(Cyber Crime in India)
भारत में पुणे में स्थित सी-डैक (C-DAC ) नामक संस्थान ने तकनीकी पहलू के आधार साइबर क्राइम को चार वर्गों में बाँटा है। इसमें अनाधिकृत डाटा एक्सेस, क्राइम में कम्प्यूटर का उपकरण की तरह उपयोग, अन्य अपराधों में कम्प्यूटर की उपस्थिति और कम्प्यूटर की सुविधाओं का अनुचित लाभ उठाने को शामिल किया है।
इसके अतिरिक्त साइबर क्राइम को तकनीकी तौर पर अलग-अलग श्रेणियाँ दी गई हैं। इसमें चैटिंग, क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी औन मनी लांडिंग आदि को फाइनेंशियल साइबर क्राइम, पोर्नोग्राफिक फोटो वाली वेबसाइट्स, कम्प्यूटर डिजाइन पोर्नोग्राफिक फोटो वाली मैग्जींस आदि जैसे कार्य को साइबर पोर्नोग्राफिक क्राइम, नोर्कोटिक्स हथियार जैस प्रतिबन्धित चीजों को पोस्टिंग इन्फारमेशन वेबसाइट, ऑक्शन वेबसाइट, बुलेटिन बोर्ड अथवा · साधारण तरीके से ई-मेल के जरिए बेचने की कोशिश को इल्लीगल आर्टिकल सेल साइबर क्राइम, इन्टरनेट पर चल रही लाखों ऑन लाइन गैम्बलिंग वेबसाइट्स और नेट के जरिए हो. रहे हवाला कारोबार जैसी बातों ऑन लाइन, गैम्बलिंग साइबर क्राइम, सॉफ्टवेयर पायरेसी कॉपीराइट इनफ्रिंजमेंट, ट्रेडमार्क्स वायलेसन, कम्प्यूटर सोर्सेज के जरिए चोरी को इनटेलेक्चुअल प्रापर्टी साइबर क्राइम, किसी का ई-मेल एड्रेस चोरी कर उसके जरिए गलत काम करने जैसे काम को ई-मेल स्पूफिंग साइबर क्राइम, किसी के लिए नेअ पर बदनामती वाले ई-मेल भेजना अथवा धमकी देना आदि को साइबर डिफेमेशन क्राइम, किसी की हरकतों पर नजर रखना और उसे नेट के जरिए मैसेज भेजकर परेशान करना जैसे चैटरूम में अनावश्यक रूप से मैसेजों की बमबारी कर देना आदि को साइबर स्टाकिंग क्राइम तथा किसी के निजी अथवा नेट से जुड़े कम्प्यूटर सिस्टम के लीगल प्रोटेक्शन यानी पासवर्ड को हैक करते हुए ड छेड़छाड़ करना, बदलाव करना, वायरस भेजना आदि को अनऑथराइज्ड एक्सेस साइबर क्राइम की श्रेणी दी गई है।
भारत के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कम्प्यूटर इन्टरनेट की पहुँच हो गयी है। कम्प्यूटर इन्टरनेट में इन्टरनेट प्रयोग करने वाले देशों की सूची में अमेरिका, चीन और जापान के बाद चौथे स्थान पर है। स्पष्ट है कि भारत दुनिया का चौथा साइबर देश है। भारत में अब हर प्रकार का साइबर क्राइम होने लगा है। वर्ष 2005 के आँकड़ों के अनुसार देश के सभी राज्यों (केन्द्र शासित प्रदेशों को छोड़कर) में साइबर क्राइम के तहत आई० टी० एक्ट के तहत 167 मामले तथा आई० पी० सी० के तहत 294 मामले दर्ज किए गए। यदि केन्द्र शासित प्रदेशों को भी शामिल कर लिया जाय तो वर्ष 2005 में यह संख्या आई० टी० एक्ट के तहत 179 तथा आई० पी० सी० के तहत 302 थी। बंगलौर, सूरत, , चेन्नई तथा दिल्ली सर्वाधिक साइबर क्राइम वाले शहर हैं ।
भारत में सी० बी० आई की साइबर क्राइम सेल को पूरे भारत में साइबर क्राइम की . विवेचना का क्षेत्राधिकार प्राप्त हैं । वगत कुछ वर्षों में सी० बी० आई की साइबर क्राइम सेल ने वेब आधारित क्राइम जैसे पोर्नोग्राफी, ट्रेकिंग, ई-मेल बाम्बिंग, वैब साइट्सों का डिफेसमेंट, क्रेडिट कार्ड जालसाजी, ऑनलाइन फ्राड, साइबर स्टाकिंग आदि मामलों को खोलने में विशेषज्ञता प्राप्त की है। अब तक सी० बी० आई० की साइबर क्राइम सेल द्वारा निम्न मामले अनावरित किए जा चुके हैं-
(1) ई-मेल बाम्बि
ब्रिटेन के एक शिकायतकर्ता द्वारा ई-मेल बाम्बिंग का केस दर्ज कराया गया। इस मामले में शिकायतकर्त्ता इंटरनेट आधारित व्यवसाय करता था। वर्ष 2001 के अन्त में उसके ई-मेल बॉक्स में लाखों ई-मेल आए जिस कारण वह अपने वास्तविक ई-मेल प्राप्त नहीं कर सका। इसके फलस्वरूप उसको व्यवसाय में अत्यधिक हानि हुई । लाखों ई-मेल भेजने वाले पांडिचेरी का 16 वर्षीय युवक था तथा वह बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ चुका था । मेल युवक द्वारा परेशान करने के इरादे से भेजे गए थे क्योंकि शिकायतकर्ता के सम्बन्धी के ये साथ उनका कुछ विवाद हुआ था । पांडिचेरी की अदालत में उसके विरुद्ध मुकदमा चलाया। गया जिसमें दोषी युवक ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इस मामले में अदालत द्वारा अपराधी को एक वर्ष की सजा सुनाई गई।
(2) हैंकिंग
वर्ष 2002 में केन्द्रीय सरकार के संगठनों द्वारा उनकी वैब साइट्स हैक करने के दो | मामले दर्ज कराये गये। वैब साइटें हैक करने के एक मामले में एआईसी नाम से जाने वाले समूह को दोषी पाया गया। यह समूह पाकिस्तान का था। इस समूह के विस्तृत विवरण के लिए पाकिस्तान सरकार को एक पत्र भेजा गया परन्तु इस सम्बन्ध में अभी तक कोई भी उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है। दूसरे मामले में एक अन्य समूह एफबीएच (Federal Burau of Hackers) के द्वारा साइट्स हैक की गयी। समूह के सम्बन्ध में अपर्याप्त सबूत और सूचनाएँ होने के कारण मामले को बंद कर दिया गया अन्तिम रिपोर्ट लगा दी गयी। इस सम्बन्ध में कोर्ट के द्वारा केस बंद करने की अन्तिम रिपोर्ट भी स्वीकार की जा चुकी है।
(3) क्रेडिट कार्ड का दुरूपयोग
(i) एम्स का मामला - एम्स के वरिष्ठ डॉक्टर की शिकायत पर एक मामला दर्ज किया गया। डॉक्टर की शिकायत थी कि उसके क्रेडिट कार्ड का इंटरनेट पर दुरूपयोग किया गया है जिसके परिणामस्वरूप उनका बिल बहुत अधिक आया। यूएस गोपनीय सेवाओं के माध्यम से यह पता लगाया कि इस क्रेडिट कार्ड नम्बर का प्रयोग पोर्न साइट्स पर पहुँचने के लिए किया गया था तथा जिस आई० पी० एड्रेस के द्वारा पोर्न साइट्स का भुगतान हु वह प्रदाता एम्स का पाया गया था तथा यह प्रदाता एम्स में फैकल्टी और छात्रों को इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराता था। एक छोटा प्रदाता होने के कारण एम्स द्वारा लाग-बुक एवं प्रवेश का विस्तृत रिकार्ड नहीं रखा जाता था जिसके कारण 300 उपयोगकर्ताओं के बीच से संदिध को नहीं पकड़ा जा सका ।
(ii) क्रेडिट कार्ड सम्बन्धी सूचनाओं को बेचना - इंटरनेट पर एक अनजान व्यक्ति द्वारा क्रेडिट कार्ड सम्बन्धी सूचना स्त्रोत बेचने का मामला दर्ज किया गया। यह व्यक्ति : इंटरनेट रिले चैट के माध्यम से क्रेडिट कार्ड विवरण इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को बेचता था । उसके बदले मैसर्स वैस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर के द्वारा धन प्राप्त करता था । वैस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर के रिकार्ड से यह रहस्य खुला कि भुगतान पुणे में किया गया था। वैस्टर्न यूनियन के क्लर्क की पहचान पर दोषी को गिरफ्तार किया गया। वैस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर के रिकार्ड से यह भी जानकारी प्राप्त हुई कि दोषी इससे पूर्व विभिन्न नामों से 50 से भी अधिक बार इस धंधे से धन प्राप्त कर चुका था। एक अन्य व्यक्ति जो मैसर्स वैस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर से धन प्राप्त करता था वह भारत से बाहर का व्यक्ति था और उसकी पहचान प्रमाणित नहीं की जा सकी।
(iii) आईआरटीसी (IRTC) मामले - नवम्बर 2002 से फरवरी 2004 के बीच भारतीय रेल की वेबसाइट से चोरी किए गए क्रेडिट कार्ड द्वारा धोखाधड़ी से भारतीय रेल के टिकट खरीदने के 3 मामले प्रकाश में आए। मामले में पकड़े गए दोषी व्यक्तियों, ने खुलासा किया कि उन्होंने दूसरे व्यक्तियों के क्रेडिट कार्ड का विस्तृत विवरण सोशल इंजीनियरिंग नामक प्रोग्राम द्वारा प्राप्त किया था। ये सभी मामले न्यायालय में लम्बित चल रहे हैं।
(iv) एअर टिकट ठगी--एक टिकट कम्पनी द्वारा शिकायत की गई कि कोई अनजान व्यक्ति चोरी के क्रेडिट कार्ड का प्रयोग करके उनसे हवाई यात्रा के टिकट खरीदने का प्रयास कर रहा है। ये टिकट हैदराबाद स्थित एक ट्रेवल एजेंट को भेजे जाने थे। उस ट्रेवल एजेंट से पूछताछ के आधार पर यह पता चला कि एक नाइजीरियन नागरिक द्वारा यह टिकट बुक कराए गए थे तथा उसके द्वारा एक फोन नम्बर भी दिया गया था जिसके आधार पर नाइजीरियन नागरिक की विस्तृत जानकारी ली गई। शिकायतकर्ता पता चला कि दिये गये यात्रियों के नामों से दिल्ली में भी टिकट भेजने की प्रार्थना की गई है तथा उसी मोबाइल नम्बर को दिया गया था, जो हैदराबाद के ट्रेवल एजेंट को दिया गया था। इस मोबाइल नम्बर के पते के आधार पर नाइजीरियन नागरिक एवं उसके अन्य साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया तथा उनके कब्जे से बड़ी मात्रा में क्रेडिट कार्ड की बरामदगी हुई तथा अन्य जानकारी भी प्राप्त हुई। दिल्ली में अपराधी विरूद्ध चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें न्यायालय के समक्ष अपराधी द्वारा अपना अपराध स्वीकार कर लिया गया, इसके आधार पर दोषी व्यक्ति को 90 दिन की कारावास की सजा तथा 2000 रुपये का जुर्माना किया गया।
(4) साइबर स्टाकिंग
साइबर स्टाकिंग के अन्तर्गत एक महिला द्वारा अश्लील ई-मेल प्राप्त करने की शिकायत दर्ज करायी गयी, जिसे ई-मेल भेजने वाले को पहचान कर गिरफ्तार कर लिया गया । दोषी व्यक्ति उस महिला का परिचित था । दोषी के कार्यालय के कम्प्यूटर से ई-मेल पता तथा अन्य मेल भी प्राप्त की गयी, जिसके आधार पर उसके विरुद्ध चार्जशीट दी गयी, - परन्तु केस के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा इस सम्बन्ध में राजीनामा का प्रार्थना पत्र दिया गया। यद्यपि दोषी व्यक्ति द्वारा अपराध स्वीकार कर लिया गया था परन्तु न्यायालय के द्वारा उसके बयान लेने के बाद समझौते को स्वीकार कर लिया ।
एक अन्य मामले में एक अन्य महिला द्वारा अश्लील ई-मेल तथा उसकी फोटो को अन्य किसी अश्लील फोटो के साथ मिश्रित करके अश्लील तस्वीर एक वेबसाइट पर डालने की शिकायत दर्ज कराई गयी। जाँच के दौरान दोषी व्यक्ति की पहचान कर पाया गया कि वह शिकायतकर्ता महिला का पुराना सहकर्मी था। शिकायतकर्ता महिला की शादी के बाद दोषी व्यक्ति ने महिला की फोटो प्राप्त कर इंटरनेट से अन्य अश्लील तस्वीर को डाउनलोड करके मिश्रित कर दिया। यह मिश्रित अश्लील फोटो दोषी व्यक्ति के कार्यालय के कम्प्यूटर से भी प्राप्त हुई। मामला न्यायालय में लम्बित चल रहा है ।
(5) जॉब फ्रॉड
नौकरी के लिए ठगी के एक मामले में पीड़ित द्वारा शिकायत की गई कि किसी अनजान व्यक्ति ने विदेशों में नौकरी दिलाने के बहाने उससे 48,000 रुपये ठग लिए हैं। उस व्यक्ति द्वारा प्रलोभन देने के लिए कम्पनी की झूठी ई-मेल आईडी का प्रयोग किया जा रहा था। यद्यपि अपराधी दिल्ली से इंटरनेट का प्रयोग कर रहा था। उसके बैंक एकाउंट में दिए गए पते भी गलत थे परन्तु स्थानीय विवेचना की मदद से संदिग्ध का पता लगा लिया। गया है कि वह बंगाल का रहने वाला था। उसको पैतृक स्थान से साक्ष्यों के साथ गिरफ्तार किया गया। वह आपराधिक सबूत खाने का भी छोषी पाया गया। उसने इससे पूर्व भी बंगलौर से नेपाल तक भी बहुत लोगों को ठगा था। मामला न्यायालय में लम्बित चल रहा है।
(6) आक्शन फ्रॉड
सीबीआई में आक्शन फ्रॉड के दो मामले दर्ज कराए गए। जिसमें प्रथम मामले में दोषी व्यक्ति ने जनवरी से फरवरी 2003 के मध्य लोगों को इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के नीलाम करने की सूचना नीलामी की वैबसाइट पर डालकर धोखा दिया था। इस मामले में बैंक एकाउंट के आधार पर, जिससे उपयोगकर्ताओं द्वारा खरीददारी हेतु भुगतान कराया गया था, दोषी व्यक्ति की पहचान की गई जो कि मदुरै का निवासी था तथा इंजीनियरिंग का छात्र था। उस पर सात धोखाधड़ी के मामले सिद्ध हुए जिसके आधार पर उसके विरुद्ध चार्जशीट दी गई।
एक अन्य मामले में अपराधी विभिन्न नीलामी वेबसाइट्स पर अपना मोबाइल नीलाम करके लोगों को धोखा दे रहा था, इस मामले में अपराधी व्यक्ति द्वारा बैंक एकांउट में दिया गया पता गलत पाया गया, परन्तु बैंगलोर पुलिस तथा बाद में दिल्ली पुलिस द्वारा इस प्रकार के अन्य दर्ज मामलों में वह व्यक्ति पकड़ा गया। वह अपराधी व्यक्ति मलेशिया का नागरिक था तथा बैंगलोर में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था। इस मामले में चार्जशीट दी जा चुकी है।
भारत का प्रथम साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन
सितम्बर 2001 में भारत में बंगलौर (कर्नाटक) में देश के पहले साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की स्थापना की गयी। इस पुलिस स्टेशन का प्रभारी अधिकारी डिप्टी एस० पी० स्तर का है। इसके अतिरिक्त तीन इन्सपेक्टरों की भी नियुक्ति की गयी है। यह पुलिस स्टेशन 24 घण्टे कार्यरत रहता है। इस पुलिस स्टेशन पर कोई भी पीड़ित व्यक्ति ऑनलाइन अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। यह पुलिस स्टेशन पूरे राज्य में घटने वाले साइबर क्राइम को आई० टी० एक्ट, 2000 के तहत दर्ज करता है। हैदराबाद, मुम्बई, दिल्ली आदि शहरों में भी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशनों की स्थापना की गयी ।
मुंबई साइबर लैब
महाराष्ट्र में साइबर क्राइम की जाँच करने हेतु प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए मुम्बई में साइबर लैब की स्थापना की गयी हैं। पुलिस विभाग के विभिन्न रैंक के अधिकारियों को साइबर क्राइम की विवेचना का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों की कम्प्यूटर हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर के अतिरिक्त कम्प्यूटर तथा इंटरनेट की अन्य विधाओं का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। उदाहरणार्थ – डिजिटल ।
सबूतों का संकलन, आईपी एड्रेस का पता लगाना, साइबर क्राइम के प्रकार, आईटी एक्ट, प्राथमिकी दर्ज करना, मोबाईल फोरेंसिक और वायरस / ट्रोजन्स वार्मस आदि का पता लगाना। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केस स्टडीज दी जाती है। प्रशिक्षण में प्रमुख रूप से व्यावहारिक सीख पर अधिक बल दिया जाता है ।
मोबाईल फोन के जरिये भी सैक्स साइबर क्राइम में वृद्धि हो रही है। मोबाइल फोन ने जहाँ सूचना तकनीक के क्षेत्र में उल्लेखनीय उन्नति की है वहीं इसका दुरूपयोग भी बढ़ा है। मोबाइल का दुरूपयोग स्वयं मालिक या अन्य व्यक्तियों के द्वारा भी किया जा सकता हैं। जैसे कोई व्यक्ति किसी दूसरे के मोबाइल से किसी को भी अभद्र संदेश भेज देता हैं तो ऐसी स्थिति में वही व्यक्ति अपराधी होता है जो मोबाइल का मालिक होता है।
साइबर क्राइम कभी-कभी पूर्व योजना के तहत भी किया जाता है, जैसे—चैटिंग करते समय फर्जी मेल का प्रयोग करना। फर्जी मेल से कई बार ये व्यक्ति महिलाओं को परेशान करने के लिए आपत्तिजनक संदेश और फोटो भेज देते हैं। मनोचिकित्सकों के अनुसार साइबर क्राइम करने वाला व्यक्ति कभी-कभी किन्हीं खास हालत में क्रिमिनल बन जाता है और अपराध कर बैठता है। इस प्रकार साइबर क्राइम भी अन्य अपराधों की भांति किसी भी • व्यक्ति, किसी भी आयु वर्ग किसी भी सामाजिक वर्ग के द्वारा किया जा सकता है। साइबर क्राइम ने समाज में ऐसी समास्या पैदा की है। जिसका निवारण समय रहते किया जाना आवश्यक है
सी० बी० आई० की साइबर लैब देश की आधुनिकतम साइबर लैब है, जो नयी दिल्ली में स्थित है तथा जहाँ साइबर क्राइम के विशेषज्ञ नियुक्त है । उत्तर प्रदेश में भी आगरा, लखनऊ तथा गौतम बुद्ध में साइबर शैल का गठन किया गया है। देश के सभी प्रदेशों व केन्द्र शासित राज्यों में साइबर सेल / साइबर पुलिस स्टेशन का गठन होना चाहिए। न्यायालयों में भी जजों को साइबर क्राइम से सम्बन्धित उपकरणों के सम्बन्ध में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए तथा ई-कोर्टस की स्थापना की जानी चाहिए ।
आज कम्प्यूटर हमारी एक ऐसी जरूरत बन गया है जिसके बिना सुखी जीवन की कल्पना भी किया जाना सम्भव नहीं है। साइबर क्राइम का बढ़ना कम्प्यूटर के ऊपर के हमारी बढ़ती हुई इसी निर्भरता पर आधारित है तथा इसी कारण साइबर क्राइम को जड़ से समाप्त नहीं किया जा सकता। लेकिन आज साइबर क्राइम ने एक ऐसी गम्भीर चुनौती पुलिस व प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत की है जिससे निपटने के लिए हमें अपने आपको पूरी तरह तैयार रखने की आवश्कता है। इसके लिए जहाँ कम्प्यूटर इस्तेमाल करने वालों को अत्यधिक सतर्क रहना होगा वहीं पर पुलिस अधिकारियों को भी कम्प्यूटर से सम्बन्धित नवीनतम जानकारियों के रूबरू रहना होगा।
प्रायः यह देखा गया है कि साइबर क्राइम के भुक्त भोगी पुलिस तक अपनी शिकायत नहीं पहुँचाते हैं जिसके कारण अपराधियों के विरूद्ध कार्यवाही नहीं हो पाती है। ऐसे सभी मामलों को पुलिस के तत्काल संज्ञान में लाये जाने की जरूरत है ताकि एक सुनियोजित योजना के अन्तर्गत साइबर क्राइम को नियन्त्रित कर इस पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
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