शनिवार, 17 जून 2023

अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मानव अधिकारों को लागू करने के लिए किन-किन साधनों का प्रयोग किया जाता है?

प्रश्न. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मानव अधिकारों को लागू करने के लिए किन-किन साधनों का प्रयोग किया जाता है?
What means are employed for the enforcement of Human Rights at the International Level.
Or 
सिविल और राजनैतिक अधिकार प्रसंविदा एवं आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की प्रसंविदा के अन्तर्गत मानव अधिकारों को लागू करने के विभिन्न ढंगों का वर्णन बीजिए।
Explain the various modes for the implementation of the human rights under the covenant on Civil and Political Rights and the covenant on Economic, Social and Cultural Rights.
Or
"नागरिक और राजनैतिक अधिकार" और "आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों की प्रसंविदाओं के अन्तर्गत वर्णित मानव अधिकारों" के क्रियान्वयन की कौन सी क्रिया स्थापित की गई है? वर्णन कीजिए।
What procedure is laid down for the implementation of the Hu- man Rights provided under the covenants on Civil and Political Rights and the Covenants on Economic, Social and Cultural Rights. Explain.

उत्तर - स्मरणीय है कि, संयुक्त राष्ट्र चार्टर प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय दस्तावेज है जिसका उद्देश्य मानव अधिकारों और मूल स्वतंत्रताओं की वृद्धि करना है। अपने आरम्भिक दिनों में संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद और मानव अधिकार आयोग इस धारणा पर कार्य करते रहे कि अन्तर्राष्ट्रीय अधिकार पत्र में साधारण सिद्धान्तों की घोषणा की जाए जिसका नैतिक बल हो और एक पृथक प्रसव हो जिसका वैध रूप से उन राज्यों पर बाध्यकारी बल (Binding Force) हो जिन्होंने इसका अनुसमर्थन किया हो और उनके कार्यान्वयन (Implementation) का ढंग भी हो। इस तरह मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा अस्तित्व में आई जिसको महासभा ने 19 दिसम्बर, 1948 को पारित किया। इस घोषणा का विश्व में बड़ा सर्वव्यापी प्रभाव रहा क्योंकि इसके आधार पर बहुत से राज्यों ने अपने-अपने संविधानों में घोषणा में उपवर्णित मानव अधिकारों को शामिल कर लिया जिससे वे राज्यों के न्यायालयों द्वारा लागू किये जाने लगे। 

परन्तु चूँकि घोषणा के पास विधि का बल नहीं है और यह कोई बहुपक्षी संधि भी नहीं है इसलिए इसके पालन में शिथिलता और निष्क्रियता ही दिखाई दी फिर भी आरम्भिक अवस्था में भी विभिन्न अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा मानव अधिकारों के संरक्षण के विभिन्न तरीके अपनाये गये थे जिनमें प्रमुख हैं-1. वंचना (Depreivation), न्यायनिर्णयन (Adjudication), समझौता वार्ता (Negotiation); अन्वेषण (Investigation): शिक्षा (Education); और प्रतिकर (Com pensation) आदि।

अन्त में, अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय ने दो अन्तर्राष्ट्रीय प्रसंविदाएं पारित किये-सिविल और राजनैतिक अधिकारों की प्रसंविदा और आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की प्रसंविदा ये दोनों अन्तर्राष्ट्रीय प्रसंविदाएँ अब लागू हो गई है। उक्त दोनों प्रसंविदा क्रमशः 30 मार्च, 1976 व 3 जनवरी, 1976 को विधिवत लागू हो गई क्योंकि निर्धारित तिथियों को निर्धारित राज्यों की संख्या ने इनका अनुसमर्थन कर दिया है। 

दोनों प्रसंविदाओं में वर्णित मानव अधिकारों के कार्यान्वयन (Implementation) के उपबंध] दिये गये हैं। आरम्भ में कार्यान्वयन के लिए एक अलग दस्तावेज बनाने के लिए विचार किया गया था परन्तु अन्त में इन्हें प्रसविदाओं में ही शामिल कर लिया गया था। स्मरणीय है कि मानव अधिकारों को लागू करने के लिए प्रणाली दोनों प्रसंविदाओं में अलग-अलग है।

सिविल और राजनीतिक प्रसंविदा के अधीन कार्यान्वयन तंत्र (Implementation Mechanism under the Civil and Political Rights Covenants )- इस प्रसंविदा के अन्तर्गत प्रावधानों को निम्नलिखित तीन माध्यमों के द्वारा लागू किया जाता है-

(अ) मानव अधिकार समिति (Human Rights Committee HRC);

(ब) अविधिक रिपोर्ट (Periodical Reports); और 

(स) सुलह प्रक्रिया (Conciliation Procedure)।

(अ) मानव अधिकार समिति (Human Rights Committee)- सिविल और राजनीतिक अधिकारों की प्रसंविदा के उपबंधों को लागू करने के लिये प्रमुख माध्यम मानव अधिकार समिति है। इस अन्तर्राष्ट्रीय प्रसंविदा के अधीन कार्यान्वयन प्रक्रिया के निष्पादन का भार मानव अधिकार समिति पर है। समिति को गठित करने की प्रक्रिया यह है कि प्रत्येक राज्य पक्षकार अपने ऐसे दो राष्ट्रिकों (Nationalities) का नाम निर्देशित करता है जो उच्च नैतिक चरित्र के व्यक्ति होते हैं और मानव अधिकार के क्षेत्र में जिनकी मान्यता प्राप्त क्षमता होती है। अनुच्छेद 28 (2) के अनुसार, यह भी ध्यान रखा जाता है कि कुछ व्यक्तियों के पास विधिक क्षमता है। अनुच्छेद 29 (1) के अनुसार, राज्य पक्षकारों द्वारा नामनिर्देशित व्यक्तियों में से अठारह सदस्यों का चुनाव गुप्त मतदान द्वारा किया जाता है मानव अधिकार समिति अठारह सदस्यों से मिलकर बनती है। समिति का सदस्य पुनः नामनिर्देशन का पात्र होता है। मानव अधिकार समिति की अवधि चार वर्ष होती है। सदस्य अवधि पूरा होने पर पुनः निर्वाचित हो सकते हैं परन्तु यह तब जबकि वे प्रसंविदा के पक्षकारों द्वारा नाम निर्दिष्ट (Nominated) किये जाते हैं बारह सदस्य समिति की गणपूर्ति करते हैं समिति में सभी निर्णय उपस्थित सदस्यों के बहुमत से किये जाते हैं। स्मरणीय है कि संविदा में वर्णित मानव अधिकारों के क्रियान्वयन के उपायों का निष्पादन मानव अधिकार समिति द्वारा निम्नलिखित चार प्रकार से किया जाता है अर्थात्-

(i) रिपोर्टिंग प्रणाली (Reporting System);

(ii) अन्तर राज्यिक संसूचना प्रणाली (Inter-State Communications System);

(iii) सुलह प्रक्रिया (Conciliation Procedure) और

(iv) व्यक्ति संसूचना प्रणाली (Individual Communication System)

(i) रिपोर्टिंग प्रक्रिया (Reporting Procedure)- अनुच्छेद 40 (1) के अनुसार, राज्यों की यह बाध्यता है कि ये उन उपायों को जो दे प्रसंविदा के अन्तर्गत परिकल्पित अधिकारों को प्रभावी बनाने के लिये किये हैं और इन अधिकारों के उपभोग में जो प्रगति हुई है उन पर अपनी रिपोर्ट भेजें। राज्य पक्षकारों से प्रसंविदा के लागू होने के एक वर्ष के अन्दर रिपोर्ट भेजने की अपेक्षा की गई है और उसके बाद जब समिति अनुरोध करे तब राज्य रिपोर्ट भेजेंगे। रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के महासचिव को भेजी जाती है जो उन्हें समिति को विचार कने के लिये प्रेषित करते हैं। अनुच्छेद 40 (2) के अनुसार, रिपोर्टों में उन कारकों (Factors) और कठिनाइयों को, यदि कोई हो, बताया जाना है जो वर्तमान प्रसंविदा के प्रवर्तन को प्रभावित करने वाले हैं। समिति रिपोर्ट का अध्ययन करती है तथा राज्य पक्षकारों को अपनी रिपोर्ट तथा ऐसी सामान्य टिप्पणियों को प्रेषित करती है जिसे वह ठीक समझती है। समिति राज्य पक्षकारों से प्राप्त रिपोर्टों की प्रतिलिपियों के साथ इन टिप्पणियों को आर्थिक तथा सामाजिक परिषद को भी भेज सकती है। रिपोर्टिंग प्रणाली का उद्देश्य सदस्य राज्यों में प्रसंविदा के उपबंधों के कार्यान्वयन के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारी प्राप्त करना है।

(ii) अन्तर- राज्यिक संसूचना प्रणाली (Inter- State Communications System)- यदि प्रसंविदा का एक राज्य पक्षकार यह समझता है कि दूसरा राज्य पक्षकार वर्तमान प्रसंविदा के उपबंधों को प्रभावी नहीं कर रहा है तो वह उस राज्य पक्षकार का ध्यान आकर्षित कर सकता है। ध्यान आकर्षण करने की संसूचना लिखित दी जाती है। अनुच्छेद 41 (क) और (ख) के अनुसार, सूचना प्राप्त करने के बाद तीन मास के भीतर, संसूचना प्राप्त करने वाला राज्य संसूचना भेजने वाले राज्य को स्पष्टीकरण या मामले को स्पष्ट करते हुए लिखित कोई अन्य कथन भेजता है। स्पष्टीकरण या कथन में मामले में किये गये, लम्बित या उपलब्ध घरेलू प्रक्रियाओं तथा उपचारों का सम्भव सीमा तक और उपयुक्त निर्देश को शामिल किया जाना चाहिये। यदि संसूचना प्राप्त करने वाले राज्यों के द्वारा प्रारम्भिक संसूचना की प्राप्ति के बाद 6 मास के भीतर मामला सम्बद्ध दोनों राज्य पक्षकारों की संतुष्टि में समायोजित नहीं होता है तो दोनों में किसी राज्य पक्षकार को मामला मानव अधिकार समिति को और दूसरे पक्षकार को दी गई सूचना द्वारा मानव अधिकार समिति को निर्दिष्ट करने का हक है।

उपर्युक्त अनुच्छेद 41 (क) और (छ) से यह स्पष्ट होता है कि मानव अधिकार समिति को निर्देश देने से पहले एक राज्य पक्षकार द्वारा दूसरे राज्य पक्षकार को संसूचना देना होता है। लेकिन समिति को संसूचित करने में काफी सीमाएं हैं संसूचना को समिति द्वारा तब प्राप्त किया जाएगा और उस पर विचार किया जाएगा, जब उसे उस राज्य पक्षकार द्वारा भेजा जाता है जिसने स्वयं इस संबंध में समिति की क्षमता को मान्यता देते हुए घोषणा की है ऐसी घोषणा वर्तमान प्रसंविदा के किसी राज्य पक्षकार द्वारा किसी समय यह कहते हुए की जा सकती है कि वह सूचना प्राप्त करने तथा उस पर विचार करने की समिति की क्षमता इस मत को मान्यता देता है कि एक राज्य पक्षकार यह दावा करता है कि दूसरा राज्य पक्षकार वर्तमान प्रसंविदा के अधीन अपनी बाध्यताओं को पूरा नहीं कर रहा है। इस प्रकार की अन्तर राज्यिक संसूचना प्रणाली प्रसंविदा के उपबंधों के अधीन स्वैच्छिक है।

अनुच्छेद 41 (ग) के अनुसार, अपने को निर्देशित मामले में समिति इस बात को निश्चित करके विचार करेगी कि अन्तर्राष्ट्रीय विधि के सामान्यतः मान्य सिद्धान्तों के अनुसार सभी प्राप्य उपचारों का सहारा ले लिया गया है और उन्हें निःशेषित (Exhaust) कर लिया गया है। यह नियम नहीं होगा जहाँ उपचारों का आवेदन अयुक्तियुक्त रूप से लम्बित (Pending) रहता है। समिति संसूचना की परीक्षा गुप्त बैठक में करती है। किसी मामले का विचार करते समय, समिति पक्षकारों से सुसंगत जानकारी प्राप्त कर सकती है। संसूचना के विचारण के समय सम्बद्ध पक्षकार प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। उन्हें मौखिक रूप से पा लिखित में या दोनों प्रकार से निवेदन करने का अधिकार है। समिति प्रसंविदा में मान्यता प्राप्त मानव अधिकारों और मूल स्वतन्त्रताओं के प्रति आदर के आधार पर मामले के मैत्रीपूर्ण समाधान के लिये सम्बद्ध राज्य पक्षकारों को अपना सत्प्रयत्न उपलब्ध करा सकती है, अनुच्छेद 41 (ङ) ।

प्रत्येक ऐसे मामले में समिति से राज्य पक्षकार द्वारा सूचना को प्राप्ति की तारीख से बारह मास के भीतर रिपोर्ट देने की अपेक्षा की जाती है। यदि कोई समाधान निकल आता है तो. समिति तथ्यों और समाधान का एक संक्षिप्त विवरण अपनी रिपोर्ट में शामिल करती है। यदि कोई समाधान नहीं निकल पाता है तो समिति अपनी रिपोर्ट के साथ तथ्यों का संक्षिप्त विवरण और मौखिक निवेदनों के अभिलेख को संलग्न कर देगी।

यद्यपि प्रत्येक मामले में रिपोर्ट सम्बद्ध राज्य पक्षकारों को भेजी जाती है फिर भी ऐसे प्रावधानों के होते हुए भी राज्यों ने अन्तर- राज्यिक सूचना प्रणाली का उपयोग बहुत कम किया है। 

(iii) सुलह प्रक्रिया (Conciliation Procedure)- जब अन्तर- राज्यिक संसूचना में मामले का कोई समाधान नहीं निकल पाता है तो मानव अधिकार समिति अनुच्छेद 42 के अधीन सुलह प्रक्रिया अपनाती है। ऐसे मामले में समिति मैत्रीपूर्ण समाधान के लिये सम्बद्ध पक्षकारों की पूर्व सम्मति से तदर्थ सुलह आयोग का गठन कर सकती है। आयोग का गठन उन पांच व्यक्तियों से किया जाएगा जो सम्बद्ध पक्षकारों को मन्जूर हों। यदि सम्बद्ध राज्य पक्षकार आयोग के गठन पर तीन मास के अन्दर किसी सहमति पर पहुँचने में असफल रहते हैं, तो आयोग के वे सदस्य जिनके बारे में सहमति नहीं हुई है, समिति के सदस्यों में से उनके दो तिहाई बहुमत द्वारा गुप्त मतदान से चुने जाएंगे। आयोग के सदस्य अपनी व्यक्तिगत हैसियत में कार्य करते हैं। सदस्य सम्बद्ध राज्य पक्षकारों या वर्तमान प्रसंविदा के गैर राज्य पक्षकार या उस राज्य पक्षकार, जिसने अनुच्छेद 41 के अधीन घोषणा नहीं की है, के राष्ट्रीय नहीं होते हैं। आयोग अपने अध्यक्ष का चुनाव स्वयं करता है तथा अपनी प्रक्रिया के नियम स्वयं स्वीकार करता है। सामान्यतया आयोग की बैठकें संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय में या जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में होती हैं। बैठकें अन्य स्थानों पर भी की जा सकती हैं, यदि आयोग संयुक्त राष्ट्र महासचिव तथा सम्बद्ध राज्य पक्षकारों के साथ विचार विमर्श करके ऐसा निर्णय करता है।

(iv) व्यक्ति संसूचना (Individual Communications) - यद्यपि सिविल और राजनीतिक अधिकारों की अन्तर्राष्ट्रीय पसंविदा के अधीन केवल राज्यों को शिकायत करने की प्रास्थिति (Status) है। परन्तु फिर भी ऐसा ही अधिकार व्यक्तियों को सिविल और राजनीतिक अधिकारों की अन्तर्राष्ट्रीय प्रसंविदा के प्रथम वैकल्पिक प्रोटोकाल में दिया गया है। अब कोई भी व्यक्ति प्रसंविदा के अधीन मानव अधिकार का अतिक्रमण करने वाले राज्य के विरूद्ध शिकायत दायर कर सकता है। लेकिन ऐसी शिकायत केवल उसी राज्य के विरूद्ध दायर की जा सकती है जो प्रसंविदा का पक्षकार है। जो राज्य इस प्रोटोकोल का पक्षकार बन जाता है वह मानव अधिकार समिति की इस क्षमता को मान्यता देता है कि वह अपने क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत उस व्यक्ति से सूचना प्राप्त कर सकती है और उस पर विचार कर सकती है, जो प्रसंविदा में वर्णित मानव अधिकारों में से किसी का उस राज्य पक्षकार द्वारा उल्लंघन से पीड़ित होने का दावा करता है। प्रोटोकाल के अनुच्छेद 41 का कहना है कि समिति द्वारा कोई ऐसी सूचना प्राप्त नहीं की जाएगी जो प्रसंविदा के राज्य पक्षकार से संबंधित है परन्तु वह वर्तमान प्रोटोकाल का पक्षकार नहीं है।

सूचना पेश करने के विषय में एक नयाचार यह है कि कोई सूचना समिति द्वारा प्राप्त नहीं की जाएगी यदि वह अनाम (anonymous) है या समिति समझती है कि सूचना भेजने के अधिकार का दुरूपयोग है या यह प्रसंविदा के उपबंधों से असंगत है। समिति किसी व्यक्ति की सूचना पर तब तक विचार नहीं करेगी जब तक वह यह निश्चय नहीं कर लेती है कि वही मामला अन्तर्राष्ट्रीय अन्वेषण (Investigation) या निपटारे की अन्य प्रक्रिया के अधीन देखा नहीं जा रहा है। समिति यह भी देखेगी कि व्यक्ति ने उपलब्ध सभी घरेलू उपचारों को निःशेषित (Exhaust) कर लिया है। परन्तु यह नियम वहाँ लागू नहीं होगा जहाँ उपचारों के आवेदन पर अयुक्तियुक्त देर की जाती है। वर्तमान प्रोटोकाल के अधीन सूचना को देखते समय समिति गुप्त बैठक करेगी।

यदि कोई सूचना समिति द्वारा विचार के लिये स्वीकार की जाती है, तो वह उस राज्य पक्षकार का ध्यानाकर्षित करती है जिसके संबंध में कथन किया जाता है कि उसने प्रसंविदा के उपबंध को भंग किया है। राज्य 6 मास के भीतर कोई लिखित स्पष्टीकरण, या मामले तथा उपचार, यदि कोई हो, जो राज्य द्वारा सम्पादित किया गया हो, को स्पष्ट करते हुए कथन पेश करने की अपेक्षा की जाती है। समिति व्यक्ति द्वारा सम्बद्ध राज्य पक्षकार द्वारा उसे उपलब्ध कराए गये सभी लिखित सूचना के परिप्रेक्ष्य में वर्तमान प्रोटोकाल के अधीन प्राप्त सूचनाओं पर विचार करती है। 

सूचना पर विचार करने के बाद समिति से अपने विचारों को सम्बद्ध राज्य पक्षकार तथा व्यक्ति को अग्रसारित करने की अपेक्षा की जाती है। स्मरणीय है कि समिति निर्णय' नहीं देती है। प्रोटोकोल में प्रयुक्त पद ‘विचारों' है। इसमें 'सिफारिश' शब्द भी प्रयुक्त नहीं किया गया है। 

यह कहा जा सकता है कि केवल 'विचारों' की क्या महत्ता है जबकि समिति सिफारिश करने के लिये भी सक्षम नहीं है जो 'निर्णय' से महत्व में काफी कम है। अतः इसके विचार सम्बद्ध राज्य पर बाध्यकारी नहीं हैं। मानव अधिकार समिति इन विचारों को अपनी वार्षिक रिपोर्ट में सम्मिलित करती है। इससे यह आशयित है कि कथित अपचारी राज्य के कार्यकलाप अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय के समक्ष उजागर हो जाएंगे। यह निश्चित ही लोकमत एकत्र करेगा। राज्य का उपचार प्रत्येक व्यक्ति की निगाह में आ जाएगा सब राज्य जान जाएंगे कि अपचारी राज्य संविदा के उपबंध का पालन नहीं कर रहा है।

उक्त प्रसंविदा की एक खास बात यह है कि एक व्यक्ति राज्य को अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय और लोगों के समक्ष अपने अधिकारों के उल्लंघन की प्रत्यक्ष शिकायत पेश कर सकता है। यद्यपि कि किसी व्यक्ति को मानव अधिकार का दुरूपयोग होने पर मानव अधिकार समिति को सूचना संबोधन करने से कोई प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिलता, फिर भी सबसे बड़ा लाभ व्यक्ति से यह है कि व्यक्ति को अन्तर्राष्ट्रीय मंच के समय आने की प्रास्थिति (Status) उपलब्ध है।

आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की प्रसंविदा के अधीन मानव अधिकारों का कार्यान्वयन (Implementation Mechanism of the Human Rights under the covenant on Economic, Social and Cultural Rights)- स्मरणीय है कि आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की प्रसंविदा में अधिकारों का संरक्षण करने के लिए तंत्र केवल रिपोर्टिंग प्रणाली तक ही सीमित है। यह प्रणाली एक ऐसी प्रणाली है जिसके बारे में अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय का काफी सफल अनुभव रहा है।

रिपोर्टिंग प्रणाली (Reporting System) उक्त प्रसंविदा में रिपोर्टिंग प्रणाली के लिये उपबंध अनुच्छेद 16 से 23 तक में किये गये हैं। सर्वप्रथम प्रसंविदा के राज्य पक्षकार उठाए गये कदमों और मानव अधिकारों के पालन में की गई प्रगति पर अपनी रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र महासचिव के पास भेजते हैं। तत्पश्चात् महासचिव इन रिपोर्टों को प्रसंविदा के उपबंधों के अनुसार आर्थिक और सामाजिक परिषद के पास विचार के लिए भेजता है। रिपोर्टों की प्रतिलिपियाँ या उनका अंश महासचिव द्वारा विशिष्ट अभिकरणों Specialised Agencies) के पास भी भेजा जाएगा जहां तक कोई मामला उनके उत्तरदायित्व की परिधि में आता है। राज्य पक्षकारों को अपनी रिपोर्टों के प्रक्रम में, आर्थिक और सामाजिक परिषद द्वारा स्थापित कार्यक्रम के अनुसार भेजनी पड़ती है। ऐसे कार्यक्रम का निर्धारण प्रसंविदा के लागू होने के दो वर्ष पश्चात् परिषद् द्वारा किया जाता है। राज्यों को रिपोर्टों में उन कारकों और कठिनाइयों को इंगित किया जाता है जो प्रसंविदा के अधीन बाध्यताओं को पूरा करने में अड़चन पैदा करते हैं।

अनुच्छेद 18 में कहा गया है कि आर्थिक और सामाजिक परिषद्, विशिष्ट अभिकरणों के साथ उसके पास उनके क्षेत्र में प्रसंविदा के अधीन उपबंधों के पालन की प्रगति की प्राप्ति से संबंधित उनके क्रियाकलापों के बारे में रिपोर्ट भेजने की व्यवस्था कर सकती है। इन रिपोटों के अन्तर्गत सक्षम अंगों द्वारा ऐसे कार्यान्वयन पर निर्णयों और सिफारिशों की विशिष्टियाँ शामिल की जानी आवश्यक हैं।

मानव अधिकारों के बारे में प्रसंविदा के राज्य पक्षकारों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट को, आर्थिक और सामाजिक परिषद् मानव अधिकार आयोग के पास अध्ययन, साधारण सिफारिश या सूचना के लिये भी भेज सकती है।

अनुच्छेद 20 के अनुसार, मानव अधिकार आयोग की सिफारिशों पर राज्य और विशिष्ट अभिकरण अपनी टिप्पणियाँ आर्थिक और सामाजिक परिषद् के पास भेज सकते हैं। अनुच्छेद 21 के अनुसार, आर्थिक और सामाजिक परिषद् को प्रसंविदा के अधीन मान्यता प्राप्त अधिकारों के बारे में उठाये गये कदमों और उनके संबंध में पालन की प्राप्ति की प्रगति के विषय में राज्यों और विशिष्ट अभिकरणों से प्राप्त सूचना का संक्षेप और उस पर साधारण प्रकृति की अपनी सिफारिश महासभा के पास भेजने की शक्ति दी गई है।

अनुच्छेद 22 के अनुसार, परिषद संयुक्त राष्ट्र के अंगों, उनके समनुषंगी अंगों और विशिष्ट अभिकरणों का ध्यान आकर्षित कर सकती है जो राज्य द्वारा की गई रिपोर्ट से निकलने वाले मामले के बारे में तकनीकी सहायता प्रदान करने से संबंधित हैं और अन्यों को जो ऐसी निकायों की सहायता जो प्रसंविदा के उपबंधों के प्रभावी कार्यान्वयन की उपयुक्तता के लिये अन्तर्राष्ट्रीय उपायों को निश्चित करने में सम्भवतः योगदान करें।

यद्यपि कोई भी व्यक्ति रिपोर्टिंग प्रणाली द्वारा मानव अधिकारों के प्रवर्तन के बारे में सन्देही हो सकता है फिर भी किसी व्यक्ति को यह नहीं भूलना चाहिये कि आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों का कार्यान्वयन राज्य की आर्थिक प्रगति पर निर्भर करता है। रिपोर्टिंग प्रणाली कुछ सीमाओं तक कम से कम प्रसंविदा के अधीन ली गई बाध्यताओं के पालन के संवर्धन के लिये प्रेरित करती है। 




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