रविवार, 25 जून 2023

भारतीय तार अधिनियम, 1885 (The Indian Telegraph Act, 1885)

भारतीय तार अधिनियम, 1885 
(The Indian Telegraph Act, 1885)

(अधिनियम सं० 13 सन् 1885) (22 जुलाई, 1885)

भाग एक : प्रारम्भिक

1. संक्षिप्त नाम, स्थानीय विस्तार और प्रारम्भ - (1) यह अधिनियम भार अधिनियम, 1885 कहा जा सकेगा। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है । (3) यह अक्टूबर, 1885 के प्रथम दिन से प्रवृत्त होगा ।

2. निरसित ।

3. परिभाषाएँ – इस अधिनियम में, जब तक कि विषय या सन्दर्भ में कोई बात विरुद्ध न हो—

[(i)] “निधि” धारा 9-क की उपधारा (2) के अधीन स्थापित की गयी सर्वव्यापी सेवा बाध्यता से अभिप्रेत है । 

[(1) क क] "तार” से संकेतों, सिग्नलों, लिखतों, बिम्बो, ध्वनियों या किसी प्रकार की अधिसूचना, तार, दृश्य या अन्य विद्युत चुम्बकीय लोपों, रेडियो तरंगों या हर्टजियन तरंगों, रासायनिक विद्युत चुम्बकीय या विद्युत साधन द्वारा पारेषण या प्राप्त करने के लिए प्रयोग को समर्थ या प्रयुक्त कोई साधित्र, उपकरण, सामग्री या यन्त्र अभिप्रेत है ।

स्पष्टीकरण - "रेडियो तरंगों " या "हर्टडियन तरंगों" से 300 गाईना साइकिल्स प्रति सेकेण्ड से कम आवृत्तियों की कृत्रिम मार्गदर्शन के अन्तरिक्ष में प्रचारित विद्युत चुम्बकीय किरणें अभिप्रेत है।

(2) “तार अधिकारी” से केन्द्रीय सरकार या इस अधिनियम द्वारा अनुज्ञप्ति किसी व्यक्ति द्वारा संस्थापित, अनुरक्षित या कार्यकारित तार के संबंध में नियोजित कोई व्यक्ति, चाहे स्थाई या अस्थाई अभिप्रेत है । 

(3) “संदेश” से तार भेजा गया या तार अधिकारी को तार द्वारा भेजे जाने को या परिदान को दिया गया कोई पत्रादि अभिप्रेत है ।

(4) "तार लाइन" से तार के प्रयोजन के लिए तार या तारें, उसमें जुड़ी हुई केसिंग, विलेपित ट्यूब और पाइप साधित्र या यन्त्र अभिप्रेत है 

(5) " खम्भा" से कोई तार लाइन के आलम्बन या कुछ काल तक रोके रखने के लिए कोई खम्भा, पोल, स्टैन्डर्ड स्टे, थूनी या भूमि ऊपर कोई प्रयुक्ति अभिप्रेत है । 

(6) "तार प्राधिकारी” से डाक और तार के महानिदेशक अभिप्रेत है और उसमें अधिनियम के अधीन तार प्राधिकारी के किसी या सभी कृत्यों को सम्पन्न करने को, उसके द्वारा सशक्त, कोई अधिकारी भी सम्मिलित हैं। 

भाग दो : सरकार की शक्तियाँ और विशेषाधिकार

4. तारों के संबंध में अनन्य विशेषाधिकार और अनुज्ञप्तियों मन्जूर करने की शक्ति- 

(1) भारत के भीतर,तारों के स्थान, अनुरक्षण और कार्यकरण का विशेषाधिकार होगा परन्तु केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के अधीन बनाये गये और शासकीय राजपत्र में बनाये गये नियमों द्वारा, ऐसे निर्बन्धनों और शर्तों के अध्यधीन जैसी वह उचित समझे-

(क) राज्यक्षेत्रीय समुद्र के भीतर पोतों पर या भारत के भीतर या ऊपर वायुयान पर या भारतीय राज्यक्षेत्रीय समुद्र पर वायुयानों पर बेतार तार, और

(ख) बेतार तारों के अतिरिक्त, भारत के किसी भाग में तारों का स्थापन, अनुकरण और कार्यकरण करना अनुज्ञात कर सकेगी।

(2) केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उपधारा (1) के प्रथम परन्तुक के अधीन कोई या सभी शक्तियाँ तार प्राधिकारी को प्रत्यायोजित कर सकेगी। 

तार प्राधिकारी द्वारा इस प्रकार प्रत्यायोजित शक्तियों का प्रयोग ऐसे निर्बन्धनों और शर्तों के अधीन होगा, जैसा केन्द्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा अधिरोपित करना उचित समझे । 

(1-क) “सर्वव्यापी सेवा बाध्यता" दिया जा सकने योग्य एवं युक्तियुक्त मूल्य के ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों की आधारभूत टेलीग्राफ सेवाओं तक पहुँच मार्ग का उपबन्ध करने की बाध्यता से अभिप्रेत है ।)

1. (स्पष्टीकरण - इस उपधारा के अधीन एक लाइसेंस की मंजूरी के लिए किये गये संदाय के अन्तर्गत सर्वव्यापी सेवा बाध्यता के फलस्वरूप ऐसी रकम आयेगी जिसका अवधारण टेलीकाम एथारिटी आफ इण्डिया एक्ट 1997 (24 आफ 1997) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित किये गये टेलीकाम एथारिटी आफ इण्डिया द्वारा इस निमित्त की गयी सिफारिश पर विचार करने के पश्चात केन्द्रीय सरकार द्वारा किया जा सके ।)

5. अनुज्ञप्ति तारों का कब्जा लेने और संदेशों को अन्तर्रूद्ध करने की सरकार की शक्ति लोक सुरक्षा के हित में या लोक आपात् की घटना होने पर केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या केन्द्र या राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से प्राधिकृत अन्य अधिकारी, यदि वह समाधान हो जाये कि वैसा करना समीचीन और आवश्यक है, इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञापित किसी व्यक्ति द्वारा स्थापित, अनुरक्षित या कार्यकारित किसी तार का अस्थाई कब्जा (तब तक के लिए जब तक कि लोक आपात् विद्यमान रहता है या लोक सुरक्षा के हित में ऐसी कार्यवाही किया जाना अपेक्षित हो) ले सकेगा । 

(2) लोक सुरक्षा के हित में लोक आपात् की घटना होने पर केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या केन्द्र या राज्य सरकार द्वारा इस निमित विशेष रूप से प्राधिकृत अन्य अधिकारी यदि उसे समाधान हो जाये कि वैसा करना भारत की प्रभुता और अखण्डता, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों की मैत्रीपूर्ण संबंधों और लोक व्यवस्था के हित में या किसी अपराध के कारित के उद्दीपन को निवारित करने के लिए, लिखित में अभिलिखित कारणों के लिए, आदेश द्वारा पारेषण के लिए लाया गया या पारेषित या प्राप्त किया गया कोई सन्देश या सन्देशों का वर्ग पारेषित नहीं किया जायेगा या अन्तर्रुद्ध या निरुद्ध किया जायेगा अथवा आदेश बनाने वाली सरकार या आदेश में वर्णित उसके किसी अधिकारी को प्रकट किया जायेगा ।

परन्तु केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार को प्रत्यायित संवाददाता का, प्रकाशन को आशयित, प्रेस सन्देश अन्तर्रुद्ध या निरुद्ध नहीं किया जायेगा जब तक कि उनका पारेषण इस उपधारा के अधीन प्रतिषिद्ध किया गया हो ।

6. रेलवे कम्पनियों की भूमि पर तारों के स्थापन की शक्ति- 
कोई रेलवे कम्पनी केन्द्रीय सरकार द्वारा वैसा करने के लिए अपेक्षा किया जाने पर सरकार को कम्पनी के भूमि के किसी भाग पर तार स्थापित और अनुरक्षित करना अनुज्ञात करेगी और उसे कार्य करने की प्रत्येक युक्तियुक्त सुविधा देगी।

6. (क) भारत से बाहर के देशों को संदेशों के पारेषण के लिए दरों को अधिसूचित करने की शक्ति–
केन्द्रीय सरकार समय-समय पर आदेश द्वारा दरें जिन पर अन्य शर्तें और निर्बन्धन जिनके अध्यधीन, सन्देश भारत से बाहर किसी देश को सन्देश पारेषित किये जाये अधिसूचित करेगी।

(2) उपधारा (1) में दरें अधिसूचित करते समय केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित तथ्यों में से किसी या सभी का सम्यक ध्यान रखेगी, अर्थात् 

(क) भारत से बाहर के देशों में सन्देशों के पारेषण के लिए तत्समय प्रवृत्ति दरें;

(ख) तत्समय प्रवृत्त विदेशी मुद्रा की दरें;

(ग) भारत के भीतर सन्देशों के पारेषण के लिए तत्समय प्रवृत्त दरें;

(घ) ऐसे अन्य संगी तथ्य जैसे केन्द्रीय सरकार मामले की परिस्थितियों में उचित समझा।

7. तारों के संचालन के नियम बनाने की शक्ति-

(1) केन्द्रीय सरकार समय-समय पर शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, सरकार या इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञपित व्यक्तियों द्वारा स्थापित, अनुरक्षित और कार्यकारित किसी भी तारों के संचालन के लिए इस अधिनियम से संगत नियम बना सकेगी।

(2) इस धारा के अधीन नियम, निम्नलिखित में से किसी या सभी विषयों और अन्य विषयों के साथ, उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात्-

(क) दरें जिन पर शर्तें और निर्बन्धन जिनके अध्ययधीन, भारत के भीतर संदेश पारेषित किये जायेंगे;

(ख) सन्देश के प्रकटन और अनुचित अन्तर्रुद्धकरण को निवारित करने के लिए बरती जाने वाली पूर्वावधानियाँ;

(ग) कालावधि जिसके लिए और शर्तें जिनके अध्यधीन, तार और तार अधिकारी की अभिरक्षा में होने वाले या उसके होने वाले अन्य दस्तावेज परिरक्षित किये जायेंगे; और

(घ) तार अधिकारी की अभिरक्षा में अन्य दस्तावेजों और तारों की तलाश करने के लिए प्रभारित की जाने वाली फीस। 

(ङ) शर्तें निर्बन्धन जिनके अध्यधीन तार संबंधी संचार के लिए तार लाइनें, साधित्र

या यन्त्र स्थापित, अनुरक्षित, कार्यकारित मरम्मत, अन्तरित, परिवर्तित, प्रत्यारहित या डिस्कनेक्ट किये जायेंगे । 

[(1. ड.ड़क)] जिस रीति से निधि प्रदान की जाय ।

(ड. ड. ड. ख) मानदण्ड जिस पर आधारित रकम निर्मोचित कर दी जाये

(च) (i) किसी तार लाइन, साधित्र या यन्त्र के स्थापन, अनुरक्षण, कार्यकारण, मरम्मत, [1] अन्तरण या परिवर्तनः

(ii) ऐसी लाइन, साधित्र या यन्त्र के परिचालन में आपरेटर की सेवाओं की बाबत प्रभारें;

(छ) किसी प्रणाली से, जिसके अधीन तार यन्त्र सम्बन्धी संचार के लिए तार लाइन, साधित्र या यन्त्र के स्थान, अनुरक्षण, मरम्मत, अन्तरण या परिवर्तन से संबंधित अधिकार और बाध्यतायें किसी करार के अधीन संलग्न हो, किसी प्रणाली में, जिसके अधीन ऐसे अधिकारी और बाध्यतायें इस धारा के अधीन बनाये गये नियमों द्वारा संलग्न हों, संक्रमण से संबंधित विषय;

(ज) समय जिस पर, रीति जिसमें शर्तें जिनके अध्यधीन और व्यक्ति जिनके द्वारा इस धारा में वर्णित दरें प्रभार और फीसें संदत्त की जायेंगी और ऐसी दरों, प्रभारों, फीसों के संदाय के लिए प्रतिभूति का दिया जाना;

(झ) किसी व्यक्ति के लाभ के लिए उपबन्धित किसी साधित्र, यन्त्र या तार लाइन के सम्बन्ध में उपगत किसी हानि के लिए केन्द्रीय सरकार को प्रतिकर का संदाय -

(क) जहाँ लाइन, साधित्र यन्त्र उसके प्रयोग किये जाने के लिए कनेक्शन किये जाने के पश्चात् इन नियमों द्वारा नियत कालाविध के अवसान के पूर्व उस व्यक्ति द्वारा छोड़ दी जाय, या 

(ख) जहाँ लाइन, साधित्र यन्त्र, उसके प्रयोग किये जाने के लिए कनेक्शन किये जाने के पश्चात् इन नियमों द्वारा नियम कालावधि के अवसान के पूर्व; उस व्यक्ति के किसी कार्य या लोप द्वारा निष्फल बना देता है। 

(ञ) सिद्धान्त जिनके अनुसरण में और प्राधिकारी जिसके द्वारा खण्ड (झ) में निर्देशित प्रतिकर का निर्धारण किया जायेगा;

( ञ ञ) किसी तार के स्थापन, अनुसरण का कार्यकारण के नियोजित व्यक्तियों द्वारा उत्तीर्ण की जाने वाली परीक्षायें और रखी जाने वाली अर्हतायें, यदि कोई हो और ऐसी परीक्षा में प्रवेश के लिए प्रभारित की जाने वाली फीस: 

(त) कोई अन्य विषय, जिसके लिए इस अधिनियम के अधीन किसी या सभी तारों के उचित और सक्षम संचालन के लिए उपबन्ध करना आवश्यक हो ।

(3) नियम बनाते समय इस अधिनियम के अनुज्ञापित किसी व्यक्ति द्वारा स्थापित, अनुरक्षित या कार्यकारित किसी तार के संचालन के लिए केन्द्रीय सरकार नियमों द्वारा उनके किसी भंग के लिए जुर्माने विहित कर सकेगी; 

परन्तु इस प्रकार विहित किये गये जुर्माने निम्नलिखित किसी से अनधिक होंगे, नामत- 

(क) इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञापित व्यक्ति भंग के लिए दण्डनीय हो, एक हजार रुपये के निरन्तर भंग के मामले में प्रथम पश्चात् ऐसा भंग निरन्तर रहने वाले पूरे या किसी भाग के दौरान प्रत्येक दिन के लिए दो सौ रुपये और जुर्माना;

(ख) जब इस प्रकार अनुज्ञापित व्यक्ति का सेवक या अन्य कोई व्यक्ति भंग के लिए दण्डनीय हो, (क) में विनिर्दिष्ट रकम के एक-चौथाई से । 

(4) इस धारा या इसके अधीन बनाये गये नियमों की किसी बात का अर्थ नहीं लगाया जायेगा-

(क) केन्द्रीय सरकार को किसी व्यक्ति के साथ, तार संचार उपलब्ध कराने के प्रयोजन के लिए, जहाँ उस व्यक्ति द्वारा अपेक्षित लाइनों, साधित्रों या यंत्रों की संख्या को ध्यान में रखते हुए उसके साथ ऐसे करार करना और समीचीन हो, किन्हीं तार लाइन, साधित्रों या यंत्रों के उस सरकार द्वारा करार में विनिर्दिष्ट शर्तों और निर्बन्धों पर स्थापन, अनुरक्षण और कार्यकारण के लिए करार के प्रवारित करने का, या

(ख) तार संचार के साधनों को उपलब्ध कराने के प्रयोजन के लिए कोई तार लाइन, साधित्र या यन्त्र उपबन्धित करने को केन्द्रीय सरकार को किसी बाध्यता के अध्यधीन करने की ।

(5) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जायेगा। यह अवधि एक सत्र में या दो अथवा अधिक अनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी, यदि उस सत्र के पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने को सहमत हो जायें या दोनों सदन सहमत हो जायें कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात वह केवल ऐसे उपान्तरित रूप में प्रभावी होगी यथास्थिति प्रभावी नहीं होगी, किन्तु ऐसा कोई उपान्तरण या बातिलीकरण उसके अधीन इसके पूर्व की गई किसी बात की विधित मान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।

7. (क) विद्यमान करारों की व्यावृत्ति-धारा 7 की कोई बात केन्द्रीय सरकार के किसी व्यक्ति के साथ भारतीय तार (संशोधन) अधिनियम, 1957 के प्रारम्भ के पूर्व, तार संचार के लिए किसी तार लाइन, साधित्र या यन्त्र के स्थापन, अनुरक्षण या कार्यकरण के संबंध में, हुए किसी करार को अवधारित करने को कोई नियम बनाने को अधिकृत नहीं करेगी और ऐसे स्थापन, अनुरक्षण या कार्यकरण से संबंधित तद्धीन सभी अधिकार और बाध्यतायें उस करार की शर्तों और निर्बन्धनों द्वारा अवधारित होंगी।

7. (ख) विवादों की मध्यस्ता - (1) इस अधिनियम में अन्यथा स्पष्ट रूप से उपबन्धित के सिवाय, किसी तार लाइन, साधित्र या यन्त्र संबंधी तार प्राधिकारी और व्यक्ति, जिसके लाभ के लिए लाइन, साधित्र या यन्त्र उपबन्धित है या की गई हो, के मध्य कोई विवाद मध्यस्थता के द्वारा अवधारित किया जायेगा और ऐसे अवधारण के प्रयोजन के लिए, केन्द्रीय सरकार द्वारा या तो उस विवाद के अवधारण के लिए विशेष रूप में या इस धारा के अधीन विवादों के अवधारण के लिए सामान्य रूप से नियुक्त मध्यस्थ को निर्देशित किया जायेगा । 

(2) उपधारा (1) के अधीन नियुक्त मध्यस्थ का अधिनिर्णय विवादों के पक्षकारों के मध्य निश्चायक होगा और किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जायेगा । 

8. अनुज्ञप्तियों का प्रतिसंहरण - केन्द्रीय सरकार द्वारा 4 के अधीन मंजूर किसी अनुज्ञप्ति का, किसी भी समय अन्तर्विष्ट किसी शर्त के भंग या तद्धीन संदेश किसी प्रतिफल के संदाय में व्यतिक्रम पर, प्रतिसंहरण कर सकेगी।

9. सरकार हानि या नुकसान का जिम्मेदार नहीं है-सरकार किसी हानि या नुकसान की जिम्मेदार नहीं होगी, जो किसी सन्देश की प्राप्ति, पारेषण या परिदान की बाबत किसी तार अधिकारी द्वारा उसके कर्त्तव्यों में असफल रहने के परिणामस्वरूप घटित होती है; और ऐसा कोई अधिकारी हानि या नुकसान का जिम्मेदार नहीं होगा, यदि वह उसे उपेक्षापूर्वक, विद्वेषपूर्वक या कपटपूर्वक नहीं करता ।

भाग दो क 
सर्वव्यापी सेवा बाध्यता निधि

9. (क) सर्वव्यापी सेवा बाध्यता निधि - (1) भारतीय टेलीग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2003 के प्रारम्भ होने पर या उससे, सर्वव्यापी सेवा बाध्यता निधि कही जानी वाली एक निधि इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ स्थापित किया जाना समझ जायेगा।

(2) निधि० केन्द्रीय सरकार के नियन्त्रण के अधीन होगी और उसमें जमा की जायेगी- 

(क) धारा 9 ख के अधीन संदाय की गयी कोई भी धनराशि,

(ख) धारा 9-ग के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा किया गया कोई अनुदान और दिया गया कोई ऋण;

(3) निधि की जमा का अतिशेष वित्तीय वर्ष के अन्त में व्ययगत नहीं होगा । 

9. (ख) भारत वर्ष की समेकित निधि में रकम को जमा करना

धारा 4 के अधीन सर्वव्यापी सेवा बाध्यता की और प्राप्त की गयी धनराशि भारतीय समेकित निधि में जमा की जायेगी, और केन्द्रीय सरकार, यदि संसद इस निमित्त विधि द्वारा निर्मित विनियोजन द्वारा वैसा उपलब्ध करती हो तो सर्वव्यापी सेवा बाध्यता बैठक के लिए अनन्य रूप से उपयोग किय जाने हेतु समय-समय पर ऐसे निधि में ऐसे उत्पादों को जमा करेगी ।

9. (ग) केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदान एवं ऋण-

केन्द्रीय सरकार इस निमित्त विधि द्वारा संसद द्वारा किये गये सम्यक् विनियोजन के पश्चात् ऐसी धनराशियों को अनुदानी एवं ऋणों के रूप में जमा करेगी जिसे वह सरकार निधि में आवश्यक समझे। 

9. (घ) निधि का दिया जाना और उपयोग

(1) . केन्द्रीय सरकार के पास ऐसी रीति से निधि देने की शक्ति होगी जो इस अधिनियम के अधीन बनाये गये नियमों द्वारा विहित किया जाय । 

(2) निधि का उपयोग सर्वव्यापी सेवा बाध्यता बैठक के लिए अनन्य रूप से किया जायेगा ।

(3) केन्द्रीय सरकार उन मानदण्डों के अनुसार समन्वय तथा समय से रकम का उपयोग एवं निर्मोचन सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी होगी जिन्हें इस अधिनियम के अधीन नियमों द्वारा विहित किया जाय ।

भाग तीन
तारों की लाइनों और खम्भों के लगाने की शक्ति

10. तार लाइनों और खम्भों को लगाने और अनुरक्षण करने को तार प्राधिकारी के लिए शक्ति

तार प्राधिकारी समय-समय पर किसी स्थावर सम्पत्ति के नीचे ऊपर साथ-साथ या आर-पार कोई तार लाइन में या खम्भे पर लगा और अनुरक्षित कर सकेगी :

परन्तु — 
(क) तार प्राधिकारी इस धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग सिवाय भारत सरकार द्वारा स्थापित या अनुरक्षित या स्थापित और अनुरक्षित किये जाने को तारों के सिवाय नहीं करेगा ।

(ख) परन्तु केन्द्रीय सरकार की सम्पत्ति में प्रयोगकर्ता के अतिरिक्त अन्य कोई अधिकार अर्जित नहीं करती; जिसके नीचे ऊपर साथ-साथ या आर-पार कोई तार लाइन या खम्भज्ञे तार पाधिकारी लगाता हैं;

(ग) इसमें इसके पश्चात् उपबन्धित के सिवाय तार प्राधिकारी किसी स्थानीय प्राधिकारी के नियंत्रण या प्रबन्धन के अधीन अथवा में निहित किसी सम्पत्ति की बाबत अधिकारों का प्रयोग उस प्राधिकारी की अनुज्ञा के बिना नहीं करेगा।

(घ) तार प्राधिकारी इस धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने में कम से कम सम्भव नुकसान करेगा और जब वह खण्ड (ग) में निर्देशित के सिवाय किसी सम्पत्ति की बाबत शक्तियों का प्रयोग कर चुका हो उन शक्तियों के प्रयोग के कारण उन्हें पहुँचे किसी नुकसान के लिए हितबद्ध व्यक्तियों को पूरा प्रतिकर संदत्त करेगा ।

11. तारों की लाइन या खम्भों को हटाने या मरम्मत करने के लिए सम्पत्ति पर प्रवेश करने की शक्ति-

तार प्राधिकारी किसी समय तार लाइन या खम्भों का परीक्षा, मरम्मत, परिवर्तन या हटाये जाने के प्रयोजन के लिए किसी सम्पत्ति पर जिसके नीचे, साथ-साथ या आर-पार में या पर तार खम्भे लगाये गये है, प्रवेश कर सकेगा ।

उपबन्ध स्थानीय प्राधिकारियों के नियंत्रण या प्रबन्ध के अधीन या में निहित सम्पत्तियों को लागू होंगे।

12. स्थानीय प्राधिकारी की शर्तों के अध्यधीन, धारा 10 खण्ड (ग) के अधीन अनुज्ञप्ति देने की शक्ति-धारा 10 खण्ड (ग) के अधीन स्थानीय प्राधिकारी द्वारा दी गई कोई अनुज्ञा, , ऐसी युक्तियुक्त शर्तों के अध्यधीन दी जा सकेगी, जैसी वह प्राधिकारी किन्हीं व्ययों के संदाय के बारे में, जो उस धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग के परिणामस्वरूप उस प्राधिकारी को करना आवश्यक होंगे, या किसी कार्य के निष्पादन से ढंग या समय के बारे में उन शक्तियों के अधीन या प्राधिकारी द्वारा उपक्रमित किसी अन्य कार्य से संबंधित या जुड़ी हुई अन्य चीज के बारे में अधिरोपित करना उचित समझे ।

13. तार की लाइनों या खम्भों को हटाने या परिवर्तित करने की अपेक्षा करने की स्थानीय प्राधिकारी की शक्ति-जब इस अधिनियम के पूर्वगामी उपबन्धों के अधीन तार प्राधिकारी द्वारा कोई तार लाइन या खम्भा, स्थानीय प्राधिकारी के नियन्त्रण या प्रबन्ध की या में निहित किसी सम्पत्ति पर नीचे या ऊपर, साथ-साथ, आर-पार, में या लगाया गया तो था स्थानीय प्राधिकारी उन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जो ऐसे खम्भा या लाइन से उत्पन्न हो गई हों, यह समीचीन समझे कि यह हटा लिया जाना चाहिए या उसकी स्थिति में परिवर्तित कर देना चाहिए, स्थानीय प्राधिकारी तार प्राधिकारी से यथास्थिति, इसे हटाये जाने या इसकी स्थिति परिवर्तित करने की अपेक्षा कर सकेगा।

14. गैस और जल पाइपों और नालियों की स्थिति परिवर्तित करने की शक्ति- तार प्राधिकारी इस अधिनियम के अधीन उसे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने के प्रयोजन के लिए, स्थानीय प्राधिकारी नियंत्रण या प्रबन्ध के अधीन की या में निहित किसी सम्पत्ति की बाबत, तद्धीन गैस या जल के प्रदाय के लिए किसी पाइप (मुख्य न होने पर) या किसी नाली (मुख्य नाली न होने पर) की स्थिति परिवर्तित कर सकेगा;

परन्तु — 
(क) जब तार प्राधिकारी ऐसी किसी नाली या पाइप की स्थिति परिवर्तित करने की इच्छा करे, वह जैसा करने के अपने आशय का युक्तियुक्त नोटिस, समय विनिर्दिष्ट करते हुए जब कि वैसा करना प्रारम्भ किया जायेगा, स्थानीय प्राधिकारी को और जहाँ पाइप और नाली स्थानीय प्राधिकारी के नियंत्रणाधीन न हो, उस व्यक्ति को जिसको नियंत्रणाधीन नाली या पाइप हो, देगा।

(ख) खण्ड (क) के अधीन नोटिस प्राप्त होने पर स्थानीय प्राधिकारी या वह व्यक्ति 'कार्य के अधीक्षण के लिए एक व्यक्ति को भेज सकेगा और तार प्राधिकारी कार्य को इस प्रकार भेजे गये व्यक्ति के युक्तियुक्त समाधान में निष्पादन करेगा।

15. तार प्राधिकारियों और स्थानीय प्राधिकारियों के मध्य विवाद- 

(1) यदि स्थानीय प्राधिकारी द्वारा धारा 10 में निर्देशित अनुज्ञा से इंकार या धारा 12 के अधीन कोई शर्त विहित करने के परिणामस्वरूप अथवा तार प्राधिकारी के धारा 13 में की गई अपेक्षा का अनुपालन करने में लोप के परिणामस्वरूप या इस अधिनियम के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने में अन्यथा स्थानीय प्राधिकारी के माध्य कोई विवाद उत्पन्न होता है, वह ऐसे प्राधिकारी द्वारा अवधारित किया जायेगा जैसा केन्द्रीय सरकार सामान्य तौर पर या विशेष रूप से इस निमित्त नियुक्त करे । 

(2) इस प्रकार नियुक्त प्राधिकारी के अवधारण की अपील केन्द्रीय सरकार को होगी और सरकार का आदेश अन्तिम होगा ।

अन्य सम्पत्तियों पर लागू होने वाले उपबन्ध

16. स्थानीय प्राधिकारी के अतिरिक्त अन्य सम्पत्ति के मामले में प्रतिकर के विवादों और धारा 10 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग- 

(1) यदि धारा 10 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग उस धारा के खण्ड (घ) में निर्देशित सम्पत्ति, बाबत, प्रतिरोधित या बाधित किया जाता है, जिला मजिस्ट्रेट अपने विवेक से आदेश कर सकेगा कि तार प्राधिकारी उसका प्रयोग करने को अनुज्ञात होगा।

(2) यदि, उपधारा (1) के अधीन ऐसा आदेश करने के पश्चात् कोई व्यक्ति उन शक्तियों के प्रयोग करने में प्रतिरोध करता है या सम्पत्ति पर नियंत्रण रखते हुए उनके प्रयोग किये जाने के लिए सभी सुविधायें नहीं देता है, वह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 के अधीन अपराध कारित करने वाला समझा जायेगा ।

(3) यदि कोई विवाद धारा 10 के खण्ड (घ) के अधीन संदत्त किये जाने वाले प्रतिकर की पर्याप्तता से संबंधित उत्पन्न हो, यह उस प्रयोजन के लिए विवादग्रस्त पक्षकारों में से किसी के आवेदन पर जिला न्यायाधीश द्वारा अवधारित किया जायेगा, जिसकी अधिकारिता में सम्पत्ति स्थित हो ।

(4) यदि प्रतिकर प्राप्त करने के हकदार व्यक्तियों के बारे में उसके हिस्सों के अनुपात जिसमें कि हितबद्ध व्यक्ति हकदार हैं, के बारे में कोई विवाद उत्पन्न होता है, तार प्राधिकारी जिला न्यायाधीश के न्यायालय में ऐसी रकम का, जैसी वह पर्याप्त समझता है अथवा जहाँ सभी विवादग्रस्त पक्षकार निविदत्त रकम का पर्याप्त होना लिखित में स्वीकार करें अथवा वह रकम जो उपधारा (3) के अधीन अवधारित की गई हो, संदाय कर सकेगा और जिला न्यायाधीश पक्षकारों को नोटिस देते हुए उनमें से सुने जाने की इच्छा करें, सुनवाई करते हुए प्रतिकर के प्राप्त करने के हकदार व्यक्तियों को या उसके हिस्सों के अनुपात का अवधारण, जैसी स्थिति हो, करेगा ।

(5) उपधारा (3) या उपधारा (4) के अधीन जिला न्यायाधीश द्वारा विवाद का प्रत्येक अवधारण अन्तिम होगा । 

परन्तु इस उपधारा की कोई बात पर प्राधिकारी के द्वारा संदत्त प्रतिकर के किसी भाग सम्पूर्ण वाद द्वारा उस व्यक्ति से जिसने उसे प्राप्त किया है, वसूली के अधिकार को प्रभावित नहीं करेगी। 

17. स्थानीय प्राधिकारी के अतिरिक्त की सम्पत्ति पर से तार लाइन और खम्भों का परिवर्तन या हटाया जाना-

(1) जब इस अधिनियम के पूर्वगामी उपबन्धों के अधीन स्थानीय प्राधिकारी के नियंत्रण या प्रबन्ध के अधीन या में निहित सम्पत्ति में या पर, नीचे, ऊपर, साथ-साथ या आर-पार तार प्राधिकारी द्वारा कोई खम्भा या तार लाइन लगाई गई हो और यदि वैसा करने को हकदार व्यक्ति सम्पत्ति से ऐसी रीति में संव्यवहार करता है; कि तार लाइन या खम्भे को उसके अन्य भाग में या उच्च या निम्न स्तर पर हटाया अथवा रूप में परिवर्तित करना आवश्यक या सुविधाजनक हो जाये वह तार प्राधिकारी से तद्नुसार लाइन या खम्भे को हटाने या परिवर्तित करने की अपेक्षा कर सकेगा ।

परन्तु यदि धारा 10 के खण्ड (घ) के अधीन प्रतिकर संदत्त किया गया हो, वह जब तार प्राधिकारी अपेक्षा करे परिवर्तन या हटाने के व्यय को चुकाने को अपेक्षित रकम या प्रतिकर के रूप में संदत्त रकम की आधी जो भी छोटी धनराशि हो, निविदत्त करेगा ।

(2) यदि तार प्राधिकारी अपेक्षा का अनुपालन करने में लोप करता है, करने वाला व्यक्ति जिला मजिस्ट्रेट को, जिसकी अधिकारिता में सम्पत्ति स्थित है, हटाये जाने या परिवर्तन करने के आदेश के लिए आवेदन कर सकेगा ।

(3) जिला मजिस्ट्रेट उपधारा (2) के अधीन आवेदन प्राप्त होने पर अपने विवेक से उसे नामंजूर कर सकेगा या पूर्ण रूप से या शर्तों के अध्यधीन तार लाइन या खम्भों, सम्पत्ति के किसी भाग या निम्न स्तर पर हटाने या इसके रूप को परिवर्तित करने के आदेश दे सकेगा।

सभी सम्पत्तियों पर लागू होने वाले उपबन्ध 

18. तार संचार में अवरोध डालने वाले वृक्षों को हटाया जाना-

(1) यदि किसी तार लाइन के समीप खड़ा हुआ कोई वृक्ष तार संचार में अवरोध पैदा करता है या अवरोध पैदा करने को सभाव्य हो, प्रथम या द्वितीय वर्ग का मजिस्ट्रेट तार प्राधिकारी के आवेदन पर वृक्ष को कटवा सकेगा या ऐसी रीति में व्यवहार कर सकेगा, जैसी वह उचित समझता है ।

(2) जब उपधारा (1) के अधीन आवेदन के निपटारे में, मजिस्ट्रेट तार लाइन तार लगाये जाने के पूर्व विद्यमान वृक्ष के मामले में, वृक्ष में हितबद्ध व्यक्तियों को ऐसे प्रतिकर का अधिनिर्णय कर सकता है, जैसा वह युक्तियुक्त समझे और ऐसा अधिनिर्णय अन्तिम होगा ।

19. इस अधिनियम के पारित होने के पूर्व लगाये गये तार संबंधी खम्भे और लाइनें केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित या सुरक्षित तार के प्रयोजन के लिए किसी सम्पत्ति के नीचे, ऊपर, साथ-साथ, आर-पार में या पर इस अधिनियम के पारित होने के पूर्व लगाई गई प्रत्येक तार लाइन और खम्भा अधिनियम की अपेक्षाओं के पश्चात् और द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में लगाया गया समझा जायेगा ।

19. (क) तारों को नुकसान पहुँचाने या तार संचार में हस्तक्षेप करने की संभावना में अधिकार का वैध प्रयोग करने वाले व्यक्ति द्वारा नोटिस दिया जाना-

(1) किसी सम्पत्ति में वैध अधिकारों का प्रयोग, ऐसी रीति में संव्यवहार करने की इच्छा करता है जो किसी तार, लाइन या खम्भे को, जो इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसरण में सम्यक् रूप से लगाया गया हो, नुकसान पहुँचाना या तार संचार में अवरोध या हस्तक्षेप करना संभावित हो, ऐसे अधिकार के आशयित प्रयोग का एक माह से कम का न होने वाला नोटिस तार प्राधिकारी या तार अधिकारी को, जिसे तार प्राधिकार द्वारा इस निमित्त सशक्त किया हो; देग।|

(2) यदि ऐसा कोई व्यक्ति उपधारा (1) के उपबन्धों के अनुपालन के बिना सम्पत्ति से ऐसी रीति में संव्यवहार करता है, जो किसी तार लाइन या खम्भे को नुकसान पहुँचाने या तार संचार में अवरोध या हस्तक्षेप करने को संभाव्य है, प्रथम या द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट तार प्राधिकारी के आवेदन पर ऐसे व्यक्ति को ऐसी रीति में ऐसी सम्पत्ति से संव्यवहार करने के उसके आदेश की तारीख से एक माह से अधिक कालावधि के लिए प्रविरत करने का आदेश कर सकेगा और उसके साथ ही उस सम्पत्ति के बाबत ऐसी कालावधि के दौरान ऐसे नुकसान अवरोध या हस्तक्षेप के निवारण या उपचार के लिए मजिस्ट्रेट उसकी आवश्यक कार्यवाही ' कर सकेगा ।

(3) उपधारा (1) में निर्देशित रीति में किसी सम्पत्ति से संव्यवहार करने वाला व्यक्ति, उसे स्वयं को या किसी मानव की व्यक्तिगत क्षति को आसन्न संकट के टालने के सद्भावपूर्ण आशय उक्त धारा के उपबन्धों का अनुपालन करने को समझा जायेगा, यदि वह आशयित अधिकारों का प्रयोग का ऐसा नोटिस जैसा परिस्थितियों में संभव हो, दे देता है या जहाँ पर ऊपर निर्देशित आसन्न संकट को उपगत किये बिना ऐसा पूर्व नोटिस न दिया जा सकता हो, यदि वह तत्काल ऐसे अधिकार के वास्तविक प्रयोग का नोटिस पूर्वोक्त उपधारा में विनिर्दिष्ट प्राधिकारी या अधिकारी को दे देता है। 

19. (ख) इस भाग के अधीन तार प्राधिकारियों की शक्तियाँ अनुज्ञप्तिधारी को प्रदत्त करने की शक्ति- 
केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा धारा 4 के अधीन किसी अनुज्ञप्तिधारी को उसकी अनुज्ञप्ति के विस्तार के और किन्हीं शर्तों और निर्बन्धनों जो केन्द्रीय सरकार अधिरोपित करना उचित समझे तथा इस भाग में उपबन्ध के अधीन कोई या सभी शक्तियाँ प्रदत्त कर सकेगी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित या अनुरक्षित या स्थापित या अनुरक्षण किये जाने की बाबत इस धारा के अधीन तार प्राधिकारी को होती है;

परन्तु धारा 19-क में विहित नोटिस सदैव तार प्राधिकारी या धारा 19-क (1) के अधीन नोटिस प्राप्त करने को सशक्त अधिकारी को ही दिया जायेगा ।

भाग चार: शक्तियाँ

20. अनाधिकृत तार का स्थापन, अनुरक्षण और कार्यकारण-

(1) यदि कोई व्यक्ति धारा 4 के उल्लंघन में या उस धारा के अधीन बनाये गये नियमों द्वारा यथा— अनुज्ञात से अन्यथा भारत के भीतर तार स्थापित, अनुरक्षित या कार्यकारित करता है, वह यदि तार कोई बेतार का तार है, तीन वर्ष तक के हो सकने वाले कारावास या जुर्मान से या दोनों से तथा अन्य किसी मामले में एक हजार रुपयों तक के हो सकने वाले जुर्मान से दण्डनीय होगा । 

(2) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 में किसी बात के अन्तर्विष्ट होने पर भी इस धारा के अधीन बेतार के तार की बाबत अपराध, उस संहिता के प्रयोजन के लिए जमानतीय और असंज्ञेय होंगे।

(3) जहाँ कोई व्यक्ति इस धारा के अधीन अपराध का सिद्धदोष हो, न्यायालय जिसके समक्ष उसे सिद्धदोष किया जाता है, निर्देश कर सकेगा कि तार जिसकी बाबत अपराध कारित किया गया हो या ऐसे तार का कोई भाग सरकार को समपहत होगा ।

20. (क) अनुज्ञप्ति की शर्त का भंग-यदि धारा 4 के अधीन मंजूरी अनुज्ञप्ति का धारक उसकी अनुज्ञप्ति में अन्तर्विष्ट किसी शर्त का उल्लंघन करता है, वह एक हजार रुपये तक के हो सकने वाले जुर्माने से और जुर्माने से जो पाँच सौ रुपये प्रति सप्ताह तक का हो सकेगा, जिस दौरान कि शर्त भंग निरन्तर रहता है ।

21. अनधिकृत तारों का प्रयोग करना-यदि कोई व्यक्ति यह जानते हुए यह विश्वास करने के कारण होते हुए कि कोई तार उस अधिनियम के उल्लंघन में स्थापित, अनुरक्षित या कार्यकारित है, ऐसे तार द्वारा कोई संदेश प्राप्त या पारेषित करता है, या उसकी आनुषंगिक किसी सेवा को सम्पन्न करता है, या तार द्वारा पारेषण के लिए संदेश परिदत्त करता है या इसके द्वारा भेजे जाने के किसी संदेश के परिदान को स्वीकार करता है, वह पंचास रुपयों तक के हो सकने वाले जुर्माने से दण्डनीय होगा ।

22. रेलवे भूमि पर तारों के स्थापन का विशेष-यदि कोई रेल कम्पनी या रेल कम्पनी का अधिकारी धारा 6 के उपबन्धों का अनुपालन करने से इन्कार करता है या उपेक्षा करता है, वह प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान उपेक्षा या इन्कार निरन्तर रहता है, एक सौ रुपये तक के हो सकने वाले जुर्मान से दण्डनीय होगा ।

23. संकेत कक्ष में अतिक्रमण, तार कार्यालय में अतिचार या बाधा - यदि कोई व्यक्ति- 
(क) सक्षम प्राधिकारी की अनुज्ञा के बिना सरकार या इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञापित व्यक्ति के तार कार्यालय के संकेत कक्ष में प्रवेश करता है, या

(ख) ऐसे तार कार्यालय के चारों ओर लगी हुई बाड़ में किसी नियम या वैसा न करने के किसी नोटिस के उल्लंघन में प्रवेश करता है, या

(ग) ऐसे कक्ष या संलग्न को उसमें नियोजन किसी सेवक या अधिकारी द्वारा वैसा अनुरोध किये जाने, पर छोड़ने से इन्कार करता है, या

(घ) ऐसे किसी अधिकारी या सेवक को अपने कर्त्तव्यों के पालन में बाधा या अड़चन डालता है, या वह पाँच सौ रुपयों तक के हो सकने वाले जुर्माने से दण्डनीय होगा । 

24. सन्देशों की विषय-वस्तु को विधि विरुद्धतया जानने का प्रयत्न करना

यदि कोई व्यक्ति धारा 23 में वर्णित कार्य, किसी संदेश की विषय-वस्तु को विधिविरुद्ध जानने के अथवा इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के कारित करने के आशय से करता है, वह (जुर्माने की वृद्धि में, जिससे वह धारा 23 दण्डनीय है) एक वर्ष तक के हो सकने वाले कारावास से दण्डनीय किया जा सकेगा।

25. आशयपूर्वक तारों से छेड़छाड़ करना या नुकसान पहुँचाना - यदि -

(क) किसी सन्देश परिदान या पारेषण में बाधा डालने या निवारण करने, या 

(ख) किसी सन्देश की विषय-वस्तु से स्वयं को अवगत कराने या अन्तर्रुद्ध करने, या

(ग) रिष्टि कारित करने :

को आशयित कोई व्यक्ति किसी तार में उसके कार्यकरण में लगभग प्रयुक्त या उसका भाग होते हुए किसी बैटरी मशीनरी, तार लाइन, खम्भा या कोई भी अन्य चीज को छूता है, से छेड़छाड़ करता है, हटाता है या नुकसान पहुँचाता है, वह तीन वर्ष तक के हो सकने वाले कारावास से या जुर्माने से या दोनों से दण्डनीय होगा । 

25. (क) तार लाइनों या खम्भे में हस्तक्षेप या क्षति पहुँचाना - यदि किसी मामले में धारा 25 द्वारा जिस के लिए उपबन्ध न किया गया हो, कोई व्यक्ति किसी सम्पत्ति से संव्यवहार करता है और एतद्वारा जान-बूझकर या उपेक्षा या इस अधिनियम के अनुसरण में ऐसी सम्पत्ति पर सम्यक् से लगे किसी तार लाइन या खम्भे को नुकसान पहुँचाता है, तो वह तार प्राधिकरण द्वारा ऐसे व्ययों, (यदि कोई हो) जैसे उस नुकसान को ठीक करने में उपगत हो सके, के संदाय का दायी होगा और यदि इस प्रकार कारित नुकसान के कारण तार संचार अवरुद्ध हुआ, एक हजार रुपयों तक के हो सकने वाले जुर्मान से भी दण्डनीय होगा ।

परन्तु इस धारा के उपबन्ध लागू नहीं होंगे जहाँ ऐसा अवरोध या नुकसान सम्पत्ति से संव्यवहार करने वाले व्यक्ति द्वारा वैध अधिकारियों के द्वारा कारित हुए हों, यदि उसने धारा 19-क (1) के उपबन्धों की अनुपालन कर दी हो। 

26. तार अधिकारी या अन्य पदाधिकारी द्वारा सन्देशों को विधि विरुद्ध अन्तरुद्ध या प्रकट करना या परिवर्तित करना या संकेतों के तात्पर्य प्रकट करना - यदि कोई तार अधिकारी या तारघर के रूप में प्रयुक्त किसी कार्यालय से संबंधित पदीय कर्त्तव्य करने, तार प्राधिकारी न होते हुए,

कोई व्यक्ति-

(क) कोई संदेश, जिसने उसे पारेषण या परिदान के लिए प्राप्त किया हो, जान-बूझकर परिवर्तित करता है, छिपाता है या लेकर भाग जाता है या

(ख) जानबूझकर और केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार अथवा राज्य या केन्द्रीय सरकार द्वारा आदेश बनाने की विशेषतया अधिकृत अधिकारी के आदेश के अनुपालन से अन्यथा, किसी सन्देश या उसके किसी भाग के पारेषण में लोप या अन्तर्रुद्ध या निरुद्ध करता है। अथवा उसके पदीय कर्त्तव्य के अनुसरण में या सक्षम न्यायालय के निर्देश से अन्यथा, संदेश की विषय-वस्तु या विषय-वस्तु का कोई भाग उसे प्राप्त करने का हकदार न होने वाले किसी व्यक्ति को प्रकट करता है, या

(ग) किसी तार संबंधी संकेत या तात्पर्य, उससे अवगत न होने के हकदार व्यक्ति की प्रकट करता है, 

वह तीन मास तक हो सकने वाले कारावास से या जुर्मान से या दोनों दण्डित किया जायेगा । 

(27) बिना भुगतान के कपटपूर्वक संदेश भेजने वाला तार अधिकारी-यदि कोई तार अधिकारी केन्द्रीय सरकार या इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञाप्ति किसी व्यक्ति द्वारा, जैसी स्थिति हो, प्रभारों के भुगतान किये बिना तार द्वारा कोई संदेश, एतद्द्वारा सरकार या • व्यक्ति को कपटपूर्वक आशय से, पारेषित करता है, वह तीन वर्ष तक के हो सकने वाले कारावास से या जुर्मान से या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

28. अवचार - यदि कोई तार अधिकारी या तार के रूप में प्रयुक्त किसी कार्यालय से संबंधित पदीय कर्तव्यों को करने वाले अन्य कोई व्यक्ति भत्ता, लापरवाही या किसी अवचार का दोषी है, जिसके द्वारा संदेश का सही पारेषण या परिदान में अड़चन हुई हो या विलंब हुआ है, अथवा यदि कोई तार अधिकारी किसी संदेश के पारेषण से विलम्ब करता है या यत्र-तत्र घुमाता है, वह तीन मास तक के हो सकने वाले कारावास से या एक सौ रुपये तक के हो सकने वाले जुर्माने से दण्डित किया जायेगा ।

29. (विलुप्त ) 

29. (क) शास्ति - यदि कोई व्यक्ति बिना प्राधिकार के—

(क) ऐसी प्रकृति का कोई दस्तावेज, जिसके युक्तियुक्त रूप में विश्वास करने की संगणना हो सके कि वह दस्तावेज डाक और तार के महानिदेशक के द्वारा प्राधिकारी द्वारा या के अधीन जारी करता है, या

(ख) किसी दस्तावेज पर डाक और तार के महानिदेशक के अधीन किसी तार कार्यालय का कोई चिन्ह या स्टाम्प होने को तात्पर्यत या समान रूप का या अनुकृति में चिन्ह बनाता है अथवा ऐसा चिन्ह बनाता है, जिससे उसमें युक्तियुक्त रूप से विश्वास करने को संगणना की जा सके कि इस प्रकार चिन्हांकित दस्तावेज डाक और तार के महानिदेशन प्राधिकार के अधीन या द्वारा जारी किया गया है। वह पचास रुपये तक के हो सकने वाले जुर्माने से दण्डित किया जायेगा।

30. गलती के परिदत्त सन्देश प्रतिधारित करना-यदि कोई व्यक्ति ऐसा सन्देश जिसे किसी अन्य व्यक्ति को परिदत्त किया जाना चाहिए, कपटपूर्वक प्रतिधारित करता है या जानबूझकर छुपाता है, लेकर भाग जाता है या निरुद्ध करता है, अथवा तार अधिकारी द्वारा ऐसे संदेश को परिदत्त करने की अपेक्षा करता है या वैसा करने से इन्कार कर देता है, वह दो वर्ष तक के हो सकने वाले कारावास से या जुर्मान से या दोनों से दण्डित किया जायेगा। 

31. रिश्वत - तार अधिकारी भारतीय दण्ड संहिता की धाराओं 161, 162, 163, 164 और 165 के अभिप्रायों में लोक सेवक समझा जायेगा और उक्त धारा 161 में अन्तर्विष्ट “वैध पारिश्रमिक” की परिभाषा में शब्द “सरकार" के अन्तर्गत इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञाति कोई व्यक्ति सम्मिलित समझा जायेगा ।

32. अपराध करने का प्रयत्न करना जो कोई इस अधिनियम के अधीन दण्ड कोई अपराध कारित करने का प्रयत्न करता है, उस अपराध के लिए इसमें उपबन्धित दण्ड से दण्डित किया जायेगा ।

भाग पाँच : अनुपूरक

33. उन स्थानों में जहाँ तारों की रिष्टि बार-बार होती है, अतिरिक्त पुलिस का नियोजन करने की शक्ति-

(1) जब कभी भी राज्य सरकार को यह प्रतीत होता हो कि किसी तार को सदोष नुकसान करने वाला या करने को संभाव्य कोई कार्य किसी स्थान में बार-बार और विद्वेषपूर्वक कारित होता है, तथा एतद्द्वारा उस स्थान में अतिरिक्त पुलिस बल का नियोजन आवश्यक बन गया है, राज्य सरकार ऐसे अतिरिक्त पुलिस बल को, जैसा वह उचित समझे, उस स्थान को भेज सकेगी और उसे वहाँ तक नियोजित रखेगी, जैसा सरकार की राय में वैसा करने की आवश्यकता निरन्तर रहे।

(2) उस स्थान के निवासी अतिरिक्त पुलिस बल के खर्चों से प्रभावित होंगे और जिला मजिस्ट्रेट राज्य सरकार के आदेशों के अध्यधीन, अनुपात निर्धारित करेगा, जिसमें निवासियों द्वारा उसके निर्णय उनके अपने-अपने साधनों के अनुसार संदत्त किये जायेंगे ।

(3) उपधारा (2) के अधीन संदेय सभी धन या तो मजिस्ट्रेट के वारण्ट के अधीन उसकी स्थानीय अधिकारिता की परिसीमा में व्यतिक्रमी की जंगम सम्पत्ति के करस्थम और बिक्री द्वारा वसूल किये जायेंगे । 

(4) राज्य सरकार लिखित आदेश द्वारा इस धारा के प्रयोजनों के लिए परिसीमा का परिभाषा कर सकेगी।

34. अधिनियम का प्रेसीडेन्सी नगरों पर लागू होना - यह अधिनियम इनके प्रेसीडेन्सी नगरों में लागू होते समय इस प्रकार पढ़ा जायेगा गानों धारा 16, उपधारा (1) और धाग 17. उपधारा (2) और (3) में "जिला मजिस्ट्रेट" शब्दों के लिए धारा 18 उपधारा (1) और धारा 19-क उपधारा (2) में "प्रथम द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट" के लिए, तथा धारा 18 उपधारा (2) में मजिस्ट्रेट शब्द के लिए, “पुलिस का आयुक्त " शब्द तथा धारा 16 उपधाराओं (3) (4) और (5) में "जिला न्यायाधीश” शब्दों के लिए "लघुवाद न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश” अधिनियमित किये गये हो ।

(2) निरसित ।

(3) धारा 16 की उपधारा (3) के अधीन प्रेसीडेन्सी के लघुवाद न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की किसी आवेदन के बारे में फीस उसी प्रकार होगी जैसी न्यायालय फीस अधिनियम, 1870 के अधीन प्रेसीडेन्सी नगरों की परिसीमा के परे जिला न्यायाधीश को किसी आवेदन के बारे में संदेय होती तथा उपधारा (3) और (4) के अधीन मुख्य न्यायाधीश के समक्ष कार्यावाही में समनों और आदेशिकाओं के लिए फीस प्रेसीडेन्सी लघुवाद न्यायालय अधिनियम, 1882 की चतुर्थ अनुसूची में दिये गये मान के अनुसार सन्देय होगी।

35. (भारत एवं राज्यों को कतिपय विधियों के प्रतिनिर्देश) अधिनियम सं० 3 सन् 1951 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा निरसित ।

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