रविवार, 18 जून 2023

मानव अधिकारों का संयुक्त राष्ट्र कमिश्नर पद की स्थापना और उसके कार्यों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

प्रश्न - मानव अधिकारों का संयुक्त राष्ट्र कमिश्नर पद की स्थापना और उसके कार्यों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर- मानव अधिकारों का संयुक्त राष्ट्र कमिश्नर (U.N.Commissioner for Human Rights)-20 दिसम्बर, 1993 को एक प्रस्ताव द्वारा एक महत्वपूर्ण निर्णय में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानव अधिकारों के संयुक्त राष्ट्र उच्च कमिश्नर के पद का सृजन किया। यह निर्णय मानवीय अधिकारों के क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र के कार्यों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उच्च कमिश्नर को महासचिव द्वारा महासभा के अनुमोदन पर चार वर्षों की अवधि हेतु नियुक्त किया जाता है। उच्च कमिश्नर आर्थिक एवं सामाजिक परिषद के माध्यम से एक वार्षिक रिपोर्ट महासभा को प्रेषित करता है। उच्च कमिश्नर का मुख्य कार्यालय जेनेवा में है जिसकी एक शाखा न्यूयार्क में है। उच्च कमिश्नर का पद सृजित करते समय महासभा ने अपने प्रस्ताव में स्पष्ट किया था कि उच्च कमिश्नर निष्पक्ष अपने कार्य, विषय-वस्तु तथा गैर-थपनात्मक (Impartial, Objective and Non-selective) रूप से करेगा तथा इस पद पर आसीन होने वाले व्यक्ति उच्च नैतिक प्रतिष्ठा एवं व्यक्तिगत निष्ठ वाले होने चाहियें एवं उन्हें मानवीय अधिकारों के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त होनी चाहिये तथा उन्हें विभिन्न संस्कृतियों का ज्ञान होना चाहिये।

मानव अधिकारों सम्बन्धी संयुक्त राष्ट्र कमिश्नर के कार्य (Functions of U.N. Commissioner for Human Rights) - मानव अधिकारों के संयुक्त राष्ट्र कमिश्नर को जो कार्य सौंपे गये है वे निन्न प्रकार है-

(i) मानवीय अधिकारों के तन्त्र को सुदृढ़ एवं सुव्यवस्थित करना; 

(ii) मानवीय अधिकारों के लिये सम्मान सुनिश्चित करने हेतु सभी सरकारों से वार्ता करना।

(iii) मानवीय अधिकारों के सम्बन्ध में पूर्ण संयुक्त राष्ट्र प्रणाली जिसमें संयुक्त राष्ट्र शिक्षा एवं लोक सूचना प्रोग्राम भी सम्मिलित है, मानवीय अधिकारों की प्रोन्नति एवं संरक्षण कार्यो आदि में समन्वय स्थापित करना।

(iv) सभी सिविल, सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनीतिक एवं सामाजिक अधिकारों की प्रोन्नति तथा उनके प्रभावशाली उपभोग को संरक्षित करना।

(v) मानवीय अधिकारों के केन्द्र (Centre for Human Rights) का पर्यवेक्षण करना। 

(vi) सभी मानवीय अधिकारों की प्राप्ति में आने वाली वर्तमान बाधाओं को हटाना तथा चुनौतियों का सामना करने में एक सक्रिय भूमिका अदा करना। 

(vii) राज्यों की प्रार्थना पर उन्हें सलाहकारी सेवायें एवं तकनीकी एवं आर्थिक सहायता देना तथा

(viii) मानवीय अधिकारों को प्रोन्नति एवं संरक्षण के लिये अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग में वृद्धि के लिये कदम उठाना।




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