उपचारी कानून से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-उपचारी कानून (Remedial Statute)-उपचारी कानून वह कानून है जिससे एक नया उपचार प्रदान किया जाता है। ऐसे कानून को पारित करने का मुख्य उद्देष्य किसी के अधिकार के लागू करने में सुधार लाना या भूलों को ठीक करना एवं पूर्व विधि के दोषों को दूर करना होता है। आजकल कुछ विद्वानों द्वारा एक दूसरी समानार्थक अभिव्यक्ति "सामाजिक आर्थिक विधान" उपचारी कानून के लिये प्रयोग की जाती है। मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961; कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923; आदि उपचारी कानून के उदाहरण हैं। कई उपचारी अधिनियमों में अधिनियमिति की भाषा के तत्काल पहले 'जिसके उपचार के लिये' शब्दों का प्रयोग किया गया है। ब्लेकस्टोन सहित कुछ विद्वानों का मत है कि उपचारी कानून विस्तारकारी और अवरोधकारी दोनों ही प्रकार के हो सकते हैं। अधिनियम विस्तारकारी तब होंगे जब संकीर्ण कॉमन लॉ का विस्तार किया गया हो और अवरोधकारी तब होंगे जब विद्यमान कॉमन लॉ का विस्तार किया गया हो और अवरोधकारी तब होंगे जब विद्यमान कामन लॉ अधिकार में कमी हो गई हो। प्रायः यह सत्य है कि कल्याणकारी राज्य में सभी विधानों को सामान्य कल्याण को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से ही अधिनियमित किया जाता है, पर कुछ अधिनियमितियाँ ऐसी भी होती हैं जो कुछ अत्यावश्यक सामाजिक माँगों के अनुकूल होती हैं और जो सामाजिक प्रगति के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये सामाजिक बुराइयों पर तत्काल प्रत्यक्ष प्रभाव डालकर लागू होती हैं। उपचारी कानून का उदारवादी अर्थान्वयन उदारवादी दृष्टिकोण से किया जाता है और किसी प्रकार की संदिग्धता का निराकरण उन व्यक्तियों के पक्ष में किया जाता है जिनके हित के लिये उस कानून को बनाया गया होता है।
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