भारतीय दण्ड संहिता, 1860 में संशोधन
(1) धारा 29 के पश्चात् निम्न धारायें अन्तः स्थापित की जायेंगी -
29. (अ) इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड - शब्द इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड सूचना तकनीकी अधिनियम, 2000 की धारा 2 के उपधारा (1) के खण्ड (7) में समनुदेशित अर्थों में होगा ।
2. धारा 167 में शब्द "ऐसे लोक सेवक” से किसी दस्तावेज का तैयार किया जाना या भाषान्तरण उस दस्तावेज का बनाया जाना तथा भाषान्तरण आरोपित होगा शब्द "ऐसा
लोक सेवक किसी दस्तावेज अथवा इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख का बनाया जाना, तैयार किया जाना अथवा उस अभिलेख अथवा इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख का भाषान्तरण आरोपित है।
3. धारा 172 में शब्द न्यायालय में किसी दस्तावेज का पेश किए जाने के लिए शब्द न्यायालय में किसी दस्तावेज अथवा इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड का पेश किया जाना प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
4. धारा 173 में शब्द न्यायालय में किसी दस्तावेज को पेश करने के लिए शब्द न्यायालय में किसी दस्तावेज अथवा इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड के पेश करने से है ।
5. धारा 175 में शब्द दस्तावेज के लिए सभी स्थानों पर शब्द दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
6. धारा 192 में शब्द "किसी पुस्तिका अथवा रिकार्ड में मिथ्या प्रविष्टि करना अथव मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट करने वाले दस्तावेज का बनाने के लिए शब्द किसी पुस्तिका अभिलेख अथवा इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड में मिथ्या प्रविष्टि करना अथवा मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट करने वाले किसी दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड को बनाना प्रतिस्थापित किया जायेगा ।”
7. धारा 204 में शब्द " दस्तावेज” के लिए सभी स्थानों पर जहाँ " दस्तावेज” अथवा "इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड" प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
8. धारा 463 में शब्द "जो कोई मिथ्या दस्तावेज को या उसके किसी भाग को नुक्सान पर क्षति करने के आशय से बनाता है" के लिए शब्द "जो कोई मिथ्या दस्तावेज अथवा मिथ्या इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड अथवा दस्तावेज के या इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड के किसी भाग को क्षति नुकसान कारित करने के आशय से बनाता है" प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
8. धारा 464 में—
(क) उस अंश के लिए जो कि निम्न शब्दों से प्रारम्भ होते हैं, “उस व्यक्ति के बारे में यह कहा जाता है कि वह व्यक्ति मिथ्या दस्तावेज रखता है” और निम्न शब्दों से समाप्त होता है " प्रवंचना के कारण जो उससे की गयी, जानता नहीं है, कि उस दस्तावेज का सार क्या है अथवा बदलाव की प्रवृत्ति क्या है 92 के स्थान पर निम्नलिखित को प्रतिस्थापित किया जायेगा-
उस व्यक्ति के बारे में कहा जाता है कि वह व्यक्ति मिथ्या दस्तावेज अथवा मिथ्या इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड बनाता है—
पहला - जो बेइमानी से या कपटपूर्वक-
(क) दस्तावेज अथवा दस्तावेज के किसी भाग को रचित, हस्ताक्षरित, मुद्रांकित अथव निष्पादित करता है;
(ख) इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड अथवा इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड के किसी भाग को बनाता या • पारेषित करता है;
(ग) किसी इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड पर अँगूठे के हस्ताक्षर करता है;
(घ) दस्तावेज या अँगूठे के हस्ताक्षर की प्रमाणिकता के लिए दस्तावेज का द्योतन करने वाला कोई चिन्ह लगाता है;
कि यह विश्वास किया जायेक कि ऐसी दस्तावेज या दस्तावेज का भाग, इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड, की रचना, हस्ताक्षर, मुद्राकरण या निष्पादन पारेषण ऐसे व्यक्ति द्वारा या ऐसे व्यक्ति के प्राधिकार द्वारा किया गया था जिसके द्वारा या जिसके प्राधिकार के द्वारा उसकी रचना हस्ताक्षरण मुद्राकरण. या निष्पादन होने की बात वह जानता था ।
दूसरा- जो किसी दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड के किसी तात्विक भाग परिवर्तन उसके द्वारा या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा चाहे ऐसा व्यक्ति परिवर्तन के समय जीवित हो या नहीं उस दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड के रचित निष्पादित किये जाने के पश्चात् उसे रद्द करने के द्वारा या अन्यथा विधिपूर्वक प्राधिकार के बिना बेइमानी या कपट पूर्वक करता है; अथवा
तीसरा - जो किसी व्यक्ति द्वारा जानते हुए कि ऐसा व्यक्ति किसी दस्तावेज अथवा किसी इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड की विषय वस्तु को परिवर्तन के रूप को चित्रविकृत्ति या मत्ता की हालत में होने के कारण जान नहीं सकता या उस प्रवंचता के कारण जो उससे की गयी है जानता नहीं उस दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड का बेइमानी से या कपटपूर्वक हस्ताक्षर मुद्रांकित निष्पादित या परिवर्तित किया जाना कारित करता है।
(ब) स्पष्टीकरण 2 के पश्चात् निम्न स्पष्टीकरण अन्तः स्थापित किये जायेंगे ।
स्पष्टीकरण - इस धारा के प्रयोजन के लिए अभिव्यक्ति "अँगूठे का निशान लगाना, सूचना तकनीक अधिनियम, 2000 की धारा 2 की उपधारा (1) के खण्ड (घ) के अर्थों में समनुदेशित होगा ।
10. धारा 466 में-
(क) शब्द 'जो कोई किसी दस्तावेज की कूट रचना" के स्थान पर शब्द "जो कोई किसी दस्तावेज या किसी इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड की कूटरचना", प्रतिस्थापित किया जायेगा;
(ख) अन्त में निम्न स्पष्टीकरण अन्तः स्थापित किये जायेंगे ।
स्पष्टीकरण - इस धारा के प्रयोजन के लिए “रजिस्टर" किसी सूची, विषय वस्तु अथवा सूचना तकनीक अधिनियम, 2000 की धारा 2 की उपधारा की (1) के खण्ड (द) के रूप में परिभाषित इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में वर्णित प्रविष्टियों को सम्मिलित करता है ।
11. धारा 468 में - शब्द "दस्तावेज" की कूट रचना के स्थान पर शब्द " दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड" की कूट रचना प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
12. धारा 469 में - शब्द "इस आशय से दस्तावेज” की कूट रचना के स्थान पर शब्द "इस आशय से दस्तावेज अथवा इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड" की कूट रचना प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
13. धारा 470 में - शब्द " दस्तावेज" सभी स्थानों पर जहाँ भी यह प्रयुक्त हुआ हैं के स्थान पर शब्द " दस्तावेज अथवा इलेक्ट्रॉनिक" रिकार्ड प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
14. धारा 471 में - शब्द " दस्तावेज" जहाँ भी प्रयुक्त है के स्थान पर शब्द " दस्तावेज अथवा इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड" प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
15. धारा 474 में - शब्द "जो कोई किसी दस्तावेज को अपने कब्जे में रखता है" से शुरु होने वाले भाग और शब्द “यदि दस्तावेज इस संहिता की धारा 466 में वर्णित विस्तारों में से एक से समाप्त होने वाले भाग के लिए निम्न शब्द-
“जो कोई किसी दस्तावेज अथवा इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड को उसे कूट रचित यह जानते हुए और आशय रखते हुए कि यह कपटपूर्वक या बेइमानी से असली के रूप में उपयोग में लायी जायेगी अपने कब्जे में रखेगा यदि वह दस्तावेज अथवा इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड इस संहिता की धारा 466 में वर्णित प्रकारों में से एक है" प्रतिस्थापित किया जायेगा।
16. धारा 467 में शब्द "किसी दस्तावेज" के लिए शब्द "कोई दस्तावेज यां इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड” प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
17. धारा 477 अ में— शब्दों "पुस्तिका कागज, लिखित सभी स्थानों जहाँ भी वे प्रयुक्त हो के लिए शब्द "पुस्तिका, इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड कागज, लिखित" को प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
अनुसूची II (धारा 92 देखें)
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 में संशोधन
1. धारा 3 में- (क) साक्ष्य की परिभाषा में शब्दों "न्यायालय के लिए सभी दस्तावेजों का पेश किया • जाना" के लिए शब्द “न्यायालय के निरीक्षण के लिए इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड सहित सभी - दस्तावेजों का पेश किया जाना" प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
(ख) “भारत” की परिभाषा के वाद निम्न को अन्तः स्थापित किया जायेगा—-
अभिव्यक्तियों “प्रमाणन प्राधिकारी" अँगूठे के हस्ताक्षर का प्रमाणपत्र, इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप, इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड, सूचना, इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड की सुरक्षा अँगूठे के हस्ताक्षर की सुरक्षा और उपभोक्ता को सूचना तकनीकी अधिनियम, 2000 में समनुदेशित अर्थों में रखा जायेगा ।
2. धारा 17 में— शब्दों "मौखिक अथवा दस्तावेजी" के लिए शब्दों, "मौखिक, दस्तावेजी अथवा इलेक्ट्रॉनिक फार्म" को प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
3. धारा 22 के पश्चात् निम्न धारा अन्तः स्थापित की जायेगी—
22. (अ) इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड की अन्तर्वस्तुओं मौखिक स्वीकृतियाँ सुसंगत हो — इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड की अन्तर्वस्तुओं की मौखिक स्वीकृतियाँ तक तक सुसंगत नहीं होती हैं जब तक कि पेश किये गये इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड की असलियत प्रश्नगत न हो।
4. धारा 34 में - शब्दों "खाता पुस्तिका में की प्रविष्टियों" के लिए शब्दों "इलेक्ट्रॉनिक फार्म में की अन्तर्विष्टियों के सहित खाता पुस्तिका की प्रविष्टियों" को प्रतिस्थापित किया जायेगा।
5. धारा 35 में - शब्द “ अभिलेख" के लिए सभी स्थानों पर जहाँ पर प्रयुक्त हैं के लिए " अभिलेख या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
6. धारा 39 के पश्चात् निम्न धारा प्रतिस्थापित की जायेगी-
कौन साक्ष्य दिया जायेगा जब वार्तालाप 34 दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख, पुस्तिका अथवा पत्रों की आवली अथवा कागजातों का स्वरूप कथन के रूप में हो - जब किसी कथन जिसका साक्ष्य दिया जाता है। कथन अथवा वार्तालाप का विस्तृत स्वरूप हो अथवा अलग-अलग दस्तावेज का भाग हो अथवा इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड के भाग में अन्तर्विष्ट हैं अथवा, पत्रों या कागजातों की आवली का भाग हो तब इस प्रकार दिया गया साक्ष्य, कथन, वार्तालाप दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड, पुस्तिका अथवा पत्रों की आवली अथवा कागजात जिन्हें न्यायालय उस विशिष्ट मामले की प्रकृति और कथन का प्रभाव और कथन का प्रभाव .. और परिस्थितियाँ जिनमें ये किये गये को समझने के लिए आवश्यक समझता हैं में किये गये कथन से अधिक नहीं हैं।
7. धारा 47 के पश्चात् निम्न धारा अन्तः स्थापित की जायेगी
47. (अ) डिजिटल हस्ताक्षर के बारे में राय कब सुसंगत हैं-जब न्यायालय किसी व्यक्ति के डिजिटल हस्ताक्षर के बारे में राय बनाना चाहता है डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र जारी करने वाले प्रमाणन प्राधिकारी की रायें सुसंगत तथ्य हैं।
8. धारा 59 में - शब्दों “दस्तावेजों की अन्तर्वस्तुयें" के लिए शब्दों “दस्तावेजों या इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड की अन्तर्वस्तुओं" को प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
9. धारा 65 के पश्चात् निम्न को अन्तः स्थापित किया जायेगा-
65. (अ) इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख से सम्बन्धित साक्ष्य के लिए विशेष उपबन्ध - इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की अन्तर्वस्तुयें धारा 65-ब, के उपबन्धों के अनुसार साबित की जा सकेंगी।
65. (ब) इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की ग्राह्यता - (1) इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख में अन्तर्विष्ट कोई सूचना जो कि कागज पर मुद्रित, अभिलिखित है, आप्टिकल की प्रतियाँ अथवा ( एतस्मिनपश्चात् कम्प्यूटर आउटपुट के रूप में निर्दिष्ट) कम्प्यूटर द्वारा पेश मैग्नेटिक मीडिया हों भी दस्तावेज समझे जायेंगे यदि इस धारा में अन्तर्विष्ट शर्तें सूचना के सम्बन्ध में सन्तोषजनक हैं और कम्प्यूटर प्रश्नगत है तो ये अतिरिक्त सबूत या मूल के पेश किये बिना ही मूल की अन्तर्वस्तु अथवा उसमें कथित तथ्य जिनका प्रत्यक्ष साक्ष्य ग्राह्य होगा किसी कार्यवाही में ग्राह्य होंगे।
(2) कम्प्यूटर आउटपुट के सम्बन्ध में उपधारा (1) में निर्दिष्ट शर्तें निम्नलिखित होंगी
(क) उस अवधि के दौरान जब कम्प्यूटर नियमित रूप से उपयोग में लाया गया था कम्प्यूटर द्वारा सूचना अन्तर्विष्ट करने वाला पेश किया गया कम्प्यूटर आउटपुट रखा जायेगा अथवा उस अवधि के दौरान कम्प्यूटर के उपयोग पर विधिपूर्ण प्राधिकार रखने वाले व्यक्ति द्वारा नियमित रूप से की गयी कार्यवाहियों के प्रयोजन के लिए सूचना की प्रक्रिया होगी;
(ख) कथित अवधि के दौरान सूचना के वर्ग को इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख में अथवा कथित कार्यवाहियों के सामान्य अनुक्रम में कम्प्यूटर द्वारा नियमित रूप से अन्तर्विष्ट की गयी सूचना के रूप में अन्तर्विष्ट होती है;
(ग) कथित अवधि जिसके दौरान कम्प्यूटर उचित तरीके से संचालित किया गया था तात्विक भाग अथवा यदि ऐसा नहीं है तो तब किसी अवधि के सम्बन्ध में जब यह उचित तरीके से संचालित नहीं किया गया था अथवा उस अवधि के किसी भाग में संक्रिया से परे था इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड अथवा अन्तर्वस्तु की शुद्धता के रूप में प्रभावी नहीं था ।
(घ) इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड में अन्तर्विष्ट सूचना पुनः पेश की जाती है अथवा कथित कार्यवाहियों के सामान्य अनुक्रम में कम्प्यूटर में फेड ऐसी सूचना का स्वरूप होती है।
(3) जहाँ किसी अवधि में संचयन की कार्यवाही अथवा किसी कार्यवाही के प्रयोजन के लिए दी गयी सूचना उपधारा (2) के खण्ड (क) में अन्तर्विष्ट नियमित कार्यवाहियाँ कम्प्यूटर द्वारा नियमित रूप से पालन की गयी थी चाहे-
(क) उप सम्पूर्ण अवधि में कम्प्यूटर के संचालन के संयोग द्वारा; अथवा
(ख) उस सम्पूर्ण अवधि में विभिन्न कम्प्यूटरों के संचालन के क्रम में; अथवा
(ग) उस अवधि में कम्प्यूटर के विभिन्न संयोगों; अथवा
(घ) उस अवधि के दौरान पश्चात्वर्ती संक्रिया अन्तर्विष्ट करने वाले किसी ढंग जो कि एक या अधिक कम्प्यूटरों के क्रम अथवा एक या अधिक कम्प्यूटरों के संयोग के क्रम में हों, उस अवधि के दौरान प्रयुक्त सभी कम्प्यूटर इस धारा के प्रयोजन के लिए एकल कम्प्यूटर गठित करने वाले के रूप व्यवहृत किये जायेंगे और इस धारा के संदर्भ में कम्प्यूटरों.. को तद्नुसार व्याख्या की जायेगी।
(4) किसी कार्यवाही में जहाँ इस धारा के आधार पर साक्ष्य में किसी कथन का दिया जाना इच्छित है निम्न चीजों को करने वाला कोई प्रमाण पत्र -
(क) कथन को अन्तर्विष्ट करने वाला इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख और जिसमें यह पेश किया गया था उसे वर्णित करने वाले ढंग के प्रमाणन;
(ख) इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड के पेश किये जाने में अन्तर्गस्त युक्ति की ऐसी विशिष्टियाँ देमा जो यह दर्शित करने के प्रयोजन के लिए कि इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड कम्प्यूटर द्वारा पेश किया गया था के लिए पर्याप्त हो सकेंगी;
(ग) किसी मामले जिनकी शर्तें उपधारा (2) में वर्णित होंगी और सुसंगत युक्ति की संक्रिया के सम्बन्ध में युक्तियुक्त पदीय स्थित धारण करने वाले व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित होना तात्पर्यित होंगी अथवा सुसंगत कार्यवाहियाँ (जो कि समुचित) होंगी प्रमाणपत्र में कथित मामले के सम्बन्ध में साक्ष्य होंगी और इस उपधारा के प्रयोजन के लिए इसे करने वाले व्यक्ति द्वारा मार्मले के कथन के लिए अच्छे ज्ञान और विश्वास के लिए पर्याप्त होगा ।
( 5 ) इस धारा के प्रयोजन के लिए-
(क) सूचना कम्प्यूटर को दिये जाने के पश्चात् ली जायेगी यदि यह उचित स्वरूप में दी गयी है और यह उचित स्वरूप में दी गयी है और चाहे यह प्रत्यक्ष रूप से (मानव हस्तक्षेप के सहित या रहित) उचित उपस्कर द्वारा दी गयी है;
(ख) किसी पदीय कार्यवाहियों के अनुक्रम में यदि सूचना कम्प्यूटर द्वारा की उन कार्यवाहियों के अनुक्रम में भण्डारित या धारित करने के प्रयोजन से दी जाती है और उन कार्यवाहियों से भिन्न क्रियाशील की जाती है तो यदि वह सूचना कम्प्यूटर को सम्यक् रूप में आपूर्ति की गयी है तो वह उन कार्यवाहियों के अनुक्रम में आपूर्ति की गयी समझी जायेगी;
(ग) कम्प्यूटर आउटपुट कम्प्यूटर द्वारा किया जायेगा चाहे यह इसके द्वारा प्रत्यक्ष अथवा (मानव हस्तक्षेप के सहित या रहित) समुचित उपस्कर द्वारा दी गयी हो ।
स्पष्टीकरण - इस धारा के प्रयोजन के लिए सूचना से सम्बन्धित कोई निर्देश इस निर्देश के सम्बन्धित अन्य सूचना से क्रियाशील होगी।
10. धारा 67 के पश्चात् निम्न धारा अन्तः स्थापित की जायेगी -
67. (अ) डिजिटल हस्ताक्षर का सबूत - सुरक्षित डिजिटल हस्ताक्षर के सिवाय यदि किसी उपभोक्ता का डिजिटल हस्ताक्षर इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख पर किया जाता है तो तथ्य यह है कि ऐसा डिजिटल हस्ताक्षर उपभोक्ता का डिजिटल हस्ताक्षर है आवश्यक रूप से साबित किया जायेगा ।
11. धारा 73 के पश्चात् निम्न धारा अन्तः स्थापित की जायेगी-
(अ) डिजिटल हस्ताक्षर के सत्यापन का सबूत - यह अभिनिश्चित करने के क्रम में कि डिजिटल हस्ताक्षर उस व्यक्ति के हैं जिसके द्वारा किया जाना तात्पर्यित है तो न्यायालय निदेश कर सकेगी कि—
(क) वह व्यक्ति अथवा कन्ट्रोलर अथवा प्रमाणन प्राधिकारी डिजिटल हस्ताक्षर पेश करें;
(ख) कोई अन्य व्यक्ति डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र में सूचीबद्ध लोक कुंजी के लिए आवेदन करेगा और उस व्यक्ति द्वारा तात्पर्यित डिजिटल हस्ताक्षर को सत्यापित करेगा ।
स्पष्टीकरण—इस धारा के प्रयोजन के लिए कन्ट्रोलर से आशय सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त कन्ट्रोलर 17 से है।
12. धारा 81 के पश्चात् निम्न धारा अन्तः स्थापित की जायेगी-
81. (अ) इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में गजट के बारे में उपधारणा -- न्यायालय हर ऐसी दस्तावेज का असली होना उपधारित करेगा जिसका शासकीय गजट या इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड जिसका किसी व्यक्ति द्वारा किसी विधि के निदेश में रखा जाना तात्पर्यित है यदि ऐसा इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड विधि द्वारा अपेक्षित पश्चात्वर्ती स्वरूप में रखा जाता है और उचित - अभिरक्षा से पेश किया जाता है
13. धारा 85 के पश्चात् निम्न धारा अन्तः स्थापित की जायेगी-
85. (अ) इलेक्ट्रॉनिक करारों के बारे में उपधारणा-
न्यायालय उपधारित कर सकेगा कि प्रत्येक इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख पक्षकारों को डिजिटल हस्ताक्षर अन्तर्विष्ट करने वाले करार के रूप में तात्पर्यित है जो पक्षकारों के हस्ताक्षर किये जाने के द्वारा किया गया था ।
85. (ब) इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों और डिजिटल हस्ताक्षरों के बारे में उपधारणा-
(1) सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख में अन्तग्रस्त किसी कार्यवाही के सम्बन्ध में जब तक प्रतिकूल साबित नहीं किया जाता न्यायालय उपधारित करेगा कि सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख विशिष्ट समय बिन्दु जो कि सुरक्षित स्तर से सम्बन्धित है तक परिवर्तित नहीं किया जा सकता है।
(2) डिजिटल हस्ताक्षर अन्तग्रस्त करने वाली किसी कार्यवाही में जब तक प्रतिकूल साबित नहीं किया जाता न्यायालय उपधारित करेगी कि -
(क) उपभोक्ता द्वारा सुरक्षित डिजिटल हस्ताक्षर इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों के साबित करने और हस्ताक्षर करने के प्रयोजन से किया जाता है,
(ख) सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख और सुरक्षित डिजिटल हस्ताक्षर के सिवाय इस धारा की कोई भी बात इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख अथवा डिजिटल हस्ताक्षर की विश्वसनीयता और प्रमाणिकता से सम्बन्धित नहीं है।
85. (स) डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र के बारे में उपधारणा - जब तक कि प्रतिकूल साबित नहीं किया जाता न्यायालय यह उपधारित करेगा कि उपभोक्ता की सूचना के रूप में विनिर्दिष्ट सूचना जो कि सत्यापित नहीं है के सिवाय डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र में सूचीबद्ध सूचना सही है यदि प्रमाण पत्र उपभोक्ता द्वारा स्वीकार किया गया था ।
14. धारा 88 के पश्चात् निम्न धारा अन्तः स्थापित की जायेगी-
88. (अ) इलेक्ट्रॉनिक सन्देश के रूप में उपधारणा- न्यायालय यह उपधारित कर सकेगा कि उत्पादक द्वारा इलेक्ट्रॉनिक मेलसरवेयर के माध्यम से सम्बोधिती जिसे सन्देश पारेषण के लिए उसके कम्प्यूटर में फेड सन्देश के समवर्ती सम्बोधिती होना तात्पर्यित है इलेक्ट्रॉनिक सन्देश द्वारा भेजा गया था लेकिन न्यायालय उस व्यक्ति के बारे में जिसे ऐसा सन्देश भेजा गया था कोई उपधारणा नहीं करेगा।
स्पष्टीकरण - इस धारा के प्रयोजन के लिए अभिव्यक्ति "सम्बोधिती" और "उत्पादक' " सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 2 की उपधारा (1) के खण्ड (b) और (Za) में समनुदेशन के सम्बन्ध में समान अर्थ रखते हैं ।
15. धारा 90 के पश्चात् निम्न धारा अन्तः स्थापित की जायेगी -
90. (अ) पाँच वर्ष पुराने दस्तावेज के रूप में उपधारणा- जहाँ कोई इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख पाँच वर्ष पुराने दस्तावेज के रूप में साबित और तात्पर्पित है, और किसी की अभिरक्षा से पेश किया जाता है, जिसे न्यायालय विशिष्ट मामले में उचित विचारित करता है तो न्यायालय उपधारित कर सेगा कि डिजिटल हस्ताक्षर जो कि किसी विशिष्ट को डिजिटल हस्ताक्षर के रूप में तात्पयित है वह उसके या उसके या उसके द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा किया गया था ।
स्पष्टीकरण- इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख उचित अभिरक्षा में कहा जाता है यदि वे ऐसे सथान और ऐसे व्यक्ति जिसके वे हैं की देख-रेख में है। लेकिन कोई अभिरक्षा अनुचित नहीं है यदि इसकी उत्पत्ति वैध साबित है अथवा मामले की विशिष्ट परिस्थितियों में ऐसी उत्पत्ति सम्भाव्य है;
यह स्पष्टीकरण धारा 81 क को भी लागू होता है ।
16. धारा 131 के लिए निम्न धारा अन्तः स्थापित की जायेगी
131. उन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों का पेश किया जाना जिन्हें कोई दूसरा व्यक्ति जिन पर उसका कब्जा है पेश करने से इन्कार कर सकता था— कोई भी व्यक्ति अपने कब्जे ऐसे दस्तावेज अथवा इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख को पेश करने के लिए जिनको पेश करने से कोई अन्य व्यक्ति से यदि उसके कब्जे में होती इंकार करने का हकदार होता विवश नहीं किया जायेगा जब तक कि ऐसा अंतिम वर्णित व्यक्ति उनके पेश कारण की सम्मति नहीं देता ।
अनुसूची III (धारा 93 देखें)
बैंकर्स पुस्तिका साक्ष्य अधिनियम, 1891 में संशोधन
1. धारा 2 में
(क) खण्ड 3 के लिए निम्न खण्ड अन्तः स्थापित किया जायेगा -
(3) "बैंकर्स पुस्तिका " खाता बही, डे पुस्तिका, कैश पुस्तिका, खाता पुस्तिका और अन्य सभी पुस्तिकाओं जो कि बैंक के कारबार के सामान्य अनुक्रम में प्रयुक्त की जाती है चाहे वे लिखित रूप में रखी गयी हो चाहे वे फ्लोपी में भण्डारित विवरण के मुद्रण के रूप में हो, या डिस्क, टेप अथवा इलेक्ट्रॉनिक भण्डारित किसी अन्य रूप में हो को सम्मिलित करता है;
(ख) खण्ड 8 के लिए निम्न खण्ड प्रतिस्थापित किया जायेगा- “
(8) लिखित रूप में वर्णित है"
(क) ऐसी पुसतिकाओं में किसी प्रविष्टि प्रति जो ऐसी प्रति के याद पर लिखित प्रमाण पत्र के साथ है ऐसी प्रविष्टि की सत्य प्रतिलिपि है यह कि ऐसी प्रविष्टि बैंक की सामान्य पुस्तिकाओं में से एक में अन्तर्विष्ट है और कारबार के सामान्य अनुक्रम में की गयी है और कि ऐसी पुस्तिका बैंक के कब्जे में है और जहाँ कि प्रति मेकेनिकल अथवा अन्य प्रक्रियाओं द्वारा जो स्वयं ही प्रति की शुद्धता सुनिश्चित करती है प्राप्त की गयी है, उस प्रभाव का अग्रिम प्रमाण पत्र है लेकिन जहाँ कि पुस्तिका जिससे ऐसी प्रति तैयारी की गयी थी ऐसी प्रति के तैयार किये जाने के पश्चात् बैंक के कारबार के कारबार के सामान्य अनुक्रम में नष्ट हो गयी है उस प्रभाव का अग्रिम प्रमाण पत्र है जो कि दिनांकित है और बैंक के मुख्य खाता पालक अथवा प्रबन्धक द्वारा अपने नाम से और पदीय रूप में हस्ताक्षरित किया गया है,
(ख) फ्लोपी डिस्क, टेप अथवा किसी अन्य इलेक्ट्रोमैग्निटिक डाटा में भण्ड 'युक्ति से मुद्रित है ऐसी प्रविष्टि का मुद्रण तथा ऐसे प्रिन्ट की प्रति जो धारा 2- अ के उपबन्धों के अनुसार प्रमाणित ऐसे कथन के साथ है।
2. धारा 2 के पश्चात् निम्न को अन्तः स्थापित किया जायेगा-
2. (अ) मुद्रण की शर्तें - प्रविष्टि का मुद्रण अथवा धारा 2 की उपधारा 8 में निर्दिष्ट मुद्रण की प्रति निम्न के साथ होंगी-
(क) इस प्रभाव के प्रमाण पत्र के साथ कि यह ऐसी प्रविष्टि का मुद्रण है अथवा मुख्य खाता पालक अथवा शाखा प्रबन्धक द्वारा ऐसे मुद्रण की प्रति है;
(ख) कम्प्यूटर तंत्र भारसाधक द्वारा कम्प्यूटर तंत्र के संक्षिप्त विवरण अन्तर्विष्ट करने वाले प्रमाण पत्र और विशिष्टियों-
(क) कम्प्यूटर द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए कि आँकड़े ग्रहण किये गये हों सुरक्षा अंगीकृत की गयी है अथवा अन्य संक्रियाओं का पालन केवल प्राधिकृत व्यक्तियों द्वारा किया गया है ।
(ख) आँकड़े का अप्राधिकृत परिवर्तन रोकने के लिए सुरक्षा अंगीकार की गयी है;
(ग) आँकड़े में कम बद्धता की असफलता अथवा अन्य कारणों से जो हानि हो गयी थी उनके पुनः प्राप्ति के लिए सुरक्षा;
(घ) ढंग जिसमें आँकड़े;
(ङ) यह सुनिश्चित करने के क्रम में सत्यापन का तरीका कि आँकड़े शुद्ध रूप ऐसे माध्यम हटाये गये;
(च) ऐसे भण्डारित आँकड़े की पहचान का ढंग;
(छ) ऐसी युक्ति के भण्डारण और अभिरक्षा के लिए व्यवस्थापन;
(ज) तंत्र के साथ छेड़छाड़ के दोष को निवारित करने की सुरक्षा;
(झ) कोई अन्य चीजें जो कि तंत्र की यथार्थता और विश्वसनीयता के लिए सत्य प्रमाणित होगी;
(ग) कम्प्यूटर तंत्र के भारसाधक व्यक्ति अग्रिम प्रमाण पत्र इस प्रभाव के लिए कि उसके अच्छे ज्ञान और विश्वास के साथ, ऐसा कम्प्यूटर सिस्टम तात्विक समय पर उचित तरीके से क्रियाशील किया गया उसने सभी सुसंगत आँकड़े उपलब्ध कराये और प्रश्नगत प्रिन्ट को सही ढंग से प्रस्तुत किया अथवा सुसंगत आँकड़े से समुचित तरीके से चलाया गया।
अनुसूची IV (धारा 94 देखें)
रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया अधिनियम, 1934 में संशोधन
रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया, अधिनियम, 1934 की धारा 58 की उपधारा (2) में खण्ड (p) के पश्चात् निम्न् अन्तः स्थापित किया जायेगा—
"(pp) निधि का विनियम इलेक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से बैंक से बैंक को और धारा 45 (1) के खण्ड (c) निर्दिष्ट अन्य वित्तीय संस्थाओं को अभिलिखित ऐसी शर्तों पर जिस पर बैंक या अन्य वित्तीय संस्थायें निधि के ऐसे स्थानान्तर में भाग लेंगी। ऐसी निधि के स्थानान्तरण का ढंग और अधिकार और दायित्व ऐसे निधि के स्थानान्तरण में होगा।”
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