेगा यदि उनका प्रतिपादन करने में असफल रहता है तो वह ऐसी सफलता के लिए ऐसी शास्ति जो कि दस हजार रुपये न होगी ऐसी असफलता के बने रहने तक प्रत्येक दिन के लिए देगा ।
45. अवशिष्ट शास्तियाँ - जो कोई किन्हीं नियमों अथवा इस अधिनियम के अधीन बनाये गये विनियमों का उल्लंघन करता है तो ऐसा उल्लंघन जिसके लिए शास्ति पृथक रूप से उपबन्धित नहीं है वह ऐसे उल्लंघन के लिए प्रतिकर जो पच्चीस हजार रुपये से अधिक न होगा के भुगतान के लिए जिम्मेदार होगा ।
46. न्याय निर्णयन की शास्ति इस अध्याय के अधीन न्याय निर्णयन के प्रयोजन के लिए जहाँ कोई व्यक्ति इस अधिनियम के उपबन्धों अथवा इसके किसी नियम, विनियम या उनके अधीन किये गये किसी निर्देश या आदेश का उल्लंघन करता है तो केन्द्रीय सरकार उपधारा (3) के उपबन्धों के लिए ऐसे किसी अधिकारी जिसकी पंक्ति केन्द्रीय सरकार के डाइरेक्टर से कम न होगी अथवा राज्य सरकार के किसी समान अधिकारी जो कि न्याय निर्णयन करने वाला अधिकारी होगा केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित ढंग से जाँच किये जाने के लिए नियुक्त करेगा ।
(2) न्याय निर्णयन करने वाला अधिकारी उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति को मामले के सम्बन्ध में प्रतिनिधित्व करने के लिए युक्तियुक्त अवसर देगा यदि ऐसी पाँच पर वह संतुष्ट है कि उस व्यक्ति ने उल्लंघन किया है तो वह ऐसी शास्ति अधिरोपित कर सकेगा अथवा ऐसा प्रतिकर जिसे वह उस धारा के उपबन्धों के अनुसार उचित समझता हो अधिनिर्णीत करेगा ।
(3) कोई व्यक्ति न्याय निर्णयन करने वाला अधिकारी नियुक्त न किया जायेगा जब तक कि वह सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुभव न रखता हो और केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किये जा सकने वाले न्यायिक अथवा विधिक अनुभव न रखता हो ।
(4) जहाँ एक से अधिक न्याय निर्णयन करने वाले अधिकारी नियुक्त किये जाते हैं केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा ऐसे मामले और स्थान विनिर्दिष्ट कर सकेगी जिसके सम्बन्ध में ऐसे अधिकारी अपनी न्यायिक अधिकारिता का प्रयोग करेंगे।
(5) प्रत्येक न्यायनिर्णयन करने वाला अधिकारी धारा 58 की उपधारा (2) के अधीन साइबर अपीलीय अधिकरण को दी गयी सिविल न्यायालय की शक्तियों से युक्त होगा; और-
(क) इसके समक्ष प्रत्येक कार्यवाही भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धाराओं 193 और 228 के अर्थों में न्यायिक कार्यवाही 228 समझी जायेगी; तथा
(ख) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धाराओं 345, 346 के प्रयोजन के लिए सिविल न्यायालय समझा जायेगा ।
47. न्याय निर्णयन करने वाले अधिकारी द्वारा विचार में ली जाने वाली बातें-
जब इस अध्याय के अधीन प्रतिकर की मात्रा पर न्याय निर्णयन किया जा रहा हो तो वहाँ न्याय निर्णयन करने वाला अधिकारी निम्न बातों पर ध्यान देगा-
(क) अनुसूचित लाभ द्वारा प्राप्त रकम जहाँ परिमाणिक हो तो, निर्धारण व्यतिक्रम के परिणाम के अनुसार किया जायेगा ।
(ख) किसी व्यक्ति को कारित नुकसान की रकम व्यतिक्रम के परिणाम के अनुसार किया जायेगा ।
(ग) व्यतिक्रम की पुनरावृत्तिक प्रकृति ।
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