पूरा नाम Vital Information Resources Under Siege (वाइटल इनफार्मेशन रिसोर्सेज अंडर सीज).
कंप्यूटर या मोबाइल वायरस एक ऐसा सॉफ्टवेयर प्रोग्राम होता है, जो अपनी प्रतिलिपि बनाकर कंप्यूटर उपयोगकर्ता की अनुमति के बिना कंप्यूटर या मोबाइल को संक्रमित (Infected) कर देता है, और कंप्यूटर या मोबाइल में मौजूद सारें data और files को नुकसान पहुंचाता है। जिसके बारे में कंप्यूटर या मोबाइल उपयोगकर्ता को इसका पता भी नहीं चल पाता ।
ये वायरस छोटे छोटे प्रोग्राम होते है। जो खुद ही Execute होते है।
यदि एक बार virus कंप्यूटर में आ जाता है, तो यह खुद ही पूरे कंप्यूटर में फैल जाता है, और कंप्यूटर में मौजूद सभी programs या files या data को corrupt कर देता है। वायरस के पास अपनी खुद की copy को बनाने करने की क्षमता होती है, जिसके कारण वह एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में आसानी से फैल सकता है।
वायरस को self-replicating program भी कहते है, क्योंकि यह एक कंप्यूटर से दुसरे कंप्यूटर में अपने आप (Automatic) फैलता रहता है।
वायरस कंप्यूटर या किसी भी अन्य Electronic device के लिए बहुत ही खतरनाक होते हैं।
वायरस फैलाने पर सजा : वायरस फैलाना_ धारा 43C, 66, IPC 268, 3 साल सजा & जुर्माना
साइबर आतंकवाद धारा 66F गैर जमानत, उम्रकैद
वायरस के प्रकार : _ कंप्यूटर वायरस कई प्रकार के होते हैं, और हर प्रकार के वायरस में अलग-अलग विशेषतायें और क्षमता होती है।
1 Boot sector virus (बूट सेक्टर वायरस)_ जब कंप्यूटर को Boot किया जाता है, तो तब यह virus कंप्यूटर में फैलता है।
2 Resident Virus (रेजिडेंट वायरस):_ यह कंप्यूटर की primary memory मौजूद होता है, जिसे हम RAM भी कहते है।
जब कोई यूजर, कंप्यूटर को open करता है, तो यह वायरस Active हो जाता है, और कंप्यूटर में फाइलों को corrupt कर देता है।
3 File Infector Virus (फाइल इन्फेक्टर वायरस):_ इस प्रकार के वायरस Windows, और Unix, जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम को infect करता है।
4 Macro Virus (मैक्रो वायरस):_
Macro virus, ऐसा वायरस है, जिसे macro language में लिखा जाता है। Macro language, एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है, जो कंप्यूटर में मौजूद डेटा और फाइलों को infect (संक्रमित) करता है। यह वायरस MS Word, और MS Excel, जैसे प्रोग्राम और email के द्वारा भी फैलता है।
इन सब के अलावा Web scripting virus (वेब स्क्रिप्टिंग वायरस), Append Virus (अपेण्ड वायरस), Multipartite Virus (मल्टीपैरटाइट वायरस), Computer worm (कंप्यूटर वोर्म), Trojan Horse (ट्रोजन हॉर्स), Cavity virus ( कैविटी वायरस), CMOS Virus, Companion Virus (कम्पैनियन वायरस), Encrypted Virus (एन्क्रिप्टेड वायरस), Polymorphic Virus (पोलीमार्फिक वायरस), Rabbit Virus (रैबिट वायरस), Stealth Virus (स्टील्थ वायरस), Overwrite Virus (ओवरराईट वायरस) आदि है।
सबसे पहले कंप्यूटर वायरस क्रीपर था, जो 1971 में Robert Thomas ने विकसित किया था। यह वायरस TENEX OS के द्वारा फैला था।
उदेश्य: - कोई भी कंप्यूटर या मोबाइल वायरस खुद नहीं बनता हैं। इन्हें प्रोग्रामर द्वारा किसी खास कार्य, या मकसद के लिए बनाया जाता है।
जैसे कोई सूचना बिना इजाजत के एकत्रित करने के लिए, किसी के कंप्यूटर में घुसपैठ करने के लिए आदि। कंप्यूटर या मोबाइल में वायरस कई तरह से आ सकते है, जिसके बाद यह साथ में जुड़े अन्य कंप्यूटर में भी फैलते रहते है।
Virus का उदेश्य computer के कार्य करने की छमता को धीमा (slow) करना, कंप्यूटर के data को चुराना, डेटा को नुकसान पहुंचाना, और डेटा को modify करना आदि होता है।
कारण: -
वायरस एक कंप्यूटर को, दुसरे कंप्यूटर के साथ connect करने से कंप्यूटर में आ सकता है, डेटा ट्रांसफर करते वक़्त, इंटरनेट के द्वारा, Computer में प्रोग्राम और एप्लीकेशन download करते समय, ब्राउज़र का इस्तेमाल करते समय भी वायरस computer में प्रवेश कर सकते है।
लक्षण : -
कंप्यूटर की speed का धीमा होना, हार्ड ड्राइव में दिक्कत, अनचाहा प्रोग्राम, असामान्य गतिविधियां, सुरक्षा में गडबडी, नेटवर्क की समस्या, डिस्प्ले की परेशानी, Dialog Box, कंप्यूटर स्क्रीन पर वार्निंग अलर्ट या अजीब मैसेज आना, प्रोग्राम और फाइल नहीं मिलना, ऑपरेटिंग सिस्टम क्रैश होना, अधिक विज्ञापनों का दिखना, प्रिंटर की समस्या, इंटरनेट स्पीड धीमा होना आदि।
उपाय: -
कंप्यूटर को लगातार update करते रहना, strong password का इस्तेमाल करना चाहिए, कंप्यूटर में Firewall का इस्तेमाल करना, वायरस से protect करने के लिए Popup Blocker का इस्तेमाल करना।
आजकल बहुत सारें Antivirus सॉफ्टवेयर है, जिनकी मदद से हम अपने डिवाइस, या कंप्यूटर को Virus से आसानी से सुरक्षित रख सकते हैं।
जैसे कि- Norton, QuickHeal, McAfee, Avast और Kaspersky आदि।
वायरस
जिस प्रकार विभिन्न प्रकार के वायरस मनुष्य के शरीर को बीमार कर देते हैं और उसे नुक्सान पहुंचाते हैं उसी प्रकार वायरस कम्प्यूटर को नुकसान पहुँचाते हैं। तकनीकी भाषा में वायरस एक प्रकार का प्रोग्राम होता है जो कम्प्यूटर को नुकसान पहुंचाता है। इस प्रकार हजारों प्रकार के कम्प्यूटर प्रोग्राम जिन्हें वायरस कहा जाता है जो बनाए जा चुके हैं या बनाए और इंटरनेट पर छोड़े जा रहे हैं या छोड़े जा चुके हैं के कारण दुनिया भर में हजारों कम्प्यूटरों को नुकसान पहुँचा है। कम्प्यूटरों को वायरस में नुकसान पहुँचाने के दो ही मुख्य तरीके हैं-
(i) पहला तरीका - कम्प्यूटर में वायरस तभी प्रवेश कर सकता है जब कोई फाइल डाउन लोड की जा रही हो या मैकोज जिन्हें एक्जीक्यूटेबल फाइल भी कहा जाता है, को खोला जाए ।
(ii) दूसरा तरीका- इसमें ई मेल के साथ जोड़कर वायरस डाल दिया जाता है। यह वायरस एक्जीक्यूटेबल फाइल के एक्सटेंशन के साथ जोड़ दिया जाता है। इन्हें मेन फाइल के साथ डाट एक्स, डाट बैट, डाट काम आदि के रूप में डाल दिया जाता है।
पिछले पाँच-छह वर्षों में इन वायरसों के कारण कम्प्यूटरों के उपभोक्ताओं और कंपनियों को अरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है। फरवरी 2000 में सी० एन० एन०, याहू, अमेजन डाटकाम, ई-बिजनेस और ई-कामर्स वाली अन्य साइटों पर इस तरह के वायरस डाल दिए गए कि उन्हें इतनी ज्यादा सूचनाएँ बार-बार मिलने लगी कि इन साइटों के सर्वर उनका विश्लेषण कर पाने में असफल होते गए। ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई कि ये साइट काम नहीं कर पाने की स्थिति में हो गयीं। जिन्हें कम्प्यूटर की भाषा में डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विसेस की स्थिति में मानना पड़ा। मामले की व्यापक जाँच के बाद इस घटना के पीछे कनाडा के एक किशोर का हाथ होने का प्रमाण मिला। इसी प्रकार जून 2000 में आई लव यू बग जिसे विशेषज्ञों ने वायरस की बजाय वर्म यानी कीड़े का नाम दिया, के कारण पूरी दुनिया में इंटरनेट व्यवस्था अस्त-व्यस्त कर दिया गया। इस घटना के पीछे फिलीपींस के एक युवक का हाथ होने का संदेह हुआ। दोनों के खिलाफ अब अदालतों में मामले चल रहे हैं। आई लव यू बग़ के कारण 10 बिलियन डालर से भी अधिक का नुकसान होने होने का अनुमान लगाया गया है। दिसम्बर 2000 में इसी प्रकार से विश्व व्यापार संगठन के वेबसाइट पर हमला किया गया था। याहू की साइट पर हमले के समय इस प्रकार के वायरस का उपयोग किया गया जिसके कारण इस साइट पर पाँच टाइप किए हुए पेजों के बराबर की जानकारी प्रति सेकेंड की दर से पहुँचने लगी। निश्चय ही इतनी बड़ी संख्या में पहुँच रही जानकारी को प्रोसेस कर पाना संभव नहीं था। अंततः वेबसाइट को बंद करने की स्थिति उत्पन्न हो गई। इसी प्रकार मेलीसा वायरस के कारण पूरी दुनिया के दस लाख ज्यादा कम्प्यूटरों को क्षति पहुँची थी और इससे 80 मिलियन डॉलर से भी अधिक का नुकसान हुआ। जून 2005 में माइकल जैक्सन की आत्महत्या की खबर के साथ एक वायरस आया जो कम्प्यूटर में एकत्रित जानकारी को चुरा लेता था। इसी वर्ष कनाडा सरकार का बजट एक वायरस की वजह से खत्म होते-होते बचा। वायरस से होने वाले नुकसान को मुख्यतः कम्प्यूटर की मशीन को होने वाली क्षति (हार्डवेयर डिस्क प्रोग्राम सिस्टम की क्षति) को बहाल करने
पर होने वाले खर्च के आधार पर नापा जाता है । एंटी वायरस बनाने वाली प्रसिद्ध कंपनी नेटवर्क एसोसिएट्स के एक सर्वे के मुताबिक इस समय इंटरनेट की दुनिया में 60000 से भी अधिक वायरस मौजूद हैं।
विश्व में सबसे पहला कम्प्यूटर वायरस अमेरिकी छात्र फ्रेड कोहेन ने बनाया था। कोहेन के इस वायरस का नाम वीड़ी था। कोहेन के अनुसार- "वायरस एक ऐसा कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर है जो अन्य कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर को अपनी तरह ढाल लेता है और उसमें : को मिला लेता है।” खुद
पाकिस्तान के अहमद बंधुओं को कम्प्यूटर वायरस का जनक कहा जा सकता है। इन लोगों ने 1986 में ब्रेन नामक कम्प्यूटर वायरस बनाया था। इन लोगों द्वारा इस वायरस के निर्माण का उद्देश्य यह देखना था कि कहीं कोई उनके सॉफ्टवेयर की नकल तो नहीं कर रहा हैं।
यह बात देखने में आयी है कि वायरसों का निर्माण करने वाले अधिकांशतया काफी उम्र के व्यक्ति होते हैं। बैकडोर से वायरस आक्रमण अधिकतर गोपनीय डाटा को चुराने के लिए किया जाता है जो कि प्रत्येक वर्ष 50 प्रतिशत की वृद्धि दर से बढ़ रहा है। कंपनियाँ संस्थाएँ या कोई भी व्यक्ति कितनी भी वायरस रोधी सॉफ्टवेयर प्रयोग कर ले, वे वायरस का शिकार कभी न कभी अवश्य ही हो जाते हैं ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें