How is National Human Right Commission is Constituted and on what grounds its members and chairman are removed from their offices?
उत्तर- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन (Constitution of National Human Right Commission)- मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम (Protection of Human Rights) Act, 1993 की धारा-3 के अन्तर्गत केन्द्र सरकार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के गठन की शक्ति है। इसी अधिकार के अन्तर्गत केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना की है जिसका मुख्यालय दिल्ली में है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का एक अध्यक्ष होगा। मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष वही व्यक्ति हो सकता है जो उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रह चुका हो। वर्तमान समय में उच्चतम न्यायालय के भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेन्द्र बाबू राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में अध्यक्ष के अतिरिक्त निम्नलिखित सात सदस्य होगे-
1. उच्चतम न्यायालय का वर्तमान या अवकाश प्राप्त न्यायाधीश,
2. उच्च न्यायालय का वर्तमान या अवकाश प्राप्त न्यायाधीश,
3. दो सदस्य ऐसे व्यक्तियों में से नियुक्त किए जायेंगे जो मानवाधिकार से विषयों में ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखते हो,
4. तीन पदेन सदस्य (निम्नलिखित आयोगों के अध्यक्ष) होंगे-
(क) अल्पसख्यको के लिए राष्ट्रीय आयोग,
(ख) अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग,
(ग) राष्ट्रीय महिला आयोग ।
मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 3 की उपधारा (4) मे आयोग के लिए एक कार्यपालन अधिकारी की नियुक्ति का प्रावधान है जिसे महासचिव कहा जायेगा।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और मोहरयुक्त वारन्ट द्वारा की जाएगी। इससे स्पष्ट है कि इनकी नियुक्ति की शक्ति राष्ट्रपति में निहित है। राष्ट्रपति राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति एक समिति की संस्तुति पर करेगा। इस समिति के सदस्य प्रधानमंत्री की अध्यक्षता के अतिरिक्त अन्य पाँच सदस्य होंगे। इनमें लोकसभा का अध्यक्ष, केन्द्रीय गृहमंत्री, लोकसभा में विपक्ष का नेता, राज्य सभा में विपक्ष का नेता, राज्य सभा का उपसभापति सम्मिलित है।
अधिनियम की धारा 6 के अनुसार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष 70 वर्ष की आयु या पाँच वर्ष तक की समयावधि तक अपने पद पर रह सकता है। इस प्रकार यदि नियुक्ति के समय उसकी आयु 68 वर्ष है तो वह सिर्फ दो वर्षों तक अपने पद पर बना रह सकता है।
धारा 6 (2) के अनुसार, सदस्य पाँच वर्ष तक या 70 वर्ष की आयु तक सदस्य रह सकता है। किसी सदस्य की पुनर्नियुक्ति भी हो सकती है परन्तु वह किसी भी परिस्थिति में 70 वर्ष की आयु के पश्चात् सदस्य नहीं रह सकता। एक सदस्य पुनर्नियुक्त हो सकता है परन्तु अध्यक्ष की पुनर्नियुक्ति नहीं हो सकती। आयोग का अध्यक्ष या सदस्य आयोग से सेवानिवृत्ति के पश्चात् भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन नियोजित होने का पात्र नहीं रह जाता।
किन आधारों पर राष्ट्रीय मानव अधिकार के अध्यक्ष और सदस्यों को उनके पदों से हटाया जा सकता है? (On What Grounds its President and Members are Removed from their Offices) अधिनियम की धारा 5 मे अध्यक्ष तथा सदस्यों को पद से हटाये जाने के बारे मे प्रावधान किया गया है। इस प्रावधान के अनुसार, अध्यक्ष तथा सदस्यो को हटाये जाने के दो आधार हैं-
1. धारा 5 की उपधारा (1) मे वर्णित आधारों पर और
2. धारा 5 की उपधारा (2) में वर्णित आधारों पर।
1. धारा 5 की उपधारा (1) में अध्यक्ष तथा सदस्यों को हटाये जाने के निम्नलिखित दो आधार हैं-
(क) दुर्व्यवहार (Misconduct) और (ख) (Incapatity)।
(2) धारा-5 की उपधारा (2) में अध्यक्ष तथा सदस्यों को हटाये जाने के निम्नलिखित आधार है-
(क) उसे दिवालिया न्याय निर्णीत कर दिया जाये।
(ख) पदावधि के दौरान उसने अपने पदीय कर्तव्यों से भिन्न किसी लाभप्रद नियोजन को स्वीकार किया हो।
(ग) शारीरिक या मानसिक दौर्बल्य के कारण वह अपने पद पर बने रहने के अयोग्य हो गया हो।
(घ) सक्षम न्यायालय द्वारा वह विकृतचित घोषित किया गया हो।
(ङ) किसी ऐसे अपराध में दोषसिद्ध एवं दण्डित कर दिये जाने पर जिनमें राष्ट्रपति की राय में नैतिक अक्षमता अन्तर्बलित हो।
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