Ans. समेकनकारी कानून वह कानून है जो किसी विशिष्ट विषय पर विधि को एक स्थान पर समेकित करता है; यह उस विषय पर सभी वैधानिक अधिनियमितियों को संग्रहीत करता है और यदि आवश्यक हो होने तो, गौण संशोधन के साथ उन्हें एक कानून का रूप प्रदान करता है।
समेकनकारी संविधियों (Consolidating Statutes) से आशय ऐसी संविधियों से है जो किसी विषय-विशेष पर विधियों को एक स्थान पर समेकित करती हैं अर्थात् एक स्थान पर संग्रहित करती हैं।
समेकनकारी कानून वह कानून है जो किसी विशिष्ट विषय से संबंधित सभी कानूनी उपबंधों को एक स्थान पर यदि आवश्यक हो तो कुछ संशोधन तथा सुधार करके एक अधिनियम में इकट्ठा करता है। दूसरे शब्दों में जो कानून किसी विशिष्ट विषय से संबंधित कानूनों को आवश्यक संशोधनों के बाद एक स्थान पर एक विधायी अधिनियम में संग्रहित अथवा एकत्रित करता है, उसे समेकनकारी कानून कहते हैं। उदाहरण के लिए माध्यस्थम अधिनियम 1940 (Arbitration Act 1940), भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 (Indian Succession Act 1925) आदि ।
किसी समेकनकारी अधिनियम का निर्वचन करते समय उपधारणा यह है कि विधायिका वर्तमान विधि को परिवर्तित करने का आशय नहीं रखती क्योंकि उसने कोई नया विधान पारित नहीं किया है बल्कि किसी विशिष्ट विषय पर अलग-अलग फैले हुए सभी सुसंगत कानूनी उपबंधों को मात्र एक स्थान पर एकत्रित किया है।
यदि किसी समेकनकारी कानून का एक से अधिक युक्तियुक्त एवं सुसंगत अर्थान्वयन संभव हो तो वह अर्थान्वयन मान्य होगा जो वर्तमान विधि में कम से कम हस्तक्षेप करें।
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