रविवार, 25 जून 2023

Causes of Cyber Crime in India

भारत में साइबर क्राइम के क्या कारण है 
(Causes of Cyber Crime in India)

साइवर क्राइम वैश्विक स्तर पर होने वाले वाला अपराध है। यह 21वीं सदी का व्हाइट कालर क्राइम है। यह न केवल भारत वरन् पूरी दुनिया के लिए मुसीबत बना हुआ है। जिस प्रकार से समान प्रकार के अपराध आर्थिक, राजनैतिक, व्यापारिक, व्यावसायिक, पारिवारिक, शारीरिक, मनोवैज्ञानिक लाभ के लिए किए जाते हैं उसी प्रकार साइबर क्राइम भी उपरोक्त लाभ के लिए ही किए जाते हैं, फर्क बस इतना है कि अन्य अपराधों में अपराधी शिक्षित या अशिक्षित होता है तथा प्रत्यक्ष हानि कारित है, जबकि साइबर क्राइम में अपराधी न तो प्रत्यक्ष हानि करता है और न ही वह अशिक्षित होता है। साइबर क्रिमिनल काफी पढ़ा-लिखा व तेज दिमाग का होता है।

मनोवैज्ञानिक डॉ. कविता पाण्डेय के अनुसार साइबर क्रिमिनल अक्सर किसी को नीचा दिखाने या बदला लेने की भावना से अपराध की दुनिया में कदम रखता है। एक अन्य मनोवैज्ञानिक डॉ० शैलेन्द्र के अनुसार साइबर क्रिमिनल बहुत शिक्षित होता है। साइबर क्राइम जितना बड़ा होगा, साइबर क्रिमिनल उतना ही शातिर होगा। ऐसे लोगों में चुनौतियों से लड़ने की क्षमता और आत्मविश्वास की कमी होती है। इन्टरनेट उन्हें सुरक्षित जरिया लगता है।

भारत दुनिया के उन प्रमुख देशों में है, जहाँ कम्प्यूटर क्रान्ति की बयार चल रही है। इन्टरनेट ने शहरों से आगे बढ़कर गाँवों का रूख कर लिया है। गाँवों गाँवों में साइबर कैफे/साइबर रेस्तरां का साइन बोर्ड झलक रहा है। नेट कनेक्शन देने के लिए टेलीफोन सेवा प्रदाताओं में होड़ लगी है। भारत दुनिया में कम्प्यूटर/ इन्टरनेट का प्रयोग करने वालों में चौथे स्थान पर है। इन कम्प्यूटर और नेट सेवाओं का भारत में भी दुरूपयोग होने लगा है तथा अपराध भी इनके माध्यम से कारित किया जाने लगा है। भारत में साइवर क्राइम किए जाने के प्रमुख कारण निम्नवत हैं-

(i) आर्थिक लाभ के लिए- कम्प्यूटर के जानकार बिना सीधे परिदृश्य में आए हुए आर्थिक लाभ के लिए साइबर क्राइम करने लगे हैं। इंटरनेट के माध्यम से साइबर क्राइम करना बड़ा आसान है। घर में बैठे बैठे पकड़े जाने के भय के बिना आर्थिक अपराध सरलता से कर लिया जाता है। कभी ई-मेल के जरिए भी पासवर्ड हैक करके, कभी बैंक एकाउण्ट से जानकारी करके, कभी क्रेडिट कार्ड चोरी करके आदि तरीकों से आर्थिक लाभ साइबर क्रिमिनल द्वारा लिया जाता है। कुछ युवकों ने ई-मेल के जरिए लाटरी के नाम पर लाखों रुपए हड़प लिएतथा उसे अपने खाते में जमा करके निकाल लिया। क्रेडिट कार्ड के माध्यम से पैसों की हेराफेरी कर ली जाती है। इलाहाबाद कृषि डीम्ड विश्वविद्यालय, नैनी, इलाहाबाद के कुलपति डॉ० आर० बी० लाल का ई मेल पासवर्ड चुराकर उनके विदेशी मित्रों को ई-मेल भेजकर हजारों डालर मँगाए गए। 

इसी प्रकार दो युवकों ने अमीर बनने के लिए कम्प्यूटर हैकर करके भेल (BHEL) के शेयर बाजार में बेच दिए। कम्पनी को जानकारी हुयी, तब उसने मुकदमा दर्ज कराया।

(ii) राजनीतिक लाभ के लिए अपने संगठन के प्रचार-प्रसार के लिए, रातो-रात सुर्खियाँ बटोरने के लिए, राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा पाने के लिए इन्टरनेट का लाभ लिया जाता है। पाकिस्तानी हैकर्स द्वारा वर्ष 2001 में इण्डियन साईस कांग्रेस तथा आई टी, राय, बंगलौर तथा आई आई टी चेन्नई की वेबसाइटों को हैक लिया गया था। इसी प्रकार कई बार नेट के जरिए राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री आदि प्रमुख व्यक्तियों को ई-मेल भेजा गया था। हाल ही में भारतीय राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल की पूना यात्रा को प्रभावित करने के लिए धमकी भरे ई-मेल किए गए थे

(iii) पारिवारिक कारण से भारत में ऐसे परिवार जहाँ माता-पिता दोनों नौकरी करते हैं या जहाँ माता-पिता में विवाद रहता है, अलगाव की स्थिति रहती है, वहाँ एकाकीपन ..के कारण बच्चे कम्प्यूटर और इन्टरनेट पर अधिक समय पास करते हैं और अनजाने में बच्चे साइबर अपराध कर बैठते हैं। कभी-कभी बच्चे पारिवारिक आर्थिक स्थिति तंग होने के कारण बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं तथा कम्प्यूटर की जानकारी होने के कारण अपना तनाव कम्प्यूटर इंटरनेट पर खेल, खेल करके बताते हैं। माता-पिता बच्चे पर ध्यान नहीं दे पाते हैं । अतः बच्चे साइबर क्राइम की ओर प्रवृत्त हो जाते हैं ।

(iv) सबक सिखने के उद्देश्य से कभी कभी स्कूल या कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र अपने किसी खास दोस्त या शिक्षक शिक्षिका को सबक सिखाने के उद्देश्य से या फिर उनके प्रति आकर्षिक होकर साइबर क्राइम कर डालते हैं। उन्हें इस बात का पता नहीं होता है कि वह जो कर रहे हैं, संगीन अपराध की श्रेणी में आता है।

(v) मनोवैज्ञानिक कारण से इंटरनेट के जानकार कभी-कभी मनोरंजनवश या अपनी जानकारी दूसरों पर प्रदर्शित करने के लिए या किसी को तंग करने या चिढ़ाने के लिए या फिर गोपनीय पत्रों को पढ़कर मनोरंजन करने के लिए साइबर क्राइम कर डालते हैं। महिलाओं एवं युवतियों के प्रेम पत्रों को उनके कम्प्यूटर में झांककर पढ़ना, दूसरे के पत्रों को कम्प्यूटर पर पढ़ना भी अपराध की श्रेणी में आता हैं जो कम्प्यूटर के जानकार जाने अनजाने में करते हैं। कार्यालयों में जब कोई व्यक्ति गोपनीय पत्र लिखते हुए अचानक कहीं चला जाता है तो ऐसे में दूसरा व्यक्ति उसकी फाइल खोलकर वह पत्र पढ़ लेता है तथा पत्र पढ़ने के बाद बंद करके वहाँ से चला जाता है। कभी-कभी साइबर क्रिमिनल (अपराधी) सूचनाओं की चोरी के साथ ही साथ जिस कम्प्यूटर के सम्पर्क में आते हैं, उसे करण्ट कर देते हैं या वायरस से प्रभावित कर देते हैं। कुछ वर्ष पूर्व आई आई टी के छात्रों द्वारा वी एस एन एल (VSNL) के वेलकम मैसेज “Welcome to VSNI” वेलकम टू रैनडोजवस द ग्रांड आई आई टी फेस्टीवल (Welcome to Randezous the Grand IIT Festival) रख दिया। यह आईआईटी छात्रों ने लाभ के लिए नहीं बल्कि अपनी आपसी खुशी के लिए किया परन्तु साइबर क्राइम में यह अपराध की श्रेणी में आता है ।

(vi) शारीरिक कारण - मन में उठ रही सेक्स सम्बन्धी इच्छाओं को तृप्त करने के कम्प्यूटर इन्टरनेट का सहारा युवा वर्ग के लोग लेते हैं। 75 से 80 लिए कम्यूसाइटें देखते हैं तथा इन्टरनेट के माध्यम से दूसरों को 80 प्रतिशत तक है । कई युवा तो इन्टरनेट के माध्यम से पड़ोसी, सहकर्मी या अन्य किसी व्यक्ति को सैक्युअल रूप से उत्पीड़ित करते हैं। इंटरनेट के माध्यम से भोली-भाली लड़कियों को देह-व्यापार में भी झोंका जा रहा है।

वर्ष 1997 में पूजा भट्ट का अश्लील नग्न फोटो इंटरनेट से डाऊन लोड करके स्टार डस्ट पत्रिका ने अपने मुख पृष्ठ पर छाप दिया था जिसमें पूजा भट्ट ने पत्रिका के ऊपर मुम्बई पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया था । साइबर कैफे में आने वाले अधिकांश युवक-युवतियाँ नग्न (पोर्न वेबसाइट देखते हैं और इन साइटों को देखने के साथ रिले चैटिंग भी करते हैं जिसमें सैक्युअल वार्तालाप भी होता है, जो अपराध की श्रेणी में आता है ।

(vi) व्यापारिक व्यसावसायिक कारण - कभी-कभी किसी संगठन में काम करने वाले कर्मचारी को लगता है कि उसे उपेक्षित किया जा रहा है, उसे कार्य का सही मूल्यांकन नहीं किया जा रहा है। ऐसे व्यक्ति किसी अधिकारी को या संगठन को नुकसान पहुँचाने के लिए साइबर क्राइम का सहारा लेते हैं।

व्यावसायिक प्रतिद्वंद्वी व्यवसाय में जल्दी तरक्की पाने एवं दूसरे को नुकसान पहुँचाने के लिए साइबर क्राइम का सहारा लेते हैं। साइबर क्राइम के तहत इस तरह के लोग अक्सर अपनी प्रतिद्वंद्वी कम्पनी के आँकड़ों या उनके गोपनीय दस्तावेज चोरी कर लेते हैं या फिर उसे नष्ट कर देते हैं।

(viii) प्रतिभा का स्वार्थ पूर्ति हेतु उपयोग - साइबर के तकनीकी विशेषज्ञ अपने स्वार्थ हेतु अपनी तकनीकी जानकारी का दुरूपयोग करते हैं तथा लाभान्वित होते रहते हैं । दूसरों को कम्प्यूटर व इन्टरनेट से नुकसान पहुँचाने से उनका अहम सन्तुष्ट होता है तथा वे यह सोचकर बार-बार अपराध करते हैं कि वे तकनीकी की जानकारी की वजह से दूसरों को हरा पाते हैं । ये साइबर अपराधी दूसरे व्यक्तियों की मुसीबत में देखकर खुश होते हैं। ये ऐसे तकनीकी विशेषज्ञ होते हैं कि इन्हें अपने आस-पास जहाँ भी कोई टेक्नालॉजिकल इन्स्ट्रूमेंट मिला, ये सक्रिय होकर उसका उपयोग करके अपराध कर डालते हैं ।

भारतवर्ष में प्रत्येक प्रकार का साइबर क्राइम हो रहा है। वर्ष 2005 में कोल्डड्रिंक में पेस्टीसाइड्स की मात्रा मानक से अधिकं रखे जाने की शिकायत पर साइंस एण्ड एनवायरनमेंट (CSE), नागपुर के वैज्ञानिकों को सरकार द्वारा उसको जाँच सौंपी गयी। इस संस्था के वैज्ञानिकों द्वारा जो साफ्ट ड्रिंक की रिपोर्ट जारी की गयी उसे जारी होते ही टैकर्स ने हैक कर लिया और CSE की आफिशियल वेबसाइअ को अपने कब्जे में ले लिया । साइंस एण्ड एनवायरनमेंट की निदेशिका के अनुसार देश में बिक रहे 11 ब्राण्ड के कोल्ड ड्रिंक्स के 12 राज्यों से लिए गए 57 नमूनों में कीटनाशक की मात्रा भारतीय मानक ब्यूरो (B.I.S.) द्वारा निर्धारित मानक से 22 से 25 गुना अधिक मात्रा में पायी गयी। सी एस ई की पॉल्यूशन मानिटरिंग लैब को उसकी विशेषज्ञता के लिए ISO 9001-2000 की प्रमाण पत्र प्राप्त है। इस रिपोर्ट को इसलिए सॉफ्ट ड्रिंक कम्पनियों ने हैकरों के जरिए हैक करा लिया ताकि यह रिपोर्ट आम आदमी तक न पहुँचे और उनकी बिक्री प्रभावित न हो ।

भारत में साइबर क्राइम के आँकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि विगत वर्षों में साइबर क्राइम के आँकड़ों में निरन्तर वृद्धि हो रही है। वर्ष 1998 में उपयोगकर्ताओं की संख्या 10,40,000 तक थी तो 2006 में यह संख्या 5,06,00,000 तक पहुँ गयी। इंटरनेट का प्रयोग बढ़ने से नये-नये साइबर क्राइम सामने उभरकर आ रहे हैं। आई० टी० एक्ट 2000 से पहले अपराधों को भारतीय दण्ड संहिता के अन्तर्गत दर्ज किया जाता था परन्तु आई. टी॰ एक्ट के बाद साइबर क्राइम से सम्बन्धित मामले इसके अन्तर्गत दर्ज किए जाते हैं।

आई० टी० एक्ट की कम जानकारी होने के कारण अभी भी अधिकार मामले भारतीय दण्ड संहिता की विभिन्न धाराओं के अन्तर्गत ही दर्ज कराये जाते हैं। वर्ष 2005 के आँकड़ों में आई० टी० एक्ट के अन्तर्गत जहाँ 179 साइबर क्राइम के मामले दर्ज किए वहीं भारतीय दण्ड संहिता की विभिन्न धाराओं के अन्तर्गत 302 मामले दर्ज किए गए। सामान्यतयाः समाज' में यह धारणा व्याप्त है कि समाज साइबर क्राइम को नवयुवकों द्वारा अंजाम दिया जाता है। परन्तु आँकड़े दर्शाते हैं कि 42-9 प्रतिशत अपराध 30 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगों द्वारा किए जाते हैं तथा 37.4 प्रतिशत अपराध 18 से 30 वर्ष की आयु वर्ग के व्यक्तियों द्वारा किए जाते हैं। अन्य राज्यों एवं केन्द्रशासित राज्यों की तुलना में स्थित इसके बिल्कुल विपरीत है। दिल्ली में 15 से 21 अपराधी 18 वर्ष से कम आयु वर्ग थे ।

एन० सी० आर० बी०, नई दिल्ली द्वारा जारी भारत में अपराध 2005 रिपोर्ट में भारत में वर्ष 2005 में आई० टी० एक्ट के तहत दर्ज विभिन्न प्रकार के साइबर क्राइम का विवरण निम्नवत् है—

1. कम्प्यूटर सोर्स विभाग में अनाधिकृत परिवर्तन
(धारा-65, I.T. Act. 2000)

2. हैंकिंग के जरिए कम्प्यूटर की उपयोगिता के रूप में हानि / नष्ट करना । 
(धारा-66 (1), I.T. Act. 2000)

3. हैंकिंग (धारा-66 (2), I.T. Act 2000) 

4. अश्लील साहित्य का प्रकाशन और इलेक्ट्रॉनिक रूप से सम्प्रेषण
( धारा 67, I.T., ct - 2000) 

5. अनधिकृत पहुँच (धारा - 70, I. T. Act-2000)

6. झूठे प्रमाणपत्र का प्रकाशन (धारा- 71, I.T. Act-2000) 

7. डिजिटल हस्ताक्षरों की जालसाजी
(RT-73/74 I.T. Act-2000) 

8. विश्वास / निजता / विच्छेद का उल्लंघन (धारा-72 I.T. Act-2000)

भारत वर्ष में आई० टी० एक्ट 2000 के तहत वर्ष 2002 70 वर्ष 2003 में 60 वर्ष 2004 में 68 तथा वर्ष 2005 में 179 मामले दर्ज हुए। भारत 2005 में 179 साइबर क्राइम के तहत सर्वाधिक कार्यवाही धारा 67 आई० टी० एक्ट-2000 के तहत हुयी है ।

भारत में दर्ज मामलों की संख्या वास्तविकता से कम पाई जाती है। इसका प्रमुख कारण लोगों में आई० टी० एक्ट 2000 की कम जानकारी तथा कुछ मामलों में समाज का दबाव भी पाया जाता है। केवल 50 प्रतिशत लोग ही मामलों की शिकायत करते हैं तथा इसमें से भी केवल कुछ व्यक्तियों की ही रिपोर्ट दर्ज हो पाती है। सैक्स सम्बन्धी मामलों में पीड़ित बहुधा महिलाएँ होती हैं। समाज में लज्जा तथा भय से वह ऐसे मामलों की रिपोर्ट ही नहीं करतीं। दिल्ली का एसएमएस तो केवल एक मामला है जो सामने आ सका। ऐसे कितने मामले होते हैं जिनमें महिला का उत्पीड़न किया जाता , परन्तु समाज का उत्पीड़न किया जाता है, परन्तु समाज के भय से वे इन अपराधों की शिकायत ही नहीं करती है। इस एक्ट के तहत दर्ज मामले जले के एस० पी० (वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक) की अनुमति से ही दर्ज किए जाने की बात के कारण भी तमाम अभियोग दर्ज नहीं हो पा रहे हैं। भारत में साइबर क्राइम तेजी से बढ़ रहा है। इस पर रोक लगाने का एकमात्र उपाय जनता में जागरूकता फैलाकर लोगों को सचेत करना ही है।

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