Explain the provisions of inquiries and proceedings in any complaint relating to the violation of human rights under the Human Rights Protection Act, 1993. Also state the Procedurd when there is a violation of human rights by the armed forces.
उत्तर- मानव अधिकारों के उल्लंघन सम्बन्धी परिवादों में जाँच (Inquiries in to Complaints Relating to the Violation of Human Rights) धारा 17 के अनुसार, मानव अधिकार के उल्लंघन के किसी मामले में जबकि आयोग जाँच कर रहा हो, तव आयोग-
(i) केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, किसी प्राधिकारी या संगठन से निर्धारित समय में सूचना या रिपोर्ट मांग सकता है।
यह भी उपबन्धित है कि
(क) यदि आयोग द्वारा निर्धारित समयाविधि में सूचना या रिपोर्ट प्राप्त नहीं होती तो आयोग स्वयं अपने विवेक से शिकायत पर जाँच कार्यवाही शुरू कर सकता है।
(ख) यदि सूचना या रिपोर्ट यथासमय प्राप्त होती है और आयोग का ऐसी सूचना पा रिपोर्ट से यह समाधान हो जाता है कि अब आगे और जाँच की आवश्यकता नहीं है या सरकार या प्राधिकारी द्वारा आवश्यक कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गई है तो आयोग आगे कार्यवाही नहीं करेगा तथा शिकायतकर्ता को इस आशय की सूचना देगा।
(ii) उपधारा (i) में किसी बात के होते हुए भी आयोग यदि मामले की प्रकृति को ध्यान मे रखते हुए आगे जाँच करना उचित समझता है तो वह ऐसा कर सकेगा।
इस प्रकार धारा 17 के अनुसार, मानव अधिकार के उल्लंघन पर किसी शिकायत के प्राप्त होने पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग शिकायत के सम्बन्ध में केन्द्र सरकार या राज्य सरकार या किसी प्राधिकारी या संस्था से रिपोर्ट मांग सकता है। निर्धारित समय में रिपोर्ट न आने की स्थिति में वह स्वयं शिकायत की जाँच कर सकता है। यदि जाँच रिपोर्ट के देखने से आयोग को यह प्रतीत होता है कि शिकायत में आगे जांच की आवश्यकता नहीं है या सरकार या अधिकारी द्वारा अपेक्षित कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गई है तो आयोग कोई कार्यवाही नहीं करेगा तथा इसकी सूचना शिकायतकर्त्ता को देगा।
जाँच पूरी होने पर कार्यवाही (Steps After Inquiry)-धारा 18 के अनुसार, इस अधिनियम के अन्तर्गत जाँच पूरी हो जाने के बाद आयोग निम्नलिखित में से कोई कार्यवाही कर सकेगा
1. जहां जांच से यह प्रकट होता हो कि किसी लोक सेवक द्वारा मानवाधिकारो का उल्लघन किया गया है या ऐसे उल्लंघन को रोकने में लापरवाही बरती गई है, वहाँ आयोग सम्बन्धित सरकार अथवा प्राधिकारी से ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही करने की सिफारिश कर सकेगा।
2. उच्चतम या उच्च न्यायालय से समुचित निदेश, आदेश या रिट जारी करने की प्रार्थना कर सकेगा।
3. सम्बन्धित सरकार या अधिकारी से पीड़ित और व्यधित व्यक्ति या उसके परिजनों को तत्काल राहत प्रदान करने की सिफारिश कर सकेगा।
4 आयोग जांच रिपोर्ट की प्रति शिकायतकर्ता या उसके प्रतिनिधि को उपलब्ध करायेगा।
5. आयोग अपनी रिपोर्ट की प्रति अनुशंसा सहित सम्बन्धित सरकार या प्राधिकारी को भेजेगा। ऐसी सरकार या प्राधिकारी का यह कर्त्तव्य होगा कि वह एक माह के भीतर या निर्धारित अवधि में आयोग को अपनी टिप्पणी भेजेगा तथा उस पर की गई या को जाने वाली कार्यवाही से अवगत करायेगा।
6 आयोग अपनी रिपोर्ट प्रकाशित करेगा जिसमें सरकार या प्राधिकारी की टिप्पणी, यदि कोई हो, सरकार या प्राधिकारी द्वारा उस पर की गई कार्यवाही या सरकार अथवा प्राधिकारी द्वारा उस पर की जाने वाली सम्भावित या प्रस्तावित कार्यवाही का वर्णन किया जायेगा।
इस प्रकार धारा 18 से स्पष्ट है कि आयोग मानवाधिकार के उल्लंघन पर प्राप्त होने वाली किसी शिकायत की जाँच के बाद यदि यह पाता है कि किसी लोकसेवक द्वारा मानव अधिकारो का उल्लघन किया गया है या इसे रोकने में लापरवाही बरती गई है तो आयोग दोषी व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही करने का अनुमोदन करेगा। आयोग उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय से समुचित आदेश, निदेश या याचिका जारी करने की प्रार्थना कर सकेगा तथा पीड़ित व्यक्ति या उसके घर वालो को तत्काल राहत प्रदान करने की सिफारिश सम्बन्धित सरकार या प्राधिकारी से कर सकेगा। इस धारा में यह भी प्रावधान किया गया है कि आयोग जाँच रिपोर्ट की प्रति शिकायकर्त्ता या उसके प्रतिनिधि को उपलब्ध करायेगा तथा एक प्रति सम्बन्धित सरकार या अधिकारी को भेजेगा।
सशस्त्र बलों के सदस्यों के सम्बन्ध में प्रक्रिया (Procedure with Respect to Armed Forces)—धारा 19 के अन्तर्गत सशस्त्र बलों के सदस्यों के सम्बन्ध में निर्धारित प्रक्रिया का उपबन्ध किया गया है। इस धारा के अनुसार-
1. जहाँ मामला सशस्त्र बल के किसी सदस्य द्वारा मानव अधिकारों के उल्लंघन का हो, वहाँ आयोग निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन करेगा (क) आयोग स्वप्रेरणा से या किसी शिकायत, परिवाद या याचिका के प्राप्त होने पर केन्द्रीय सरकार से उस पर रिपोर्ट की अपेक्षा करेगा, (ख) ऐसी रिपोर्ट के प्राप्त हो जाने पर आयोग या तो आगे कार्यवाही नहीं करेगा या उस पर सरकार को अपनी सिफारिशें भेजेगा।
2. जब आयोग सरकार को अपनी सिफारिशे पेश करता है तब केन्द्रीय सरकार का यह कर्तव्य होगा कि वह तीन माह के अन्दर या आयोग द्वारा निर्धारित अवधि में आयोग को इस तथ्य से अवगत कराये कि उसके द्वारा इस सम्बन्ध में क्या कार्यवाही की गई है।
3. आयोग इस सम्बन्ध में अपनी रिपोर्ट प्रकाशित करेगा जिसमें केन्द्रीय सरकार को आयोग द्वारा की गयी सिफारिशों तथा ऐसी सिफारिशों पर केन्द्रीय सरकार द्वारा की गई कार्यवाही का विवरण किया जायेगा।
4 उपधारा (3) के अन्तर्गत प्रकाशित रिपोर्ट को प्रति आयोग शिकायतकर्ता (Complainant) या उसके प्रतिनिधि (Agent) को उपलब्ध करायेगा। इस प्रकार, धारा 19 के अधीन सशस्त्र बलों के किसी सदस्य के द्वारा यदि किसी के मानव अधिकारों का उल्लंघन किया जाता है तो आयोग केन्द्र सरकार से रिपोर्ट माँगेगा और तत्पश्चात् रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्यवाही करेगा।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें