सोमवार, 19 जून 2023

दुर्बल समूह से आप क्या समझते हैं? दुर्बल समुहों को अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार में दिये गये संरक्षरणों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

प्रश्न. दुर्बल समूह से आप क्या समझते हैं? दुर्बल समुहों को अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार में दिये गये संरक्षरणों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
What do you mean by vulnerable groups? Briefly explain the protection given to the vulnerable groups under International Human Rights.

उत्तर- दुर्बल समूह का अर्थ (Meaning of Vulnerable Group ) - स्मरणीय है। कि व्यक्तियो के कुछ समूह ऐसे होते हैं जो प्राकृतिक रूप से या सुस्थापित रूढ़ियों के कारण दुर्बल (कमजोर) होते हैं। ऐसे निर्बल व्यक्तियों में बच्चे, महिलायें, अक्षम व्यक्ति, वृद्ध व्यक्ति, प्रवासी कर्मचारी या किसी विशेष मूलवंश से सम्बन्धित व्यक्ति शामिल हैं।

समाज के इन दुर्बल व्यक्तियों को मानव होने के कारण कुछ मानव अधिकार तथा मूलभूत स्वतन्त्रताएँ दी गयी है परन्तु इन प्राप्त अधिकारों का उल्लंघन हमेशा प्रयत्न वर्ग द्वारा किया जाता रहा है। इन्हीं सब समस्याओं को ध्यान में रखते हुए समाज में उनका अस्तित्व बनाने, उन्हें सुरक्षित रखने के लिए, मानव अधिकार के रूप में अधिकारों की उत्पत्ति हुई है। इनके अधिकारों के संरक्षण के लिए संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में निम्नलिखित अभिसमय बनाये गये हैं: -

1. महिलाओं को प्रदत्त संरक्षण (Protection Given to Women) - मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा मे महिलाओं के विरुद्ध हो रहे भेदभाव को रोकने के लिए महासभा ने 7 नवम्बर, 1967 को महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव की समाप्ति की घोषणा को | स्वीकार किया। इसके सिद्धान्तों के त्वरित कार्यान्वयन के लिए एक अभिसमय 18 दिसम्बर, 1979 जो 1981 में प्रवर्तन में आया और जिसके अक्टूबर 1, 2004 तक 178 राज्य पक्षकार बन चुके हैं। इसमें निम्नलिखित घोषणाएं की गयी हैं 

1. पुरुष और महिलाओं में समानता के सिद्धान्त को लागू करेंगे।

2. महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभाव को दूर करेंगे तथा संरक्षण के उपाय करेंगे।

3. पुरुषों के साथ समान आधार पर महिलाओं के अधिकारों के विधिक संरक्षण की स्थापना करेगे।

4. किसी व्यक्ति, संगठन में महिलाओं के साथ भेदभाव को दूर करेंगे। 

5. ऐसे सभी राष्ट्रीय दण्ड प्रावधानों का निरसन (Repeal) करेंगे जो महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव फैलाते हैं।

6. महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव के किसी कार्य या अभ्यास में संलग्न होने से विरत रहेंगे।

2. शिशु को प्रदत्त संरक्षण (Protection Given to Child): - मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के अनु० 25 के परिच्छेद (2) व सिविल एवं राजनैतिक अधिकारी पर अन्तर्राष्ट्रीय प्रसंविदा के अनु० 23 एवं 24 तथा आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक अधिकारो पर अन्तर्राष्ट्रीय प्रसंविदा के अनु० 10 शिशुओं की देखभाल के लिए प्रावधान किये गये। शिशुओं के अधिकार पर अभिसमय महासभा द्वारा 20 नवम्बर, 1989 को शिशुओं की सार्वभौमिक घोषण की वर्षगाँठ पर सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया जो दिनांक 2 सितम्बर, 1990 को लागू हुआ। वर्तमान समय में 199 राज्य इसके पक्षकार हैं। इन अभिसमयों में शिशुओं को निम्नलिखित संरक्षण दिये गये हैं-

1. प्राण का अधिकार. 2. राष्ट्रीयता अर्जित करने का अधिकार, 3 अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का अधिकार, 4. विचार, अन्तःकरण एवं धर्म की स्वतन्त्रता का अधिकार, 5 संगम की स्वतन्त्रता एवं शान्तिपूर्ण सभा करने का अधिकार 6. शिक्षा का अधिकार, 7. सामाजिक सुरक्षा से लाभ का अधिकार, 8. शिशु के शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक विकास हेतु पर्याप्त जीवन स्तर का अधिकार 9 स्वास्थ्य के उच्चतम प्राणस्तर के उपभोग तथा बीमारी के उपचार एवं स्वास्थ्य की पुनर्स्थापना हेतु सुविधाओं का अधिकार. 10. शिशु के एकान्तता, परिवार, गृह, पत्राचार के मनमाना एव विधि विरुद्ध हस्तक्षेप के विरुद्ध संरक्षण का अधिकार।

शिशु के अधिकारों के विषय में आम सभा मे ऐच्छिक नयाचार बनाये गये—जो अभी लागू नहीं किए गए है तथा इसे न्यूयार्क में शिशु के अधिकारों पर अभिसमय के दो ऐच्छिक नयाचारों को 25 मई, 2000 को स्वीकार किया गया जो निम्नलिखित है-

(i) सशस्त्र संघर्ष मे शिशुओं की अन्तर्ग्रस्तता पर ऐच्छिक नयाचार,

(ii) शिशुओं के विक्रय, बाल वेश्यावृत्ति, बाल अश्लील साहित्य पर ऐच्छिक नयाचार।

3. प्रवासी कर्मचारियों को प्रदत्त संरक्षण (Protection Given to Immigrant Employees) - प्रवासी कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए 18 दिसम्बर, 1990 को महासभा द्वारा एक अभिसमय स्वीकार किया गया जिनमें अनेक अधिकार दिये गये हैं। उदाहरण के लिए प्रमुख अधिकारों में निम्नलिखित है। मनमानेपूर्ण गिरफ्तारी से संरक्षण, 2 संविदात्मक दायित्व को पूरा करने में असफल रहे अप्रवासी कर्मचारी को गिरफ्तारी से सरक्षण, 3. अप्रवासियों का समूह निष्कासन से सरक्षण, 4. न्यायालयों में राष्ट्रिको के समान व्यवहार, 5. व्यक्ति की स्वतंत्रता एवं सुरक्षा का अधिकार 6 विधि के अधीन प्राण के अधिकार का संरक्षण, 7. दास प्रथा या गुलामी का निषेध 8. बलात् अथवा अनिवार्य श्रम का निषेध, 9 विचार, अन्तःकरण और धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार 10 सम्पत्ति से मनमानेपूर्ण तरीके से वंचित किये जाने से संरक्षणा

4. शरणार्थियों को प्रदत्त संरक्षण (Protection Given to Refugees) - सन् 190 में नावें के डॉ० मैनसेन के नेतृत्व में राष्ट्र संघ द्वारा शरणार्थियों के उच्चायुक्त की स्थापना गयी। बाद में प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय अभिकरण संयुक्त राष्ट्र अनुतोष एवं पुनर्वास प्रशासन और की 2. अन्तर्राष्ट्रीय शरणार्थी संगठन, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त को स्थापना की जो शरणार्थी के अधिकारों को संरक्षण प्रदान करते हैं।

5. अन्यदेशीयों को प्रदत्त संरक्षण (Protection Given to Aliens) -अन्यदेशीय शब्द का तात्पर्य ऐसे व्यक्तियों से है जो किसी ऐसे राज्य में निवास करते हैं जो उस राज्य के राष्ट्रिक नहीं है। इस प्रकार एक राज्य के राष्ट्रिकों को दूसरे राज्य में अन्यदेशीय कहा जाता है। ऐसे व्यक्तियों के मानव अधिकारों की घोषणा को 13 दिसम्बर, 1985 को स्वीकार किया गया जिनमें अनेक अधिकारों को प्रदान किया गया।

6. विराष्ट्रिकता को प्रदत्त संरक्षण (Protection Given to Stateless Person) -- जब कोई व्यक्ति किसी देश की राष्ट्रीयता धारण नहीं करता तो उस विराष्ट्रिकता कहा जाता है। पहली बार राष्ट्रीयता विधियों के संघर्ष पर अभिसयम 1930 स्वीकार किया गया। विराष्ट्रिक व्यक्तियों की प्रास्थिति को विनियमित एवं सुधार करने के लिए अभिसमय 28 सितम्बर 1954 को आर्थिक एवं सामाजिक परिषद् द्वारा पूर्णाधिकारी सम्मेलन द्वारा स्वीकार किया गया जो 6 जून 1960 को लागू हुआ।

7. देशी लोगों को प्रदत्त संरक्षण (Protection Given to Indigenous Peoples) - देशी लोगो से तात्पर्य उन लोगों से है जो किसी देश के ऐतिहासिक रूप से मूल निवासी है। पहली बार 1953 में अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने देशी एवं जनजातीय जनसंख्या के अधिकारो पर अभिसमय संख्या 10 को स्वीकार किया गया। 1989 में एक दूसरा अभिसमय स्वीकार किया गया जो 5 सितम्बर 1991 को लागू हुआ।

8. वयोवृद्ध व्यक्ति को प्रदत्त संरक्षण (Protection Given to Older Persons ) - संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वृद्धों की स्थिति एवं अनेक अधिकारों के संरक्षण के लिए सन् 1978 में वृद्धजनों पर एक विश्व सम्मेलन आयोजित करने का निश्चत किया तथा वृद्धजनों पर विश्व सभा का आयोजन वियना में 26 जुलाई, 1982 से लेकर 6 अगस्त, 1982 तक चला। सभा में एक अभिसमय को स्वीकार किया गया। आगे महासभा ने 16 दिसम्बर, 1991 को संकल्प द्वारा वयोवृद्ध व्यक्तियों के लिए सिद्धान्तो को स्वीकार किया। ये सिद्धान्त जिनकी संख्या 18 थी वयोवृद्ध व्यक्तियों की स्वतंत्रता एवं गरिमा से सम्बन्धित थे।

9. असमर्थ व्यक्ति को प्रदत्त संरक्षण (Protection Given to Disabled Persons ) - विश्व के 520 करोड़ व्यक्तियों में से अधिक से अधिक 10 प्रतिशत जनसंख्या असमर्थ व्यक्तियों की है असमर्थ व्यक्तियों के अधिकारों की घोषणा निम्नलिखित अभिसमयो में की गयी है - 1. मानसिक रूप से असमर्थ व्यक्तियों के अधिकारों पर घोषणा 1971 और 2. शरीरिक रूप से असमर्थ व्यक्तियों के अधिकारों की घोषणा 1975 

महासभा ने 1981 को असमर्थ व्यक्तियों का अन्तर्राष्ट्रीय वर्ष तथा 1983 1992 के समय को असमर्थ व्यक्तियो के दशम के रूप में घोषित किया था। महासभा ने 1999 में असमर्थ व्यक्तियों से सम्बन्धित एक विश्वव्यापी कार्य योजना बनायी तथा उनके क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया।

10. अल्पसंख्यकों को प्रदत्त संरक्षण (Protection Given to Minorities) - राष्ट्रीय, जातीय, धार्मिक भाषायी अलपसंख्यकों से सम्बन्धित व्यक्तियों के अधिकारो से सम्बन्धित अन्तर्राष्ट्रीय सिविल एवं राजनैतिक अधिकारों की प्रसंविदा में महासभा ने 18 दिसम्बर 1992 नको एक अभिसमय की घोषणा की है।




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