गुरुवार, 12 अक्टूबर 2023

क, ख के विरुद्ध एक मिथ्या एवं तंग करने वाला परिवाद लाता है। क्या 'क' को इस कार्य के लिए दण्डित किया जा सकता है? यदि हाँ, तो किस धारा के अन्तर्गत ?

प्रश्न . (र) क, ख के विरुद्ध एक मिथ्या एवं तंग करने वाला परिवाद लाता है। क्या 'क' को इस कार्य के लिए दण्डित किया जा सकता है? यदि हाँ, तो किस धारा के अन्तर्गत ?

'A' files a false and vexatious complaint against 'B'. Whether 'A' can be punished for this? If so, under what section of the Consumer protection Act 1986?

 

उत्तर- प्रत्येक परिवादी का यह कर्त्तव्य है कि वह जानबूझकर ऐसा कोई परिवाद न लायें जो मिथ्या एवं तंग करने वाला (Friviolous or Vexatious) हो। यदि ऐसा कोई परिवाद लाया जाता है तो यथास्थिति, जिला फोरम, राज्य आयोग या राष्ट्रीय आयोग द्वारा:-

 

(i) उसे निरस्त किया जा सकेगा, एवं

(ii) परिवादी को यह आदेश दिया जा सकेगा कि वह विपक्षी को दस हजार रुपये तक की राशि हर्जे के रूप में प्रदान करे।

 

ऐसी व्यवस्था अधिनियम की धारा 26 में की गई है। 'ख' के विरुद्ध भी ऐसा ही आदेश पारित किया जा सकता है।

 

स्मरणीय है कि दस हजार रुपये के हर्जाने की व्यवस्था पहले नहीं थी। यह उपभोक्ता संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 1993 द्वारा की गई है।

 

प्रश्न  सेवाओं के संदर्भ में "उपभोक्ता" की अनिवार्य शर्तों का उल्लेख करते हुए बताइये कि क्या निम्नलिखित व्यक्ति उपभोक्ता हैं-

(क) सरकारी अस्पतालों से निःशुल्क चिकित्सा सेवायें प्राप्त करने वाला व्यक्ति

(ख) रेलवे में टिकट लेकर यात्रा करने वाला व्यक्ति

(ग) आवासन बोर्ड से आवंटन में भू-खण्ड अथवा मकान प्राप्त करने वाला व्यक्ति

(घ) शिक्षण संस्था से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र एवं उनके अभिभावक तथा

(ङ) टैक्सी के रूप मे चलाने के लिए वाहन खरीदने वाला व्यक्ति।

Explaining the essential conditions of consumer with reference to services state whether the following persons are consumers-

(a) Person obtaining services from Govt. Hospitals free of charge,

(b) Person travelling by train with ticket,

(c) Person obtaining a plot or house by allotment from Housing Board,

(d) Students obtaining education form educational institutions andtheir parents,

(e) Person purchasing a vehicle for plying as a taxi.

 

उत्तर- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 2 (1) (घ) में दो गई परिभाषा के अनुसार सेवाओं के संदर्भ में "उपभोक्ता" के लिए निम्नलिखित बातें आवश्यक हैं---

 

(i) उपभोक्ता को सेवायें प्रदान की गई हों,

(ii) उपभोक्ता द्वारा सेवाओं को खरीदा गया हो, एवं

(iii) ऐसी सेवायें प्रतिफल स्वरूप हो कन्ज्यूमर यूनिटी एण्ड ट्रस्ट सोसायटी, जयपुर बo सेक्रेटरी, मेडिकल एण्ड हेल्थ डिपार्टमेन्ट जयपुर, परिवाद स० । सन् 1988 राजस्थान आयोग 3 जनवरी 1989

 

समस्यायें (Problems) -

 

(क) सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों से निःशुल्क चिकित्सा सेवायें प्राप्त करने वाले व्यक्ति उपभोक्ता नहीं हैं हनुमान प्रसाद दरबान व डॉ० सी० एस० शर्मा, एस० एम० एस० हास्पीटल, जयपुर, परिवाद सं0 3 सन् 1989 राजस्थान आयोग, 200.6.1989 |

 

(ख) रेलवे में टिकिट लेकर यात्रा करने वाला व्यक्ति उपभोक्ता है जनरल मैनेजर, साऊथ ईस्टर्न रेलवे ब० आनन्द प्रसाद सिन्हा, प्रथम अपील सं० 3 सन् 1988 राष्ट्रीय आयोग 28.8.1989

 

(ग) आवासन बोर्ड द्वारा आवंटन-भूखण्ड अथवा मकान प्राप्त करने वाले व्यक्ति उपभोक्ता हैं उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद् ब० गरिमा शुक्ला प्रथम अपील संo 5 सन् 1989 राष्ट्रीय आयोग, 27.8.89

 

(घ) शिक्षण संस्थाओं से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र एवं उनके अभिभावक उपभोक्ता नहीं हैं ऐज्यूकेशनल सोसायटी ऑफ सोफिया, कोटा ब० कैलाशचन्द्र सिंघल, कोटा, अपील संo 45 सन् 1989 राजस्थान आयोग 25.9.1989

(ङ) टैक्सी के रूप में चलाने के लिए वाहन खरीदने वाला व्यक्ति उपभोक्ता नहीं है क्योंकि टैक्सी ड्राइवर का उद्देश्य व्यवसायिक है। श्रीमती पुष्पा मीण, बून्दी ब० शाह एन्टरप्राइजेज राजस्थान लि०, कोटा, परिवाद सं0 4 सन् 1989 राजस्थान आयोग 4.8.1989 1

 

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