सजा : Hacking - IT Act की धारा 43A, 66, IPC 379, 406 3 साल जेल, 5 लाख जुर्माना
66 हैंकिंग- इस धारा के अन्तर्गत कोई भी व्यक्ति साशय अथवा यह जानकार कि वह जनता या किसी व्यक्ति को सदोष नुकसार या क्षति करेगा कम्प्यूटर स्त्रोत में स्थित किसी सूचना को नष्ट करता है, हटाता है अथवा परिवर्तित करता है अथवा इसके मूल्य या उपयोगिता को नष्ट करता है या किसी साधन से क्षतिग्रस्त करता है वह हैकिंग का अपराधी है। इस धारा के अन्तर्गत हैकिंग करने वाले को 3 वर्ष तक के कारावास या जुर्माना जो 2 लाख रुपये तक हो समता है अथवा दोनों सजा का प्रावधान है ।
हैक का शाब्दिक अर्थ है-उड़ा लेना । हैकिंग से आशय किसी कम्प्यूटर सिस्टम या नेटवर्क में सुरक्षित सूचनाओं को अनाधिकृत तरीके से उस सिस्टम या नेटवर्क में प्रवेश करके सिस्टम में किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा रखे गुप्त ज्ञान को उड़ा लेना या सूचनायें चुरा लेना या डेटा का अनाधिकृत प्रयोग करना है ।
कम्प्यूटर क्राइम धोखाधड़ी, जालसाजी और अनधिकृत प्रवेश को हैकिंग, फ्रीकिंग की संज्ञा दी जाती है। अलग-अलग देशों में और परिस्थितियों में इन अपराधों को अलग-अलग नाम दिए गए हैं। वास्तव में ये अपराध लगभग एक समान हैं या उनमें मामूली अन्तर है । यह अन्तर अपनाए जाने वाले तरीके और उस तरीके से किए गए प्रयासों के परिणामों के आधार पर अलग-लग किए जा सकते हैं। जैसा कि पहले ही उल्लेख किया गया है कि इंटरनेट कम्प्यूटर नेटवर्कों का नेटवर्क है। इस नेटवर्क में प्रवेश और उसके उपयोग के कुछ निश्चित तौर तरीके हैं। इस प्रवेश के लिए इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर टेलीफोन कम्पनियों द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं के लिए एक निश्चित भुगतान करना होता है। ये कम्पनियाँ उनके द्वारा महँगी लागत पर उपलब्ध कराये जाने वाली सेवाओं के बदले में मासिक, त्रैमासिक, वार्षिक निर्धारित शुल्क लेती हैं। उनके नेटवर्क में अनधिकृत लोग प्रवेश नहीं कर सकें इसके लिए अपने उपभोक्ताओं को निश्चित यूजर नेम पासवर्ड आदि देती है। यूजरनेम पासवर्ड के आधार पर उपभोक्ता नेटवर्क में प्रवेश करके इंटरनेट पर विचरण यानी सर्फिंग कर सकते हैं। कुछ लोग ऐसे हैं जोकि बिना भुगतान किए नेटवर्क का उपयोग करना चाहते हैं और इसके लिए अपने तकनीकी ज्ञान का उपयोग या किसी अन्य का यूजर नेम या पासवर्ड का उपयोग करके नेटवर्क में अनाधिकृत तरीके से प्रवेश कर जाते हैं। इस प्रकार का कार्य करने वालों को फ्रीकर या हैकर और इस प्रक्रिया को हैकिंग या फ्रीकिंग कहा जाता । कुछ ऐसे भी लोग हैं जो नेटवर्क कम्पनियों द्वारा की गई सुरक्षा व्यवस्था को धता बताकर और उनके द्वारा सुरक्षा के लिए खड़ी की गई दीवारों जिन्हें फायरवाल कहा जाता है, को तथा अन्य और बाधाओं को पार करके नेटवर्क में प्रवेश कर जाते हैं और बिना किसी भुगतान के सर्फिंग करते हैं। ऐसे लोगों को क्रैकर और इस प्रक्रिया को क्रैकिंग कहते हैं। हैकिंग शब्द इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के समुदाय में आतंक का पर्याय बन गया है।
हैकिंग में कम्प्यूटर सिस्टम या नेटवर्क में सुरक्षित सूचनाओं को प्राप्त करने के लिए अनाधिकृत प्रवेश किया जाता है तथा प्राप्त सूचनाओं के माध्यम से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हानि पहुँचायी जाती है । इस अनाधिकृत प्रवेश के द्वारा डेटा प्राप्त करने का उद्देश्य व्यावसायिक गुप्त ज्ञान प्राप्त करना, सूचना चुराना और डेटा का अनाधिकृत प्रयोग करना होता है।
हैंकिंग की शुरूआत 'विहस्कर' नामक प्रोग्राम से होती है जिसका प्रयोग सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर अपने सिस्टम की कमियों को जानने के लिए करते हैं। इसी प्रोग्राम की सहायता से हैकर एक क्षण में यह जान लेता है कि उस सिस्टम में कौन सा आपरेटिंग सिस्टम है तथा उसमें कितनी सुरक्षा खामियाँ मौजूद हैं तथा सुरक्षा खामियों को दूर करने के लिए पैच इंस्टॉल किया गया है अथवा नहीं। इसके बाद स्कैनर, प्रोग्राम तथा अन्य साफ्टवेयर की मदद से असुरक्षित स्थान या फाइल में एक ट्रोजन हार्स (वायरस) डाल दिया जाता है जो कम्प्यूटर द्वारा लॉग ऑन होने पर बिना मालिक की वास्तविक जानकारी के हैकर को कम्प्यूटर से सम्बन्धित सूचनाएँ भेजना शुरू कर देता है। एक बार पहचान एवं पासवर्ड पता लगने के बाद हैकर का नियन्त्रण कम्प्यूटर पर हो जाता है ।
इसके अतिरिक्त अन्य तरीकों में हैकर्स द्वारा कई प्रोग्राम स्वयं इस तरह लिखे जाते हैं कि वे उनकी साइट पर क्यिक करने पर अथवा मेलिंग लिस्ट के माध्यम से किसी कम्प्यूटर या नेटवर्क की सुरक्षा खामियों को पकड़ते हैं तथा आने-जाने वाले समस्त डाटा को स्कैन करके सारी जानकारी हैकर तक पहुँचाते हैं। एक बार आवश्यक जानकारी प्राप्त होने के बाद सिस्टम हैकर द्वारा नियन्त्रित किए जाने के लिए तैयार हो जाता
बाजार में कुछ ऐसे सॉफ्टवेर भी मौजूद है जो मॉडम का प्रयोग करके हजारों फोन नम्बर डायल करके कम्प्यूटर से जुड़े अन्य मॉडम एवं साइबर हमले के प्रति असुरक्षित कम्प्यूटर एवं नेटवर्कों की सूची बना देते हैं। यह सूचियाँ हैकर्स द्वारा आपस में आदान-प्रदान की - जाती हैं जिनको ऊपर दिए गए किसी भी तरीके से हैक कर लिया जाता है
इस समय दुनिया भर के मुल्क हैकिंग की समस्या से जूझ रहे हैं। भारत की ही बात करें, तो वर्ष 2007 के शुरूआती पाँच महीने में ही हैकिंग के 2,344 मामले सामने आए। इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम के जुटाए आँकड़ों के मुताबिक वर्ष 2006 में हैकिंग के 5,200 मामले सामने आए थे। हैकरों से सुरक्षित होने का दावा कोई संस्था नहीं कर सकता। 14 अगस्त 2006 को हैकरों ने संयुक्त राष्ट्र की साइट टैक कर डाली, तो 31 अगस्त 2006 को बैंक ऑफ इण्डिया की, जबकि हाल ही में सात नवम्बर 2006 को वोडाफोन की साइट को निशाना बनाया गया। एनआईसी, कोलकाता पुलिस, भारतीय मिलिटरी अकादमी समेत कई प्रमुख संस्थानों की साइट भी वर्ष 2007 में हैक की गई। सबसे चिन्तनीय बात यह है कि अब हैकिंग सिर्फ मौज-मस्ती या डराने धमकाने के लिए नहीं हो रही है। साइबर अपराधी हैकिंग के जरिये आर्थिक गतिविधियों को भी प्रभावित करने की कौशिश कर रहे हैं।
हैकर्स कम्प्यूटर तकनीक के विशेषज्ञ होते हैं। ये इतने विशेषज्ञ होते हैं कि ये कोई न कोई तरीके से कम्प्यूटर सिस्टम में अतिक्रमण या अनाधिकृत प्रवेश करने में सफल जो जाते हैं। हैकर्स के प्रकार-हैकर्स दो प्रकार के होते हैं— (i) उदार हैकर्स, एवं (ii) विद्वेषी हैकर्स ।
(i) उदार हैकर्स - ये हैकर्स या तो नौसिखिया होते हैं जो अपने ज्ञान में वृद्धि करने के लिए नए-नए प्रयोग करते-करते किसी विशेष और महत्वपूर्ण सिस्टम में अनाधिकृत प्रवेश कर जो हैं या फिर इस प्रकार के विशेषज्ञ होते हैं कि अपनी जरूरत के लिए जो सामग्री या सूचना चाहिए उसे पाने के लिए अनाधिकृत रूप से दूसरे सिस्टम में अतिक्रमण कर देते हैं। ये किसी कम्प्यूटर सिस्टम या नेटवर्क को वास्तविक हानि नहीं पहुँचाते हैं ।
(ii) विद्वेषी हैकर्स—ये हैकर्स पूर्ण रूप से कम्प्यूटर के विशेषज्ञ होते हैं। ये विद्वेष की भावना से कम्प्यूटर नेटवर्क में अनाधिकृत रूप से प्रवेश कर जाते हैं तथा सूचनाओं को विघटित करना, चुरा लेना या नष्ट करके कार्य करते हैं। ये हैकर्स इन आरक्षित सूचनाओं का प्रयोग आपराधिक गतिविधियों जैसे पहचान चोरी करने के लिए भी कर सकते हैं। विद्वेषी हैकर्स व्यावसायिक प्रकृति के होते हैं। इन्हें बड़ी-बड़ी कम्पनियों द्वारा अपनी प्रतिद्वंद्वी कम्पनियों की गतिविधियों एवं पॉलिसी मैटर्स की जानकारी करने तथा निरन्तर दृष्टि रखने के लिए उच्च सैलरी पर रखा जाता है। इन विद्वेषी हैकर्स की मदद गुप्तचर एजेंसियाँ जासूसी के लिए लेती हैं। शत्रु देश के कम्प्यूटर सिस्टम व नेटवर्क तथा वेबसाइट को हैक करने के लिए इन विद्वेषी हैकर्स की मदद ली जाती है। विद्वेषी हैकर्स अपने वित्तीय लाभ के लिए किसी भी कम्प्यूटर सिस्टम या नेटवर्क को वास्तविक रूप से नष्ट करने का कार्य करते हैं।
इसके अतिरिक्त एक वर्ग नैतिक हैकर्स का भी है जो किसी भी संगठन को विद्वेषी हैकर्स के विरुद्ध सुरक्षा साधनों को और अधिक शक्तिशाली बनाने तथा अग्रगण्य तरीके अपनाने में सहायता प्रदान करते हैं। ये हैकर्स राष्ट्रीयता तथा नैतिक मूल्यों से ओतप्रोत हैं। कुछ राजनीतिक हैकर्स भी होते हैं जो राजनीतिक विचारधारा या दर्शन की उन्नति,
प्रचार-प्रसार के लिए हैकिंग को साधन के रूप में अपनाते हैं । हैकिंग के उद्देश्य - हैकिंग के निम्न उद्देश्य हैं-
(i) नौसिखिए कम्प्यूटर जानकारों द्वारा चुनौती के रूप में स्वीकार किया जाना।
(ii) शौकिया तौर पर कम्प्यूटर पर अधिक समय तक कार्य करते करते किसी लाभदायक जानकारी का मिल जाना।
(iii) अपराध को सरलता से अंजाम देना (दण्ड बिना अपराध ) ।
(iv) किसी कम्प्यूटर नेटवर्क को विघटित करना ।
(v) सूचनाओं की चोरी। -
(vi) पहचान चोरी करना ।
(vii) बौद्धिक सम्पदा की चोरी।
(viii) किसी को डिफ़ेम (बदनाम) करना ।
(ix) अपने हित में अनाधिकृत रूप से आँकड़े बेचना या आँकड़े का प्रयोग करना ।
(x) राजनीतिक विचारधारा के समर्थन के लिए तथ्यों को हैकर करना आदि ।
हैकिंग की शब्दावली
ब्लैक हैट-डेटा चुराने या सिस्टम को नुकसान पहुँचाने वाले हैकर ब्लैक हैट कहलाते हैं। इन ब्लैक हैकर्स में सबसे अधिक खतरनाक वे होते है जो वर्षों तक किसी कम्प्यूटर की निगरानी करते रहते हैं और तब भी पकड़ में नहीं आते।
कम्प्यूटर व्हाइट हैट हैकर - किसी आपराधिक उद्देश्य के बिना, केवल जिज्ञासावश किसी -की छानबीन करने वालों को व्हाइट हैट हैकर कहा जाता है। कुछ व्हाइट हैट हैकर्स वेबपोर्टलों के सुरक्षा सलाहकारों, प्रोग्रामरों और नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य करते हैं।
क्रैकर - आपराधिक या गलत इरादों कार्य करने वाले ब्लैक हैट हैकर्स को क्रैकर कहा जाता है।
हैक्टिविज्म- किसी सामाजिक या राजनीतिक प्रकार के संदेश को नेट के जरिए प्रचारित करने के लिए हैकिंग का सहारा लिया जाता है। इस प्रकार के हैकर्स किसी सामाजिक - सुधार कार्य में लगी संस्था के संदेशों या बाल यौन शोषण रोकथाम की वैबसाइट को बिगाड़ सकते हैं या किसी सरकार या उसकी नीतियों के विरुद्ध संदेश लिख सकते हैं । अब तक भारत, इस्त्रायल, चीन, और संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकारों के विरुद्ध इस प्रकार के हमले हो चुके हैं।
एक्सप्लॉइट - यह किसी आपरेटिंग सिस्टम या एप्लिकेशन में कोई कमी होती है, जो किसी कम्प्यूटर को हैकर्स के हमलों के प्रति असुरक्षित कर देते हैं। हैकर्स और साफ्टवेयर कंपनियाँ सदैव ऐसी खामियों को तलाशने में जुटी रहती हैं। इस प्रकार की खामियों के कारण ही ये हैकर्स सूचनाओं को अपने हित में प्रयोग कर लेते हैं।
ट्रोजन हॉर्स (Trojan Horse) - ये वायरस या वर्म से अधिक खतरनाक होते हैं । ये बहुधा ई-मेल अटेचमेंट के रूप में आते हैं। ट्रोजन हॉर्स हैकर को उस कम्प्यूटर पर असीमित नियंत्रण प्रदान कर देते है जिसमें ये प्रवेश पा लेते हैं। नेटबस, सबसे वन और बैंक ऑरिफिस ट्रोजन हॉर्स के तीन सबसे अधिक प्रचलित प्रकार हैं। डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल ऑफ- सर्विस अटैक
यह किसी साइट पर बहुत से कंप्यूटर्स द्वारा किए जाने वाला हमला है। इसमें हैकर इन सभी कम्प्यूटरों पर किसी विशेष साइट से लगातार डेटा माँगने का आदेश देता है, जिससे वह साइट पूरी तरह बंद हो जाती है । हैकर्स इस प्रकार हमलों द्वारा याहू जैसी साइट्स को भी बंद करा चुके हैं।
बैंक ऑरिफिस- किसी दूरस्थ कम्प्यूटर पर नियंत्रण करने के लिए 'कल्ट ऑफ द डेड काउ' नामक एक हैकर संगठन द्वारा एक सॉफ्टवेयर लिखा गया है। इसके द्वारा हैकर एक ट्रॉजन हॉर्स के माध्यम से किसी भी विण्डोज पीसी पर नियंत्रण कर सकता है। यह हैकर को पीसी पर इतना नियंत्रण दे सकता है कि वह उसकी सेटिंग्स आदि को बदलने से लेकर पासवर्ड मालूम करने जैसे कार्य आसानी से कर सकता है।
बफर ओवरफ्लो - यह कोई ऑपरेटिंग सिस्टम्स पर पाई जाने वाली एक सामान्य और आसानी से दोहन योग्य खामी है। इसके द्वारा किसी कम्प्यूटर को उसकी क्षमता से अधिक बड़ी कमांड भेजकर उसे फ्रीज या क्रैश किया जा सकता है। विण्डोज 95 में यह समस्या विशेष रूप से विद्यमान थी ।
बूट फोर्स - सामान्यतः यह शब्द पासवर्ड तोड़ने के लिए शब्दों व अंकों के सभी संभव संयोजनों का प्रयोग करने के लिए प्रयुक्त होता है।
सेशन हायकिंग- किसी क्लाइंट और सर्वर के बीच के कनेक्शन पर किसी हैकर द्वारा बीच में ही घुसकर कब्जा कर लेना सेशन हायजैकिंग कहलाता है। इससे हैकर वास्तविक क्लाइंट की ही तरह सर्वर को कमाण्ड दे सकता है।
बैनर ग्रैबिंग - जिस कम्प्यूटर का हैक करने का लक्ष्य तय किया गया हो, उसे लॉग-ऑन बैनर प्राप्त करने का कार्य वैनर यैबिंग कहा जाता है। इसके द्वारा हैकर अपने कार्य को अधिक सहजता से कर पाता है
स्क्रिप्ट किडी-ऐसे हैकर के लिए प्रयुक्त शब्द हैकिंग के लिए दूसरों के लिखे और इंटरनेट पर उपलब्ध सॉफ्टवेयर का प्रयोग करता है। ये लोग बहुधा अपने द्वारा किए जाने वाले हमलों के पीछे की तकनीक को पूरी तरह नहीं समझते और डिनायल ऑफ सर्विस या वेबपेज डिफेमेशन जैसे कार्य ही कर पाते हैं। डेटा चुराने, पासवर्ड पता करने या कम्प्यूटर • क्रैश करने जैसे अधिक दुष्कर कार्यों में ये पारंगत नहीं होते ।
स्पूफिंग नेटवर्क या इंटरनेट पर किसी अन्य होस्ट के आईपी एड्रैस का प्रयोग कर स्वयं को उसके रूप में दर्शाना स्पूफिंग कह कहलाता है। इस प्रकार स्पूफ करने वाला आसानी से हैकिंग कर सकता है या बिना ऑथेन्टिशन (पहचान ) किसी भरोसेमंद होस्ट के नाम से किसी अन्य होस्ट में प्रवेश पा सकता है ।
हैकर्स का एक बहुत संगठित एवं पेशेवर वर्ग इस समय पैदा हो गया है। साइवर क्राइम के अपराधों में लगभग 50 से 62 प्रतिशत अपराध हैकिंग की श्रेणी के ही हो रहे हैं, जबकि पहले इतने ही मामले शौकिया तौर पर की गयी छोटी-मोटी छेड़छाड़ के होते थे । साइबर क्रिमिनलों के गिराहों ने हैंकिंग को अपना एक अहम मोड्स ओपरेंडी बना लिया है। ये ठेका लेकर किसी संस्था या कंपनी आदि को ब्लॉग के जरिए बदनाम करते हैं, उसकी मानहानि करते है, उसकी कारपोरेट एंटरीज को नुकसान पहुँचाने के लिए उसके बारे में अफवाहें फैलाते हैं। डेटा माइनिंग तो इनका एक अहम हथियार बना ही है। इस मामले की शुरूआत तो इन हैकर्स ने ठेका मिलने के बाद किसी कंपनी के रिकार्ड चुराने से की थी, मगर जब ये इस तरीके को विकसित करने में सफल हो गए तो फिर बिना ठेका मिले, अपनी पहल पर ही रिकार्ड चुराने का काम शुरू कर दिया। ऐसे रिकार्ड ये एक तरह से अपनी अपराधी दुकान के शो रूप में सजाकर रखते हैं। सही कीमत देने वाला ग्राहक मिल जाए तो ये हैकर्स इन रिकार्डों को अच्छे दामों में बेच देते हैं। ऐसे साइबर गिराहों के सरगना (हैकर्स) खुद को एंटरप्रेनुअर बताते हैं और अपनी फर्म में बाकायदा विज्ञापन देकर आई टी के जानकारों की नियुक्ति करते हैं। उन्हें अच्छी खासी रकम वेतन के रूप में दी जाती है। फिर उन्हें अलग-अलग बीपीओं कंपनियों में किसी तरह नौकरी दिलाकर दाखिल करवाया जाता है। वहाँ ये हैकर्स सिर्फ डेटा चुराने के इरादे से ही टिके रहते है और जैसे ही डेटा हाथ आ जाए, फुर्र हो जाते हैं। फिर इस डेटा की बोली लगाकर प्रतिद्वंद्वी खरीद लेते हैं । मार्च 2000 में क्यूरेडर नाम के एक हैकर ने अमरीका, कनाडा, थाईलैण्ड, जापान और ब्रिटेन से काम करने वाली ई-कामर्स वेबसाइट से 28,000 क्रेडिट काईस के नम्बर उड़ा लिए। 18 वर्षीय इस ब्रिटिश किशोर रैफेल ये की इस कारगुजारी के कारण 3.5 मिलियन डालर का नुकसान हुआ। कुछ एथिकल हैकर्स होते हैं जो विद्वेषी हैकर्स के विरोधी होते हैं। ये देशभक्त प्रकृति के होते हैं तथा विद्वेषी हैकर्स की गतिविधियों को नष्ट करते रहते हैं ।
एथिकल हैकर इंटरनेट मित्र होता है जो ग्राहकों (आपको) को इंटरनेट इस्तेमाल का सेफगार्ड प्रदान करता है। इथिकल हैकर आपकी सिक्योरिटी को मजबूत करता है और साइबर क्रिमिनल को पकड़ने में आपकी मदद करता है। एथिकल हैकर साइबर क्रिमिनल से चार कदम आगे की सोचता है। इन एथिकल हैकर्स को सरकार का भी समर्थन प्राप्त होता है । सरकार भी अपने अधिकारों को एथिकल हैंकिंग के लिहाज से मजबूत कर रही है। एथिकल हैकर, साइबर स्पेस में आपको सुरक्षित रखने में मददगार होता है। एथिकल हैकर वही बन सकता है, जो कम्प्यूटर सेवा और ग्रैजेट फ्रेंडली हो ।
हैंकिंग,
वर्ष 2002 में केन्द्रीय सरकार के संगठनों द्वारा उनकी वैब साइट्स हैक करने के दो | मामले दर्ज कराये गये। वैब साइटें हैक करने के एक मामले में एआईसी नाम से जाने वाले समूह को दोषी पाया गया। यह समूह पाकिस्तान का था। इस समूह के विस्तृत विवरण के लिए पाकिस्तान सरकार को एक पत्र भेजा गया परन्तु इस सम्बन्ध में अभी तक कोई भी उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है। दूसरे मामले में एक अन्य समूह एफबीएच (Federal Burau of Hackers) के द्वारा साइट्स हैक की गयी। समूह के सम्बन्ध में अपर्याप्त सबूत और सूचनाएँ होने के कारण मामले को बंद कर दिया गया अन्तिम रिपोर्ट लगा दी गयी। इस सम्बन्ध में कोर्ट के द्वारा केस बंद करने की अन्तिम रिपोर्ट भी स्वीकार की जा चुकी है। (3) क्रेडिट कार्ड का दुरूपयोग
(i) एम्स का मामला - एम्स के वरिष्ठ डॉक्टर की शिकायत पर एक मामला दर्ज किया गया। डॉक्टर की शिकायत थी कि उसके क्रेडिट कार्ड का इंटरनेट पर दुरूपयोग किया गया है जिसके परिणामस्वरूप उनका बिल बहुत अधिक आया। यूएस गोपनीय सेवाओं के माध्यम से यह पता लगाया कि इस क्रेडिट कार्ड नम्बर का प्रयोग पोर्न साइट्स पर पहुँचने के लिए किया गया था तथा जिस आई० पी० एड्रेस के द्वारा पोर्न साइट्स का भुगतान हु वह प्रदाता एम्स का पाया गया था तथा यह प्रदाता एम्स में फैकल्टी और छात्रों को इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराता था। एक छोटा प्रदाता होने के कारण एम्स द्वारा लाग-बुक एवं प्रवेश का विस्तृत रिकार्ड नहीं रखा जाता था जिसके कारण 300 उपयोगकर्ताओं के बीच से संदिध को नहीं पकड़ा जा सका ।
(ii) क्रेडिट कार्ड सम्बन्धी सूचनाओं को बेचना - इंटरनेट पर एक अनजान व्यक्ति द्वारा क्रेडिट कार्ड सम्बन्धी सूचना स्त्रोत बेचने का मामला दर्ज किया गया। यह व्यक्ति : इंटरनेट रिले चैट के माध्यम से क्रेडिट कार्ड विवरण इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को बेचता था । उसके बदले मैसर्स वैस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर के द्वारा धन प्राप्त करता था । वैस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर के रिकार्ड से यह रहस्य खुला कि भुगतान पुणे में किया गया था। वैस्टर्न यूनियन के क्लर्क की पहचान पर दोषी को गिरफ्तार किया गया। वैस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर के रिकार्ड से यह भी जानकारी प्राप्त हुई कि दोषी इससे पूर्व विभिन्न नामों से 50 से भी अधिक बार इस धंधे से धन प्राप्त कर चुका था। एक अन्य व्यक्ति जो मैसर्स वैस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर से धन प्राप्त करता था वह भारत से बाहर का व्यक्ति था और उसकी पहचान प्रमाणित नहीं की जा सकी।
(iii) आईआरटीसी (IRTC) मामले - नवम्बर 2002 से फरवरी 2004 के बीच भारतीय रेल की वेबसाइट से चोरी किए गए क्रेडिट कार्ड द्वारा धोखाधड़ी से भारतीय रेल के टिकट खरीदने के 3 मामले प्रकाश में आए। मामले में पकड़े गए दोषी व्यक्तियों, ने खुलासा किया कि उन्होंने दूसरे व्यक्तियों के क्रेडिट कार्ड का विस्तृत विवरण सोशल इंजीनियरिंग नामक प्रोग्राम द्वारा प्राप्त किया था। ये सभी मामले न्यायालय में लम्बित चल रहे हैं।
(iv) एअर टिकट ठगी--एक टिकट कम्पनी द्वारा शिकायत की गई कि कोई अनजान व्यक्ति चोरी के क्रेडिट कार्ड का प्रयोग करके उनसे हवाई यात्रा के टिकट खरीदने का प्रयास कर रहा है। ये टिकट हैदराबाद स्थित एक ट्रेवल एजेंट को भेजे जाने थे। उस ट्रेवल एजेंट से पूछताछ के आधार पर यह पता चला कि एक नाइजीरियन नागरिक द्वारा यह टिकट बुक कराए गए थे तथा उसके द्वारा एक फोन नम्बर भी दिया गया था जिसके आधार पर नाइजीरियन नागरिक की विस्तृत जानकारी ली गई। शिकायतकर्ता पता चला कि दिये गये यात्रियों के नामों से दिल्ली में भी टिकट भेजने की प्रार्थना की गई है तथा उसी मोबाइल नम्बर को दिया गया था, जो हैदराबाद के ट्रेवल एजेंट को दिया गया था। इस मोबाइल नम्बर के पते के आधार पर नाइजीरियन नागरिक एवं उसके अन्य साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया तथा उनके कब्जे से बड़ी मात्रा में क्रेडिट कार्ड की बरामदगी हुई तथा अन्य जानकारी भी प्राप्त हुई। दिल्ली में अपराधी विरूद्ध चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें न्यायालय के समक्ष अपराधी द्वारा अपना अपराध स्वीकार कर लिया गया, इसके आधार पर दोषी व्यक्ति को 90 दिन की कारावास की सजा तथा 2000 रुपये का जुर्माना किया गया।
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