What do you mean by the International Human Rights Commission? On what subjects International Human Rights Commission was direted to give recommondations and reports?
उत्तर- अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का अर्थ (Meaning of International Human Rights Commission)- अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग संयुक्त राष्ट्र संघ का एक प्रमुख अंग है- आर्थिक तथा सामाजिक परिषद् (Economic and Social Council - ECOSAOC)। मानवाधिकार के प्रश्न से इस परिषद् का सीधा सम्बन्ध है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 68 के अन्तर्गत उपरोक्त परिषद को यह अधिकार था कि वह मानवाधिकार के सरक्षण तथा प्रगति के लिए एक आयोग की स्थापना करे। इस परिषद को अपने कार्यों के सम्पादन के लिए अन्य आयोगों की स्थापना का भी अधिकार था। इस अधिकार के अन्तर्गत आर्थिक तथा सामाजिक परिषद ने मानवाधिकार आयोग की स्थापना की जिसे । फरवरी, 1946 को सामान्य सभा ने अपना अनुमोदन प्रदान किया। इस आयोग में आर्थिक तथा सामाजिक परिषद् द्वारा 18 सदस्यों की नियुक्ति की गई। प्रत्येक सदस्य राज्य ने अपने प्रतिनिधियों का चुनाव किया। यह सदस्य संख्या सन् 1962 में 21 हो गई तथा सन् 1966 में 32 तक पहुँच गई। वर्तमान समय में इस आयोग की सदस्य संख्या 53 राज्यों तक पहुँच गई है।
अन्तर्राष्ट्रीय मानवाअधिकार आयोग को किन विषयों पर संस्तुतियाँ और प्रतिवेदन तैयार करने का निर्देश दिया गया ? (On What Subjects International Human Rights Commission was Directed to Give Rocommendations & Reports) - स्मरणीय है कि अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को निम्नलिखित विषयों पर संस्तुतियाँ तथा प्रतिवेदन तैयार करने का निर्देश दिया गया था -
1. अन्तर्राष्ट्रीय अधिकार विधेयक (International Bill of Rights) पर।
2. दीवानी स्वतंत्रता (Civil Liberties) पर अन्तर्राष्ट्रीय अभिसमया में की गई घोषणाओं पर महिलाओं की स्थिति, सूचना की स्वतंत्रता तथा अन्य विषयो पर ।
3. अल्पसंख्यको के संरक्षण पर (On the Protetion of Minorities)।
4. धर्म, भाषा, लिंग तथा जाति के आधार पर विभेद के निवारण पर (Prevention of discrimination on the ground of race, sex, language or religion)
आयोग को अध्ययन करने, संस्तुति करने तथा नई सन्धियों के प्रारूप का निर्माण करने की शक्ति थी। आयोग मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों की जाँच कर सकता था तथा यदि बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लघन का मामला बनता था तो आयोग को कार्यवाही करने का भी अधिकार था। आयोग की उप-आयोग (Sub-Commission) गठित करने का भी अधिकार था।
आयोग ने जनवरी सन् 1947 में अपना कार्य प्रारम्भ किया। श्रीमती फ्रेन्कलिन डी० रूजवेल्ट अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की प्रथम अध्यक्षा थीं। अपने प्रथम सत्र में इस आयोग ने अल्पसंख्यको के संरक्षण तथा अल्पसंख्याओं के प्रति भेद-भाव (Discrimination) के निवारण के लिए एक उप-आयोग (Sub-commission) का गठन किया। यह निष्पक्ष विशेषज्ञों वाला एक उप-आयोग था। आयोग ने इसी सत्र में अन्तर्राष्ट्रीय अधिकार विधेयक (International Bill of Rights) का प्रारूप तैयार करने हेतु एक प्रारूप समिति का गठन किया। इस समिति ने मानवाधिकार की सार्वभौमिक घोषणा का प्रारूप तैयार किया जिसे 10 दिसम्बर, 1948 को सामान्य सभा द्वारा (स्वीकार) किया गया। तबसे आयोग ने अपने को मानक स्तर के निर्धारण के कार्य पर केन्द्रित किया है। सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा को आधार मानते हुए आयोग ने सन् 1966 में सिविल तथा राजनैतिक प्रसंविदा तथा आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रसंविदा (Covenants) का प्रारूप तैयार किया। तब से आयोग ने राज्यों द्वारा मानवाधिकार विधि का पालन सुनिश्चित कराने तथा इस पर निगरानी रखने के लिए यंत्र तथा प्रक्रिया तैयार करने के कार्य तक अपने को केन्द्रित किया है। आयोग मानवाधिकार के उल्लंघन के आरोपों की जाँच कर सकता है। आयोग मानवाधिकार के उल्लंघन के आरोपों की जांच हेतु सम्बन्धित राज्य (राष्ट्र) में अपने प्रतिनिधि मण्डल प्रेषित करता है जो तथ्यों की जांच का कार्य करते हैं। सन् 1994 में एक विशेष प्रतिनिधि चीन और एक प्रतिनिधि जाति विभेद पर जाँच हेतु अमेरिका गया।
सन् 1990 में आयोग ने सलाहकारी सेवा तथा जरूरतमंद राज्य में तकनीकी सहायता का कार्य किया जिससे राज्यों को मानवाधिकार के पालन के मार्ग में आ रहे अवरोधों से निपटने में सहायता मिल सके। आयोग ने आर्थिक, सामाजिक तथा राजनैतिक अधिकारो की उन्नति के लिए अधिक बल दिया जिसमे विकास का अधिकार तथा पर्याप्त जीवन स्तर के अधिकार को भी सम्मिलित किया गया।
आयोग ने निम्न उप-आयोग द्वारा उप-समितियों का गठन भी किया है-
1. अल्पसंख्यकों के संरक्षण तथा विभेद के निवारण पर उप-आयोग (Sub-Commission on Prevention of Discrimination and Protection of Minorities)—इस उप-आयोग में आयोग द्वारा नियुक्त 26 सदस्य हैं। ये सदस्य अपने राज्यों के प्रतिनिधि के रूप में कार्य नहीं करते अपितु व्यक्तिगत सक्षमता में कार्य करते हैं। यह उप- आयोग वर्ष में चार सप्ताह अपनी बैठ करते हैं। उनके तीन स्थायी समूह (Standing Groups ) हैं-1. मानवाधिकार की शिकायतो की जाँच करने वाला समूह, 2. दासता पर जाँच करने वाला समूह और 3 घरेलू जनसंख्या की समस्याओं पर कार्य करने वाला समूह।
2. महिलाओं की स्थिति पर आयोग (Commission of the Status of Women)—यह आयोग सन् 1946 में स्थापित हुआ। प्रारम्भ में इसकी सदस्य संख्या पन्द्रह थी जो सन् 1961 में बढ़कर 21 हो गई। आज इसके 32 सदस्य हैं। प्रमुख रूप से इसका कार्य महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक तथा राजनैतिक एवं शैक्षिक अधिकारों पर संस्तुतियाँ तथा प्रतिवेदन तैयार करना है।
3. मानवाधिकार के लिए केन्द्र (Centre for Human Rights) - यह केन्द्र जिनेवा में स्थित है तथा मानवाधिकार गतिविधियों में समन्वय स्थापित करता है। यह अध्ययन प्रतिवेदन तथा प्रकाशन तैयार करता है। यह सरकारों को सलाहकारी सेवा तथा सहायता प्रदान करता है। मानवाधिकार केन्द्र को मानवाधिकार को लागू करने के लिए विस्तृत प्रयास करना चाहिए। मानवाधिकार के लिए केन्द्र ने बड़े राष्ट्रों के संविधान निर्माण में सहायता प्रदान की है।
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