Explain the provisions of the convention on the elimination of all forms of discrimination against women and its implementation mechinery.
अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विवाहित महिलाओं की राष्ट्रीयता का अभिसमय, समान पारिश्रमिक अभिसमय और शिक्षा में भेदभाव के खिलाफ अभिसमय सम्बन्धी प्रावधानों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Briefly explain the provisions relating to the Nationality of Married Women and Equal Remuneration Convention and Convention Against Discrimination in Education.
उत्तर - महिलाओं के विरूद्ध, सभी प्रकार के भेदभाव के समापन सम्बन्धी अभिसमय (Convention on the Elimination of All Forms of Discrimination Against Women)- महिलाओं के विरूद्ध सभी प्रकार के भेदभाव के समापन सम्बन्धी अभिसमय, संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा द्वारा, 18 दिसम्बर, 1979 को स्वीकार कर लिया गया था जो 3 सितम्बर, 1981 से लागू हुआ। यह अभिसमय छः भागों और 30 अनुच्छेदों में बंटा हुआ है। अनुच्छेद 1 'महिलाओं के विरूद्ध भेदभाव' को परिभाषित करते हुए कहता है कि कोई भी अन्तर, अपवर्जन, या प्रतिबंध जो लिंग के आधार पर किया गया हो और जिसका परिणाम होता है कि महिलायें अपनी वैवाहिक स्थिति के बावजूद, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, सिविल या अन्य किसी क्षेत्र में अपने मानवाधिकार और मूल स्वतन्त्रताओं का पुरूषों के साथ समान स्तर पर उपभोग और प्रयोग न कर सके या ये अधिकार निष्प्रभावी होते हो या इनको हानि पहुंचती हो तो राज्य ऐसे भेदभाव को रोकने का प्रयास करेगा।
राज्य पक्षकार सभी क्षेत्रों में और विशेष रूप से राजनीतिक, सामाजिक आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में, सभी उपाय जिसमें विधान भी शामिल है, करेंगे इस बात को सुनिश्चित करने के लिये कि महिलाओं का पूर्ण विकास हो और ये आगे बढ़ सकें। यह इस उद्देश्य से किया जायेगा कि उन्हें पुरुषों के साथ समान स्तर पर मानव अधिकार और मूल स्वतन्त्रताओं के प्रयोग और उपभोग की गारन्टी दी जा सके ( अनुच्छेद 3)।
अभिसमय के भाग दो में राजनीतिक अधिकार और राष्ट्रीयता सम्बन्धी अधिकारों में भेदभाव रोकने सम्बन्धी प्रावधान है। भाग तीन शिक्षा और नियोजन और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भेदभाव रोकने का उपबन्ध करता है। भाग तीन में अनुच्छेद 15 महिलाओं के लिये पुरुषों के समान विधि के समक्ष समानता का अधिकार प्रदान करता है। अनुच्छेद 16 विवाह और पारिवारिक मामलो में भेदभाव को रोकने की बात करता है।
क्रियान्वयन तन्त्र (Implementation Machinery ) अभिसमय एक कार्यान्वयन तन्त्र की व्यवस्था करता है। इसके लिये महिलाओं के विरूद्ध भेदभाव समापन की समिति (Committee on the Elimination of Discrimination Against Women) की स्थापना करता है। इस समिति में 23 विशेषज्ञ, उच्च नैतिक हैसियत और क्षमता से लोग होते हैं। ये विशेषज्ञ अपनी व्यक्तिगत हैसियत में कार्य करते हैं। इनका कार्यकाल चार वर्ष का होता है। इस अभिसमय के प्रावधानों को लागू करने के लिये राज्य पक्षकारों ने कौन-कौन से विद्यार्थी न्यायिक, प्रशासकीय तथा अन्य उपाय किये, इसका एक प्रतिवेदन संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव की, समिति के विचार के लिये पेश करेंगे ऐसा प्रतिवेदन प्रत्येक चार वर्ष में एक बार पेश किया जायगा। अभिसमय के प्रवर्तन में आने वाली कठिनाइयों और कारकों का इस प्रतिवेदन में वर्णन रहता है। समिति का सम्मेलन प्रति वर्ष प्रतिवेदनों पर विचार के लिये होता है। प्रतिवेदनों पर विचार के दौरान समिति ने यह सुझाव दिया है कि सदस्य राज्यों को महिलाओं के विरूद्ध भेदभाव खत्म करने को सुनिश्चित करने के लिये लोक संस्थायें सुनिश्चित करनी चाहिये और जहा पहले से ही ऐसी संस्थायें हैं, उनका पूर्ण रूप से उपयोग करना चाहिये।
विवाहित महिलाओं की राष्ट्रीयता का अभिसमय (Conveation on the Nation- ality of Married Women)- विवाहित महिलाओं को राष्ट्रीयता का अभिसमय, संयुक्त राष्ट्र संघकी महासभा ने 1957 में स्वीकार किया था यह अभिसमय 11 अगस्त, 1958 को लागू हुआ। यह अभिसमय राष्ट्रीयता की विधियों के विरोध सम्बन्धी कुछ प्रश्नों पर हेग अभिसमय, 1930 का आगे विकाश है। यह अभिसमय, जहां तक विवाहित महिलाओं की राष्ट्रीयता का प्रश्न है, स्त्री और पुरूषों के बीच समानता के सिद्धान्त को स्थापित करने का प्रयत्न करता है। इस कथन को समर्थन अभिसमय के अनुच्छेद 1, 2 और 3 के प्रावधानों से प्राप्त होता है।
समान पारिश्रमिक अभिसमय (Equal Remuneration Convention)- समान पारिश्रमिक अभिसमय, अन्तर्राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के सामान्य सभा (कॉन्फ्रेंस) द्वारा 29 जून, 1951 को स्वीकार किया गया था, जो 23 मई 1953 को लागू हुआ। यह सिद्धान्त की पुरूषों और महिलाओं को समान काम के लिये समान पारिश्रमिक मिले, शांति संधि 1919 में स्वीकृत सामान्य सिद्धान्तों में से एक था। समान काम के लिये समान पारिश्रमिक के सिद्धान्त को अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की उद्देशिका में भी मान्यता मिली है। अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा इस अभिसमय को स्वीकार किये जाने का उद्देश्य यह था कि समान काम के लिये समान पारिश्रमिक के भुगतान में, पुरुषों और महिलाओं के बीच, जो असमानता है उसे समाप्त किया जा सके। अभिसमय यह प्रावधान करता है कि 'पुरूष और महिला कामगर के लिये समान मूल्य के काम के लिये समान पारिश्रमिक का तात्पर्य लिंग पर आधारित भेदभाव के बिना, निश्चित की गई पारिश्रमिक की दर से है मजदूरी का भुगतान किया जाना चाहिये। (अनुच्छेद 1 (ब))।
शिक्षा में भेदभाव के विरूद्ध अभिसमय (Convention Against Discrimina tion in Education) शिक्षा में भेदभाव के विरूद्ध अभिसमय, संयुक्त राष्ट्र संघ, शैक्षिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक संगठन की सामान्य सभा द्वारा 14 दिसम्बर, 1960 को पेरिस में 11 वें सम्मेलन में स्वीकार की गई थी। यह 22 मई, 1962 को लागू हुआ।
अभिसमय शिक्षा के मामले में भेदभाव के लिये लिंग को एक अननुज्ञेय (impremissible) आधार मानता है। इस अभिसमय के प्रयोजनों के लिये भेदभाव में सम्मिलित है, कोई अन्तर अपवर्जन, सीमा या वरीयता जो लिंग पर आधारित है और जिसका प्रभाव शिक्षा में समानता के व्यवहार को निष्प्रभावी करना या कम करना होता है। पद 'शिक्षा' का तात्पर्य है सभी प्रकार और स्तर की शिक्षा, और इसमें शामिल है, शिक्षा में पहुंच, शिक्षा का स्तर और गुणवत्ता, और वे शर्ते जिसके अन्तर्गत यह दिया जाता है।
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