रविवार, 25 जून 2023

साइबर क्राइम

साइबर स्कवैटिंग

इसका तात्पर्य ऐसी गतिविधि से है, जिसमें किसी स्थापित कंपनी के नाम को चुरा लिया जाता है या अपना लिया जाता है। फिलहाल इस तरह के मामलों को ट्रेड एण्ड मर्केंडाइज ऐक्ट, 1958 और ट्रेड मार्क्स ऐक्ट, 1999 के तहत ही दर्ज किया जा सकता है। आई० टी० एक्ट में इसका कोई प्रावधान नहीं है। ट्रेड एण्ड मर्केंडाइज ऐक्ट, 1958 और ट्रेडमार्क्स एक्ट, 1999 आज की बदली हुयी परिस्थितियों में कम प्रभावी हैं।

साइबर स्टाकिंग

किसी व्यक्ति को अवांछित या अयाचित सूचनाएँ भेजकर आतंकित करने को साइबर स्टाकिंग कहा जाता है। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक संचार या इन्टरनेट के माध्यम से साइबर क्रिमिनल छिपकर दूसरे व्यक्ति को तंग करता है तथा बार-बार पीड़ित को धमकी भी देता है। साइबर स्टाकिंग में अपराधी अधिकतर पुरुष वर्ग के तथा पीड़ित अधिकतर महिला वर्ग की होती है। यह अपराध दुनिया में कहीं भी पीड़ित के पड़ोसी द्वारा भी किया जा सकता है । 'साइबर स्टाकर कभी-कभी बुलेटिन बोर्ड और चैट रूम के माध्यम से तीसरी पार्टी को संलिप्त कर सकता है। इंटरनेट का प्रयोग करने के कारण अपराधी एवं पीड़ित का आमना-सामना नहीं हो पाता है और अपराधी बार-बार वही संदेश पीड़ित को भेजता रहता है तथा इसमें अपराधी की पहचान सदैव छिपी रहती है। स्टाकिंग का काम तीन प्रकार के साइबर अपराधी कर सकते हैं-

(i) पीड़ित के पूर्व परिचित,

(ii) पीड़ित से अनजान व्यक्ति तथा 

(iii) पीड़ित से अचानक परिचय में आए व्यक्ति 

स्टाकिंग के पीछे प्रमुख कारण दूसरे व्यक्ति को परेशान करना, बदला लेने की प्रवृत्ति तथा ब्लैकमेल करना होता है। स्टाकिंग के क्रिमिनल अश्लील, द्विअर्थी या अपमानित करने वाले मैसेज चैटरूम, वीडियो क्रांफ्रेसिंग, बुलेटिन या मैसेज बोर्ड, ई-मेल त्वरित संदेश, एस एम एस का प्रयोग करते । कभी-कभी ये अपराधी ई-मेल के जरिए वायरस भी प्रेषित कर देते हैं। जिससे कम्प्यूटर सिस्टम हैंग कर जाता है।

इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारियों का उपयोग किसी भी व्यक्ति को तंग करने के लिए जाने की शिकायतें मिली हैं। हाल ही में दिल्ली के एक युवक को पुलिस ने इसलिए गिरफ्तार किया था क्योंकि उसने अपनी एक स्त्री रिश्तेदार को तंग करने के लिए उसका नाम पता और फोन नंबर एक ऐसी वेबसाइट पर पोस्ट कर दिया था जहाँ से उस स्त्री को वेश्यावृत्ति के लिए संपर्क किया जाता था ।

इंटरनेट पर अश्लील कही जाने वाली सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। इस साधन पर नियंत्रण नहीं होने के कारण पूरी दुनिया में हजारों की संख्या में ऐसे साइट उपलब्ध जो अपने सदस्यों को एक नियमित भुगतान करने पर अश्लील चित्र और अन्य ऐसी ही सामग्री उपलब्ध कराती हैं। इनका उपयोग भी स्टाकिंग करने वाले अपराधी करते हैं

साइबर गैम्बलिंग

साइबर क्राइम के क्षेत्र में यह नया क्षेत्र उभरा है। इसमें इंटरनेट के माध्यम से गैम्बलिंग (जुआखोरी) की जाती है। ऑन लाइन जुआखोरी चौबीसों घण्टे चलती रहती है । नेट पर कैसिनो चल पड़े हैं। तमाम फ्री साइटें इसमें सक्रिय हैं। इन पर क्लिक करते हीं "व्यक्ति ऑन लाइन लाटरी के जाल में उतर जाता है। भारी इनामों की घोषणा के साथ इन साइटों पर जाने का लालच पैदा किया जाता है। मुफ्त में धन किसे बुरा लगता है, लिहाजा नेट पर जुआखोरों की संख्या बढ़ती जा रही है। आज सबसे अधिक जुआखोरी पूरी दुनिया में आस्ट्रेलिया में हो रही है। आस्ट्रेलियाई सरकार ने कानूनी तौर पर सुव्यवस्थित ऑन लाइन जुआ चलाने में पहल करते हुए लैसेटर्स ऑनलाईन (Lasseters Online) को सबसे पहला पूरी तरह सुसंचालित लाइसेंसी ऑनलाइन कैसिनों बना दिया है।

क्रिश्चयन कैपिटल एडवाइजर्स नामक संस्था के एक सर्वे के मुताबिक 2009 तक ऑन लाइन जुआ उद्योग लगभग 3.5 बिलियन डॉलर का हो जाएगा । ऑन लाइन कैसीनी लेसेटर्स ऑनलाइन की कमाई 32 प्रतिशत प्रतिमाह की गति से बढ़ रही है। इसके 99% जुआरी दुनिया के दो सौ देशों में फैले हुए हैं। एक अन्य ऑनलाइन जुआ घर सेन्टरबेट तो बाकायदा कानूनी शोध करके विधिक तरीके से जुआ खिलाता है। जिस इलाके में जुआ खेलने की पांबदी है वहाँ जुआ खिलाने से पहले वह कुछ ऑनलाइन औपचारिकताएँ पूरी करके यह सुनिश्चित करना कि जुआरी कानून से बाहर तो नहीं जा रहा है।

साइबर डिफेमेशन या वेब डिफेमेण्ट

इस प्रकार के अपराध में किसी व्यक्ति द्वारा अन्य किसी इंटरनेट उपयोगकर्ता का पासवर्ड तोड़कर उसके नाम से दूसरे व्यक्ति (सगे-संबंधी, दोस्त, सहकर्मी या पारिवारिक मित्र ) को बदनाम करने वाली ई-मेल भेजी जाती है जिसकी जानकारी उपयोगकर्ता को नहीं हो पाती है और बाद में जिसके पास ई-मेल पहुँचाती है, वह उससे वाद-विवाद करता एक उदाहरण से इसको समझ सकते हैं-

एक अनुराधा नाम की युवती की शादी अनुराग नाम के युवक के साथ तय हो गयी। दोनों एक दूसरे को बहुत चाहते थे और पसंद भी करते थे। एक दिन अनुराधा को • अनुराग का व्यवहार कुछ अजीब सा लगा। पूछने पर अनुराग ने बताया कि उसके घर देर सारी ई-मेल प्राप्त हो रही है जिसमें अनुराधा के बारे में तमाम तरह की गलत बातें लिखी गयी हैं, जिसके कारण उसके घर में तनाव हो गया है। अनुराधा के कहने पर अनुराग ने इसकी सूचना पुलिस को दी। छानबीन से पता चला कि अनुराग के घर सारी ई-मेल अनुराधा के सौतले पिता ने भेजी थी । वह अनुराधा की शादी नहीं होने देना चाह रहा था ताकि वह उसकी दौलत पर ऐश करता रहे।

स्पूफिंग

स्पूफिंग का अर्थ है— नेटवर्क या इंटरनेट पर किसी अन्य मेजबान (होस्ट) के आई पी एड्रेस का प्रयोग कर स्वयं को उसके रूप में दर्शाना। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि झूठे नाम से या झूठी ई-मेल एड्रेस (पते) से भेजे गए ई-मेल को स्पूफिंग कहा जाता है। स्पूफिंग करने वाला चाहे तो आसानी से हैकिंग कर सकता है या बिना ऑथेन्टिशन किसी भरोसेमंद होस्ट के नाम से किसी अन्य होस्ट में प्रवेश पा सकता है । -

उदाहरण- शिव कुमार अपने ई-मेल एड्रेस s-kumar@hotmail.com से अपने मित्रों तथा सगे संबंधियों को ई-मेल भेजता तथा प्राप्त करता था। पूजा, शिवकुमार की मित्र थी, जिससे शिवकुमार का दोस्त मोहन भी मित्रता करना चाहता था, लेकिन सफल नहीं हुआ। जिससे नाराज होकर मोहन, पूजा को दुर्भावना पूर्ण ई-मेल भेजने लगा जो शिवकुमार के ई-मेल s-kumar@hotmail.com से भेजी हुई प्रतीत होती थी । इन दुर्भावनापूर्ण ई-मेल के कारण शिवकुमार और पूजा के संबंधों में तनाव उत्पन्न हो गया ।

इंटरनेट रिले चैट

यह इंटरनेट कनेक्शन धारण करने वाले दो व्यक्तियों के मध्य संपर्क का एक साधन हैं। इसमें उपयोगकर्त्ता द्वारा टाइप किया गया संदेश दूसरे उपयोगकर्ता के कम्प्यूटर स्क्रीन पर प्रदर्शित होता है तथा उस उपयोगकर्ता द्वारा टाइप किया गया संदेश पहले उपयोगकर्ता के कम्प्यूटर स्क्रीन पर प्रदर्शित होता है। इस प्रकार इंटरनेट का उपयोग कर किसी एक व्यक्ति या पूरे चैनल पर उपलब्ध व्यक्तियों से कम्प्यूटर पर टाइपिंग के माध्यम से ऑनलाइन • बातचीत की जाती है। उस सुविधा का उपयोग युवा विशेषकर आधुनिक ख्यालों के लोगों द्वारा किया जा रहा है। इसमें युवाओं द्वारा अश्लीलता से वार्तालाप किया जाता है और विपरीत लिंग के लोगों से नग्नता पूर्ण वार्ता की जाती है। तमाम साइटों पर अश्लील व नग्नता पूर्ण यौन संतुष्टि वाले वार्तालाप करने के लिए पुरुष एवं स्त्रियाँ अपने-अपने एड्रेस दर्ज कराकर नेट पर मौजूद रहते हैं। यह कार्य भी अपराध की श्रेणी में लाया जाना चाहिए।

साइबर बुलिंग

साइबर बुलिंग में स्कूल जाने वाले छात्रों द्वारा अपने साथियों या दोस्तों को परेशान करने के लिए बेनाम एसएमएस अथवा बेनाम-ई-मेल भेजा जाता है जिसका उद्देश्य उस बच्चे को चिढ़ाना तथा परेशान करना होता है। इस तरह की नाम बदलकर की गई अथवा बेनामी ई-मेल अथवा एसएमएस से बच्चे को भद्दा, कंजूस, मोटा अथवा किसी अन्य प्रकार का कोई नाम दिया जाता है, जिससे ई-मेल / एसएमएस पाने वाला बच्चा परेशान हो जाता है। ये ई-मेल कई बार बच्चों पर गहरा मनोवैज्ञानिक असर डालते हैं। एक मामले में ई-मेल द्वारा एक बच्चे की शक्ल-सूरत का मजाक उड़ाया गया तथा उसके तरह-तरह के कई नाम रखे गए जिससे यह बच्चा बिल्कुल टूट गया तथा उसने स्कूल जाना बिल्कुल बंद कर दिया।'

इस तरह की साइबर बुलिंग विशेष रूप से पश्चिम के देशों में होती है परन्तु आजकल यह भारत में भी तेजी से फैलने लगी है। साइबर बुलिंग की तकनीक में ई-मेल, सैलफोन, टैक्सट मैसेज, इंस्टेंट मैसेज इत्यादि का प्रयोग होता है । अध्ययन के दौरान जब एक स्कूल छात्रा से साइबर बुलिंग के बारे में पूछा गया तो उसने बताया कि एक अमुक लड़की हमेशा कक्षा में प्रथम आती थी जिससे कक्षा में अन्य छात्राएँ उससे चिढ़ती थीं । उन्होंने उस लड़की . के अनेक नाम रखकर तथा नैन नक्स का मजाक उड़ाकर अन्य स्कूल के छात्रों को बेनामी एसएमएस किया जिससे वह लड़की परेशान हो गयी तथा मानसिक रूप से तंग होकर गुम सुम रहने लगी तथा उसकी पढ़ाई प्रभावित हुयी। बाद में उसके घर वालों ने पता किया। तो सच्चाई का पता चला और स्कूल प्रशासन ने ऐसे छात्रों को दंडित किया । साइबर बुलिंग के पीछे प्रमुख रूप से निम्न प्रेरक तत्व कार्य करते हैं--

1. आमना-सामना करने की अक्षमता ।

2. बदला लेना

3. मजाक करना

4. अकेले एवं असुरक्षित बच्चे

5. परेशान करना एवं चिढ़ाना

फिसिंग

यह गोपनीय सूचनाओं को प्राप्त करने का फर्जी (धोखा वाला) तरीका है। इसमें ई-मेल भेजने वाले का लक्ष्य व उद्देश्य इंटरनेट उपयोगकर्ता की व्यक्तिगत सूचनाओं को प्राप्त करना होता है। ई-मेल के द्वारा व्यक्तियों, व्यापारिक संस्थाओं को अपने बारे में जानकारी भेजने को कहा जाता है। इस जानकारी का उद्देश्य वास्तव में पासवर्डो तथा अन्य वैयक्तिक सूचनाओं की चोरी करना होता है। फिसिंग में सबसे ज्यादा जोर धोखाधड़ी पर रहता है । ई-मेल के जरिए लोगों को विश्वास दिलाया जाता है कि वे उस वेबसाइट (वास्तव में यह साइट नकली ही होती है) को अपने बारे में सूचना उपलब्ध करा दें। इस प्रकार की सूचना प्राप्त कर वेबसाइट वाले उसका दुरूपयोग करते हैं। पे-पाल, ई-बे ऑन लाइन बैंकिंग, इत्यादि साइट्स सामान्य रूप से फिसिंग का कार्य कर रही हैं। 

ई-मेल बॉम्बग

इस प्रकार के अपराध में साइबर क्रिमिनल किसी भी व्यक्ति या कंपनी के ई-मेल पते पर लगातार इतनी अधिक ई-मेल भेजता है कि प्राप्तकर्ता का ई-मेल बाक्स फर्जी मेल से भर जाता है. तथा अन्य जरूरी ई-मेल उसके बॉक्स में नहीं आ पाती है, जिससे व्यक्ति, कंपनी या सेवा प्रदाता के व्यवसाय में गिरावट आती है। ज्यादा ई-मेल आने से कम्प्यूटर सर्वर भी कभी-कभी ध्वस्त हो जाता ।

उदाहरण - विदेशी मूल का एक व्यक्ति जो पिछले लगभग 30 वर्षों से शिमला में रह रहा था। शिमला हाउसिंग बोर्ड द्वारा भूखण्ड आवंटन की एक ऐसी योजना विज्ञापित की गई जिसके अर्न्तगत भारतीय नागरिकों कम दाम पर भूखण्ड कराये जाने थे। इस विदेशी नागरिक ने भी शिमला हाउसिंग बोर्ड की उक्त योजना में कम कीमत पर भूखण्ड पाने हेतु आवेदन किया लेकिन विदेशी मूल का होने के कारण उसका प्रार्थना पत्र अस्वीकृत हो गया। जिससे नाराज हो उस विदेशी एक साथ शिमला हाउसिंग बोर्ड के कम्प्यूटर सर्वर को इतनी ढेर सारी ई-मेल भेजी कि उनका कम्प्यूटर सर्वर ही ध्वस्त (crash ) हो गया । (ई-मेल बॉम्बिंग)

नाइजीरियन स्कैन या एडवाँस फ्री फ्रॉड या 419 फ्रॉड

इंटरनेट द्वारा उपयोगकर्ताओं को इस तरह की ई-मेल भेजी जाती है कि किस प्रकार वह अधिक धन अर्जित कर सकते हैं या धनी बन सकते हैं। इसमें उपयोगकर्ताओं को ईनाम - जीतने वाला ई-मेल प्राप्त होता है, जिसमें उसके द्वारा जीतीं गई धनराशि के बारे में लिखा होता है। ऐसी धोखाधड़ी करने वाले साइबर क्रिमिनल लोगों के नाम और पते इस तरीके इस तरीके से एकत्रित करते हैं तथा फिर उनको अपना शिकार बनाते हैं। ये ई-मेल उसी देश से या बाहर से भी प्राप्त हो सकते हैं। इनमें लिखा होता है कि हमारे संस्थान ने इतनी बड़ी राशि ईनाम के रूप में देने के लिए आपको चुना है। इसके पश्चात् ये अपनी कंपनियों की नीतियों के बारे में बताते हैं तथा उपयोगकर्त्ता को अपना एकाउंट नंबर तथा अन्य प्रकार से सहयोग करने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके बाद ये उपयोगकर्ताओं से एकाउंट में रुपये (धनराशि) स्थानांतरित करने के लिए वी पी पी द्वारा आने वाले खर्च का भुगतान करने के लिए आग्रह करते हैं, लेकिन उपयोगकर्ता द्वारा वी० पी० पी० (VPP) खर्च की धनराशि भेज देने के उपरांत भी ईनामी राशि उसे नहीं मिल पाती तथा ई-मेल द्वारा यह संदेश उसे बार-बार भेजा जाता है कि किन्हीं कारणों से धनराशि स्थानांतरित नहीं की जा सकी है व्यक्ति इंतजार करता रहता है परन्तु उसको वह धनराशि नहीं मिल पाती है। इस तरह के फर्जी ई-मेल एक, दो नहीं बल्कि हजारों, लाखों लोगों को एक साथ भेजे जाते हैं तथा ई-मेल भेजने वाले लोग स्वयं को किसी शासक का करीबी रिश्तेदार, सर्वोच्च बैंक अधिकारी, किसी उच्च समिति का उच्च अधिकारी या कोई बैरिस्टर अथवा ट्रस्टी कहते हैं। ये नाइजीरिया स्कैम या एडवांस की फ्रॉड (Advance Fee Fraud) या 419 फ्रॉड के नाम से जाते हैं।

आइडेंटिटी थेफ्ट

इस प्रकार के अपराध में आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए या आपराधिक गतिविधियों के लिए किसी व्यक्ति की आइडेंटिटी (पहचान ) चोरी की जाती हैं । इस प्रकार के साइबर क्राइम में कोई व्यक्ति गलत तरीके से किसी अन्य व्यक्ति का व्यक्तिगत डाटा यां व्यक्तिगत गोपनीय जानकारी अनाधिकृत ढंग से प्राप्त कर लेता है तथा फिर इसका प्रयोग अपनी पहचान छिपाकर तथा अन्य व्यक्ति की पहचान प्रदर्शित करके किसी फ्रॉड अथवा आर्थिक लाभ के लिए करता है। चूँकि इस अपराध में आइडेंटिटी बहुत चालाकी से चोरी की गयी रहती है, अतः पीड़ित व्यक्ति बहुत समय तक यह नहीं जान पाता है कि उसकी पहचान को चुरा लिया गया है। आइडेंटिटी थेफ्ट आजकल इंटरनेट पर सबसे अधिक समृद्ध वाला अपराध माना जाता है

साइबर स्क्वैटिंग और टाइपों स्कवैटिंग

प्रसिद्ध नामों की साइटों का रजिस्ट्रेशन इस आशय से कराना कि उन्हें भारी दामों में बेचा जाएगा और लाभ अर्जित किया जाएगा, साइबर स्क्वैटिंग कहलाता है। इन्हीं साइटों के नाम से थोड़ा वैरिएशन करके, ग्राहकों, जो गलती से या भूल वश इस साइट को टाइप कर देते हैं, को गुमराह करना टाइपों स्क्वैटिंग कहलाता है ।

एयर फ्रांस की एक वेबसाइट www.airfrance.com है। अल्वारी कोलाजो, जो उरुग्वे की एक फर्म के मालिक हैं, उन्होंने एक वेबसाइट www.airfrance.com नाम से दर्ज कराया। एयर फ्रांस ने अल्वारों कोलाजी की इस साइट का विरोध करते हुए टाइपों स्क्वैटिंग का अपराध बताते हुए अपनी आपत्ति विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार संगठन में दर्ज करायी। संगठन ने अल्वारो कोलाजो को टाइपोग्राफिकल मिस स्पेलिंग का दोषी बताया और यह कहा कि यह बुरी नियत से कोलाजो द्वारा साइट दर्ज करायी गयी है और इस साइट प्रतिबंधित कर दिया। इस तरह विश्व के प्रतिष्ठित अखबार वाल स्ट्रीट जर्नल की वेबसाइट www.wallstreetjournal.com की वेबसाइट की मिलती जुलती वेबसाइट `www.wallstreetjournal.com एक व्यक्ति ने रजिस्टर कराया। इसे भी वाल स्ट्रीट जर्नल द्वारा शिकायत करने पर प्रतिबन्ध कर दिया गया।

इसी प्रकार के साइबर अपराध को सलामी अटैक भी कहा जाता है। उदाहरणस्वरूप एक अमेरिकी बैंक ने अपने एक कर्मचारी राबर्ट को नौकरी से निकाल दिया जिससे नाराज होकर राबर्ट ने बैंक के कम्प्यूटर सिस्टम में एक ऐसा प्रोग्राम डाल दिया जिससे की प्रत्येक माह के अंत में खाता धारकों के खाते से 10 सेंट निकालकर उस व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर हो जाय जिसका नाम अंग्रेजी वर्णमाला के क्रम में अंतिम हो । राबर्ट ने इस हेतु उसी बैंक में Ziegler नाम से एक खाता खोला और वह बैंक का अंतिम खाता धारक बन गया । अब हर माह 10 सेंट खाता धारकों के खाते में Ziegler के खाते में ट्रांसफर होने लगे । 10 सेंट की रकम इतनी कम थी कि किसी खाताधारक को इसका पता ही नहीं चला और पता भी न चलता लेकिन तभी Zygler नामक एक अन्य व्यक्ति ने भी उसी बैंक में खाता खोला, अब अंग्रेजी वर्णमाला के क्रम में अंतिम खाता होने के कारण उसके खाते में हर माह काफी धन आने लगा तो Zygler ने इसकी सूचना बैंक को दी, तब Ziegler द्वारा अपराध किए जाने का पता चला। (सलामी अटैक)

पासवर्ड ब्रेकिंग

कम्प्यूटर पर जब हम काम करते हैं तो हम अपना डाटा सुरक्षित रखने के लिए एक गोपनीय पासवार्ड रखते हैं, बिना इस पासवर्ड का प्रयोग किए कम्प्यूटर का वह भाग खुलेगा ही नहीं जहाँ हमने डाटा स्टोर करके रख रखा है। इस समय साइबर क्रिमिनल इतने तेज हो गए हैं कि वे पासवर्ड को ब्रेक करके किसी भी डाटा को खोज निकालने की क्षमता रखते हैं। पासवर्ड को तोड़कर ये साइबर क्रिमिनल डाटा चुरा सकते हैं या अनाधिकृत रूप से • वित्तीय लेन-देन भी कर सकते हैं। पासवर्ड को ब्रेक करने वाले साइबर क्रिमिनल को हैकर बहते हैं। ये हैकर्स पासवर्ड को ब्रेक करने (तोड़ने ) के लिए निम्न तकनीक का प्रयोग करते हैं- 

(i) शब्द कोश के माध्यम से - इस प्रकार के आक्रमण में फाइल नाम के बाद में कोई संख्या जोड़कर पासवर्ड जोड़ने का प्रयास किया जाता है। अधिकतर उपयोगकर्ताओं द्वारा फाइल के नाम के साथ संख्याएँ जोड़कर पासवर्ड रखे जाते हैं। ये अपना पासवर्ड परिवर्तित करते समय पासवर्ड की अंतिम संख्या में परिवर्तन कर लेते हैं जैसे—प्रथम महीने में यदि पासवर्ड 'श्याम' है तो अगले महीने में 'श्याम 2', तीसरे महीने में 'श्याम 3' और अगले महीने में भी इसी क्रम में पासवर्ड परिवर्तित करते रहते हैं। इस क्रम में रखे पासवर्ड को तोड़ना आसान कार्य होता है ।

(ii) क्रूरतापूर्वक आक्रमण करके इस प्रकार से पासवर्ड ब्रेक करने के लिए हैकर्स द्वारा एनक्रिप्टेड संदेश के माध्यम से उपयोगकर्त्ता के आइडेंटिटी (आई डी) तथा पासवर्ड को ब्रेक करने का प्रयास किया जाता है। एक बार हैकर द्वारा आई डी प्राप्त कर लेने के बाद पासवर्ड ब्रेक करना और उस पासवर्ड को तोड़ने के बाद संग्रहित डाटा प्राप्त करना आसान हो जाता है।

इसके अतिरिक्त पासवर्ड की जानकारी होने पर साइबर क्रिमिनल इन्टरनेट समय की चोरी भी करने लगता है। इसे हम एक उदाहरण से समझ सकते हैं। दिल्ली निवासी कर्नल बाजवा ने एक नजदीकी इंटरनेट कैफे के मालिक श्याम कुमार को अपने घर पर स्थित कम्प्यूटर में इंटरनेट कनेक्शन चालू करने के लिए बुलवाया। श्याम कुमार ने कर्नल बाजवा के घर जाकर उनका इंटरनेट कनेक्शन चालू कर दिया। लेकिन इस प्रक्रिया में श्याम कुमा | को कर्नल बाजवा के इंटरनेट कनेक्शन का यूजरनेम और पासवर्ड मालूम हो गया । श्याम कुमार ने इस सूचना का दुरुपयोग कर कर्नल बाजवा के 100 घण्टे के इंटरनेट कनेक्शन में से 94 घण्टे एक सप्ताह के अंदर खर्च कर डाले। (इंटरनेट समय की चोरी)

जंक मेल

वह मेल, जिसमें अनुपयोगी सामग्री होती है, जंक मेल कहलाती है । जंक मेल प्रमुखतया व्यावसायिक प्रकार की होती है। यह मेल अनेक इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को एक साथ भेजी जाती है। ये मेल व्यावसायिक विज्ञापन, संदिग्ध उत्पादों, धनी बनने संबंधी योजना आदि से संबंधित होती हैं। दुनिया में अयाचित व्यावसायिक ई-मेल और अयाचित बल्क मेल उपयोगकर्ताओं को सबसे अधिक हानि पहुँचाती है। जंक मेल विभिन्न प्रकार की हो सकती है, जैसे :

1. इस तरह की मेल, जिसको आगे भेजने की आपसे बार-बार प्रार्थना की जाती है

2. बहुराष्ट्रीय मार्केटिंग योजना संबंधी 

3. ऑनलाईन उपाधियाँ प्राप्त करने संबंधी 

4. ऑनलाईन गैम्बलिंग, कैसिनोज और भविष्यफल जानने संबंधी 

5. आनलाईन सामाजिक क्लब (डेटिंग तथा शादी) संबंधी 

6. नीम हकीमों के स्वास्थ्य संबंधी उत्पादन और उपचार योजनाएँ, ऑनलाइन औषधियाँ 

7. अयाचित ई- समाचार पत्र 

8. शहरी दंतकथाएँ 

सर्वेक्षण से यह बात प्रकाश में आयी है कि 90% ई-मेल जंक मेल होती है। जंक मेल का विरोध करने तथा उस पर अंकुश लगाने के लिए "स्पैम हॉस" नामक संगठन हुआ है। जंक मेल से अमेरिका, द० कोरिया, रूस, कनाडा आदि सर्वाधिक प्रभावित हैं। अमेरिका में जंक मेल के विरुद्ध कानून बनाया जा चुका है।

जंक मेल एक व्यक्ति द्वारा ई-मार्केटर्स व्यक्तियों के समूह द्वारा या मशीनीकृत साफ्टवेयर जो जोम्बीज के नाम से जाना जाता है, के द्वारा भेजी जाती है। इसके पीछे प्रमुख उद्देश्य ऑनलाइन के माध्यम से अधिक धन कमाना, विभिन्न उत्पादों एवं सेवाओं के लिए ई-मार्केट तैयार करना होता है ।

कम्प्यूटर सूचना के माध्यम से भौतिक अपराध कारित करना साइबर क्रिमिनल द्वारा कम्प्यूटर के माध्यम से सूचनाएँ एकत्र कर फिर उसका लाभ भौतिक रूप से अपराधों के लिए भी कभी-कभी किया जाता हैं। जर्मनी के हाइडेलबर्ग शहर में घटी चोरी की घटनाओं को उदाहरण स्वरूप लिया जा सकता है। इस शहर में एक ट्रैवल एजेंसी में दो बार चोरी तो हुई परन्तु कोई भी भौतिक सामान चोरी नहीं हुआ। यह चौंकाने वाली बात थी कि दो बार चोरी के प्रयासों के बाद भी कोई सामान चोरी नहीं हुआ था । कुछ समय उपरांत उसी क्षेत्र के समीप लगातार कई चोरी के मामले प्रकाश में आए। चोरी सामान्यतयाः उन दिनों में हुई जब मकान मालिक छुट्टियाँ मनाने घर बाहर गए हुए थे। पुलिस ने जब चोरी हुए मकानों के पतों की तुलना एजेंट के कम्प्यूटर में डेटाबेस से की तो पाया कि सभी व्यक्तियों ने उसी एजेंट के द्वारा छुट्टियों के लिए होटल की बुकिंग करायी थी। इस प्रकार इन साइबर अपराधियों ने कम्प्यूटर में रखी सूचनाओं का प्रयोग चोरी के लिए किया था ।

वित्तीय अपराध कारित करना

'इंटरनेट पर पहचान छिपाना सबसे आसान है, लिहाजा किस्म-किस्म के चोरों ठगों की यहाँ अच्छी तादाद है। इंटरनेट पर डाटा चोरी प्रमुख अपराध है, जो बड़ी कंपनियों को.. करोड़ों की चपत लगा रही है, तो छुटभैये चोर अपने अंदाज में काम कर हैं। जेयनयू के सेंटर फॉर स्टडी ऑफ लॉ ऐंड गर्वनेंर्स की अमिता सिंह के दोस्त-परिचित भी ऐसे ही ठगों के जाल में फंस गए। अमिता का ई-मेल आई डी हैक कर लिया गया और फिर उनके परिचितों को एक ई-मेल भेजा गया कि वह नाइजीरिया के एक होटल में फंस गई है उनका सामान चोरी हो गया है और उन्हें मदद के लिए फौरन कुछ रुपये भेजे जाएँ। इसी तरह कुछ लोग फर्जी बैंक साइट पर पैसे लूटा बैठे। हाल में आईसीआईसीआई बैंक की फर्जी साइट तक बना दी गई थी। दरअसल, नेट पर ठगों द्वारा ठगी करना आसान है। इन दिनों लोगों को लगातार ऐसे ई-मेल मिल रहे हैं, जिनमें कुछ लाख डॉलर का जैकपॉट मिलने की बात कही जाती है और यह रकम पाने के लिए उनसे कुछ सौ डॉलर माँगे जाते है। दिल्ली पुलिस में इस तरह ठगे गए कई लोगों की शिकायतें दर्ज हुई, तो पुलिस को भी अखबारों में इश्तिहार देना पड़ा कि नेट पर ऐसी धोखाधड़ी से बचें। उदाहरण - एक बेबसाइट द्वारा बहुत ही कम कीमत पर अलफांसो आम बेचने का विज्ञापन दिया गया जिस पर शुरू में बहुत लोगों ने विश्वास नहीं किया। लेकिन कुछ लोग जिस भी थे जिन्हें यह विज्ञापन विश्वसनीय लगा। उन्होंने वेबसाइट से सम्पर्क स्थापि इंटरनेट के माध्यम से खरीददारी हेतु अपने क्रेडिट कार्डों का नम्बर दे दिया। इन सभी व्यक्तियों को विज्ञापित कीमत पर अलफांसो आमों की डिलीवरी मिल गई। यह बात जंगल में आग की तरह प्रचारित हो गयी जिसके फलस्वरूप हजारों लोगों ने उक्त वेबसाइट को अपने-अपने क्रेडिट कार्डों का नम्बर देते हुए अलफांसो आम की डिलीवरी हेतु आर्डर दे दिया लेकिन किसी को आमों की डिलीवरी नहीं मिली । खोजबीन के पश्चात् पता चलता कि जिस व्यक्ति ने यह वेबसाइट लांच की थी वो एक बहुत बड़ा जाल-साज था। उसके द्वारा क्रेडिट कार्ड नम्बरों का दुरुपयोग कर कार्ड धारकों को लाखों रुपये का चूना लगा दिया गया। (वित्तीय अपराध)

इंटरनेट आज दुनिया में व्यापार और कारोबार का प्रमुख माध्यम बन गया है। इसे ई-कामर्स का नाम दिया गया है। व्यापार के इस तरीके को बी टू बी यानी बिजनेस टू. बिजनेस और बी टू सी यानी बिजनेस टू कन्ज्यूमर कहा जाता है। इसके अलावा इंटरनेट पर व्यापार के और भी नए रूप रोज सामने आते जा रहे है। कंपनियाँ अब अपने उत्पादन, वितरण, भुगतान आदि के लिए इंटरनेट का उपयोग कर रही हैं। इसके अलावा बैंकिंग, बीमा, परिवहन, ट्रांसपोर्ट सभी तरह के कार्य में इंटरनेट महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। इस माध्यम के साथ छेड़छाड़ और अपराध किए जाने की घटनाएँ बढ़ रही हैं। मसलन बी टू सी में भुगतान का प्रमुख साधन प्लास्टिक मनी यानी क्रेडिट-डेबिट कार्ड है। कम्प्यूटर पर आधारित इन कार्डों का उपयोग विभिन्न प्रकार के भुगतान के लिए किया जाता है। इसके लिए नेट पर भुगतान करते समय क्रेडिट कार्ड के नंबरों की चोरी करके भुगतान, खरीद-फरोख्त और हेराफेरी साइबर अपराधों का एक प्रमुख क्षेत्र हैं। सायबर अपराध का विश्व अर्थव्यवस्था पर कितना व्यापक असर पड़ता है इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2005 में अमरीकी एजेंसी नेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंट्रल द्वारा कराए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि साइबर क्राइम के कारण विश्वव्यापी अर्थव्यवस्था को एक करोड़ 95 लाख डालर का नुकसान होता है ।

आजकल एटीएम का उपयोग लगभग हर वर्ग और आयु के लोग धड़लले से कर रहे हैं। एटीएम से धन की निकासी आदि के समय विशेष सावधानी बरतने की जरुरत होती है। आपके एटीएम के उपयोग में प्रयुक्त होने वाला गुप्त कोड या पासवर्ड जानने के पीछे भी सम्भव है कोई साइबर अपराधी लगा हुआ हो। इस काम के लिए हो सकता है एटीएम मशीन के आसपास कोई सूक्ष्म कैमरा लगा दिया गया हो जिससे आपकी गतिविधियों को 100-150 मीटर दूर अपने वाहन में बैठा अपराधी देख रहा हो । प्राप्त जानकारी का उपयोग करके वह आपके बैंक खाते का उपयोग अपने लाभ के लिए कर सकता है।

की लागर्स

इंटरनेट उपयोगकर्ता किसी बैंक या ऑन लाइन क्रेडिट कार्ड या किसी विशेष की वर्ड की इस प्रकार के साइबर क्रिमिनल धैर्यवान प्रकृति के होते हैं। जब कोई कम्प्यूटर प्रविष्टि करके संबंधित साइट पर जब कोई जाता है तभी की लागर्स सक्रिय होते हैं। ये उपयोगकर्ता के की स्ट्रोक्स को एक फाइल में सेव (सुरक्षित) कर लेते हैं। ये वेब फार्मों की नकल उतार लेते हैं तथा कभी-कभी प्रयोगकर्ता की स्क्रीन के स्नैप शाट भी ले लेते हैं। ये की लागर्स कम्प्यूटरों को संक्रमित कर देते हैं। की लागर्स का मुख्य उद्देश्य पैसा निकालने के लिए नामों और पासवर्डो की चोरी करना होता है । की लागर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अमेरिका में ये सर्वाधिक सक्रिय हैं तथा फिसिंग विरोध कार्यदल के अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव पीटर कैसिडी इन्हें भविष्य की आँधी की संज्ञा देते हैं जो हानि कारित कर सकते हैं।

डाटा डिडलिंग

इसके अन्तर्गत साइबर क्रमिनल किसी कम्प्यूटर उपयोगकर्ता के रा ( Raw) डाटा में प्रासेस से पहले ही हेरफेर कर देता है। यदि उपयोगकर्ता रा डाटा को प्रासेस करने में सफल भी हो गया तो भी साइबर क्रिमिनल पुनः इसे हेरफेर करके रा डाटा के रूप में कर देता है। इसे ही डाटा डिडलिंग कहते हैं ।

सलामी अटैक

साइबर क्रिमिनल इस प्रकार के आक्रमण को वित्तीय अपराध कारित करने के लिए करता है। इसमें साइबर क्रिमिनल इतनी सतक्रता से हेरफेर करता है कि किसी क्षति पा रहे व्यक्ति को आभास ही नहीं पाता है। जैसे—एक बैंक का कर्मचारी बैंक के सर्वर में एक ऐसा सॉफ्टवेयर (प्रोग्राम) डाल दे कि जिससे प्रत्येक ग्राहक के खाते से न्यूनतम 05 रुपए की कटौती प्रतिमाह उसके जमा धन से होती रहे तो इस तरह की कटौती पर शायद ही कोई ग्राहक ऐसा होगा जो संज्ञान लेगा, क्योंकि उसे इतनी छोटी कटौती का आभास ही नहीं होगा। लेकिन बैंक कर्मचारी जिसने प्रोग्राम सर्वर में डाला है वह हर माह काफी भारी रकम पाकर लाभान्वित होता रहेगा। इसमें जिगलर (Ziegler) कंपनी का केस महत्वपूर्ण है । इस मामले में लॉजिक बम बैंक के कम्प्यूटर सिस्टम में डाल दिया गया था तथा प्रत्येक खाते से बहुत कम राशि की रकम प्रतिमाह निकाली जाती थी और एक निर्धारित (विशेष) खाते में जमा की जाती थी । एक अमेरिकी बैंक ने अपने एक कर्मचारी राबर्ट को नौकरी से निकाल दिया जिससे नाराज होकर राबर्ट ने बैंक के कम्प्यूटर सिस्टम में एक ऐसा प्रोग्राम डाल दिया जिससे की प्रत्येक माह के अंत में खाता धारकों के खाते से 10 सेंट निकलकर उस व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर हो जाय जिसका नाम अंग्रेजी वर्णमाला के क्रम में अंतिम हो । राबर्ट ने इस हेतु उसी बैंक में Ziegler नाम से एक खाता खोला और वह बैंक का अंतिम खाता धारक बन गया। अब हर माह 10 सेंट खाता धारकों के खाते में Ziegler के खाते में ट्रांसफर होने लगे। 10 सेंट की रकम इतनी कम थी कि किसी खाताधारक को इसका पता ही नहीं चला और पता भी न चलता लेकिन तभी Ziegler नामक एक अन्य व्यक्ति ने भी उसी बैंक में खाता खोला, अब अंग्रेजी वर्णमाला के क्रम में अंतिम खाता होने के कारण उसके खाते में हर माह काफी धन आने लगा तो Zygler ने इसकी सूचना बैंक को दी, तब Ziegler द्वारा अपराध किए जाने का पता चला। (सलामी अटैक)

डोमेन नेम डिस्प्यूट

यह भी एक प्रकार का साइबर क्राइम है। अमेरिका में जूलिया राबर्टस एक बहुत प्रचलित नाम है। हर 23 वीं महिला का नाम जूलिया राबर्टस है। इसी जूलिया राबर्टस नाम की एक प्रसिद्ध अमेरिकी अभिनेत्री भी हैं। बी० रसेल नाम के एक व्यक्ति ने जूलिया राबर्टस डॉट कॉम नाम से एक वेबसाइट रजिस्टर करायी थी। इसमें तंज से भरी सामग्री जाती थी । प्रख्यात अभिनेत्री जूलिया राबर्टस ने दावा किया कि "इस डोमेन नाम पर उसका क है। वह एक विख्यात अभिनेत्री है, उसके नाम पर मजाक नहीं किया जा सकता है।" जूलिया राबर्टस ने मामला वर्ल्ड इन्टेलेक्चुअल प्रॉपर्टी आर्गेनाइजेशन ( WIPO) के जरिए उठाया । वाइपो (WIPO) ने जूलिया राबर्टस के पक्ष में फैसला सुनाया और इंटरनेट कार्पोरेशन फॉर असाइन्ड नेम्स एण्ड नंबर्स (आइकैन) (1998 में डोमेन नेम रजिस्टर करने एवं उन्हें प्रदर्शित करने के लिए तकनीकी तौर पर अधिकारिक संस्था) को निर्देशित किया कि वह जूलिया राबर्टस डॉट काम को जूलिया राबर्टस अभिनेत्री के हवाले कर दें। रसेल ने इस मामले को कोर्ट में चुनौती दी है। रसेल का कहना है कि “मैंने जूलिया राबर्टस डॉट कॉम को कानूनी तौर पर नेटवर्क साल्यूशंस से खरीदा है तथा दो साल तक उसे पाल-पोस कर बड़ा किया है. अतः इतनी आसानी से मैं इस वेबसाइट पर अपना हक नहीं छोड़ सकता हूँ।" आइकैन के अक्टूबर 1998 में गठन के बाद उसके पास डोमेन नेम रजिस्ट्रेशन का पहला विवाद दिसम्बर 1999 में आया। बाइपो ( WIPO) के सामने अब तक 1200 के आसपास डोमेन नेम के प्रकरण आ चुके हैं। यह संस्था ही वास्तविक स्वामियों को उनका हक दिलाने के लिए उत्तरदायी है। वाइपो (WIPO) का हाल ही में एक प्रकरण में निर्णय निम्न है - प्रख्यात पॉप गायिका मैडोना लूसी सिकोन ने डॉन पैरिसी के खिलाफ शिकायत की थी कि WWW.madonna.com इनकी एक अश्लील साइट है। यह मेरे नाम का व्यावहारिक इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि मैं इसकी वास्तविक अधिकारी हूँ । इस अवैध कब्जेदार को हटाकर मुझे मोरा हक दिलाया जाय। मैडोना ने यह भी कहा कि मेरे नाम पर नंगी तस्वीरें दिखाई जा रही है जो मेरे अधिकार का हनन है । वाइपो ( WIPO) ने नीयत को आधार बनाकर अश्लील वेबसाइट के सौदागर डॉन पैरिसी की साइट मैडोना डॉट कॉम को पोर्नोग्राफी साइट बनाने के खिलाफ फैसला दिया ।

स्टिंग डॉट कॉम नामक एक साइट पर गायक माइकल स्टिंग ने अपना दावा किया था लेकिन वाइपो (WIPO) ने फैसला दिया कि स्टिंग आम नाम है और यह साइट चलाने वाला अपने उपनाम के तौर पर लम्बे अरसे से यही नाम इस्तेमाल करता रहा। यह गेम साइट है और कोई कारण नहीं कि इसे माइकल स्टिंग के हवाले किया जाए।

वाइपो (WIPO) द्वारा डोमेन नामों पर कुछ विवादास्पद फैसले भी दिए गए हैं । बार्सिलोना डॉट कॉम शहरों के बारे में बताने वाली साइट थी, उसमें कोई बुरी नियत साबित ही नहीं होती थी लेकिन इसे बार्सिलोना सिटी कौंसिल को हस्तांतरित करने का फैसला वाइपो (WIPO) ने दिया। इसी प्रकार कोरिथियन डॉट कॉम कोई व्यापार ही नहीं करती है, यह विशुद्ध रूप से बाइबल के उपदेशों वाली साइट है लेकिन वाइपो ( WIPO) ने इस डोमेन नेम को ब्राजील की साकर टीम के पक्ष में किए जाने का फैसला दिया। डोमेन नेम पर निर्णय देने के लिए यूनीफार्म डोनेम नेम डिस्प्यूट रिसाल्यूशन पॉलिसी 24 अक्टूबर 1999 से प्रभावी है। इसके लिए वाइपों की वेबसाइट पर पॉलिसी दी गयी है ।

लॉजिक बम

यह घटनाओं पर निर्भर प्रोग्राम हैं। इसका अर्थ यह है कि यह प्रोग्राम इस उद्देश्य कुछ करने के लिए बनाया जाता है कि जब किसी निश्चित कार्यक्रम या घटना (जिसे से ट्रिगर इवेन्ट भी कहते हैं) का दिन पड़े तब निष्क्रिय पड़ा वायरस सक्रिय होकर उस दिन अपनी कार गुजारी कर दिखाए। निश्चित तिथि व समय के अलावा ये वायरस अन्य समय निष्क्रिय पड़े रहते हैं। इनमें से कुछ वायरसों को लॉजिक बम कहते हैं। इस तरह के लॉजिक बम का एक उदाहरण चेरनोबिल वायरस है ।

ट्रोजन अटैक

एक ट्रोजन, एक प्रकार का अनाधिकृत प्रोग्राम है। जब वह अनाधिकृत प्रोग्राम आंतरिक रूप से क्रियाशील होता है तो यह अधिकृत प्रोग्राम की तरह दिखता है। इस प्रकार । से वास्तव में क्या हो रहा है. यह उसमें उपयोगकर्ता के साथ धोखाधड़ी करता है। इस तरह की एक महत्वपूर्ण साइबर क्राइम में अमेरिका की एक मशहूर महिला फिल्म निर्देशक के नग्न फोटोग्राफो साइबर क्रिमिनल द्वारा एक वेब कैमरा उसके कम्प्यूटर में लगाकर प्राप्त करके नेट पर प्रचारित कर दिया गया था।

डिनायल ऑफ सर्विस अटैक

इस प्रकार के अपराध में साइबर क्रिमिनल कम्प्यूटर स्त्रोत की क्षमता से अधिक अनुरोध (ई-मेल) करके कम्प्यूटर में ओवरफ्लो की स्थिति पैदा कर देता है। इसके कारण स्त्रोत को क्षति पहुँच सकती है। इसके अतिरिक्त यह प्रक्रम अधिकृत उपयोगकर्ता को मिलने वाली सेवा से भी इंकार कर देता है क्योंकि कम्प्यूटर की क्षमता से ज्यादा अनुरोध (ई-मेल) उसमें पहले से ही भरा होता है ।

प्रोटेस्ट वेबसाइट

ये वेब साइटें किसी सेवा या उत्पाद की कुछ कमी बताती हैं। ये वेबसाइटें सेवा या उत्पाद के नाम के आगे शब्द “SUCKS” लगाकर बनायी जाती है जैसे- wal-martcanadasucks.com इसका अर्थ ये है कि ये वेबसाइटें उस सेवा या उत्पाद का भी नाम इस्तेमाल करती हैं 

साइबर स्लरिंग

इंटरनेट तो सीमा विहीन (बार्डरप्लेस) है। कोई भी व्यक्ति विश्व के किसी कोने से कारोबार कर सकता है या सूचनायें प्राप्त कर सकता है। यह एक गंभीर विधिक मुद्दा है। जिसे वैश्विक स्तर पर हल किए जाने की जरुरत है। उदाहरण स्वरूप — कुछ वेबसाइटें ऐसी हैं जो भारत में प्रतिबंधित है लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका में विधि सम्मत हैं। यदि ये भारत में किसी व्यक्ति द्वारा देखी जाती हैं तो यह आई० टी० एक्ट के तहत अपराध की श्रेणी में आती हैं लेकिन अमेनिका जहाँ इन साइटों का उद्भव हुआ है वहाँ वे विधि सम्मत है तो विधि के इस तरह के विवाद क्या समाधान हो सकता है ? यह महत्वपूर्ण विचारणीय प्रश्न है । भारत में प्रतिबंधित किसी साइट को गैरकानूनी रूप से छुपकर देखना, उसका उत्पादन या बिक्री करने का अपराध साइबर स्लरिंग कहलाता |

वेब जैकिंग

वेब जैकिंग हाइजैकिंग (अपहरण) का एक प्रकार है जिसमें साइबर क्रिमिनल द्वारा वेबसाइट को अपने कब्जे में करके उसे या तो नष्ट कर दिया जाता है या उसमें की सूचनाओं में हेराफेरी कर दी जाती है। वेब जैकिंग के द्वारा दूसरी साइट पर नियंत्रण कर लिया जाता है और इस प्रकार की वेब जैकिंग का मुख्य उद्देश्य आर्थिक लाभ अर्जित करना है। हाल ही में एक पाकिस्तानी नागरिक ने अपने यहाँ के केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की साइट हैक करके उनमें नग्न एवं भद्दी चीजों को डाल दिया था ।

साइबर थ्रेट

आजकल ई-मेल के माध्यम से तो धमकी देने का प्रचलन ही चल पड़ा है जिसे साइबर थ्रेट की संज्ञा दी जा रही है। अक्टूबर 2008 के प्रथम सप्ताह में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल को पुणे स्थित भारतीय विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में शिरकत करनी थी। इस कार्यक्रम में शामिल होने से पूर्व महामहिम को ई-मेल के जरिए कभी भी पुणे में निशाना बनाए जाने की धमकी दी गयी। इसी प्रकार से नोएडा के सेक्टर-50 स्थित आलोक विहार निवासी निलभराय, जिन्होंने “2020 का सपनों का भारत” नामक एक कम्युनिटी बनायी है जो ऑरकुट पर उपलब्ध है तथा यह कम्यूनिटी युवाओं को जागरुक करने तथा आतंकवादियों को पहचानने तथा उनसे निपटने के उपाय सुझाने के लिए बनायी गयी है, को नोएडा से ही ई-मेल के जरिए 14 सितम्बर 2008 को कपिल बंसल नामक व्यक्ति ने ऑरकुट पर ही 04 बार जान से मारने की धमकी दी और गाली-गलौज किया। इस मामले की जाँच • आगरा पुलिस की साइबर सेल कर रही है। ज्ञातव्य है कि ऑरकुट गूगल की सोशल नेटवर्किंग साइट है।

स्मूपिंग ( Smooping)

इस प्रक्रिया में जब कोई व्यक्ति गोपनीय पत्र लिखते हुए कहीं चला जाता ऐसे में दूसरा व्यक्ति उसकी फाइल को खोलकर वह पत्र पढ़ लेता है तथा पढ़ने के बाद वह फाइल बंद करके वहाँ से चला जाता है 

साइबर वार का युग

इंटरनेट वरदान के साथ अब हमारे लिए अभिशाप भी बनता जा रहा है। उसकी निगाहों से कोई छिपा या बचा हुआ नहीं है। इसने लोगों की निजता तो छीन ही ली है । अब राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुती भी दांव पर है। यह अब आतंकवादियों का हथियार बन चुका है। गूगल सर्च इंजन इसमें काफी मददगार सिद्ध हुआ है। आस्ट्रिया की ग्रेज यूनिवर्सिटी की एक शोध टीम ने दुनिया की सबसे बड़ी जासूसी एजेंसी करार दिया है।

गूगल पर लगातार बढ़ते कंटेट के बीच यह साफ हो गया है कि दुनिया के तमाम विषयों, संस्थानों और लाखों लोगों की निजी जानकारी इस सर्च इंजन पर मौजूद है, जो इंटरनेट की दुनिया में एक नए खतरें का आगाज बन सकता है। शोध के मुताबिक गुगल आम लोगों और कंपनियों के बारे में किसी भी संस्थान से ज्यादा जानती है, लेकिन अमेरिका नेशनल डाटा प्रोटेक्शन ऐक्ट के तहत इस गोपनीय जानकारी को सुरक्षित रखने की उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। गूगल की वजह से देश की सुरक्षा से लेकर कारोबारी गतिविधियों और सामाजिक ढांचे को तार-तार करने का खतरा हर बार नए रूप नई शक्ल में सामने अ रहा है।

देश की सुरक्षा के लिए आतंकवादी बड़ा खतरा है और आतंकवादियों का नया हथियार इंटरनेट है 26 नवम्बर 2008 को मुंबई में आतंकवादियों ने मोबाइल इंटरनेट के जरिए लाहौर में बैठे आतंकी सरगनाओं के निर्देश पर होटल ताज होटल ट्राइडेन्ट, नरीमन प्वांइट, सी० एस० टी० व अन्य स्थानों पर फिदाईन हमला कर 180 लोगों की हत्या कर दी। आतंकवाद के इस कारनामे को अंजाम देने के लिए आतंकवादियों ने आपस में वार्तालाप के लिए इंटरनेट आधारित वायस ओवर इंटरनेट प्रोटोकाल (VOIP) तकनीक का प्रयोग किया था। साइबर आतंकवाद का यह ताजा उदाहरण है। वर्ष 2006 में अमेरिकी सेना ने इराकी विद्रोहियों के ठिकानों पर छापा मारकर गूगल अर्थ की तस्वीरें प्राप्त की, तो उनके होश उड़ गए। इन तस्वीरों में अमेरिकी और ब्रिटिश सेना के तंबू, तोप, टैंक से लेकर सैनिकों के नहाने के ठिकाने भी साफ-साफ दिख रहे थे। अमेरिका के सुरक्षा अधिकारियों द्वारा नाकाम की गई इस साजिश को रचने वाले चार कैरेबियन षडयंत्रकारियों ने जगह के बारे में बेसिक जानकारी गूगल अर्थ द्वारा दी जाने वाली सैटेलाइट तस्वीरों से जुटाई थी। विकीमैप्स पर भी इसी तरह कई संवेदनशील जगहों की जानकारी उपलब्ध है। हालांकि आतंकवादियों के लिए इंटरनेट की उपयोगिता पर बहस जारी है, पर बात सिर्फ सेटेलाइट तस्वीरें लेने तक सीमित नहीं है। इंटरनेट पर चैट रूम के जरिये आतंकवादियों के बीच आपसी संवाद अ सामान्य चुका है इसकी पुष्टि खुफिया एजेंसियाँ कई बार कर चुकी हैं। आतंकवादियों को कम्प्यूटर की ट्रेनिंग और इंटरनेट को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की खास ट्रेनिंग दी जा रही है। लुधियाना ब्लास्ट मामले में पकड़े गए आतंकवादी गुरप्रीत सिंह के पास से बरामद दस्तावेजों में इसका भी खुलासा हुआ कि उसे हैकिंग की ट्रेनिंग दी गई थी। इसके अलावा, ई-मेल के जरिए दहशत फैलाने का काम भी काफी तेजी से हो रहा है ।

इंटरनेट के जरिए साइबर वार की शुरूआत हो चुकी है। वर्ष 2007 में साइबर वार की एक घटना का उदाहरण हमारे सामने है. जिससे यह साफ सिद्ध है कि भविष्य में इंटरनेट साइबर वार का हथियार बनने जा रहा है ।

पूर्व सोवियत संघ से अलग हुए बाल्टिक देश एस्टोनिया के लिए मनोवैज्ञानिक स्तर हुआ साइबर हमला पर किसी औपचारिक हमले से कम नहीं था। नाराज रूसी भाषी अल्पसंख्यकों ने देश के महत्तवपूर्ण इंटरनेट ठिकानों पर आँकड़ा बमों की ऐसी झड़ी लगाई कि कुछ दिन तो जैसे देश की धड़कन ही रुक गई।

दरअसल झगड़ा वर्ष 2007 में तब शुरू हुआ जब एस्टोनियाई प्रशासन ने दूसरे विश्वयुद्ध काल के एक सोवियत सैनिक की कांस्य प्रतिमा को हटाने का फैसला लिया। जाहिर है इस फैसले पर रूस और खुद रूसीभाषी एस्टोनियाइयों की जबर्दस्त प्रतिक्रिया हुई । रूसी भाषा एस्टोनियाई वहाँ के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समूह हैं । प्रतिभा हटाने से आहत हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। देश के आपातकालीन कम्प्यूटर बचाव दल के निर्देशक हिलर आरलेड को सड़कों पर चल रहे संघर्ष की आंच के इंटरनेट तक पहुँचने का अंदेशा था। यह स्वाभाविक भी था, क्योंकि एस्टोनिया के लिए इंटरनेट वाटर सप्लाई जितना आम . और जरुरी है । लोग इसके जरिए वोट डालते हैं, टैक्स व बिल चुकाते हैं और तो और शॉपिंग व पार्किंग का भुगतान भी यहाँ पूरी तरह इंटरनेट आधारित है और जब सड़कों की लड़ाई इंटरनेट में पहुँची तो कई विशेषज्ञों ने इसे दुनिया का पहला औपचारिक साइबर युद्ध बताया। एक महीने चले इस अभियान में एस्टोनिया को अपने बचाव में नाटो, यूरोपीय संघ और इजराइल से मदद लेनी पड़ी। आरोप लगा कि आँकड़ों की बमबारी रूस या रूसी मूल के लोगों के निर्देश पर की गई थी। साइबर हमले ने एक बार तो एस्टोनिया के डिजिटल ढाँचे को लगभग निष्क्रिय ही कर दिया। इसके अलावा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, और दूसरे महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की वेबसाइटें जाम कर दी गई। देश के सबसे बड़े बैंक और कई दैनिक अखबारों की साइट भी हमले से नहीं बच गई। एस्टोनिया के रक्षामंत्री ने देश पर हुए पहले साइबर हमले को इन शब्दों में ब्यान किया, 'यह समझिए जैसे आपके बंदरगाह बंद कर दिए गए हों ।' सरकार का नाटो, यूरोपीय यूनियन और इजराइल के साइबर विशेषज्ञों को राजधानी तालिन बुलाना पड़ा। पेंटागन के नेटवर्क सुरक्षा संबंधी मामलों के डिप्टी आसिस्टेंट सेक्रेटरी लिंटन वैल्स के मुताबिक एस्टोनिया पर साइबर हमले से पता चलता है कि आधुनिक समाज किस हद तक अनपेक्षित खतरों की जद में हैं। 

एस्टोनियाई साइबर नेटवर्क पर पहला हमला 26 अप्रैल को रात 10 बजे हुआ। हालांकि खतरे को भांपते हुए सभी महत्वपूर्ण साइबर ठिकानों पर फायरवाल सुरक्षा बढ़ाते • हुए अतिरिक्त कम्प्यूटर सर्वर स्थापित किए गए थे। लेकिन 29 अप्रैल 2007 के देश की इलेक्ट्रॉनिक मैगीनॉट लाइन डगमगाने लगी। इसके बाद जंक संदेशों की ऐसी बाढ़ आई कि एस्टोनियाई संसद का ई-मेल सर्वर ही बैठ गया। यही नहीं हैकरो ने देश की सत्ताधारी रिफार्म पार्टी की साइट पर कब्जा कर इस पर एक फर्जी माफीनामा टांग दिया, जिसमें प्रधानमंत्री ने प्रतिमा हटाने का आदेश देने के लिए अफसोस प्रकट किया था। इन संदेशों को भेजने के लिए हैकरों ने चीन, वियतनाम, अमेरिका और पेंरु जैसे दूर-दराज देशों के कम्प्यूटरों को भाड़े पर लिया था। अधिकांश साइबर हमलों में अत्याधुनिक 'डिस्टीब्यूटेड डिनायल ऑफ सार्विस अटैक' तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इसके जरिए न केवल सर्वरों बल्कि राउटर और स्विचों तक को ठप कर दिया। हैकरों ने 'बॉट्स' नामक सॉफ्टवेयर की मदद से दुनियाभर के कम्प्यूटरों में घुस कर उन्हें पैदल सेना की इस्तेमाल किया।

एस्टोनियाई साइबर स्पेस पर सबसे बड़ा हमला 9 मई 2007 को किया गया। रूसी इतिहास में यह दिन विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन सोवियत लाल सेना ने नाजी जर्मनी को परास्त किया था । अव, हालांकि एस्टोनिया के साइबर स्पेस में दग रही आँकड़ा तोपें चुप हो गई हैं, लेकिन इन घटना ने आधुनिक समाज के एक और कमजोर अंग को उजागर किया है। यह घटना बताती है कि डिजिटल होती जा रही दुनिया में अपनी तकनीकी ताकत से बौराए आदमी को महज आँकड़ों की बाजीगरी से भी बेदम किया जा सकता है।

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