लैटिन शब्दार्थ और उनका वाक्यों में प्रयोग
(LATIN MAXIMS & THEIR USES IN HINDI SENTENCES)
Q. Latin Maxims and their uses in Hindi Sentences.
1. Ab-initio, (एब इनिशियो), आरम्भ से ।
प्रयोग, नाबालिग का संविदा आरम्भ से ही शून्य (Void) होता है।
2. Actio personalis maritur cum persona, (एक्शियों परसोनोलिस मोरिटर कम परसोना), कार्यवाही का व्यक्तिगत अधिकार व्यक्ति की मृत्यु के साथ समाप्त हो जाता है।
प्रयोग- मानहानि की कार्यवाही के दौरान वादी या प्रतिवादी की मृत्यु होने पर कार्यवाही भी समाप्त हो जाती है।
3. Actus non facit reum misi mens sit rea, (एक्टस नॉन फेसिट रियम, निसी मेन्स सिटरिया), कोई भी कार्य तभी अपराध बनता है जब वह अपराधी मन से किया जाता है।
प्रयोग, किसी व्यक्ति के आपराधिक दायित्व के निर्धारण के लिए यह आवश्यक है कि, उसके द्वारा किया गया कार्य अपराधी मन से किया गया हो ।
4. Actus reaus, (एक्टस रियम), दोषपूर्ण कार्य।
प्रयोग, सभी दोषपूर्ण कार्य हानिकारक होते हैं परन्तु सभी हानिकारक कार्य दोषपूर्ण नहीं होते।
5. Ad Litem, (एड लिटिम), वाद के लिए ।
प्रयोग, नाबालिग की ओर से वाद दायर करने के लिए वाद के लिए संरक्षक होना आवश्यक है।
6. Ad Valorem, (एड वेलोरम), मूल्यानुसार।
प्रयोग, कस्टम कर आयात की गई वस्तुओं के मूल्यानुसार आरोपित किया जाता है।
7. Alibi (एलिबि), अन्यत्र उपस्थित होने का तर्क ।
प्रयोग, कत्ल के अभियुक्त ने कत्ल के परीक्षण के दौरान यह तर्क पेश किया कि वह घटना के दिन घटना से एक हजार किलोमीटर दूर उपस्थित था ।
8. Animus, (एनिमस), इरादा।
प्रयोग, इरादा किसी ऐसे कार्य के पूर्वज्ञान को कहते हैं जिसकी इच्छापूर्ति के लिए कार्य किया गया था।
9. Audi alteram parten, (ओडी आल्ट्रम पारटम), दूसरे पक्ष को सुनो।
प्रयोग, प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्त का यह एक मौलिक सिद्धान्त है कि निर्णय देने से पहले दूसरे पक्ष को सुनना चाहिये।
10. Caveat emptor, (केवियट ऐम्पटर), क्रेता सावधान।
प्रयोग, जहाँ विक्रेता द्वारा माल खुले बाजार में दिखाकर बेचा जाता है, वहाँ विक्रेता के उद्देष्य के लिए यदि माल उपयुक्त नहीं है, तो वह क्षतिपूर्ति प्राप्त नहीं कर सकता। इसे क्रेता सावधान का नियम कहते हैं।
11. Damnum sine injuria, (डेमनम सिने इन्जूरिया), हानि बिना क्षति।
प्रयोग, अपकृत्य के मामले में जहाँ हानि बिना क्षति (कानूनी अधिकार के उल्लंघन के) उत्पन्न हुई हो वहाँ वाद का कोई कारण उत्पन्न नहीं होता।
12. De minimus non curat lex,(डि मिनिमस नॉन क्यूरा लेक्स), विधि छोटी-छोटी बातों पर ध्यान नहीं देती।
प्रयोग, साधारणतः न्यायाधीश ऐसे कम हानि वाले वादों को खारिज कर देते हैं जिनकी शिकायत कोई बुद्धिमान व्यक्ति नहीं करते हैं।
13. Decree risi, (डिक्री निसि), अपेक्षात्मक डिक्री
प्रयोग, बन्धक या विभाजन अर्थात् शर्तीय डिक्री के बाद में न्यायालय द्वारा अपेक्षात्मक डिक्री पारित की जाती है।
14. Delegatus non potest delegare, (डेलिगेट्स नॉन पोटेस्ट डिलिगेरे), प्रत्यायोजित शक्ति का पुनः प्रत्यायोजन नहीं हो सकता।
प्रयोग, संसद अपनी विधायी शक्ति का प्रत्यायोजन किसी सरकारी अधिकारी को कर सकती है परन्तु ऐसा अधिकारी प्रत्योजित शक्ति का प्रत्यायोजन किसी अन्य व्यक्ति को नहीं कर सकता।
15. Doli in capax, (डोली इन केपेक्स), अपराध करने में अक्षम ।
प्रयोग, सात वर्ष से कम आयु का बच्चा अपराध करने में अक्षम होता है।
16. Donatio mortis caouse (डोनेशियो मोरटिस कोजा) आसन्न मरण दान ।
प्रयोग, मुस्लिम विधि में आसन्न मरण दान एक मान्य दान होता है।
17. Ejusdem generis, (एजस्डम जेनेरिस), उसी किस्म या प्रकार का सजाति।
प्रयोग, जहाँ विशिष्ट शब्दों द्वारा एक ही प्रकार की जाति का बोध होता है और वे सामान्य शब्दों द्वारा अनुसरणित हैं वहाँ सामान्य शब्दों का वही अर्थ होता है जो विशिष्ट शब्दों का होता है।
18. Eminent domain, (इमिनेन्ट डोमेन), जनहित में निजी सम्पत्ति को ग्रहण करने का सरकार का सर्वोच्च अधिकार ।
प्रयोग, भारतीय संविधान के अन्तर्गत केन्द्रीय सरकार को राजमार्गों के निर्माण के लिए निजी सम्पत्ति को मुआवजा देकर ग्रहण करने का सर्वोच्च अधिकार है।
19. Ex Parte, (एक्स पार्टी), एक पक्षीय।
प्रयोग, एक पक्षीय डिक्री को न्यायालय द्वारा अपास्त किया जा सकता है यदि अनुपस्थित पक्ष ने अपनी अनुपस्थिति का सन्तोषजनक कारण दर्शाया हो ।
20. Ex post facto, (एक्स पोस्ट फेक्टो), घटनोत्तर, भूतलक्षी प्रभाव।
प्रयोग, भारतीय संविधान दण्ड विधि को भूतलक्षी प्रभाव दिये जाने से रोकता है।
21. Ex turpi causa, (एक्स टर्पी कोजा), अनैतिक कार्य ।
प्रयोग, अनैतिक कार्य से वाद का कारण उत्पन्न नहीं होता।
22. Factum Valet, (फेक्टम वेलेट), जो कार्य नहीं होना चाहिए था वह होने पर वैध माना जाता है।
प्रयोग, हिन्दू विधि के अनुसार जो विवाह पक्षों में नहीं होना चाहिये था, वह सम्पन्न होने पर वैध माना जायगा ।
23. Ignorantia juris non excusat, (इगनोरेन्शिया ज्यूरिस नॉन एक्सक्यूजट), विधि की अनभिज्ञता क्षमायोग्य नहीं होती।
प्रयोग, सार्वजनिक नीति के कारण विधि की अनभिज्ञता क्षमायोग्य नहीं होती।
24. Ignorantia facti non excusat, (इगनोरेन्शिया फेक्टि नॉन एक्सक्यूजट), अज्ञानता का तर्क ।
प्रयोग, एक अपराधी अपने बचाव में तथ्य की अज्ञानता का तर्क पेश कर सकता है।
25. In forma pauperis, (इन फोर्मा पोपरिस), अंकिचन के रूप में।
प्रयोग, जिस व्यक्ति के पास न्यायालय में कोर्ट फीस जमा करने के लिए रूपये नहीं होते, या जिसके पास कुल 1000 रू0 से अधिक की सम्पत्ति नहीं होती, उसे न्यायालय द्वारा अकिंचन के रूप में बिना कोर्ट फीस जमा किये वाद दायर करने की अनुमति दी जाती है।
26. In pari delicto, (इनपेरिडेलिक्टो), बराबर-बराबर दोषी।
प्रयोग, योगदायी उपेक्षा (असावधानी) में जहाँ दोनों पक्ष, वादी और प्रतिवादी बराबर-बराबर दोषी हों तो वहाँ कोई भी पक्ष क्षतिपूर्ति प्राप्त नहीं कर सकता।
27. In personam, (इन परसोनम ), व्यक्तिबन्धी या व्यक्ति लक्षी ।
प्रयोग, संविदा में किसी व्यक्ति के व्यक्तिलक्षी अधिकार का उल्लंघन होता है।
28. Injuria Sine damno, (इन्जूरिया सिने डेमनो ), क्षति बिना हानि ।
प्रयोग, अपकृत्य विधि में, क्षति बिना हानि अभियोज्य होती है।
29. Inter alia, (इन्टर एलिया), अन्य बातों के साथ-साथ।
प्रयोग, अस्थायी निषेधाज्ञा के लिए अन्य बातों के साथ-साथ प्रथम दृष्ट्या बाद का कारण दिखाना आवश्यक है।
30. Inter se, (इन्टर से), आपस में
प्रयोग, अन्तर्राविचनीय वाद में प्रतिवादीगण आपस में वाद लड़ते हैं क्योंकि, वादी, वाद की विषय-वस्तु में वाद के खर्चों के अलावा कुछ भी प्राप्त नहीं करना चाहता।
31. Lis Pendens, (लिस पेन्डेन्स), विचाराधीन वाद
प्रयोग, विचाराधीन वाद के दौरान विवादित सम्पत्ति को बेचना अवैध होता है।
32. Nemo dat quod non habet, (नेमो डेट क्वीड नॉन हेबेट), कोई भी व्यक्ति स्वयं के हक से ऊँचा (श्रेष्ठ) हक अन्तरित नहीं कर सकता।
प्रयोग, जब कोई व्यक्ति, चोरी की कार दूसरे को बेचता है तो खरीदार को कार में कोई हक नहीं मिलता क्योंकि मूल विक्रेता के पास बेचने का हक नहीं था।
33. Nemo debet lis puniri pro uno delicto (नेमो डेबेट विस प्यनिरि प्रो उनो डोल्किटो), एक अपराध के लिए किसी को भी दोबारा दंडित नहीं किया जा सकता
प्रयोग, भारतीय संविधान के अनुसार यह एक मूल सिद्धान्त है कि, किसी भी व्यक्ति को एक अपराध के लिए दुबारा दंडित नहीं किया जा सकता।
34. Nomo debet bis vexari, si constet curiae quod sit prouna it eadem Ocausa, (नेमो डेबेट बिस वेक्सरी, सि कन्सटेट क्यूरि कवाड सिट प्रो उनी इट इडम कोजा),
प्रयोग, अपराधिक विधि का यह सिद्धान्त है कि, किसी भी व्यक्ति को एक ही हेतुक के लिए दो बार तंग नहीं किया जा सकता।
35. Novos actus interveniens, (नोवो एक्टस इन्टर वेनियस), मध्यवर्ती नवीन कार्य ।
प्रयोग, जब वादी और प्रतिवादी के कार्य-कारण का सम्बन्ध किसी मध्यवर्ती नवीन कार्य द्वारा टूट जाता है तो, प्रतिवादी, वादी को हुई हानि के लिए दायी नहीं होगा क्योंकि, ऐसी क्षति दूरस्थ कहलाती हैं।
36. Nudum pactum, (नूडम पेकटम), बिना प्रतिफल के।
प्रयोग, बिना प्रतिफल के करार शून्य होता है।
37. Onus probande, (ओनस प्रोबेंडि), साबित करने का भार ।
प्रयोग, दीवानी के वाद में जब किसी ओर से कोई सबूत नहीं दिया जाता तो सबूत का भार उस व्यक्ति पर आ जाता है जो सबूत न देने पर वाद में असफल रहेगा।
38. Pacta sunt servanda, (पैक्टा सन्ट सर्वेन्डा ), संविदा सर्वथा पालनीय ।
प्रयोग, वास्तव में अन्तर्राष्ट्रीय विधि का आधार संविदा सर्वथा पालनीय है।
39. Prima Facie, (प्राइमा फेसि), प्रथम दृष्टया ।
प्रयोग, अस्थायी निषेधाज्ञा प्राप्त करने के लिए अन्य बातों के अलावा प्रथम दृष्टया वाद सिद्ध करना आवश्यक है।
40. Quantam Meruit, (क्वान्टम मेरिट ), जितना काम उतना दाम
प्रयोग, एक व्यक्ति को अमुक कार्य पूरा करने के लिए रखा गया परन्तु उसने उस कार्य को पूरा नहीं किया उसे उसके द्वारा किये गये कार्य के अनुसार मुक्तियुक्त रकम दी जायेगी।
41. Res gestae, (रेस जेस्टि), सम्बन्धित तथ्य और कार्य।
प्रयोग, घटना के समय अपराधियों द्वारा जो किया गया और कहा गया वह उस घटना से सम्बन्धित तथ्य और कार्य का अंग माना जायेगा।
42. Res ipsa loquiter, (रेस इप्सा लोक्यूटर), घटना स्वयं बोलती है।
प्रयोग, जब घटना इस प्रकार घटे कि वह बिना प्रतिवादी की असावधानी के नहीं घट सकती थी तो ऐसे वाद में असावधानी को सिद्ध करने का भार प्रतिवादी पर होता है कि उसने कोई असावधानी नहीं की थी।
43. Res-judicata, (रेस- जूडिकेटा), पूर्व-न्याय ।
प्रयोग, जब किसी वाद के पक्षों में पहले से ही एक वाद अमुक विषय चल रहा है तो दोबारा उन्हीं पक्षों में उसी विषय पर दायर नहीं किया जा सकता।
44. Res nullius, (रेस नलियस), स्वामीहीन सम्पत्ति ।
प्रयोग, विधिशास्त्र के अनुसार जो व्यक्ति स्वामीहीन वस्तु पर सबसे पहले अपना कब्जा करता है वही उसका स्वामी माना जाता है।
45. Rule nisi, ( रूल निसी), प्रारम्भिक आदेश, या सशर्त आदेश ।
प्रयोग, भागीदार और विभाजन के मामले में न्यायालय किसी सशर्त आदेश को तभी पूर्ण आदेश घोषित करता है जब इसके विपरीत किसी पक्ष द्वारा अन्यथा सिद्ध नहीं कर दिया जाता है।
46. Sine die, (साइने डाई), अनिश्चित काल के लिए।
प्रयोग, कभी-कभी लोकसभा अनिश्चित काल के लिये स्थगित की जाती है।
47. Sine quo non, (साइने क्यूवा नॉन), अनिवार्य ।
प्रयोग, सरकारी अधिकारी के खिलाफ वाद दायर करने के लिए धारा 80 सी0 पी० सी० के अन्तर्गत 60 दिन का नोटिस देना अनिवार्य है।
48. Stare decisis, (स्टेयर डिसिसिस), निर्णयानुसरण ।
प्रयोग, देश के सभी अधीनस्थ न्यायालय अपना निर्णय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णयानुसार देने के लिए बाध्य हैं।
49. Status quo, (स्टेटस को ), यथापूर्व स्थिति ।
प्रयोग, न्यायालय किसी ऐसे बाद में जहाँ सबूत नष्ट होने का खतरा हो वहाँ न्यायालय पक्षों को वाद के दौरान यथापूर्ण स्थिति रखने का आदेश देता है।
50. Sub judice, (सब जूडिस), न्यायाधीन ।
प्रयोग, जब दो पक्षों के बीच एक वाद-विषय पर एक न्यायालय में वाद विचाराधीन है तो वही वाद उन्हीं पक्षों के बीच अन्य न्यायालय में दायर नहीं किया जा सकता।
51. Transfer Inter Vivos, (ट्रान्सफर इन्टर वाइवाज), जीवित व्यक्तियों के बीच अन्तरण ।
प्रयोग, सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम, 1882 के अन्तर्गत केवल जीवित व्यक्तियों के बीच ही सम्पत्ति का अन्तरण किया जा सकता है।
52. Ubi jus-ibi remedium, (यूबि जस इबि रेमेडियम), जहाँ अधिकार है वहाँ उपाय है
प्रयोग, चीफ जस्टिस होल्ट ने ऐसबी ब० व्हाइटए, 1703 में यह निर्णय दिया था कि, यदि किसी व्यक्ति कर अधिकार भंग किया जाता है तो, उसको उसे लागू करने के लिए उपाय प्राप्त होना चाहिये, क्योंकि बिना उपचार के अधिकार एक अर्थहीन औपचारिकता होती है।
58. Ultra Vires, (अल्ट्रा वायरस), अधिकारातीत ।
प्रयोग, यदि कोई कानून संविधान के प्रावधानों के विपरीत है तो, सर्वोच्च न्यायालय उसे संविधान के बाह्य घोषित कर देगा है और ऐसी विधि शून्य मानी जायेगी।
54. Vice versa, (वाइस वरसा), विपरीत।
प्रयोग, कोई भी व्यक्ति पति नहीं कहला सकता, यदि उसकी कोई जीवित पत्नी न हो, इसके विपरीत कोई भी स्त्री पत्नी नहीं कहला सकती, यदि उसका कोई जीवित पति न हो ।
55. Viva Voce, (वाइवा वोसी), मौखिक परीक्षा ।
प्रयोग, सन् 2001 से एल० एल० तृतीय वर्ष में मौखिक परीक्षा आरम्भ हो गई है।
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