What do you know about the Regional Arrangements on Human Rights? When and Why Europen Convention on Human Right is estab- lished? What rights and freedoms are protected under it? What means are included in the machanism of this convention for the enforcement of Human rights. Explain.
उत्तर- मानव अधिकार पर क्षेत्रीय व्यवस्था (Regional Arrangements on Human Rights)— 'क्षेत्र' से कई राज्यों का समूह आशयित है। साधारण अर्थ में क्षेत्रवाद का आधार सामान्य हित है। क्षेत्रवाद या क्षेत्रीय व्यवस्था का प्रतिपादन संयुक्त राष्ट्र चार्टर में ही किया गया है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 52 में कहा गया है कि चार्टर की कोई बात अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाये रखने से ऐसे मामलों में, जो क्षेत्रीय कार्रवाई के लिए समुचित हैं, कार्रवाई करने के लिए क्षेत्रीय व्यवस्था के अस्तित्व को इंकार नहीं करती है, परन्तु ऐसी व्यवस्था और उनके क्रियाकलाप संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों और सिद्धान्तों से संगत होने चाहियें। संयुक्त राष्ट्र के ऐसे सदस्य, जो ऐसी व्यवस्थाएं करते हैं, स्थानीय विवादों को सुरक्षा परिषद को निर्देशित करने के पूर्व ऐसी क्षेत्रीय व्यवस्थाओं के माध्यम से उसके शांतिपूर्ण ढंग से निपटारे की वृद्धि को प्रोत्साहन देंगे। चार्टर के अनुच्छेद 53 में कहा गया है कि सुरक्षा परिषद, जहां उचित हो, वहां अपने प्राधिकार के अधीन की जाने वाली प्रवर्तनकारी कार्रवाई के लिए ऐसी क्षेत्रीय व्यवस्थाओं का उपयोग करेगी।
अनेक क्षेत्रीय संगठन, जैसे नाटो, सेण्टो, सीटो, ओआयू और ओपेक आदि अस्तित्व में आ गये हैं। इनमें से अनेक सैन्य दृष्टिकोण से स्थापित किये गये हैं। चूँकि मानव अधिकारों के संरक्षण और प्रवर्तन के लिए कोई प्रभावी अन्तर्राष्ट्रीय संस्था नहीं है अतः इस अभाव की पूर्ति के लिए कुछ ऐसे राज्यों ने क्षेत्रीय व्यवस्था के अस्तित्व की आवश्यकताओं को महसूस किया जिनकी राजनैतिक परम्परा, आदर्श, स्वतंत्रता और विधि के शासन में समानता है। क्षेत्रीय आधारों द्वारा मानव अधिकार की वृद्धि में संयुक्त राष्ट्र की अत्यन्त जटिल तंत्र की अपेक्षा अधिक कारगर तरीके से सहायता किये जाने की सम्भावना होती है। क्षेत्रीय संगठनों द्वारा उसके क्रिया कलापों को विकेन्द्रित करने और सन्देह को दूर करने की सम्भावना होती हैं और लागू करने के तरीके आसानी से उपलब्ध होते हैं । अन्तर्राष्ट्रीय प्रणाली की अपेक्षा क्षेत्रीय प्रणाली के अन्तर्गत जनमत अधिक प्रभावी होता है- मानव अधिकारों के बारे में यूरोपीय अभिसमय, मानव अधिकारों पर अमरीकी अभिसमय और मानव अधिकारों और लोगों के अधिकारों का अफ्रीकी चार्टर।
यूरोपीय मानव अधिकार अभिसमय कब और क्यों स्थापित की गई (When and Why European Convention on Human Right is Established?) - मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा को विधिक स्वरूप देने में यूरोपीय देशों ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यूरोपीय कांग्रेस द्वारा स्थापित यूरोपीय परिषद के स्टैटयूट में यह सिद्धांत प्रतिपादित किया गया है कि मानव अधिकारों को बनाए रखना तथा उनकी वृद्धि करना यूरोपीय एकता को प्राप्त करने के साधनों में से एक है। परिषद में विचार-विमर्श के फलस्वरूप मानव अधिकारों के बारे में यूरोपीय अभिसमय को रोम में 4 नवम्बर, 1950 को स्वीकार किया गया जिसे 3 सितम्बर, 1953 को लागू किया गया। अभिसमय को 22 राज्यों ने अनुसमर्थन प्रदान किया है। अभिसमय में 66 अनुच्छेद हैं। और इसे 5 भागों में विभाजित किया गया है। इस अधिसमय के 11 प्रोटोकाल हैं।
(अ) यूरोपीय अभिसमय के अन्तर्गत अधिकार और स्वतंत्रताएं (Rights and Freedoms under European Convention ) वे अधिकार जिनको मानव अधिकारों के बारे में यूरोपीय अभिसमय में मान्यता दी गयी है अभिसमय के प्रथम भाग, अनुच्छेद 2-18 और अभिसमय के 4 प्रोटोकाल में उपवर्णित किये गये हैं। इस अभिसमय में निम्नलिखित अधिकार और स्वतंत्रतायें सुरक्षित हैं अर्थात्-
1. प्राण का अधिकार ( अनुच्छेद 2 );
2. व्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 5);
3. यंत्रणा, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार या दंड से मुक्ति (अनुच्छेद 3);
4. दासता और बलात्श्रम से मुक्ति (अनुच्छेद 4);
5. ऋजु और सार्वजनिक सुनवाई का अधिकार ( अनुच्छेद 16);
6. कार्योत्तर विधि और दंड से मुक्ति ( अनुच्छेद 7);
7. प्राइवेट और पारिवारिक जीवन का अधिकार, जिसमें घर और पत्राचार भी सम्मिलित है ( अनुच्छेद 8);
8. विचार, अन्तरात्मा और धर्म की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 9);
9. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 10);
10. शांतिपूर्वक सम्मेन करने की स्वतंत्रता और संगम की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 11);
11. विवाह की उम्र वाले मनुष्यों और स्त्रियों को विवाह और परिवार स्थापित करने का अधिकार ( अनुच्छेद 12)
12. अधिकारों और स्वतंत्रताओं के उल्लंघन के विरूद्ध राष्ट्रीय अधिकरण के समक्ष प्रभावी उपचार का अधिकार ( अनुच्छेद 13 );
13. शिक्षा का अधिकार (अनु० 2 प्रोटोकाल )।
14. युक्तियुक्त, अन्तराल के पश्चात् स्वतंत्र निर्वाचन अनुच्छेद 3 प्रोटोकाल । और
15. राज्य से निष्कासन की मुक्ति (अनुच्छेद 3 प्रोटोकाल 4 );
16. मृत्यु दण्ड का अन्त (अनुच्छेद | प्रोटोकाल 6 ) ;
17. उच्चतर न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि के पुनर्विलोकन का अधिकार ( अनुच्छेद 2 प्रोटोकाल 7)
18. सामूहिक निष्कासन से मुक्ति (अनुच्छेद 4 प्रोटोकाल 4);
19. अपने कब्जा के शान्तिपूर्वक उपभोग का अधिकार (अनुच्छेद 1 प्रोटोकाल 1 ) ।
स्मरणीय है कि अनुच्छेद 15 के अनुसार, राष्ट्र के जीवन को खतरा उत्पन्न करने वाली घटना जैसे युद्ध या सार्वजनिक आपात के समय अभिसमय में उपवर्णित अधिकारों का अल्पीकरण किया जा सकता है, किन्तु इस अल्पीकरण की शक्ति का प्रयोग उसी सीमा तक किया जा सकता है, जैसी अत्यावश्यक स्थिति अपेक्षा करती है, परन्तु इसके साथ ही अनुच्छेद 15 के परिच्छेद 2 में कहा गया है कि ऐसे मामले में भी कुछ अधिकारों का अल्पीकरण नहीं किया जा सकता है-जैसे प्राण का अधिकार, यंत्रणा या अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार या दंड से मुक्ति, दासता से मुक्ति और कार्योत्तर आपराधिक विधि से मुक्ति ।
प्रत्याभूत अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रवर्तन तंत्र (Enforcement Machinery for the Protection of the Guaranteed Rights) - अभिसमय में प्रत्याभूत अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रवर्तन तंत्र की भी व्यवस्था की गयी है जिसके अन्तर्गत मानव अधिकारों का यूरोपीय आयोग और मानव अधिकारों का यूरोपीय न्यायालय आते हैं।
(ब) यूरोपीय मानव अधिकार आयोग (European Commission on Human Rights) अधिसमय के भाग तीन में यूरोपीय मानव अधिकार आयोग के संगठन सम्बन्धी प्रावधान दिये गये हैं। अनुच्छेद 20 के अनुसार, आयोग में उतने ही सदस्य हो सकते हैं, जितने अभिसमय के राज्य पक्षकार है। राज्य पक्षकारों के बराबर ही आयोग के सदस्यों की संख्या हो सकती है। एक ही राज्य से दो सदस्य नहीं हो सकते हैं। इस प्रकार आयोग में प्रत्येक पक्षकार राज्य का एक सदस्य हो सकता है। यूरोप की परिषद की संसदीय सभा के ब्यूरो द्वारा तैयार की गयी नामों की सूची से आयोग के सदस्यों का चुनाव 6 वर्ष के लिए मंत्रियों की समिति द्वारा किया जाता है। आयोग के सदस्य अपनी व्यक्तिगत हैसियत में कार्य करते हैं। वे उच्च नैतिक चरित्र के व्यक्ति हों और उनके पास अपने देश के उच्च न्यायिक पद की नियुक्ति के लिए अपेक्षित अर्हताएं (Qualifications) हो ।
आयोग के कार्य (Functions of the Commission)-आयोग के प्रमुख कार्य निम्नलिखित है-
(i) अभिसमय के उल्लंघन का अभिसमय के पक्षकार के कथन पर विचार करना जो किसी अन्य पक्षकार द्वारा आयोग को निर्देशित किया गया है (अनुच्छेद 24)।
(ii) याचिकाओं पर विचार करना, जो किसी व्यक्ति द्वारा, गैर सरकारी संगठनों द्वारा या व्यक्तियों के समूह द्वारा यह दावा करते हुए दी गयी हैं कि वे उच्च संविदाकारी पक्षकारों द्वारा अभिसमय में उपवर्णित अधिकारों के उल्लंघन से पीड़ित हैं, बशर्ते कि उच्च संविदाकारी पक्षकार, जिसके विरूद्ध शिकायत की गयी हैं, इस भाव की घोषणा करके कहता है कि उसने ऐसी याचिका को ग्रहण करने की आयोग की क्षमता को स्वीकार कर लिया है (अनुच्छेद 25)।
याचिका की ग्राह्यता के लिए निम्नलिखित शर्तों का पूरा होना आवश्यक है अर्थात्-
(i) कि सभी घेरूल उपचारों को निःशेष (Exhaust) कर दिया गया है,
(ii) मामला आयोग को अंतिम निर्णय की तारीख से 6 माह के भीतर निर्देशित किया गया है,
(iii) याचिका बिना नाम की नहीं होनी चाहिए,
(iv) याचिका ऐसे मामले पर नहीं आधारित होनी चाहिए, जिस पर आयोग ने पहले ही विचार कर लिया है,
(v) मामला पहले ही अन्य किसी अंतर्राष्ट्रीय अन्वेषण या प्रक्रिया को नहीं भेजा गया हो।
(स) यूरोपीय मानव अधिकार न्यायालय (European Court of Human Rights) अनुच्छेद 38 के अनुसार, मानव अधिकारों के यूरोपीय न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या यूरोप परिषद के सदस्यों की संख्या के समान होती हैं। इसमें दो न्यायाधीश एक ही राज्य के राष्ट्रिक नहीं है सकते हैं। अनुच्छेद 39 का कहना है कि न्यायाधीश उच्च नैतिक चरित्र के होंगे और उनके पास ऐसी अन्य अर्हतायें होनी चाहिए जो उच्च न्यायिक पद की नियुक्ति के लिए अपेक्षित हैं या मान्यता प्राप्त क्षमता के विधिवेत्ता हो। न्यायाधीशों का चुनाव 9 वर्ष की कार्यावधि के लिए यूरोप परिषद की संसदीय सभा द्वारा किया जाता है।
मानव अधिकारों के यूरोपीय न्यायालय का क्षेत्राधिकार स्वैच्छिक है। इसका क्षेत्राधिकार उन्हीं राज्यों के बारे में हैं, जिन्होंने स्पष्ट रूप से इस आशय की घोषणा करके उसके क्षेत्राधिकार को स्वीकार कर लिया है। न्यायालय के समक्ष मामले केवल उच्च संविदाकारी पक्षकारों तथा आयोग द्वारा लाये जा सकते हैं। इस संबंध में यह प्रक्रिया है कि केवल वे उच्च संविदाकारी पक्षकार वाद दाखिल कर सकते हैं, जिनके राष्ट्रिक के अधिकार का उल्लंघन हुआ है तथा जिन्होंने आयोग के समक्ष मामले को निर्दिष्ट किया था और जिनके विरूद्ध शिकायत की गयी हो। न्यायालय के क्षेत्राधिकार के बारे में यह आवश्यक है कि मामला पहले आयोग को निर्दिष्ट किया गया हो और मंत्री समिति को आयोग के रिपोर्ट के प्रेषण से तीन माह से अधिक का समय व्यतीत न हुआ हो। न्यायालय का विनिश्चय अंतिम होता है, लेकिन यह केवल किसी विशेष मामले के पक्षकारों पर बाध् यकारी होता है। निर्णय मंत्री समिति को भेजा जाता है, जो उसके निष्पादन का पर्यवेक्षण करती है। ( अनुच्छेद 54 ) ।
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